3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

जकर्याह 7

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

समझाइए

बहुत समय पहले की बात है। परमेश्वर के लोग बहुत दुखी थे। उनका सुंदर शहर, यरूशलेम, टूट गया था। बहुत साल पहले टूट गया था।

हर साल वे रोते थे। हर साल वे कहते थे, "हम खाना नहीं खाएँगे। हम दुखी रहेंगे।" यह उनका उपवास था।

फिर एक दिन कुछ लोग आए। वे परमेश्वर के घर आए। उन्होंने पूछा, "क्या हमें अब भी रोना चाहिए? क्या हमें अब भी उपवास करना चाहिए?"

तब परमेश्वर ने जकर्याह से बात की। जकर्याह परमेश्वर का दोस्त था। परमेश्वर ने कहा, "जकर्याह, तुम लोगों से एक बात पूछो।"

इसका क्या मतलब है?

परमेश्वर ने कहा, "जब तुम रोते थे, क्या तुम सच में मेरे लिए रोते थे? जब तुम खाते हो, क्या तुम मेरे बारे में सोचते हो?"

परमेश्वर उदास थे। लोग बाहर से बहुत अच्छा दिखते थे। पर उनके दिल में परमेश्वर नहीं था।

फिर परमेश्वर ने कहा, "मैं तुम्हें बताता हूँ मुझे क्या अच्छा लगता है। सुनो।"

"जो बच्चों की माँ नहीं है, उस पर दया करो। जिन बच्चों का पापा नहीं है, उनसे प्यार करो। जो गरीब हैं, उन्हें मत सताओ। एक दूसरे से अच्छे से बात करो।"

देखो, परमेश्वर को यही अच्छा लगता है!

बड़ी कहानी

पर लोगों ने नहीं सुना। उन्होंने अपने कान बंद कर लिए। उनका दिल पत्थर जैसा कड़ा हो गया।

परमेश्वर बहुत दुखी हुए।

पर परमेश्वर ने हमें छोड़ा नहीं। बहुत साल बाद परमेश्वर ने यीशु को भेजा। यीशु का दिल कड़ा नहीं था। यीशु का दिल बहुत नरम था।

यीशु गरीब लोगों के पास गए। यीशु बीमार बच्चों के पास गए। यीशु ने सबसे प्यार किया। यीशु ने वही किया जो परमेश्वर को अच्छा लगता है।

और यीशु हमारा पत्थर जैसा दिल नरम कर सकते हैं। वे हमारे दिल में प्यार भर सकते हैं।

तुम्हारे लिए

सोचो! क्या तुम्हारे स्कूल में कोई अकेला बच्चा है? क्या तुम्हारे पास कोई है जिसके पास खिलौना नहीं है?

तुम उसके पास जा सकते हो। तुम मुस्कुरा सकते हो। तुम अपना खिलौना बाँट सकते हो।

यही परमेश्वर को अच्छा लगता है। यह बड़ी बात है, पर छोटे बच्चे भी यह कर सकते हैं। तुम भी!

जब तुम किसी से प्यार करते हो, तो परमेश्वर मुस्कुराते हैं।

बात करो

तुम्हें कब अच्छा लगता है, जब कोई तुम्हारे साथ अच्छे से बात करता है?

तुम आज किसके साथ अच्छा कर सकते हो?

साथ में प्रार्थना

प्यारे परमेश्वर, मेरा दिल नरम कीजिए। मुझे सिखाइए कि मैं दूसरों से प्यार करूँ। यीशु के नाम से, आमीन।

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जकर्याह 7 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

जकर्याह 7 किस विषय में है?
बहुत समय पहले की बात है। परमेश्वर के लोग बहुत दुखी थे। उनका सुंदर शहर, यरूशलेम, टूट गया था। बहुत साल पहले टूट गया था।
जकर्याह 7 क्या कहता है?
परमेश्वर ने कहा, "जब तुम रोते थे, क्या तुम सच में मेरे लिए रोते थे? जब तुम खाते हो, क्या तुम मेरे बारे में सोचते हो?"
जकर्याह 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पर लोगों ने नहीं सुना। उन्होंने अपने कान बंद कर लिए। उनका दिल पत्थर जैसा कड़ा हो गया।
नन्हे बच्चे जकर्याह 7 से क्या सीख सकते हैं?
सोचो! क्या तुम्हारे स्कूल में कोई अकेला बच्चा है? क्या तुम्हारे पास कोई है जिसके पास खिलौना नहीं है?
जकर्याह 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम्हें कब अच्छा लगता है, जब कोई तुम्हारे साथ अच्छे से बात करता है?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

वे लोग बेतेल से आए थे, एक धार्मिक सवाल लेकर: क्या हम उपवास करते रहें? उन्होंने याजकों से पूछा, पर उत्तर याजकों से नहीं आया। "तब सेनाओं के यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा:" परमेश्वर स्वयं बीच में आ गए, और उनका जवाब नियम के बारे में नहीं, मन के बारे में था। सत्तर साल से वे उपवास रख रहे थे, पर किसके लिए? कभी सोचा कि तुम्हारी लंबी आदतें असल में किसके लिए हैं?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

ज़करयाह के समय लोग सत्तर साल से उपवास कर रहे थे, पाँचवें और सातवें महीने में। पर परमेश्वर उनसे एक चुभता हुआ सवाल पूछते हैं, "जब तुम खाते और पीते हो, तो क्या तुम अपने ही लिये नहीं खाते, और अपने ही लिये नहीं पीते?"

सोचिए, उपवास भी अपने लिए हो सकता है? हाँ। जब मैं रोता हूँ अपने दुख पर, अपने खोए हुए मंदिर पर, अपनी तकलीफ़ों पर, और भूल जाता हूँ कि परमेश्वर मुझसे क्या चाहते हैं, तब मेरी भक्ति भी बस मेरे इर्दगिर्द घूमने लगती है। आज खुद से पूछिए: मेरी प्रार्थना किसके लिए है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

जैसे मैं ने पुकारा, और वे नहीं सुनते थे, वैसे ही वे भी पुकारेंगे, परन्तु मैं नहीं सुनूँगा।"

कैसा गंभीर वचन। परमेश्वर वर्षों तक भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा पुकारते रहे, पर लोग अपने कान बंद करते रहे। और जब मुसीबत आई, तब उन्होंने पुकारा, पर आकाश चुप रहा।

सोचो, आज जब वह तुझसे धीमी आवाज़ में बात करता है, तू क्या करता है? हर अनसुनी पुकार हमारे कान को थोड़ा और भारी बना देती है। आज उसकी आवाज़ सुन, कल के लिए मत टाल।

थोड़े बड़े बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?

हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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