रोमियों 6
छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक समय की बात है। यीशु मर गए थे। क्रूस पर। बहुत दुख की बात थी। सब लोग रो रहे थे।
पर फिर… तीसरे दिन… कुछ हुआ! यीशु फिर से जीवित हो उठे! वे चलने लगे। बोलने लगे। मुस्कुराने लगे।
पौलुस नाम के एक आदमी ने यह बात लिखी। उसने कहा, "जब हम यीशु में बपतिस्मा लेते हैं, तो हम उनके साथ मर जाते हैं। और फिर हम उनके साथ जी उठते हैं। नए जीवन में!"
सोचो एक बीज के बारे में। छोटा सा, भूरा बीज। वह मिट्टी में गिरता है। मिट्टी के नीचे छिप जाता है। जैसे वह मर गया हो। अंधेरा और चुप्पी। पर फिर… हरा सा पौधा उगता है! सूरज की रोशनी में। नया जीवन!
इसका क्या अर्थ है?
पौलुस कहता है, अब पाप हमारा मालिक नहीं है। पाप जैसे एक पुराना, मैला कपड़ा था। गंदा और फटा हुआ। हमने वह कपड़ा उतार दिया।
अब हम परमेश्वर के लिए जीते हैं। नया, साफ कपड़ा पहनकर। यीशु के साथ हम मर गए। और यीशु के साथ हम जी उठे।
मुख्य सूत्र
यह सब यीशु की वजह से है। यीशु क्रूस पर मरे। एक बार। फिर वे जी उठे। अब वे फिर कभी नहीं मरेंगे। मृत्यु अब उन पर राज नहीं कर सकती।
परमेश्वर कहते हैं, "तुम भी मेरे लिए जीवित हो, मसीह यीशु में।" यह परमेश्वर का उपहार है। मुफ्त उपहार। अनन्त जीवन।
आपके लिए
तुम भी यीशु से प्रेम करते हो ना? यीशु चाहते हैं कि तुम नए जीवन में जियो।
जब कोई गलत काम करने का मन करे, तो याद करना। तुमने वह पुराना कपड़ा उतार दिया है। तुम अब परमेश्वर के हो। उनके बच्चे।
जैसे बीज से हरा पौधा उगता है, वैसे ही तुममें भी नया जीवन उगता है। हर दिन थोड़ा थोड़ा।
यीशु मरे, फिर उनके साथ क्या हुआ?
तुम परमेश्वर के लिए कैसे जी सकते हो?
साथ में प्रार्थना
हे परमेश्वर, धन्यवाद कि यीशु जी उठे। मुझे भी नया जीवन दीजिए। मैं पुराना कपड़ा उतारना चाहता हूँ। मैं आपके लिए जीना चाहता हूँ। आमीन।
रोमियों 6 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
रोमियों 6 किस विषय में है?
रोमियों 6 क्या कहता है?
रोमियों 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे रोमियों 6 से क्या सीख सकते हैं?
रोमियों 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस कहता है, "परन्तु अब पाप से स्वतंत्र होकर और परमेश्वर के दास बनकर तुमको फल मिला जिससे पवित्रता प्राप्त होती है, और उसका अन्त अनन्त जीवन है।" गौर करो, आज़ादी का मतलब बिना मालिक के जीना नहीं, बल्कि मालिक का बदल जाना है। पाप ने तुझे कभी फल नहीं दिया, सिर्फ़ लज्जा दी। पर परमेश्वर की सेवा में लगा हर दिन चुपचाप फल ला रहा है, भले तुझे अभी दिखाई न दे।
क्योंकि पाप का तुम पर अधिकार न होगा, इसलिए कि तुम व्यवस्था के अधीन नहीं वरन् अनुग्रह के अधीन हो।"
ध्यान दे, पौलुस यह नहीं कहता कि पाप तुझे अब कभी नहीं बुलाएगा। वह कहता है कि उसका अधिकार टूट गया है। आवाज़ आ सकती है, पर मालिक की तरह नहीं, एक पुराने पड़ोसी की तरह जिसके पास अब चाबी नहीं रही।
और यह आज़ादी तेरी कोशिश से नहीं, अनुग्रह से आई है। तू किसके अधीन जी रहा है?
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