फिलिप्पियों 2
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
पौलुस यह पत्र जेल से लिख रहे हैं, फिर भी उसमें कड़वाहट नहीं, बल्कि गहरी चिंता है कि फिलिप्पी की कलीसिया एक बनी रहे। वे कहते हैं, अगर मसीह में तुम्हें सच में प्रोत्साहन मिला है, प्रेम से ढाढ़स मिला है, अगर आत्मा की सहभागिता, करुणा और दया कोई हकीकत है, तो एक काम करो, एक मन रहो, एक ही प्रेम और एक ही मनसा रखो। यह कोई नरम सलाह नहीं है, यह एक आग्रह है।
फिर पौलुस उस चीज़ पर उंगली रखते हैं जो हर समूह को अंदर से तोड़ देती है, स्वार्थ और मिथ्यागर्व। वे कहते हैं, दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो, अपने ही हित की नहीं, दूसरों की भी चिंता करो। और फिर वे इसका आधार बताते हैं, यीशु मसीह का स्वभाव।
यहाँ से पौलुस एक ऐसा गीत जैसा वर्णन देते हैं जो पूरी बाइबल में सबसे गहरे हिस्सों में गिना जाता है। यीशु, जो परमेश्वर के स्वरूप में थे, उन्होंने परमेश्वर के तुल्य होने को पकड़े रखने की चीज़ नहीं समझा। उन्होंने अपने आप को शून्य किया, दास का रूप लिया, मनुष्य बने, और अपने आप को इतना दीन किया कि क्रूस की मृत्यु तक आज्ञाकारी रहे। इसके बाद परमेश्वर ने उन्हें अति महान किया और वह नाम दिया जो हर नाम से ऊँचा है, ताकि हर घुटना उनके सामने झुके और हर जीभ मान ले कि यीशु मसीह ही प्रभु हैं।
आगे पौलुस व्यावहारिक हो जाते हैं। वे कहते हैं, डरते और काँपते हुए अपने उद्धार का काम पूरा करते जाओ, क्योंकि परमेश्वर ही तुम्हारे मन में इच्छा और काम दोनों डालते हैं। बिना कुड़कुड़ाए, बिना विवाद के जीना ताकि वे इस टेढ़े संसार में जलते दीपकों जैसे दिखें। अंत में पौलुस दो लोगों का जिक्र करते हैं, तीमुथियुस जो सच में उनकी चिंता करता है, और इपफ्रुदीतुस जो बीमार होकर मरने के करीब पहुँच गया था क्योंकि उसने मसीह के काम के लिए अपनी जान जोखिम में डाली।
What Does This Mean?
यह अध्याय सीधे तुम्हारी उस दुनिया से टकराता है जहाँ तुलना करना, अपने आप को दूसरों से ऊपर दिखाना, और अपनी छवि बचाना लगभग एक रिफ्लेक्स बन गया है। पौलुस कोई नैतिक उपदेश नहीं दे रहे, वे यीशु के अस्तित्व की गहराई से बात कर रहे हैं। यीशु के पास सब कुछ था, पूरी महिमा, पूरा अधिकार, और उन्होंने वह सब पकड़े रखने से इनकार किया। यह ताकत की कमी नहीं थी, यह असली ताकत थी, जो खुद को खाली कर सकती है क्योंकि उसे किसी को कुछ साबित नहीं करना।
यही वह जगह है जहाँ यह अध्याय गहरा हो जाता है। दीनता कोई कमजोरी नहीं है जो तुम्हें दबा देती है, यह वह आज़ादी है जो आती है जब तुम्हें अपनी पहचान साबित करने की ज़रूरत नहीं रहती।
The Common Thread
यह पूरा अध्याय यीशु की कहानी है, ऊपर से नीचे और फिर नीचे से ऊपर। महिमा से खालीपन तक, खालीपन से क्रूस तक, क्रूस से फिर सबसे ऊँचे नाम तक। यह वह पैटर्न है जो पूरी बाइबल में बार बार दिखता है, परमेश्वर नीचे झुकते हैं ताकि उठा सकें। यही सुसमाचार का दिल है, कोई ताकत का प्रदर्शन नहीं बल्कि प्रेम जो खुद को त्याग देता है, और फिर परमेश्वर उसी को महिमा देते हैं। पौलुस, तीमुथियुस, इपफ्रुदीतुस, इन सबकी कहानियाँ इसी बड़ी कहानी की छोटी झलक हैं, ऐसे लोग जिन्होंने अपने हित से पहले मसीह के काम को रखा।
For You
तुम शायद हर दिन उस दबाव को महसूस करते हो कि खुद को साबित करना है, बेहतर दिखना है, आगे रहना है। यह अध्याय तुमसे झूठे विनम्रता का दिखावा करने को नहीं कहता, यह तुमसे पूछता है कि तुम्हारी असली सुरक्षा कहाँ है। अगर तुम्हें अपनी पहचान हर बार लाइक्स से, नंबरों से, तुलना से खींचनी पड़ती है, तो दूसरों के हित की चिंता करना असंभव लगेगा, क्योंकि तुम्हारे पास देने के लिए कुछ बचता ही नहीं।
लेकिन अगर तुम्हारी पहचान यीशु में सुरक्षित है, जिसने खुद को खाली करके भी कुछ नहीं खोया, तो तुम भी वह जोखिम उठा सकते हो कि किसी और की भलाई को अपनी छवि से ऊपर रखो। यह छोटी बात नहीं है, यह हर रिश्ते को बदल देती है, दोस्ती को, घर को, हर उस जगह को जहाँ तुम अपने बारे में कम और दूसरों के बारे में ज्यादा सोच सकते हो।
Talk About It
यीशु ने अपने आप को शून्य किया, अपना अधिकार पकड़े रखने से इनकार किया। तुम्हारी ज़िंदगी में वह कौन सी चीज़ है जिसे पकड़े रखना तुम्हें दूसरों से प्रेम करने से रोकता है?
पौलुस कहते हैं डरते और काँपते हुए अपने उद्धार का काम पूरा करो, फिर तुरंत कहते हैं कि परमेश्वर ही तुम्हारे मन में इच्छा और काम डालते हैं। इन दोनों बातों में तुम्हें कोई विरोधाभास लगता है, या यह साथ चल सकता है?
Praying Together
प्रभु यीशु, आपने अपनी महिमा को पकड़े नहीं रखा, बल्कि हमारे लिए खुद को खाली कर दिया। मुझे सिखाइए कि मेरी पहचान आपमें सुरक्षित है, ताकि मैं डर के बिना दूसरों के हित की चिंता कर सकूँ। मेरे मन में वह इच्छा और वह काम डालिए जो आपकी सुइच्छा के अनुसार हो। आमीन।
फिलिप्पियों 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
फिलिप्पियों 2 किस विषय में है?
फिलिप्पियों 2 क्या कहता है?
फिलिप्पियों 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर फिलिप्पियों 2 से क्या सीख सकते हैं?
फिलिप्पियों 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।" ध्यान दो, यह "इस कारण" कहाँ से आता है। क्रूस से। नीचे उतरने से। जिस रास्ते को दुनिया हार कहती है, परमेश्वर उसी को ऊँचा उठाता है।
तो जहाँ तुम आज झुक रहे हो, और किसी को दिख भी नहीं रहा, वहाँ परमेश्वर की नज़र है। वह भूलता नहीं।
बिना कुड़कुड़ाए और बिना विवाद के सब काम करो", और उसके तुरन्त बाद पौलुस कहता है कि तुम "जगत में जलते दीपकों के समान दिखाई देते हो"। चमक किसी बड़े काम से नहीं, शिकायत छोड़ने से शुरू होती है। जिस दिन तेरा मन बड़बड़ाना बंद करता है, उसी दिन तेरे घर का अंधेरा थोड़ा घटता है। टेढ़े ज़माने को भाषण नहीं, एक शांत दीपक चाहिए।
जिसने परमेश्वर के स्वरूप में होकर भी, परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।" मसीह के पास सब कुछ था, फिर भी उन्होंने कुछ भी कसकर नहीं पकड़ा। और हम? एक छोटा सा पद, एक तारीफ, एक अधिकार, इन्हें हम मुट्ठी में भींचे रहते हैं, इस डर से कि छूट गया तो हम कुछ भी नहीं रहेंगे। आज अपनी मुट्ठी देखिए। उसमें क्या है जिसे छोड़ना आपको मौत जैसा लगता है?
पौलुस जेल में है, और वह इपफ्रुदीतुस को केवल "तुम्हारा भेजा हुआ" कहकर नहीं छोड़ता। वह उसे "मेरा भाई, और सहकर्मी, और संगी योद्धा" कहता है। एक साधारण आदमी, जिसका नाम शायद किसी सूची में न होता, पौलुस उसे तीन बार सम्मान देता है।
तुम्हारे साथ कौन चुपचाप सेवा कर रहा है, जिसका नाम तुमने कभी ऊँची आवाज़ में नहीं कहा?
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