फिलिप्पियों 2
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
पौलुस फिलिप्पी की कलीसिया को लिख रहा है। वह उनसे प्यार करता है, और वह चाहता है कि वे आपस में एक हों। इसलिए वह लिखता है कि यदि मसीह में प्रोत्साहन है, प्रेम से ढाढ़स है, तो एक मन रहो, एक ही प्रेम रखो। वह कहता है कि स्वार्थ या घमण्ड के लिए कुछ मत करो, बल्कि दीनता से दूसरों को अपने से अच्छा समझो।
फिर पौलुस यीशु मसीह का उदाहरण देता है, और यह हिस्सा (पद 6 से 11) बाइबल के सबसे सुंदर हिस्सों में से एक है। यीशु परमेश्वर के स्वरूप में थे, यानी वे पूरी तरह परमेश्वर थे। फिर भी उन्होंने इस बात को पकड़कर नहीं रखा। उन्होंने अपने आपको शून्य कर दिया, दास का रूप धारण किया, और मनुष्य बन गए। उन्होंने अपने आपको दीन किया और मृत्यु तक, यहाँ तक कि क्रूस की मृत्यु तक आज्ञाकारी रहे। लेकिन कहानी वहाँ खत्म नहीं होती। परमेश्वर ने उन्हें अति महान किया, उन्हें सबसे श्रेष्ठ नाम दिया, ताकि हर घुटना उनके सामने झुके और हर जीभ मान ले कि यीशु मसीह ही प्रभु हैं।
इसके बाद पौलुस फिलिप्पियों को कहता है कि वे डरते और काँपते हुए अपने उद्धार का काम पूरा करें, क्योंकि परमेश्वर ही उनके मन में इच्छा और काम दोनों डालते हैं। वे बिना कुड़कुड़ाए काम करें, ताकि वे अंधेरी दुनिया में जलते दीपकों के समान दिखें। आखिर में पौलुस अपने साथियों तीमुथियुस और इपफ्रुदीतुस के बारे में बताता है, जो सच्चे दिल से दूसरों की चिंता करते हैं।
What Does This Mean?
यह अध्याय हमें दिखाता है कि परमेश्वर का बेटा होना ताकत दिखाने की बात नहीं थी, बल्कि नीचे उतरने की बात थी। यीशु के पास हर अधिकार था कि वे ऊँचे बने रहें, लेकिन उन्होंने अपने आपको खाली कर दिया। यह शब्द भारी है, क्योंकि इसका मतलब है कि उन्होंने अपनी महिमा को छिपाया, अपनी शक्ति को त्यागा नहीं पर उसका उपयोग अपने लिए नहीं किया। सोचो, यह कितना अजीब लगता है, क्या परमेश्वर सच में इतना नीचे आ सकते हैं? पौलुस कहता है, हाँ, बिल्कुल। और यही सच्चा प्रेम है, जो अपने हक को छोड़कर दूसरे की भलाई देखता है।
The Common Thread
यह हिस्सा पूरी बाइबल की सबसे बड़ी कहानी को छोटे रूप में बताता है। परमेश्वर ने वादा किया था कि वे अपने लोगों को छुड़ाएँगे, और यीशु मसीह में यह वादा पूरा हुआ। लेकिन रास्ता ऊपर से नीचे की तरफ गया, महिमा से क्रूस तक, और फिर फिर से महिमा तक। यही सुसमाचार है, यानी अच्छी खबर, कि परमेश्वर स्वयं नीचे आए ताकि हम ऊपर उठाए जा सकें। जब हर घुटना यीशु के सामने झुकेगा, तब वह दिन होगा जब सारी सृष्टि मान लेगी कि वे ही प्रभु हैं। यह अभी पूरी तरह नहीं हुआ है, पर यह निश्चित है, क्योंकि परमेश्वर ने खुद यह कहा है।
For You
तुम्हारे स्कूल में, तुम्हारे घर में, तुम्हारे दोस्तों के बीच रोज़ ऐसे मौके आते हैं जब तुम्हें चुनना पड़ता है, अपना हक पहले रखूँ या दूसरे की भलाई देखूँ। यीशु ने अपना हक छोड़ा, हालाँकि उनके पास सबसे बड़ा हक था। तुम भी सोच सकते हो, क्या मैं आज किसी को अपने से पहले रख सकता हूँ, बिना यह सोचे कि मुझे इसका बदला मिलेगा या नहीं। इसका मतलब यह नहीं कि तुम अपने आपको बेकार समझो, बल्कि यह कि तुम दूसरों को सच में देखो और उनकी परवाह करो। और जब यह मुश्किल लगे, याद रखो कि परमेश्वर ही तुम्हारे मन में यह इच्छा और शक्ति डालते हैं।
Talk About It
यीशु ने अपने आपको शून्य किया, ऐसा शब्द इस्तेमाल हुआ है। तुम्हारे अनुसार इसका क्या मतलब है, और क्या यह मुश्किल लगता है कि परमेश्वर ऐसा कर सकते हैं?
पौलुस कहता है कि हमें डरते और काँपते हुए अपना उद्धार पूरा करना चाहिए, फिर भी यह परमेश्वर का काम है। तुम्हें क्या लगता है, यह दोनों बातें एक साथ कैसे सच हो सकती हैं?
Praying Together
प्रभु यीशु, आप परमेश्वर होकर भी हमारे लिए नीचे आए। धन्यवाद कि आपने अपना हक छोड़ा और हमारे लिए क्रूस तक आज्ञाकारी रहे। हमें ऐसा दिल दीजिए जो दूसरों की परवाह करे, अपने बारे में कम सोचे। हमारी मदद कीजिए कि हम बिना कुड़कुड़ाए, खुशी से आपकी सेवा करें। आमीन।
फिलिप्पियों 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
फिलिप्पियों 2 किस विषय में है?
फिलिप्पियों 2 क्या कहता है?
फिलिप्पियों 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे फिलिप्पियों 2 से क्या सीख सकते हैं?
फिलिप्पियों 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस जंजीरों में है, फिर भी उसकी चिंता अपनी नहीं: "मुझे प्रभु यीशु में आशा है कि मैं तीमुथियुस को तुम्हारे पास शीघ्र भेजूँगा, ताकि तुम्हारी दशा सुनकर मुझे शान्ति मिले।" कैदखाने में बैठा आदमी दूसरों का हाल जानकर शांत होता है। सोचो, तुम्हारे मन की शांति किस बात पर टिकी है? अपनी सुविधा पर, या इस पर कि तुम्हारे अपने मसीह में मजबूत खड़े हैं?
विरोध या झूठी बड़ाई के लिए कुछ न करो, पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।" पौलुस यह जेल से लिख रहा है, और मसीह के झुकने की बात कहने से पहले कह रहा है। ध्यान दे, वह कहता है "समझो", यानी यह मन की बात है, दिखावे की नहीं। आज जिस व्यक्ति से तुलना करके तुम जलते हो, उसी को मन ही मन अपने से अच्छा समझकर देखो। क्या तुम्हारा दिल इसके लिए तैयार है?
इपफ्रुदीतुस बीमार पड़ा, मरते मरते बचा, और खाली हाथ लौटा नहीं, पर शायद लोग सोचते कि वह जल्दी लौट आया। पौलुस पहले ही कह देता है, "इसलिए तुम प्रभु में उससे बहुत आनन्द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करो।"
जो चुपचाप तेरे लिए घिसते रहे, क्या तूने कभी उन्हें आनन्द से अपनाया? या बस उनसे काम लिया और आगे बढ़ गया?
इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।" ध्यान दो, यह "इस कारण" कहाँ से आता है। क्रूस से। नीचे उतरने से। जिस रास्ते को दुनिया हार कहती है, परमेश्वर उसी को ऊँचा उठाता है।
तो जहाँ तुम आज झुक रहे हो, और किसी को दिख भी नहीं रहा, वहाँ परमेश्वर की नज़र है। वह भूलता नहीं।
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