7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

तीतुस 1

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

तीतुस 1 की व्याख्या

The Explanation

पौलुस एक बूढ़ा सिपाही था, परमेश्वर का सिपाही। उसने एक द्वीप पर एक शहर छोड़ा था, जिसका नाम क्रेते था। वहाँ उसने अपने बेटे जैसे मित्र तीतुस को काम पर छोड़ दिया। कैसा काम?

तीतुस को हर शहर में ऐसे अगुवे ढूँढ़ने थे, जो कलीसिया की देखभाल कर सकें। पर पौलुस ने कहा, हर कोई अगुवा नहीं बन सकता। अगुवे को ईमानदार होना चाहिए, गुस्सैल नहीं, शराबी नहीं, लड़ाकू नहीं, लालची नहीं। उसे मेहमाननवाज़ होना चाहिए, भला, बुद्धिमान, और सच्चाई पर मज़बूती से खड़ा रहनेवाला।

क्यों इतनी सख्त शर्तें? क्योंकि क्रेते में कुछ लोग थे, जो झूठी बातें सिखा रहे थे। वे पैसे के लिए झूठ बोलते थे, और पूरे घरों को बिगाड़ देते थे। पौलुस ने साहस से एक कहावत भी दोहराई, जो क्रेते के अपने एक भविष्यवक्ता ने कही थी: "क्रेती लोग सदा झूठे, दुष्ट पशु और आलसी पेटू होते हैं।" कड़वी बात थी, पर पौलुस ने कहा यह सच है।

इसलिए तीतुस को चेतावनी देनी थी, ताकि लोग सच्चे विश्वास में मज़बूत हो जाएँ, कहानियों और झूठी शिक्षाओं के पीछे न भटकें।

What Does This Mean?

सोचो, एक किला बनाना है। अगर दीवार बनानेवाला मज़दूर खुद कमज़ोर और बेईमान हो, तो दीवार गिर जाएगी। कलीसिया भी एक किले जैसी है। उसके अगुवे मज़बूत, सच्चे और ईमानदार होने चाहिए, नहीं तो झूठे शिक्षक अंदर घुस आएँगे और सबको भरमा देंगे।

पौलुस डरा नहीं था सच बोलने से। उसने साफ़ कहा, कुछ लोग झूठे हैं, और उनका मुँह बंद करना ज़रूरी है। यह कोई क्रूरता नहीं थी, यह प्रेम था, भेड़ों की रक्षा करने का प्रेम।

The Common Thread

पौलुस की पूरी बात एक बड़ी आशा पर टिकी है: अनंत जीवन की आशा। परमेश्वर ने यह वादा बहुत पहले किया था, और परमेश्वर कभी झूठ नहीं बोलते। यह याद रखो, यह पूरी कहानी की जड़ है।

यीशु मसीह हमारे उद्धारकर्ता हैं। पौलुस खुद परमेश्वर का दास और यीशु मसीह का प्रेरित था, भेजा हुआ एक संदेशवाहक। पूरी बाइबल एक ही कहानी कहती है, परमेश्वर सच बोलते हैं, और वे अपने वचन पर सदा खरे उतरते हैं। इसलिए झूठे शिक्षकों के सामने पौलुस इतना मज़बूत खड़ा हो सका, क्योंकि उसके पीछे एक सच्चा परमेश्वर था।

For You

तुम भी कभी ऐसी बातें सुनोगे, जो सच जैसी लगती हैं, पर सच नहीं होतीं। शायद कोई दोस्त कहे, "झूठ बोलना ठीक है, अगर कोई पकड़े नहीं।" तब याद रखना, परमेश्वर झूठ नहीं बोल सकते, और उनके बच्चों को भी सच बोलना सीखना है।

आज तुम एक छोटा काम कर सकते हो। जब तुम्हें पता चले कि कोई बात सच नहीं है, तो चुप मत रहो, हिम्मत से सच बोलो। और अपने घर में, अपनी कलीसिया में, ऐसे लोगों के लिए प्रार्थना करो जो सिखाते हैं, कि परमेश्वर उन्हें सच्चा और ईमानदार बनाए रखें।

Talk About It

अगर तुम्हारा कोई दोस्त झूठी बात सिखाए, तो तुम क्या करोगे?

तुम्हें कैसे पता चलता है कि कोई बात सच है या झूठ?

Praying Together

प्रिय परमेश्वर, आप कभी झूठ नहीं बोलते, आप हमेशा सच्चे हैं। हमें भी सच बोलने की हिम्मत दीजिए, चाहे कोई और कुछ भी कहे। हमारी कलीसिया के अगुवों को मज़बूत और ईमानदार बनाइए। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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तीतुस 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

तीतुस 1 किस विषय में है?
पौलुस एक बूढ़ा सिपाही था, परमेश्वर का सिपाही। उसने एक द्वीप पर एक शहर छोड़ा था, जिसका नाम क्रेते था। वहाँ उसने अपने बेटे जैसे मित्र तीतुस को काम पर छोड़ दिया। कैसा काम?
तीतुस 1 क्या कहता है?
क्यों इतनी सख्त शर्तें? क्योंकि क्रेते में कुछ लोग थे, जो झूठी बातें सिखा रहे थे। वे पैसे के लिए झूठ बोलते थे, और पूरे घरों को बिगाड़ देते थे। पौलुस ने साहस से एक कहावत भी दोहराई, जो क्रेते के अपने एक भविष्यवक्ता ने कही थी: "क्रेती लोग सदा झूठे, दुष्ट पशु और आलसी पेटू होते हैं।" कड़वी बात थी, पर पौलुस ने कहा यह सच है।
तीतुस 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
सोचो, एक किला बनाना है। अगर दीवार बनानेवाला मज़दूर खुद कमज़ोर और बेईमान हो, तो दीवार गिर जाएगी। कलीसिया भी एक किले जैसी है। उसके अगुवे मज़बूत, सच्चे और ईमानदार होने चाहिए, नहीं तो झूठे शिक्षक अंदर घुस आएँगे और सबको भरमा देंगे।
बच्चे तीतुस 1 से क्या सीख सकते हैं?
पौलुस की पूरी बात एक बड़ी आशा पर टिकी है: अनंत जीवन की आशा। परमेश्वर ने यह वादा बहुत पहले किया था, और परमेश्वर कभी झूठ नहीं बोलते। यह याद रखो, यह पूरी कहानी की जड़ है।
तीतुस 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम भी कभी ऐसी बातें सुनोगे, जो सच जैसी लगती हैं, पर सच नहीं होतीं। शायद कोई दोस्त कहे, "झूठ बोलना ठीक है, अगर कोई पकड़े नहीं।" तब याद रखना, परमेश्वर झूठ नहीं बोल सकते, और उनके बच्चों को भी सच बोलना सीखना है।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

क्रेती लोग सदा झूठे, दुष्ट पशु और आलसी पेटू होते हैं।" यह ताना पौलुस ने गढ़ा नहीं था, यह उनके अपने कवि के मुँह का था। फिर भी तीतुस को वहीं छोड़ा गया, उसी द्वीप पर कलीसिया खड़ी करने। जहाँ की बदनामी सबसे गहरी है, वहीं मसीह अपने लोग चुनता है। लोग तुम्हारे बारे में जो कहते हैं, वह तुम्हारा आखिरी नाम नहीं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

और विश्वासयोग्य वचन पर जो शिक्षा के अनुसार है, स्थिर रहे।" पौलुस अगुवे से पहले चतुराई नहीं, पकड़ माँगता है। जो वचन को कसकर थामे हुए है, वही दूसरों को थाम सकता है। सोचो, तुम्हारा हाथ आज किस पर टिका है? जिसे तुमने मजबूती से नहीं पकड़ा, उससे तुम किसी और को दिलासा भी नहीं दे पाओगे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

वे कहते हैं कि हम परमेश्वर को जानते हैं, परन्तु अपने कामों से उसका इन्कार करते हैं।" पौलुस क्रेते के उन शिक्षकों की बात कर रहा था जिनकी ज़ुबान सही थी, पर ज़िंदगी उलटी गवाही दे रही थी। सोचो, मुँह से इकरार और हाथों से इन्कार, दोनों एक ही इंसान में। आज अपने आप से पूछो: जो लोग मुझे रोज़ देखते हैं, मेरे काम उन्हें मेरे परमेश्वर के बारे में क्या बताते हैं?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

पौलुस तीतुस को कहता है कि हर नगर में प्राचीन नियुक्त करे, और पहली कसौटी मंच नहीं, घर है: "जो निर्दोष हो, और एक ही पत्नी का पति हो, जिसके बच्चे विश्वासयोग्य हों।" कलीसिया में आपकी आवाज़ कितनी ऊँची है, यह मायने नहीं रखता। जो लोग आपके साथ रोज़ रहते हैं, वे आपके मसीह को कैसा देखते हैं? वहीं से सेवा शुरू होती है।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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