3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

रोमियों 13

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

रात थी। बहुत गहरी, बहुत चुप रात। सब लोग अपने घरों में सो रहे थे। पर गाँव के फाटक पर एक पहरेदार खड़ा था। वह जाग रहा था, ताकि सब लोग सुरक्षित सोएँ। पौलुस कहता है, हर एक व्यक्ति उन बड़े अधिकारियों की बात माने, जो हमारी रखवाली करते हैं। क्योंकि परमेश्वर ने ही उन्हें यह काम दिया है। जो अच्छा काम करता है, उसे डरने की जरूरत नहीं। पहरेदार उसकी रक्षा करता है, उसे दंड नहीं देता।

इसका क्या अर्थ है?

सोचो, जब तुम रात में सोते हो, कोई तुम्हारी देखभाल करता है। माता-पिता, या कोई बड़ा, जागकर तुम्हें सुरक्षित रखता है। पौलुस कहता है, उनकी बात मानो, उनका आदर करो। यह अच्छी बात है, डरने वाली बात नहीं। और एक और बात भी जरूरी है। पौलुस कहता है, "अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।" जैसे तुम अपनी रोटी से प्यार करते हो, वैसे ही अपने पड़ोसी से भी प्यार करो। प्रेम किसी को कभी दुख नहीं देता।

सामान्य सूत्र

फिर रात धीरे-धीरे बीतने लगी। आसमान में हल्की रोशनी दिखने लगी। सुबह होने वाली थी। पौलुस कहता है, रात बहुत बीत गई है, दिन निकलने पर है। इसलिए हमें प्रभु यीशु मसीह को पहन लेना चाहिए। जैसे तुम सुबह उठकर साफ कपड़े पहनते हो, वैसे ही यीशु को पहन लो। यीशु ही वह रोशनी हैं, जो अंधकार को दूर भगाती है। जहाँ यीशु होते हैं, वहाँ अंधेरा नहीं टिकता।

तेरे लिए

जब तुम सुबह उठो, सोचो, आज मैं यीशु को पहन लूँगा। जब माता-पिता तुमसे कुछ कहें, उनकी बात मानो। जब तुम्हारा दोस्त पास हो, उससे प्यार करो, जैसे अपने आप से करते हो। यह परमेश्वर को बहुत अच्छा लगता है।

बात करें

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, रात में मुझे सुरक्षित रखिए। सुबह मुझे यीशु को पहनने में मदद करिए। मुझे अपने पड़ोसी से प्यार करना सिखाइए। आमीन।

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रोमियों 13 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

रोमियों 13 किस विषय में है?
रात थी। बहुत गहरी, बहुत चुप रात। सब लोग अपने घरों में सो रहे थे। पर गाँव के फाटक पर एक पहरेदार खड़ा था। वह जाग रहा था, ताकि सब लोग सुरक्षित सोएँ। पौलुस कहता है, हर एक व्यक्ति उन बड़े अधिकारियों की बात माने, जो हमारी रखवाली करते हैं। क्योंकि परमेश्वर ने ही उन्हें यह काम दिया है। जो अच्छा काम करता है, उसे डरने की जरूरत नहीं। पहरेदार उसकी रक्षा करता है, उसे दंड नहीं देता।
रोमियों 13 क्या कहता है?
सोचो, जब तुम रात में सोते हो, कोई तुम्हारी देखभाल करता है। माता-पिता, या कोई बड़ा, जागकर तुम्हें सुरक्षित रखता है। पौलुस कहता है, उनकी बात मानो, उनका आदर करो। यह अच्छी बात है, डरने वाली बात नहीं। और एक और बात भी जरूरी है। पौलुस कहता है, "अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।" जैसे तुम अपनी रोटी से प्यार करते हो, वैसे ही अपने पड़ोसी से भी प्यार करो। प्रेम किसी को कभी दुख नहीं देता।
रोमियों 13 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर रात धीरे-धीरे बीतने लगी। आसमान में हल्की रोशनी दिखने लगी। सुबह होने वाली थी। पौलुस कहता है, रात बहुत बीत गई है, दिन निकलने पर है। इसलिए हमें प्रभु यीशु मसीह को पहन लेना चाहिए। जैसे तुम सुबह उठकर साफ कपड़े पहनते हो, वैसे ही यीशु को पहन लो। यीशु ही वह रोशनी हैं, जो अंधकार को दूर भगाती है। जहाँ यीशु होते हैं, वहाँ अंधेरा नहीं टिकता।
नन्हे बच्चे रोमियों 13 से क्या सीख सकते हैं?
जब तुम सुबह उठो, सोचो, आज मैं यीशु को पहन लूँगा। जब माता-पिता तुमसे कुछ कहें, उनकी बात मानो। जब तुम्हारा दोस्त पास हो, उससे प्यार करो, जैसे अपने आप से करते हो। यह परमेश्वर को बहुत अच्छा लगता है।
रोमियों 13 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय परमेश्वर, रात में मुझे सुरक्षित रखिए। सुबह मुझे यीशु को पहनने में मदद करिए। मुझे अपने पड़ोसी से प्यार करना सिखाइए। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिए प्रेम व्यवस्था का पूरा करना है।" ध्यान दे, पौलुस यह नहीं कहता कि प्रेम बड़े बड़े काम करता है। वह कहता है, प्रेम नुकसान नहीं पहुँचाता। कभी कभी प्रेम की पहली परीक्षा यही होती है कि मैंने क्या नहीं किया। वह कड़वा जवाब जो मैंने रोक लिया, वह बात जो मैंने आगे नहीं फैलाई। आज तेरे पास किसका हिसाब चुकाने का मौका है, जिसे तू प्रेम के कारण छोड़ देगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

वरन् प्रभु यीशु मसीह को पहन लो, और शरीर की अभिलाषाओं को पूरा करने का उपाय न करो।"

ध्यान दो, पौलुस ने यह नहीं कहा कि पाप मत करो। उसने कहा, उसका उपाय मत करो। क्योंकि गिरावट अचानक नहीं आती, वह पहले से की गई छोटी तैयारी से आती है। वह नंबर जो तुमने सेव रखा है, वह ऐप जो डिलीट नहीं हुई, वह रास्ता जो थोड़ा लंबा है पर उस दुकान से होकर जाता है।

मसीह को पहनना सुबह का पहला निर्णय है। उपाय न करना दिन भर का।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

कर देना कोई बड़ी आत्मिक बात नहीं लगती, फिर भी पौलुस कहता है, "इसी कारण तुम कर भी देते हो, क्योंकि शासन करनेवाले परमेश्वर के सेवक हैं।" जिन अधिकारियों से तुम असहमत हो, उन्हें भी वह अपना सेवक कहता है। तुम्हारी ईमानदारी बिल भरने में, कागज़ भरने में भी दिखती है। वहाँ भी परमेश्वर देख रहा है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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