3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

श्रेष्ठगीत 3

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

रात हो गई थी। बहुत गहरी, बहुत काली रात। एक स्त्री अपने बिस्तर पर लेटी थी। पर वह सो नहीं पाई। उसे अपना प्रियतम याद आया। उसने चारों तरफ देखा। वह वहाँ नहीं था। स्त्री का मन घबरा गया। वह उठी। वह बाहर निकल गई। रात की ठंडी हवा उसे छू गई। वह गलियों में गई। वह चौकों में गई। रास्ते में पहरेदार खड़े थे। उसने उनसे पूछा, "क्या तुम ने मेरे प्रियतम को देखा है?" पहरेदार बस खड़े रहे, कुछ नहीं बोले। स्त्री फिर आगे बढ़ी। और तब, अचानक, वह मिल गया! उसका प्रियतम, ठीक उसके सामने। स्त्री की आँखों में खुशी आ गई। उसने उसे कसकर पकड़ लिया। उसने उसे जाने नहीं दिया। वह उसे अपने घर ले आई।

इसका क्या मतलब है?

फिर देखो, जंगल की ओर से कुछ आ रहा था। धूप के धुएँ के खंभे जैसा। उसकी खुशबू बहुत मीठी थी, गन्धरस और लोबान की खुशबू। पास आया तो पता चला, यह तो एक शानदार पालकी थी। सुलैमान राजा की पालकी। उसके चारों ओर साठ ताकतवर सिपाही चल रहे थे। हर एक के पास तलवार थी। वे रात में राजा की रखवाली करते थे। राजा ने खुद यह पालकी बनवाई थी। उसके खंभे चांदी के थे। सिरहाना सोने का था। गद्दी बैंगनी रंग की, मुलायम और सुंदर। लोगों ने उसे बड़े प्रेम से सजाया था।

एक ही कहानी की कड़ी

फिर सबको बुलाया गया, "बाहर निकलो, देखो!" राजा सुलैमान अपने सिर पर मुकुट पहने हुए था। यह मुकुट उसकी माँ ने उसे शादी के दिन पहनाया था, उस दिन जब उसका मन बहुत खुश था। यह कहानी हमें एक बात सिखाती है। जैसे वह स्त्री अपने प्रियतम को ढूंढती रही, वैसे ही परमेश्वर हमें ढूंढते हैं। और जब यीशु आते हैं, तो वे भी एक राजा की तरह आते हैं। बहुत शान से, बहुत प्रेम से। वे हमें कभी नहीं छोड़ते।

तुम्हारे लिए

जब तुम कहीं खो जाओ, या डर जाओ, तो कौन तुम्हें ढूंढता है? माँ ढूंढती है। पापा ढूंढते हैं। परमेश्वर भी तुम्हें ढूंढते हैं। वे जानते हैं तुम कहाँ हो। तुम्हें पकड़ने के लिए, तुम्हें अपने पास रखने के लिए। जैसे उस स्त्री ने अपने प्रियतम को पकड़ लिया और जाने न दिया, वैसे ही परमेश्वर तुम्हें कभी नहीं छोड़ते।

बात करें

जब तुम कहीं खो जाते हो, तो तुम्हें कौन ढूंढता है?

तुम्हें कैसा लगता है जब तुम्हें कोई प्यार करने वाला मिल जाता है?

चलो प्रार्थना करें

प्रिय परमेश्वर, आप हमें ढूंढते हैं। आप हमें प्यार करते हैं। हमें कभी मत छोड़िए। आप हमारे साथ रहिए, दिन में और रात में। आमीन।

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श्रेष्ठगीत 3 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

श्रेष्ठगीत 3 किस विषय में है?
रात हो गई थी। बहुत गहरी, बहुत काली रात। एक स्त्री अपने बिस्तर पर लेटी थी। पर वह सो नहीं पाई। उसे अपना प्रियतम याद आया। उसने चारों तरफ देखा। वह वहाँ नहीं था। स्त्री का मन घबरा गया। वह उठी। वह बाहर निकल गई। रात की ठंडी हवा उसे छू गई। वह गलियों में गई। वह चौकों में गई। रास्ते में पहरेदार खड़े थे। उसने उनसे पूछा, "क्या तुम ने मेरे प्रियतम को देखा है?
श्रेष्ठगीत 3 क्या कहता है?
फिर देखो, जंगल की ओर से कुछ आ रहा था। धूप के धुएँ के खंभे जैसा। उसकी खुशबू बहुत मीठी थी, गन्धरस और लोबान की खुशबू। पास आया तो पता चला, यह तो एक शानदार पालकी थी। सुलैमान राजा की पालकी। उसके चारों ओर साठ ताकतवर सिपाही चल रहे थे। हर एक के पास तलवार थी। वे रात में राजा की रखवाली करते थे। राजा ने खुद यह पालकी बनवाई थी। उसके खंभे चांदी के थे। सिरहाना सोने का था। गद्दी बैंगनी रंग की, मुलायम और सुंदर। लोगों ने उसे बड़े प्रेम से सजाया था।
श्रेष्ठगीत 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर सबको बुलाया गया, "बाहर निकलो, देखो!" राजा सुलैमान अपने सिर पर मुकुट पहने हुए था। यह मुकुट उसकी माँ ने उसे शादी के दिन पहनाया था, उस दिन जब उसका मन बहुत खुश था। यह कहानी हमें एक बात सिखाती है। जैसे वह स्त्री अपने प्रियतम को ढूंढती रही, वैसे ही परमेश्वर हमें ढूंढते हैं। और जब यीशु आते हैं, तो वे भी एक राजा की तरह आते हैं। बहुत शान से, बहुत प्रेम से। वे हमें कभी नहीं छोड़ते।
नन्हे बच्चे श्रेष्ठगीत 3 से क्या सीख सकते हैं?
जब तुम कहीं खो जाओ, या डर जाओ, तो कौन तुम्हें ढूंढता है? माँ ढूंढती है। पापा ढूंढते हैं। परमेश्वर भी तुम्हें ढूंढते हैं। वे जानते हैं तुम कहाँ हो। तुम्हें पकड़ने के लिए, तुम्हें अपने पास रखने के लिए। जैसे उस स्त्री ने अपने प्रियतम को पकड़ लिया और जाने न दिया, वैसे ही परमेश्वर तुम्हें कभी नहीं छोड़ते।
श्रेष्ठगीत 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम्हें कैसा लगता है जब तुम्हें कोई प्यार करने वाला मिल जाता है?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

उसके विवाह के दिन, और उसके मन के आनन्द के दिन" यह मुकुट किसी युद्ध की जीत का नहीं था, माँ के हाथों से पहनाया गया प्रेम का मुकुट था। कभी सोचा है, परमेश्वर तुझे भी ऐसे ही देखता है? डाँटने के लिए नहीं, सजाने के लिए। तेरे जीवन में भी एक दिन ऐसा है जिसे वह आनन्द का दिन कहता है। क्या तू उसे देखने निकलेगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

सुलैमान की पालकी के खम्भे चाँदी के थे, "उसका तल सोने का" था, बाहर से सब चमक रहा था। पर जो सबसे कीमती था, वह भीतर था, प्रेम से सजाया हुआ। लोग तुम्हारे जीवन की चाँदी सोना देखते हैं। पर जिसके साथ तुम रोज़ बैठते हो, वह भीतर का सामान जानता है। वहाँ क्या बिछा है, प्रेम या बस दिखावा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

देखो, यह सुलैमान की पालकी है, उसके चारों ओर इस्राएल के शूरवीरों में से साठ वीर हैं।" ये साठ लोग सजावट नहीं थे। रात का डर सच्चा था, और जो पालकी में बैठी थी वह किसी के लिए बहुत कीमती थी। सोचो, तुम्हारे चारों ओर भी पहरा है। जिसे परमेश्वर प्यार करता है, उसे वह असुरक्षित रास्ते पर अकेला नहीं छोड़ता।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

जिस पल उसे उसका प्रिय मिला, वह उसे थामे रही, फिर भी दूसरों से कहती है, "जब तक प्रेम आप से न उठे, तब तक उसे न जगाना, न उभारना।" प्रेम जल्दबाजी सह नहीं पाता। जो रिश्ता तुम खींचकर, दबाव डालकर, समय से पहले पक्का करना चाहते हो, वह भीतर से कच्चा ही रहेगा। क्या तुम परमेश्वर के समय पर भरोसा कर पा रहे हो?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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