1 कुरिन्थियों 14:39
पाठ
कुरिन्थुस के किसी घर में, तेल के दीये की रोशनी में, पत्र पढ़नेवाला अब थक चुका है। उसने अभी-अभी वह कठोर वाक्य पढ़ा है, "परन्तु यदि कोई न माने, तो न माने।" कमरे में सन्नाटा। कुछ लोग नीचे देख रहे हैं, कुछ की ठुड्डी तनी हुई है। और तभी पौलुस का स्वर नरम पड़ता है, जैसे कोई पिता डाँटने के बाद हाथ बढ़ा दे: "अतः हे भाइयों, भविष्यद्वाणी करने की धुन में रहो और अन्य भाषा बोलने से मना न करो।" तेरह पदों की लम्बी बहस, तुरही और बाँसुरी के उदाहरण, दस हजार बातों बनाम पाँच बातों की तुलना, सब कुछ इस एक वाक्य में सिमट आता है: एक को लालच से चाहो, दूसरे को रोको मत।
मूल बात
यहाँ परमेश्वर की कलीसिया के बारे में एक बात खुलकर सामने आती है जो हमें असहज करती है: आत्मा के वरदानों में श्रेणियाँ हैं, पर बहिष्कार नहीं। पौलुस निष्पक्ष नहीं रहता। वह साफ कहता है कि भविष्यद्वाणी श्रेष्ठ है, क्योंकि वह "कलीसिया की उन्नति" करती है, जबकि अन्य भाषा बोलनेवाला "अपनी ही उन्नति" करता है। परमेश्वर जो देते हैं, वह मुझे समृद्ध करने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों को बनाने के लिए देते हैं; प्रेम ही वह तराजू है जिस पर हर वरदान तौला जाता है। और फिर भी, जिसे कम उपयोगी ठहराया गया, उसे भी दबाया नहीं जाता। जहाँ मनुष्य की प्रवृत्ति होती है कि जो दूसरे दर्जे का है उसे चुप करा दो, वहाँ प्रेरित कहता है: मना मत करो। यही अनुग्रह का स्वभाव है, व्यवस्था करना पर गला न घोंटना।
सूत्र
परमेश्वर की पूरी कहानी एक ऐसे परमेश्वर की कहानी है जो समझे जाने के लिए बोलते हैं। वे अब्राहम से करार की भाषा में बात करते हैं, सीनै पर पत्थर पर लिखते हैं, भविष्यद्वक्ताओं के मुँह में शब्द डालते हैं, और अन्त में वचन देह बनकर एक गाँव की बोली में बोलने लगता है। मसीह कोई रहस्यमय ध्वनि नहीं थे; वे बढ़ई के हाथों और गलील की भाषा में समझ में आनेवाले परमेश्वर थे। इसीलिए पौलुस कलीसिया में समझ को इतना मूल्य देता है: जो सभा दूसरों के लिए अबूझ हो जाती है, वह देहधारण के विपरीत दिशा में चलती है। और साथ ही, वही मसीह किसी सुलगती बत्ती को बुझाते नहीं। "मना न करो" उसी स्वभाव की गूँज है: अनुग्रह क्रम बनाता है, पर किसी की आवाज़ नहीं छीनता।
दर्पण
आप जानते हैं वह पल, जब छोटे समूह में कोई ऐसी बात कह देता है जो आपकी रुचि से मेल नहीं खाती। बहुत भावुक प्रार्थना, बहुत ऊँचा स्वर, बहुत अजीब अनुभव। और भीतर एक छोटी सी आवाज़ कहती है: इसे किसी तरह रोको, नहीं तो लोग क्या सोचेंगे। पौलुस उस आवाज़ पर हाथ रखता है। वह व्यवस्था चाहता है, पर सफ़ाई के नाम पर आत्मा का गला घोंटना नहीं चाहता। दूसरी ओर वही पद उन्हें भी छूता है जो अपने अनुभव को तमगे की तरह पहनते हैं: तुम्हारा वरदान तुम्हारी पहचान नहीं, कलीसिया की सेवा है। आज शाम होने से पहले उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसकी आत्मिक अभिव्यक्ति आपको असहज करती है, और उस नाम को ऊँची आवाज़ में परमेश्वर के सामने रखकर कहिए: मैं इसे रोकूँगा नहीं।
एक बारीकी
"धुन में रहो" के पीछे यूनानी शब्द है ज़ेलोउते, जिसका अर्थ है जलन भरी चाह, वही ऊर्जा जो बिगड़कर ईर्ष्या बन जाती है। कुरिन्थुस की कलीसिया इसी ऊर्जा से भरी थी, पर गलत दिशा में: मेरा वरदान तुम्हारे वरदान से ऊँचा। पौलुस इस आग को बुझाता नहीं, मोड़ देता है। वह कहता है, तड़पो ज़रूर, पर उस वरदान के लिए जो दूसरे को ऊपर उठाता है। ध्यान दीजिए, यह आज्ञा बहुवचन में है, पूरी सभा से कही गई। यानी भविष्यद्वाणी किसी विशेष वर्ग का पेशा नहीं; पौलुस चाहता है कि हर कोई इस चाह में जले कि परमेश्वर का वचन मेरे मुँह से किसी के लिए उन्नति, उपदेश और शान्ति बने।
शास्त्र की गूँज
इसी अध्याय में पौलुस यशायाह को उद्धृत करता है: "मैं अन्य भाषा बोलनेवालों के द्वारा, और पराए मुख के द्वारा इन लोगों से बात करूँगा तो भी वे मेरी न सुनेंगे।" वहाँ अबूझ भाषा न्याय का चिन्ह थी, उस प्रजा के लिए जिसने साफ़ शब्दों को ठुकरा दिया था। पौलुस इसी से तर्क करता है: कलीसिया को ऐसी सभा नहीं बनना चाहिए जो अपने ही लोगों के लिए विदेशी हो जाए। दूसरी ओर गिनती की पुस्तक में मूसा की वह पुकार याद कीजिए, जब यहोशू ने दो अजनबियों को भविष्यद्वाणी करने से रोकना चाहा और मूसा ने कहा कि काश प्रभु के सब लोग भविष्यद्वक्ता होते। पौलुस वही उदारता दोहरा रहा है, अब कलम से।
मुख्य पात्र
इस पद में पौलुस खड़ा है, और उसकी स्थिति दिलचस्प है। वह उस वरदान की वकालत कर रहा है जिसे वह स्वयं सबसे अधिक रखता है और सभा में सबसे कम इस्तेमाल करता है। उसने अभी स्वीकार किया है कि वह सबसे अधिक अन्य भाषा बोलता है, और उसी साँस में कहा कि सभा में वह दस हजार के बजाय पाँच समझ में आनेवाली बातें चुनेगा। यह आदमी अपने अनुभव का बचाव नहीं कर रहा, उसे औरों के पाँव तले रख रहा है। और जब वह अनुशासन की बात कहकर लगभग कठोर हो चुका है, तब "हे भाइयों" कहकर फिर से गले लगाता है। यहाँ एक चरवाहे का दिल दिखता है जो अव्यवस्था से डरता है, पर उससे ज़्यादा इस बात से कि कोई छोटा विश्वासी चुप करा दिया जाए।
मनन के लिए
आपकी मंडली में किसकी आवाज़ पिछले साल धीरे धीरे चुप हो गई, और क्या उसमें आपका कोई हाथ था?
आप जिस आत्मिक वरदान की सबसे अधिक चाह रखते हैं, क्या वह चाह आपको लोगों की ओर ले जाती है या उनसे ऊपर?
1 Corinthians में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Church problems, cross shaped answers: Corinth feels very modern.
Paul For Everyone: 1 Corinthians
Wright's readable guide through love, gifts and resurrection.
1 Corinthians: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
1 Corinthians 14:39 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
1 कुरिन्थियों 14:39 का क्या अर्थ है?
1 कुरिन्थियों 14:39 किस विषय में है?
1 कुरिन्थियों 14:39 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
1 कुरिन्थियों 14:39 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
1 कुरिन्थियों 14:39 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
1 Corinthians 14 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, कई बार मैं दूसरों की बातें सुनकर भी समझ नहीं पाता, और अपनी बात कहकर भी अनसुना रह जाता हूँ। मुझे ऐसे शब्द दे जो दिलों तक पहुँचें, और ऐसा मन दे जो सुनना जानता हो। हमारे बीच की दूरी मिटा दे, ताकि हम एक दूसरे के लिए अजनबी न रहें।
पिता, धन्यवाद कि जब कोई मेरी बात नहीं समझता, तब भी तू सुनता है। तेरा वचन कहता है कि अन्य भाषा में बोलनेवाला "मनुष्यों से नहीं, परन्तु परमेश्वर से बातें करता है।" मेरी आहें, मेरे बिना शब्दों के आँसू, सब तेरे कान तक पहुँचते हैं। इस बात के लिए मेरा मन तेरा आभारी है।
क्योंकि यदि मैं अन्य भाषा में प्रार्थना करूँ, तो मेरा आत्मा तो प्रार्थना करता है, परन्तु मेरी समझ काम नहीं देती।"
पौलुस उस प्रार्थना को गलत नहीं कहता, बस अधूरी कहता है। आत्मा उड़ रही है और मन पीछे खड़ा रह गया है। कभी सोचा है कि तेरी प्रार्थना में तेरा दिमाग कहाँ रहता है? परमेश्वर तुझे पूरा चाहता है, भावना भी और समझ भी। अगली बार जब घुटने टेके, मन को भी साथ ले आना।
हे प्रभु, धन्यवाद कि तू भ्रम का नहीं, पर व्यवस्था का परमेश्वर है। तेरी कलीसिया में जब कोई अन्य भाषा बोले, तो दो या तीन ही बोलें, बारी बारी से, और एक अनुवाद करे, यह सिखाने के लिए तेरा शुक्रिया। तेरी बुद्धि हमें मर्यादा और सुनने का मन देती है।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें