तीतुस 1
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
पौलुस अपने साथी तीतुस को लिखते हैं, जिसे उन्होंने क्रेते द्वीप पर छोड़ा था ताकि वह वहाँ की मंडलियों में जो बचा है उसे सुधारे और नगर-नगर प्राचीन नियुक्त करे। यह पत्र किसी दूर के धर्मशास्त्र की बात नहीं है, यह एक व्यावहारिक निर्देश है कि एक नई, अभी बन रही मंडली में नेतृत्व कैसा हो। पौलुस साफ कहते हैं कि प्राचीन निर्दोष हो, एक ही पत्नी का पति हो, जिसके बच्चे विश्वासी हों, जो हठी, क्रोधी, पियक्कड़ या नीच कमाई का लोभी न हो। इसके बदले वह पहुनाई करनेवाला, भलाई का चाहनेवाला, संयमी और न्यायी हो, जो खरी शिक्षा से उपदेश दे सके और विवादियों का मुँह बन्द कर सके।
फिर पौलुस सीधे मुद्दे पर आते हैं, क्रेते में झूठे शिक्षक हैं, विशेष रूप से खतनावालों में से, जो नीच कमाई के लिए झूठी बातें सिखाकर पूरे घरों को बिगाड़ रहे हैं। पौलुस यहाँ एक कड़वी बात उठाते हैं, क्रेते के अपने ही एक कवि का कथन, "क्रेती लोग सदा झूठे, दुष्ट पशु और आलसी पेटू होते हैं।" पौलुस इस बात को झुठलाते नहीं, वे कहते हैं यह गवाही सच है। इसलिए तीतुस को कड़ाई से चेतावनी देने को कहा जाता है, ताकि वे विश्वास में पक्के हों, यहूदी कथा-कहानियों और मनुष्यों की झूठी आज्ञाओं में न भटकें। अंत में पौलुस शुद्धता की बात करते हैं, शुद्ध लोगों के लिए सब वस्तुएँ शुद्ध हैं, पर जिनकी बुद्धि और विवेक ही अशुद्ध हो गए हैं, उनके लिए कुछ भी शुद्ध नहीं रहता। वे कहते हैं कि वे परमेश्वर को जानते हैं, पर अपने कामों से उसका इन्कार करते हैं।
What Does This Mean?
यह अध्याय बताता है कि विश्वास केवल शब्दों की बात नहीं है, यह जीवन में दिखता है या नहीं दिखता है। पौलुस किसी परफेक्ट इंसान की मांग नहीं कर रहे, वे स्थिरता और सच्चाई की मांग कर रहे हैं, यानी कि आदमी का चरित्र और उसका दावा एक दूसरे से मेल खाएँ। यही बात पूरे अध्याय की धुरी है। जो लोग कहते हैं "हम परमेश्वर को जानते हैं" पर अपने कामों से उसे नकारते हैं, वे सबसे खतरनाक हैं, क्योंकि वे धोखा नहीं देते, वे धोखे में जीते हैं।
पौलुस का अपने ही समुदाय के बारे में इतनी कठोर बात कहना भी ध्यान देने लायक है। वे किसी दूसरे को दोष नहीं दे रहे, वे क्रेते के लोगों की अपनी सांस्कृतिक कमजोरी को खुलेआम स्वीकार करते हैं। यह ईमानदारी है, न कि निंदा। सच्चाई का सामना करना, चाहे वह अपने बारे में हो या अपने समाज के बारे में, विश्वास की नींव है, न कि उसकी दुश्मन।
The Common Thread
यह पूरा अध्याय एक बड़ी आशा पर टिका है, जिसका उल्लेख शुरुआत में ही होता है, "अनन्त जीवन की आशा, जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने जो झूठ बोल नहीं सकता सनातन से की है।" पौलुस, तीतुस, प्राचीन, सब कुछ इसी एक बात के इर्द-गिर्द है, परमेश्वर ने वादा किया, और वह वादा ठीक समय पर मसीह यीशु में, और उस प्रचार में जो पौलुस को सौंपा गया, प्रगट हुआ। यह पत्र किसी इंसानी नियमावली से शुरू नहीं होता, यह परमेश्वर की सच्चाई और उनकी वफादारी से शुरू होता है।
प्राचीनों से जो शुद्धता और खरी शिक्षा की मांग होती है, वह इसलिए है क्योंकि वे परमेश्वर के भण्डारी हैं, उनके घर का प्रबंध उनके हाथ में है। और जो बात परमेश्वर की सच्चाई को नहीं जानने वालों के बारे में कही गई है, कि उनकी बुद्धि और विवेक अशुद्ध हैं, वह अंततः इस बात की ओर इशारा करती है कि सच्ची शुद्धता बाहरी नियमों से नहीं, हृदय की स्थिति से आती है। यही तो पूरा सुसमाचार है, यीशु मसीह ने हमें बाहर से साफ नहीं किया, उन्होंने भीतर से बदला।
For You
तुम्हारी उम्र में यह अध्याय एक कठिन सवाल पूछता है, तुम्हारी जिंदगी और तुम्हारा दावा कितना मेल खाता है। सोशल मीडिया पर विश्वास दिखाना आसान है, एक पोस्ट, एक कविता, एक "God is good" लिख देना। पर पौलुस पूछते हैं, क्या तुम्हारे काम तुम्हारे दावे को झुठलाते हैं। यह किसी परफेक्शन की मांग नहीं है, यह ईमानदारी की मांग है।
दूसरी बात, पौलुस झूठे शिक्षकों से चौकन्ना रहने को कहते हैं। तुम्हारे आस-पास भी बहुत आवाज़ें हैं, इंटरनेट पर, स्कूल में, कहीं भी, जो सच्चाई का दावा करती हैं पर तुम्हें भटका देती हैं। सच को पहचानने की समझ अपने आप नहीं आती, यह मसीह के वचन में जड़ें जमाने से आती है। और अंत में, जब तुम अपने समाज या अपने आप में कोई सच्ची कमजोरी देखो, तो उसे झुठलाने की जरूरत नहीं है। पौलुस ने अपने ही लोगों की सच्ची कमजोरी को स्वीकार किया, और फिर भी उम्मीद नहीं छोड़ी। सच्चाई को स्वीकार करना ही बदलाव की पहली सीढ़ी है।
Talk About It
क्या तुम्हारे जीवन में कोई ऐसा क्षेत्र है जहाँ तुम्हारा दावा और तुम्हारा व्यवहार एक दूसरे से मेल नहीं खाते?
पौलुस ने अपने ही समुदाय की सच्ची कमजोरी को खुलेआम स्वीकार किया। क्या तुम अपने बारे में या अपने समाज के बारे में कोई सच्चाई ऐसी ही खुलेपन से स्वीकार कर सकते हो?
Praying Together
प्रभु, आप वे परमेश्वर हैं जो झूठ नहीं बोल सकते, और आपका वादा सच निकलता है। हमारी बुद्धि और विवेक को शुद्ध करें, ताकि हमारा जीवन हमारे दावों से मेल खाए। हमें सच्चाई पहचानने की समझ दें, और हमें उस भरोसे में स्थिर रखें जो यीशु मसीह में है। आमीन।
तीतुस 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
तीतुस 1 किस विषय में है?
तीतुस 1 क्या कहता है?
तीतुस 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर तीतुस 1 से क्या सीख सकते हैं?
तीतुस 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
और यहूदियों की कथा कहानियों और उन मनुष्यों की आज्ञाओं पर मन न लगाएँ, जो सत्य से भटक जाते हैं।" गौर कीजिए, पौलुस यह नहीं कहता कि इन बातों से लड़ो, वह कहता है मन मत लगाओ। जिस पर हम ध्यान देते हैं, धीरे धीरे वही हमें आकार देता है। कहानियाँ सुनने में मीठी लगती हैं, नियम पवित्र दिखते हैं, पर दोनों मसीह की जगह ले सकते हैं। आज आपका मन सबसे ज़्यादा किस बात पर टिका है?
पौलुस तीतुस को "मेरा सच्चा पुत्र" कहता है, पर खून का रिश्ता नहीं था। रिश्ता बना "विश्वास की सहभागिता" से। कठिन क्रेते द्वीप पर अकेले छोड़े गए इस जवान को पत्र की पहली पंक्ति में ही पिता का प्यार मिलता है।
सोच, तेरे विश्वास में तुझे किसने जन्म दिया? और तू किसे अपना बेटा कहकर हौसला दे सकता है?
पौलुस तीतुस से कहता है कि कड़ी डाँट दे, पर उसका मकसद बताता है: "कि वे विश्वास में पक्के हो जाएँ।" डाँट का लक्ष्य किसी को गिराना नहीं, चंगा करना था। सोच, जिस व्यक्ति की सख़्त बात तुझे आज चुभ रही है, कहीं वह तुझे तोड़ने नहीं, तेरे विश्वास को सीधा करने के लिए कही गई हो? और तू जब सुधारता है, तेरे मन में यही चाह होती है या बस जीतने की?
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