12 वर्ष और उससे अधिक आयु के किशोर के लिए

2 इतिहास 19

किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यहोशापात युद्ध के मैदान से जीवित लौटा है। कुछ ही समय पहले उसने राजा अहाब के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी, वही अहाब जो परमेश्वर से खुला शत्रुभाव रखता था। यहोशापात बच गया, लेकिन जब वह यरूशलेम पहुँचा, तो हनानी का बेटा येहू, एक दर्शी, उससे मिलने आया। येहू के शब्द तीखे हैं: "क्या दुष्टों की सहायता करनी और यहोवा के बैरियों से प्रेम रखना चाहिये?" यह कोई मीठी बात नहीं है। यह एक चेतावनी है कि परमेश्वर का क्रोध यहोशापात पर भड़का है।

लेकिन येहू यहीं नहीं रुकता। वह जोड़ता है: "तो भी तुझ में कुछ अच्छी बातें पाई जाती हैं।" यहोशापात ने देश से अशेरों की मूर्तियाँ हटाईं और अपना मन परमेश्वर की खोज में लगाया। सुधार की सराहना है, पर लापरवाही की सुधार-भरी फटकार भी।

यहोशापात इस डाँट को सुनता है, और फिर कुछ उल्लेखनीय होता है। वह किले में बंद नहीं होता, ना ही आत्म-दया में डूबता है। वह उठकर काम पर लग जाता है। दक्षिण में बेर्शेबा से लेकर उत्तर में एप्रैम के पहाड़ी क्षेत्र तक वह अपनी प्रजा के बीच जाता है और उन्हें उनके पूर्वजों के परमेश्वर की ओर वापस मोड़ता है।

फिर वह न्याय-व्यवस्था को नए सिरे से खड़ा करता है। हर गढ़वाले नगर में न्यायी नियुक्त करता है। उन्हें जो वह कहता है, वह ध्यान देने योग्य है: "जो न्याय करोगे, वह मनुष्य के लिये नहीं, यहोवा के लिये करोगे।" वह उन्हें याद दिलाता है कि परमेश्वर में कुटिलता नहीं है, वह पक्षपात नहीं करता, घूस नहीं लेता।

यरूशलेम में भी वह लेवियों, याजकों और घरानों के मुख्य पुरुषों को नियुक्त करता है। महायाजक अमर्याह धार्मिक मामलों का प्रमुख होगा, और जबद्याह राजकीय मामलों का। अंतिम शब्द उत्साह देने वाले हैं: "हियाव बाँधकर काम करो और भले मनुष्य के साथ यहोवा रहेगा।"

What Does This Mean?

यह अध्याय एक अजीब मोड़ पर शुरू होता है। एक राजा जो अभी-अभी मौत के मुँह से बच निकला है, उसका स्वागत आँसुओं या जय-जयकार से नहीं, बल्कि एक फटकार से होता है। परमेश्वर उसे बिना सुधारे नहीं छोड़ता। यह प्रेम का एक कठोर पक्ष है, जिसे हम अक्सर नहीं देखना चाहते। परमेश्वर आपकी गलतियों के साथ आपको आराम से नहीं रहने देता, क्योंकि वह आपकी परवाह करता है।

पर यहाँ कुछ और भी है। येहू सिर्फ आलोचना करके नहीं जाता। वह पहचानता है कि यहोशापात में क्या अच्छा है। और यहोशापात इस बात का प्रमाण देता है कि सच्चा पश्चाताप कैसा दिखता है: बहाने नहीं, विरोध नहीं, बल्कि नई शुरुआत। वह लोगों के बीच जाता है, न्याय को व्यवस्थित करता है, ईमानदारी की माँग करता है।

इस अध्याय का दिल परमेश्वर के चरित्र में है। "हमारे परमेश्वर यहोवा में कुछ कुटिलता नहीं है, और न वह किसी का पक्ष करता और न घूस लेता है।" एक ऐसी दुनिया में जहाँ हर संस्था पर संदेह किया जा सकता है, जहाँ पैसे और संपर्क अक्सर सच से ज़्यादा भारी होते हैं, यह वाक्य पहाड़ की तरह खड़ा है। परमेश्वर की अदालत ऐसी नहीं है।

The Common Thread

यहोशापात न्यायियों को याद दिलाता है कि वे मनुष्य के लिए नहीं, परमेश्वर के लिए न्याय करते हैं। यह उस बड़े सत्य की ओर इशारा करता है जो पूरे बाइबल में गूँजता है: एक दिन एक अंतिम अदालत होगी, जहाँ न्यायी स्वयं परमेश्वर होंगे। पौलुस रोमियों 2:11 में उसी बात को दोहराता है: परमेश्वर के यहाँ पक्षपात नहीं है।

और यहीं पर यीशु मसीह इस कहानी में प्रवेश करते हैं। क्योंकि अगर परमेश्वर सच में पक्षपात नहीं करता और घूस नहीं लेता, तो हम में से कोई भी उसके सामने बच नहीं सकता। यहोशापात भी नहीं। येहू ने उसे स्पष्ट कर दिया: "यहोवा की ओर से तुझ पर क्रोध भड़का है।" यहाँ यीशु का काम आवश्यक हो जाता है। वह न्यायी भी हैं और वह मध्यस्थ भी। क्रूस पर वे उस न्याय को स्वयं पर ले लेते हैं जिसका हम सामना करने के योग्य नहीं थे। पक्षपात के बिना न्याय, और उसी न्यायी की ओर से अनुग्रह। यही सुसमाचार का हृदय है।

For You

आपके जीवन में शायद कोई येहू नहीं है जो सीधे आपके पास आकर कहे कि आप कहाँ गलत हैं। पर आवाज़ें हैं। एक माता या पिता, एक दोस्त, एक शिक्षक, कभी-कभी एक अजनबी। कभी-कभी वह आवाज़ आपके अपने अंदर होती है, जब आप रात को शांत होते हैं और जानते हैं कि कुछ ठीक नहीं है।

सवाल यह है: आप उस आवाज़ के साथ क्या करते हैं? यहोशापात रक्षात्मक नहीं हुआ। उसने यह नहीं कहा कि "तुम मुझे नहीं समझते, तुम्हें पता नहीं मैं किस दबाव में हूँ।" उसने सुना और फिर काम पर लग गया।

एक दूसरी बात। यहोशापात ने न्यायियों से कहा कि वे मनुष्य के लिए नहीं, परमेश्वर के लिए काम करें। आप शायद न्यायी नहीं हैं, पर आपके पास भी शक्ति है। स्कूल में, ग्रुप चैट में, दोस्तों के बीच। आप किसे शामिल करते हैं और किसे बाहर छोड़ते हैं। आप क्या शेयर करते हैं और क्या नहीं। आप किसकी पीठ पीछे क्या कहते हैं। यह भी एक तरह का न्याय है। और परमेश्वर देख रहा है, बिना पक्षपात के।

अंतिम शब्द याद रखें: "हियाव बाँधकर काम करो और भले मनुष्य के साथ यहोवा रहेगा।" सही काम करना अक्सर हिम्मत माँगता है। पर आप अकेले नहीं हैं।

Talk About It

आपके जीवन में आखिरी बार कब किसी ने आपको कुछ कठोर सच बताया था? आपने कैसे प्रतिक्रिया दी, और आज पीछे मुड़कर देखने पर वह प्रतिक्रिया कैसी दिखती है?

*यहोशापात ने कहा कि परमेश्वर पक्षपात नहीं करता।

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For parents and teachers: किशोरों और युवाओं के लिए लिखा गया। युवा समूह, कन्फर्मेशन कक्षा, या व्यक्तिगत बाइबल अध्ययन के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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