3 यूहन्ना 1
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
यह चिट्ठी नए नियम की सबसे छोटी पुस्तकों में से एक है। सिर्फ पंद्रह आयतें। कोई गहरा धर्मशास्त्रीय भाषण नहीं, कोई लम्बा उपदेश नहीं। यह एक निजी पत्र है, जो प्रेरित यूहन्ना ने अपने एक मित्र गयुस को लिखा। यूहन्ना खुद को "प्राचीन" कहते हैं। वे बूढ़े हो चुके हैं, कलीसिया के अनुभवी अगुए हैं, और गयुस से सच्चा प्रेम रखते हैं।
पहली आयतों में यूहन्ना एक बहुत ही मानवीय बात कहते हैं: "मेरी यह प्रार्थना है कि जैसे तू आत्मिक उन्नति कर रहा है, वैसे ही तू सब बातों में उन्नति करे, और भला चंगा रहे।" यानी: तेरी आत्मा तो ठीक है, अब तेरा शरीर और तेरी परिस्थिति भी वैसी ही हो जाए। यूहन्ना को यात्रा करने वाले भाइयों से पता चला था कि गयुस "सत्य पर चल रहा है।" इससे बड़ी खुशी यूहन्ना को कुछ नहीं थी।
फिर बात एक व्यावहारिक विषय पर आती है: मेहमाननवाज़ी। उन दिनों प्रचारक और शिक्षक एक जगह से दूसरी जगह यीशु का सुसमाचार सुनाते हुए यात्रा करते थे। न कोई होटल, न कोई वेतन। वे विश्वासियों के घरों पर निर्भर थे। गयुस ने उनका स्वागत किया, यहाँ तक कि अजनबियों का भी। यूहन्ना कहते हैं कि यह अच्छा है, इसे जारी रखो।
लेकिन फिर एक अंधेरा नाम आता है: दियुत्रिफेस। यह आदमी कलीसिया में "बड़ा बनना" चाहता है। वह यूहन्ना को नहीं मानता, यूहन्ना के बारे में बुरी बातें फैलाता है, यात्रा करने वाले भाइयों को अस्वीकार करता है, और जो उन्हें स्वीकार करना चाहते हैं उन्हें कलीसिया से निकाल देता है। सत्ता का भूखा। एक असली नाम, एक असली समस्या।
इसके विपरीत दिमेत्रियुस है, जिसके बारे में सब लोग अच्छी गवाही देते हैं। यूहन्ना पत्र समाप्त करते हैं इस उम्मीद के साथ कि वे जल्दी ही आमने-सामने बात करेंगे। "तुझे शान्ति मिलती रहे।"
What Does This Mean?
यह पत्र एक स्नैपशॉट है। पहली सदी की एक छोटी कलीसिया की एक झलक। और उसमें वही चीज़ें हैं जो आज भी हैं: वफ़ादार लोग, स्वार्थी लोग, और बीच में सच्चाई का सवाल।
तीन चरित्र सामने आते हैं। गयुस, जो चुपचाप सच्चाई में जीता है और दूसरों की सेवा करता है। दियुत्रिफेस, जिसे कलीसिया मंच लगती है जहाँ वह अपनी शक्ति दिखा सके। और दिमेत्रियुस, जिसकी असली पहचान उसके काम खुद बोलते हैं।
यूहन्ना यहाँ एक सूक्ष्म पर तीखा भेद करते हैं। आयत 11 में वे कहते हैं: "जो भलाई करता है, वह परमेश्वर की ओर से है; पर जो बुराई करता है, उसने परमेश्वर को नहीं देखा।" यह सिर्फ नैतिक उपदेश नहीं है। यह एक कसौटी है। तुम्हारा जीवन दिखाता है कि तुम असल में परमेश्वर को जानते हो या नहीं। कलीसिया में ऊँचा पद, बड़ी बातें, प्रभावशाली उपस्थिति, ये कुछ भी साबित नहीं करते। जो सचमुच परमेश्वर से मिला है, वह भलाई करता है। बाकी सब दिखावा है।
The Common Thread
पूरी बाइबल में एक सवाल बार-बार लौटता है: सच क्या है, और सच कौन है? यीशु ने खुद कहा, "मैं मार्ग, सत्य, और जीवन हूँ।" यूहन्ना इस पत्र में "सत्य" शब्द बार-बार इस्तेमाल करते हैं। गयुस "सत्य पर चलता है।" दिमेत्रियुस के बारे में "सत्य ने भी गवाही दी।"
यह सत्य कोई विचार नहीं है, कोई सिद्धांतों की सूची नहीं। यह एक व्यक्ति है। यीशु मसीह। सत्य पर चलने का मतलब है उनके पीछे चलना, जिस तरह वे जिए उस तरह जीना, दूसरों की सेवा करना जैसे उन्होंने की।
और यहीं दियुत्रिफेस की समस्या साफ़ हो जाती है। वह "बड़ा बनना चाहता है।" यीशु ने ठीक इसका उलट सिखाया: "जो तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने।" दियुत्रिफेस सत्य से भटक गया, इसलिए नहीं कि उसने कोई गलत धर्मशास्त्र सिखाया, बल्कि इसलिए कि उसका दिल टेढ़ा हो गया।
For You
यह पत्र तुम्हारे बहुत करीब है, शायद तुम्हें लगता उससे भी ज़्यादा।
तुम्हारी उम्र में एक बात लगातार चलती रहती है: कौन दिखता है, कौन नहीं। कौन फ़ॉलो किया जाता है, कौन नज़रअंदाज़। सोशल मीडिया पर, स्कूल में, दोस्तों के ग्रुप में। एक हिस्सा तुम्हारे भीतर भी "बड़ा बनना" चाहता है। यह मानवीय है। पर इस पत्र में यूहन्ना दिखाते हैं कि परमेश्वर की नज़र बिलकुल अलग जगह पर टिकी होती है। वे दियुत्रिफेस को याद नहीं रखते जिसने खुद को बड़ा बनाया। वे गयुस को याद रखते हैं जिसने चुपचाप अजनबियों के लिए दरवाज़ा खोला।
एक ईमानदार सवाल: तुम अपनी असली परीक्षा कहाँ देते हो? वहाँ जहाँ कोई देख रहा है, या वहाँ जहाँ कोई नहीं देख रहा? गयुस के लिए यह छोटी-सी बात थी, यात्रियों को खाना खिलाना, बिस्तर देना, विदा करते समय कुछ पैसे थमाना। ऐसा कोई काम जिसका कोई पोस्ट नहीं बनता। पर यूहन्ना इसे "सत्य पर चलना" कहते हैं।
और आयत 2 पर एक पल रुको। यूहन्ना गयुस के शरीर की भलाई के लिए भी प्रार्थना करते हैं। परमेश्वर तुम्हारी आत्मा में ही दिलचस्पी नहीं रखते। वे तुम्हारी नींद, तुम्हारी पढ़ाई, तुम्हारे रिश्ते, तुम्हारे शरीर, सब में दिलचस्पी रखते हैं। पूरा तुम।
Talk About It
तुम्हारे भीतर कहाँ-कहाँ "दियुत्रिफेस" जैसी कुछ आवाज़ें उठती हैं, जो चाहती हैं कि तुम दिखो, माने जाओ, बड़े लगो? उनके साथ ईमानदार होना कैसा लगता है?
*अगर कोई तुम्हारे जीवन को देखकर
3 यूहन्ना 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
3 यूहन्ना 1 किस विषय में है?
3 यूहन्ना 1 क्या कहता है?
3 यूहन्ना 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर 3 यूहन्ना 1 से क्या सीख सकते हैं?
3 यूहन्ना 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
गयुस ने जिन यात्रियों को अपने घर ठहराया, वे अजनबी थे। पर लौटकर उन्होंने कलीसिया के बीच कहा: "उन्होंने कलीसिया के सामने तेरे प्रेम की गवाही दी।" सोच, तेरे बारे में कौन ऐसी गवाही दे सकता है? और यूहन्ना यहीं नहीं रुकता, वह कहता है उन्हें आगे की यात्रा के लिए भी भेज, परमेश्वर के योग्य रीति से। प्रेम सिर्फ दरवाज़ा खोलना नहीं, आगे की राह का खर्च उठाना भी है।
मुझ प्राचीन की ओर से उस प्रिय गयुस के नाम, जिससे मैं सच्चा प्रेम रखता हूँ।" यूहन्ना अपना नाम तक नहीं लिखता, पर गयुस का नाम लिखता है। बूढ़ा प्रेरित एक साधारण विश्वासी को "प्रिय" कहकर पुकारता है। सोचो, क्या तुम्हारे जीवन में कोई ऐसा है जिसका नाम तुम परमेश्वर के सामने प्रेम से लेते हो? सच्चा प्रेम हमेशा किसी चेहरे का, किसी नाम का होता है।
वहाँ के मित्रों के नाम ले लेकर नमस्कार कह देना।" यूहन्ना पूरी कलीसिया को एक झुंड की तरह नहीं देखता। हर एक का नाम है, और वह चाहता है कि नाम लेकर ही अभिवादन पहुँचे। सोच, तेरी मंडली में कितने चेहरे तू पहचानता है पर नाम नहीं जानता? प्रेम भीड़ से नहीं, नाम से शुरू होता है।
यूहन्ना गयुस के लिए लिखता है, "हे प्रिय, मेरी यह प्रार्थना है, कि जैसे तू आत्मिक उन्नति कर रहा है, वैसे ही तू सब बातों में उन्नति करे, और स्वस्थ रहे।" गौर कर, यहाँ नापने का पैमाना आत्मा है, शरीर नहीं। गयुस की आत्मा इतनी स्वस्थ थी कि उसी के बराबर सेहत माँगना आशीष थी। तेरे लिए भी यही प्रार्थना हो, तो क्या माँगी जाएगी?
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