3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

एस्तेर 9

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

कहानी क्या कहती है

क्या तुम एक कहानी सुनोगे? एक बहुत पुरानी कहानी।

बहुत समय पहले एक बड़ा देश था। उस देश में परमेश्वर के लोग रहते थे। उनका नाम था: यहूदी।

पर एक बुरा आदमी था। उसका नाम था हामान। हामान यहूदियों से नफरत करता था। वह उन्हें मार देना चाहता था। सबको! छोटे बच्चों को भी।

यहूदी बहुत डर गए थे। बहुत, बहुत डर गए थे।

पर परमेश्वर ने देखा। परमेश्वर ने सब देखा।

रानी एस्तेर वहाँ थी। और मोर्दकै भी वहाँ था। वे यहूदी थे। परमेश्वर ने उनका इस्तेमाल किया। हामान की बुरी योजना उलट गई।

और फिर एक दिन आया। वह दिन, जब बुरे लोग यहूदियों को मारना चाहते थे। पर देखो! यहूदी बच गए। परमेश्वर ने उन्हें बचाया।

इसका क्या मतलब है

यहूदी बहुत खुश हुए। बहुत, बहुत खुश।

पहले वे रो रहे थे। अब वे हँस रहे थे। पहले वे डर रहे थे। अब वे नाच रहे थे।

मोर्दकै ने कहा, "हर साल हम याद करेंगे! हम एक बड़ा भोज करेंगे। हम मीठी चीज़ें खाएँगे। हम एक दूसरे को उपहार देंगे। और गरीबों को भी देंगे।"

उस दिन का एक नाम रखा गया: पूरीम। यह एक खुशी का दिन है। बहुत खुशी का दिन।

बड़ी कहानी

क्या तुम जानते हो? परमेश्वर हमेशा अपने बच्चों को देखते हैं।

जब यहूदी डर रहे थे, परमेश्वर वहाँ थे। जब हामान बुरी योजना बना रहा था, परमेश्वर वहाँ थे। परमेश्वर ने अपने लोगों को नहीं भूला।

और बहुत सालों बाद, परमेश्वर ने एक और बच्चा भेजा। उसका नाम था यीशु। यीशु भी यहूदी थे। यीशु हम सबको बचाने आए। हमेशा के लिए।

देखो, परमेश्वर की कहानी कितनी बड़ी है।

तुम्हारे लिए

क्या तुम कभी डर जाते हो? रात में? या जब अंधेरा होता है?

सुनो। परमेश्वर तुम्हें देखते हैं। हर पल। जब तुम सोते हो, तब भी। जब तुम खेलते हो, तब भी।

परमेश्वर एस्तेर के साथ थे। परमेश्वर मोर्दकै के साथ थे। और परमेश्वर तुम्हारे साथ भी हैं।

और जब कुछ अच्छा होता है, तो हम क्या कर सकते हैं? हम खुशी मना सकते हैं! हम केक खा सकते हैं। हम गा सकते हैं। और हम दूसरे बच्चों को भी कुछ दे सकते हैं। जैसे यहूदियों ने किया।

बात करो

जब तुम डरते हो, तब तुम क्या करते हो?

तुम किसे एक उपहार देना चाहोगे?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर,

आप बहुत अच्छे हैं। आप एस्तेर को देख रहे थे। आप मुझे भी देख रहे हैं।

जब मैं डरता हूँ, आप पास हैं। धन्यवाद।

आमीन।

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एस्तेर 9 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

एस्तेर 9 किस विषय में है?
बहुत समय पहले एक बड़ा देश था। उस देश में परमेश्वर के लोग रहते थे। उनका नाम था: यहूदी।
एस्तेर 9 क्या कहता है?
और फिर एक दिन आया। वह दिन, जब बुरे लोग यहूदियों को मारना चाहते थे। पर देखो! यहूदी बच गए। परमेश्वर ने उन्हें बचाया।
एस्तेर 9 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
उस दिन का एक नाम रखा गया: पूरीम। यह एक खुशी का दिन है। बहुत खुशी का दिन।
नन्हे बच्चे एस्तेर 9 से क्या सीख सकते हैं?
क्या तुम कभी डर जाते हो? रात में? या जब अंधेरा होता है?
एस्तेर 9 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
और जब कुछ अच्छा होता है, तो हम क्या कर सकते हैं? हम खुशी मना सकते हैं! हम केक खा सकते हैं। हम गा सकते हैं। और हम दूसरे बच्चों को भी कुछ दे सकते हैं। जैसे यहूदियों ने किया।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 18

शूशन के यहूदियों को एक दिन ज़्यादा लड़ना पड़ा, इसलिए उनका विश्राम भी एक दिन बाद आया। उन्होंने "विश्राम करके भोज और आनन्द का दिन ठहराया।" आनन्द लड़ाई के बीच नहीं, थमने के बाद आया। तुम्हारी लड़ाई शायद दूसरों से लंबी खिंच रही हो, पर तुम्हारा विश्राम रद्द नहीं हुआ, बस उसका दिन अलग है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

पर्मशता, अरीसै, अरीदै और वैजाता।" ऐसे नाम जिन्हें हम पढ़ते हुए फटाफट पार कर जाते हैं। पर सोचो, हामान ने पूरी जाति का नाम मिटाने की ठानी थी, और अंत में इतिहास में उसके ही बेटों के नाम बस इसी एक कारण से लिखे रह गए, कि वे गिर गए। नफरत जो विरासत में देते हैं, वह बच्चों तक पहुँचती है। तुम अपने पीछे क्या छोड़ रहे हो?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 31

पूरीम का यह पर्व केवल एक जीत का उत्सव नहीं था। एस्तेर 9:31 में लिखा है कि उन्होंने "उपवास और विलाप" के दिनों को भी याद रखने की ठान ली। खुशी के बीच वे उन आँसुओं को नहीं भूले जो कभी बहे थे। तुम्हारे जीवन में भी शायद कोई ऐसा समय था जब तुम रोए थे। उसे मिटाओ मत। वही तो गवाही है कि परमेश्वर ने तुम्हें कहाँ से निकाला।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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