12 वर्ष और उससे अधिक आयु के किशोर के लिए

1 यूहन्ना 2

किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यूहन्ना यहाँ एक बुज़ुर्ग व्यक्ति की तरह लिख रहे हैं, जिसने अपना पूरा जीवन यीशु मसीह के साथ बिताया है, और अब वे उन युवाओं को लिख रहे हैं जो अभी विश्वास में बढ़ रहे हैं। पहली बात जो वे साफ़ कहते हैं, वह यह है कि पाप की समस्या असली है। वे यह नहीं कहते कि "अच्छे बनो और सब ठीक हो जाएगा।" वे कहते हैं कि यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, धर्मी यीशु मसीह, जो हमारे पापों का प्रायश्चित है, न केवल हमारे, बल्कि सारे जगत के पापों का भी।

फिर वे एक कसौटी देते हैं जो असहज कर सकती है। जो कोई कहता है "मैं उसे जान गया हूँ" पर उसकी आज्ञाओं को नहीं मानता, वह झूठा है। यह कोई हल्की बात नहीं है। यूहन्ना कह रहे हैं कि विश्वास केवल शब्दों में नहीं, बल्कि जीवन के ढाँचे में दिखता है, जैसे यीशु मसीह चले, वैसे ही चलना।

फिर आता है ज्योति और अंधकार का विषय। यूहन्ना कहते हैं कि जो अपने भाई से बैर रखता है, वह अंधकार में है, चाहे वह कितना भी दावा करे कि वह ज्योति में है। यह प्रेम की बात है, पर रोमांटिक प्रेम नहीं, बल्कि यह कि तुम अपने भाई-बहन के साथ कैसे व्यवहार करते हो, चाहे वे तुम्हें कितना भी परेशान करें।

इसके बाद यूहन्ना अपने पाठकों को समूहों में बाँटते हैं, बालक, जवान, और पिता, और हर एक को यह याद दिलाते हैं कि उनके पाप क्षमा हुए हैं, कि वे उसे जो आदि से है जानते हैं, और कि उन्होंने उस दुष्ट पर जय पाई है। फिर एक चेतावनी आती है संसार के प्रेम के विरुद्ध, शरीर की अभिलाषा, आँखों की अभिलाषा, और जीविका के घमण्ड के विरुद्ध। यह सब मिट जाएगा, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा।

अंत में यूहन्ना मसीह के विरोधियों की बात करते हैं, वे लोग जो कलीसिया से निकल गए क्योंकि वे कभी सच में उसमें से नहीं थे। पर विश्वासियों के पास पवित्र आत्मा का अभिषेक है, जो उन्हें सत्य सिखाता है। अध्याय का अंत भरोसे के साथ होता है, कि जब मसीह प्रगट हों, तो उनमें बने रहनेवालों को साहस होगा, लज्जा नहीं।

इसका क्या अर्थ है?

यह अध्याय एक गहरी सच्चाई को खोलता है, कि विश्वास केवल विश्वास करना नहीं है, बल्कि जीना है। तुम कह सकते हो कि तुम परमेश्वर को जानते हो, पर यूहन्ना पूछते हैं, तुम्हारा जीवन क्या कहता है। यह डराने के लिए नहीं लिखा गया, बल्कि इसलिए कि तुम्हें एक ईमानदार आईना मिले। और साथ ही, यह अध्याय राहत भी देता है, क्योंकि गिरने पर एक सहायक है, न कि केवल एक जज। यीशु मसीह वकील की तरह पिता के सामने खड़े हैं, हमारे पक्ष में।

यह भी दिलचस्प है कि यूहन्ना संसार के प्रेम की बात करते हैं। यह कोई सामाजिक नियम नहीं है कि "दुनिया से दूर रहो," बल्कि एक गहरी पहचान की बात है, कि तुम्हारा दिल किस चीज़ के पीछे भाग रहा है। शरीर की अभिलाषा, आँखों की अभिलाषा, जीविका का घमण्ड, ये तीन चीज़ें आज भी वही रूप बदलकर हमारे सामने खड़ी हैं, चाहे स्क्रीन पर हो या तुलना में।

समान सूत्र

यह पूरा अध्याय यीशु मसीह के इर्द-गिर्द घूमता है। वे हमारे पापों का प्रायश्चित हैं, वे पिता के पास हमारे सहायक हैं, और उनका जीवन वह ढाँचा है जिसमें हमें चलना है। पुरानी आज्ञा, प्रेम की आज्ञा, नई हो जाती है क्योंकि अंधकार मिटता जा रहा है और सत्य की ज्योति यीशु मसीह में चमक रही है। और अंत में जो प्रतिज्ञा दी गई है, अनन्त जीवन, वह पूरी बाइबल की कहानी का केंद्र है, कि परमेश्वर अपने लोगों को अपने साथ हमेशा के लिए जोड़ना चाहते हैं।

तुम्हारे लिए

तुम्हारी उम्र में यह अध्याय बहुत सीधी बात करता है। तुम शायद जानते हो कि सही बात कैसे बोलनी है, चर्च में, दोस्तों के बीच, पर सवाल यह है कि तुम्हारा जीवन क्या दिखाता है जब कोई नहीं देख रहा। क्या तुम किसी से बैर रखते हो जिसे तुम माफ नहीं करना चाहते। क्या संसार की चीज़ें, स्टेटस, दिखावा, तुलना, तुम्हारे दिल पर कब्ज़ा कर रही हैं। यह अध्याय तुम्हें शर्मिंदा करने के लिए नहीं है, बल्कि तुम्हें याद दिलाने के लिए कि यीशु मसीह तुम्हारे साथ खड़े हैं, तुम्हारे गिरने के बावजूद, और वे चाहते हैं कि तुम सच में उनमें बने रहो।

बात करें

अगर विश्वास केवल शब्दों में नहीं बल्कि जीवन में दिखता है, तो तुम्हारा जीवन इस समय क्या कहता है कि तुम किसमें भरोसा रखते हो।

संसार की कौन सी अभिलाषा, तुलना, दिखावा, मान्यता, तुम्हारे दिल में सबसे ज़्यादा जगह लेती है, और यीशु मसीह उस जगह को कैसे भर सकते हैं।

साथ में प्रार्थना

प्रभु, हम मानते हैं कि हमारे शब्द और हमारा जीवन हमेशा एक जैसे नहीं होते। धन्यवाद कि यीशु मसीह हमारे सहायक हैं, जब हम गिरते हैं। हमें सिखाइए कि हम एक-दूसरे से सच्चा प्रेम रखें, और संसार की चीज़ों के पीछे भागने के बजाय आपकी इच्छा पर चलें। हमें साहस दीजिए कि जब आप प्रगट हों, हम लज्जित न हों। आमीन।

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1 यूहन्ना 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 यूहन्ना 2 किस विषय में है?
यूहन्ना यहाँ एक बुज़ुर्ग व्यक्ति की तरह लिख रहे हैं, जिसने अपना पूरा जीवन यीशु मसीह के साथ बिताया है, और अब वे उन युवाओं को लिख रहे हैं जो अभी विश्वास में बढ़ रहे हैं। पहली बात जो वे साफ़ कहते हैं, वह यह है कि पाप की समस्या असली है। वे यह नहीं कहते कि "अच्छे बनो और सब ठीक हो जाएगा।" वे कहते हैं कि यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, धर्मी यीशु मसीह, जो हमारे पापों का प्रायश्चित है, न केवल हमारे, बल्कि सारे जगत के पापों का भी।
1 यूहन्ना 2 क्या कहता है?
फिर आता है ज्योति और अंधकार का विषय। यूहन्ना कहते हैं कि जो अपने भाई से बैर रखता है, वह अंधकार में है, चाहे वह कितना भी दावा करे कि वह ज्योति में है। यह प्रेम की बात है, पर रोमांटिक प्रेम नहीं, बल्कि यह कि तुम अपने भाई-बहन के साथ कैसे व्यवहार करते हो, चाहे वे तुम्हें कितना भी परेशान करें।
1 यूहन्ना 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
अंत में यूहन्ना मसीह के विरोधियों की बात करते हैं, वे लोग जो कलीसिया से निकल गए क्योंकि वे कभी सच में उसमें से नहीं थे। पर विश्वासियों के पास पवित्र आत्मा का अभिषेक है, जो उन्हें सत्य सिखाता है। अध्याय का अंत भरोसे के साथ होता है, कि जब मसीह प्रगट हों, तो उनमें बने रहनेवालों को साहस होगा, लज्जा नहीं।
किशोर 1 यूहन्ना 2 से क्या सीख सकते हैं?
यह भी दिलचस्प है कि यूहन्ना संसार के प्रेम की बात करते हैं। यह कोई सामाजिक नियम नहीं है कि "दुनिया से दूर रहो," बल्कि एक गहरी पहचान की बात है, कि तुम्हारा दिल किस चीज़ के पीछे भाग रहा है। शरीर की अभिलाषा, आँखों की अभिलाषा, जीविका का घमण्ड, ये तीन चीज़ें आज भी वही रूप बदलकर हमारे सामने खड़ी हैं, चाहे स्क्रीन पर हो या तुलना में।
1 यूहन्ना 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम्हारी उम्र में यह अध्याय बहुत सीधी बात करता है। तुम शायद जानते हो कि सही बात कैसे बोलनी है, चर्च में, दोस्तों के बीच, पर सवाल यह है कि तुम्हारा जीवन क्या दिखाता है जब कोई नहीं देख रहा। क्या तुम किसी से बैर रखते हो जिसे तुम माफ नहीं करना चाहते। क्या संसार की चीज़ें, स्टेटस, दिखावा, तुलना, तुम्हारे दिल पर कब्ज़ा कर रही हैं। यह अध्याय तुम्हें शर्मिंदा करने के लिए नहीं है, बल्कि तुम्हें याद दिलाने के लिए कि यीशु मसीह तुम्हारे साथ खड़े हैं, तुम्हारे गिरने के बावजूद, और वे चाहते हैं कि तुम सच में उनमें बने रहो।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 23

जो कोई पुत्र का इन्कार करता है, उसके पास पिता भी नहीं; जो पुत्र को मान लेता है, उसके पास पिता भी है।" यूहन्ना यहाँ कोई गणित नहीं समझा रहा, वह दिल की बात कह रहा है। बहुत लोग कहते हैं, परमेश्वर तो एक ही है, यीशु की क्या जरूरत? पर पिता को जानने का दरवाजा पुत्र ही है। जिसे तू मानता है, उसी से तेरा रिश्ता तय होता है। आज तेरे लिए यीशु कौन है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 27

यूहन्ना यह उन लोगों को लिख रहा था जिनके बीच से कुछ शिक्षक निकल गए थे और कह रहे थे कि सच्चा ज्ञान उनके पास है। उनके जवाब में यूहन्ना कहता है, "और तुम्हारा वह अभिषेक, जो उसकी ओर से किया गया, तुम में बना रहता है।" यानी जो तुझे चाहिए, वह तेरे भीतर पहले से है। किसी की चिकनी चुपड़ी बातों से डरने की ज़रूरत नहीं। पर सोच, क्या तू उस भीतर की आवाज़ को सुनने के लिए कभी शांत बैठता भी है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 24

यूहन्ना उन लोगों को लिख रहा था जिनके बीच से कुछ लोग निकल गए थे, नई नई बातें लेकर। और वह कहता है, "जो तुमने आरम्भ से सुना है, वही तुममें बना रहे।" कुछ नया नहीं, कुछ गहरा नहीं। वही पुरानी बात जो तुमने पहले दिन सुनी थी, कि यीशु ने तुझसे प्रेम किया और तेरे लिए जान दी। क्या वह अब भी तेरे भीतर जीवित है, या बस याद बनकर रह गई?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

हे मेरे बालकों, मैं ये बातें तुम्हें इसलिए लिखता हूँ, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात् धर्मी यीशु मसीह।"

ध्यान दो, यूहन्ना यह नहीं कहता "तुम्हारा सहायक", वह कहता है "हमारा"। बूढ़ा प्रेरित खुद को तुमसे अलग नहीं रखता। और गिरने के बाद तुम्हें वकील ढूँढ़ना नहीं पड़ता, वह पहले से पिता के पास खड़ा है। यह जानकर तुम पाप से बचना चाहोगे, या उसे हल्का समझोगे?

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For parents and teachers: किशोरों और युवाओं के लिए लिखा गया। युवा समूह, कन्फर्मेशन कक्षा, या व्यक्तिगत बाइबल अध्ययन के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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