एस्तेर 9
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
एस्तेर 9 की व्याख्या
व्याख्या
यह अध्याय उस दिन की कहानी है जो असल में यहूदियों की मृत्यु का दिन होना था, पर बन गया उनके बचाव का दिन। हामान ने जो साजिश बुनी थी, उसका दिन आ चुका था, अदार महीने का तेरहवाँ दिन। पर हामान अब जीवित नहीं था। एस्तेर और मोर्दकै की वजह से राजा ने पहले ही आज्ञा बदल दी थी, और अब यहूदियों को अपनी रक्षा करने और अपने शत्रुओं से लड़ने की अनुमति मिल गई थी।
पद 1 से 5 बताते हैं कि जो दिन शत्रुओं ने यहूदियों को मिटाने के लिए चुना था, वही दिन उल्टा पड़ गया। यहूदी अपने-अपने शहरों में इकट्ठा हुए और जो उन्हें हानि पहुँचाना चाहते थे, उन पर हाथ चलाया। कोई उनका सामना न कर सका, क्योंकि मोर्दकै का भय और प्रतिष्ठा हर प्रांत में फैल गई थी। शूशन नगर में पाँच सौ पुरुष मारे गए, और हामान के दसों पुत्र भी मार दिए गए, जिनके नाम गिनकर लिखे गए हैं, जैसे किसी दस्तावेज़ में हर नाम दर्ज करना जरूरी हो। यह ध्यान देने योग्य है कि यहूदियों ने धन नहीं लूटा, बार-बार यह बात दोहराई गई है। यह बदला नहीं था लालच से भरा, यह आत्मरक्षा थी।
राजा एस्तेर से पूछता है कि उसे और क्या चाहिए, और एस्तेर एक दिन और माँगती है, ताकि शूशन में भी वही किया जा सके, और हामान के पुत्रों के शव खम्भों पर लटकाए जाएँ, सार्वजनिक रूप से, ताकि सब देखें कि दुष्टता का क्या परिणाम होता है। पूरे राज्य में पचहत्तर हजार शत्रु मारे गए। यह संख्या हमें चौंका सकती है, और चौंकना गलत नहीं है।
फिर कहानी का रंग बदलता है। तेरहवें दिन की लड़ाई के बाद, चौदहवें दिन विश्राम और भोज होता है। शूशन में, जहाँ लड़ाई एक दिन ज्यादा चली, पन्द्रहवें दिन आनंद मनाया जाता है। मोर्दकै इस घटना को हर पीढ़ी के लिए स्थायी रूप देता है, वह पत्र लिखता है कि यह दिन हर साल मनाया जाए, भोज के साथ, एक दूसरे को भोजन भेजकर, और कंगालों को दान देकर। यह पर्व पूरीम कहलाता है, हामान द्वारा डाले गए पूर यानी चिट्ठी के नाम से। और अंत में एस्तेर स्वयं भी अपने अधिकार से इस नियम को स्थिर करती है।
इसका अर्थ क्या है?
यह अध्याय हिंसा से भरा है, और इसे छिपाना बेईमानी होगी। पर ध्यान से पढ़ो, यह हिंसा किसने शुरू की। हामान ने चिट्ठी डाली कि पूरी यहूदी जाति को मिटा दिया जाए, स्त्री, बच्चे, बूढ़े, सब। यह एक योजनाबद्ध नरसंहार था। जो अध्याय 9 में हुआ, वह उस योजना का उलटा होना है, आत्मरक्षा, न्याय, नाश की योजना का नाश। बाइबल यहाँ यह नहीं दिखा रही कि हिंसा अच्छी चीज़ है। यह दिखा रही है कि जब बुराई सत्ता में बैठकर किसी जाति को मिटाने की ठान लेती है, तो परमेश्वर उसे अनुत्तरित नहीं छोड़ते।
ध्यान दो, पूरे अध्याय में परमेश्वर का नाम एक बार भी नहीं आता। पूरी एस्तेर की किताब में ऐसा ही है। फिर भी हर पन्ना परमेश्वर की उपस्थिति से भरा है, जो पर्दे के पीछे से इतिहास को मोड़ रहे हैं। यही इस किताब की खूबसूरती है, यह विश्वास कि परमेश्वर वहाँ भी काम करते हैं जहाँ उनका नाम नहीं लिखा।
समान सूत्र
पूरीम का पर्व शोक को आनंद में, विलाप को खुशी में बदलने का उत्सव है। यह वही पैटर्न है जो पूरी बाइबल में बार-बार दिखता है। मिस्र में गुलामी से मुक्ति, फसह का पर्व। और सबसे बड़ा उदाहरण, क्रूस। एक दिन जो मृत्यु और हार का दिन लगता था, बदल गया विजय के दिन में। यीशु मसीह के साथ भी यही हुआ। शत्रु ने सोचा कि उसने जीत लिया, पर तीसरे दिन कब्र खाली थी।
पूरीम हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर का न्याय कभी न कभी उलट देता है वह सब जो बुराई ने योजना बनाई थी। एस्तेर की किताब कहती है, चुपचाप। सुसमाचार कहता है, ऊँची आवाज़ में। दोनों एक ही सच बोलते हैं, कि बुराई का आखिरी शब्द नहीं होता।
तुम्हारे लिए
तुम्हारी ज़िंदगी में भी ऐसे दिन आ सकते हैं जो हार के दिन लगते हैं, जहाँ लगता है कि परिस्थितियाँ, लोग, या हालात तुम्हारे खिलाफ खड़े हैं। यह अध्याय तुमसे नहीं कहता कि सब अपने आप ठीक हो जाएगा। यह तुमसे कहता है कि परमेश्वर इतिहास के पर्दे के पीछे काम करते रहते हैं, चाहे उनका नाम कहीं दिखे या न दिखे। तुम्हारी प्रार्थना, तुम्हारा विश्वास, वह भी उस काम का हिस्सा बन सकता है, जैसे एस्तेर का साहस उस दिन का हिस्सा बना।
और एक बात पर सोचो, यहूदियों ने धन नहीं लूटा। जब तुम्हें मौका मिले किसी से बदला लेने का, किसी को नीचा दिखाने का जब तुम सही होते हो, तो क्या तुम रुक सकते हो? क्या न्याय और लालच के बीच फर्क करना तुम्हें आता है?
बात करें
अगर परमेश्वर का नाम इस अध्याय में एक बार भी नहीं आता, तो तुम्हारी अपनी ज़िंदगी में वे किन जगहों पर "छिपे हुए" काम कर रहे हैं, जहाँ तुमने अभी तक ध्यान नहीं दिया?
पूरीम में शोक आनंद में बदल गया। तुम्हारी ज़िंदगी का कौन सा दुख अब भी उस बदलाव का इंतज़ार कर रहा है?
साथ में प्रार्थना
प्रभु, हम मानते हैं कि आप उन जगहों में भी काम करते हैं जहाँ हमें आपका नाम दिखता नहीं। जब हमारी ज़िंदगी में हार का दिन लगे, हमें याद दिलाइए कि आपके पास आखिरी शब्द है, न बुराई के पास। हमें साहस दें एस्तेर जैसा, और दिल दें जो लालच से नहीं, न्याय से भरा हो। आमीन।
एस्तेर 9 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
एस्तेर 9 किस विषय में है?
एस्तेर 9 क्या कहता है?
एस्तेर 9 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर एस्तेर 9 से क्या सीख सकते हैं?
एस्तेर 9 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
शूशन के यहूदियों को एक दिन ज़्यादा लड़ना पड़ा, इसलिए उनका विश्राम भी एक दिन बाद आया। उन्होंने "विश्राम करके भोज और आनन्द का दिन ठहराया।" आनन्द लड़ाई के बीच नहीं, थमने के बाद आया। तुम्हारी लड़ाई शायद दूसरों से लंबी खिंच रही हो, पर तुम्हारा विश्राम रद्द नहीं हुआ, बस उसका दिन अलग है।
पर्मशता, अरीसै, अरीदै और वैजाता।" ऐसे नाम जिन्हें हम पढ़ते हुए फटाफट पार कर जाते हैं। पर सोचो, हामान ने पूरी जाति का नाम मिटाने की ठानी थी, और अंत में इतिहास में उसके ही बेटों के नाम बस इसी एक कारण से लिखे रह गए, कि वे गिर गए। नफरत जो विरासत में देते हैं, वह बच्चों तक पहुँचती है। तुम अपने पीछे क्या छोड़ रहे हो?
पूरीम का यह पर्व केवल एक जीत का उत्सव नहीं था। एस्तेर 9:31 में लिखा है कि उन्होंने "उपवास और विलाप" के दिनों को भी याद रखने की ठान ली। खुशी के बीच वे उन आँसुओं को नहीं भूले जो कभी बहे थे। तुम्हारे जीवन में भी शायद कोई ऐसा समय था जब तुम रोए थे। उसे मिटाओ मत। वही तो गवाही है कि परमेश्वर ने तुम्हें कहाँ से निकाला।
छोटे बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?
हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और प्राथमिक आयु (7-12) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।
बच्चों की बाइबल टूल में खोलें