बाइबल व्याख्या

1 यूहन्ना 3:15

बाइबल
यह वचन OLIVE PRARTHANALAYAMU द्वारा समर्पित है

पाठ

यूहन्ना एक ऐसा वाक्य लिखते हैं जिसे पढ़कर कोई भी ठिठक जाए: "जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह हत्यारा है; और तुम जानते हो, कि किसी हत्यारे में अनन्त जीवन नहीं रहता।" यानी घृणा को वे कोई भीतरी, निजी, किसी को नुकसान न पहुँचाने वाली भावना नहीं मानते, बल्कि उसे सीधे उसी श्रेणी में रख देते हैं जिसमें खून बहाना आता है। और फिर वे एक और बात जोड़ते हैं, जो और भी बेचैन करती है: ऐसे व्यक्ति के भीतर अनन्त जीवन ठहरता नहीं। बैर रखना और परमेश्वर के जीवन में बने रहना, दोनों एक साथ नहीं चल सकते। वाक्य छोटा है, पर उसमें कहीं कोई ढील नहीं छोड़ी गई।

मर्म

यहाँ जो कहा जा रहा है, वह नैतिक अतिशयोक्ति नहीं है। यूहन्ना मान रहे हैं कि जीवन एक चीज़ है जो किसी स्रोत से बहती है, और घृणा उस बहाव को भीतर से काट देती है। कैन ने पहले अपने भाई से बैर रखा, फिर हाथ उठाया; हत्या तो केवल वह क्षण था जब भीतर की बात बाहर दिखी। इसलिए प्रश्न यह नहीं कि आपने क्या किया, बल्कि यह कि आपके भीतर कौन सी दिशा काम कर रही है, जीवन की या मृत्यु की। और ध्यान दीजिए, यूहन्ना यह नहीं कहते कि घृणा से अनन्त जीवन छिन जाता है, बल्कि यह कि वह उसमें "रहता" नहीं। परमेश्वर का जीवन प्रेम के अलावा किसी और आकार में ठहर ही नहीं सकता। तो प्रश्न खुला रह जाता है: मेरे भीतर वह क्या है जो अभी भी किसी की भलाई नहीं चाहता?

सूत्र

बाइबल की कहानी में यह पहला अपराध है। मनुष्य ने परमेश्वर की आज्ञा तोड़ी, और अगली ही पीढ़ी में भाई ने भाई का खून किया। यूहन्ना इसे भूलते नहीं, इसलिए दो पद पहले वे कैन को सामने लाते हैं: "और कैन के समान न बनें, जो उस दुष्ट से था, और जिसने अपने भाई की हत्या की।" तब से पूरा पवित्रशास्त्र इसी घाव पर काम करता है, भाइयों के बीच का बैर, याकूब और एसाव, यूसुफ और उसके भाई, और अंत में वे लोग जो परमेश्वर के पुत्र को शहर के बाहर ले गए। और ठीक उसी जगह उत्तर भी आता है, अगले पद में: "उसने हमारे लिए अपने प्राण दे दिए।" कैन ने भाई से जीवन छीना; मसीह ने भाइयों को अपना जीवन दे दिया। पूरा उद्धार इसी उलटफेर पर टिका है।

दर्पण

हम आमतौर पर अपने को हत्यारा नहीं मानते, और यही इस पद की चुभन है। पर सोचिए उस सहकर्मी के बारे में जिसकी पदोन्नति की खबर सुनकर भीतर कुछ खट्टा हो गया था। उस रिश्तेदार के बारे में जिससे ज़मीन के बँटवारे के बाद बात बंद है, और जिसके बीमार पड़ने की खबर पर मन में एक अजीब संतोष उठा। उस व्यक्ति के बारे में जिसका नाम व्हाट्सएप पर दिखता है और उँगली अपने आप आगे बढ़ जाती है। यूहन्ना पूछते नहीं कि आपने क्या किया; वे पूछते हैं कि क्या आप उसकी भलाई चाहते हैं। और यदि सचमुच नहीं चाहते, तो कहीं वह बहाव रुका हुआ है।

आज ही एक कागज़ पर वह एक नाम लिखिए जिसे सुनते ही भीतर कुछ कड़ा हो जाता है, ज़ोर से बोलकर उसके लिए भलाई माँगिए, फिर वह कागज़ फाड़ दीजिए।

प्रसंग

यह पत्र किसी अनजान भीड़ को नहीं, बल्कि एक घायल मण्डली को लिखा गया है। पहली सदी के अंत में, एशिया माइनर के घरों में जुटने वाले छोटे समूहों में फूट पड़ चुकी थी; कुछ लोग निकल गए थे, और जाते हुए यह दावा छोड़ गए थे कि सच्चा ज्ञान उनके पास है। ऐसे माहौल में "भाई" कोई भावुक शब्द नहीं था, बल्कि वही आदमी था जो कल तक साथ रोटी तोड़ता था और अब दूसरी ओर खड़ा है। बाहर संसार का बैर था, जिसके बारे में यूहन्ना कहते हैं, "यदि संसार तुम से बैर करता है तो अचम्भा न करना।" पर भीतर का बैर? उसके लिए कोई छूट नहीं। घाव ताज़ा था, और यूहन्ना उस पर नमक नहीं, सच लगाते हैं।

एक बारीकी

ध्यान दीजिए उस छोटे से शब्द पर: "रहता"। यूनानी में यह वही क्रिया है जो पूरे पत्र में बार बार लौटती है, बने रहना, ठहरना, टिकना। पद छह में "जो कोई उसमें बना रहता है", पद चौबीस में "वह उसमें, और परमेश्वर उनमें बना रहता है"। यूहन्ना के लिए अनन्त जीवन कोई प्रमाणपत्र नहीं जो जेब में पड़ा रहे, बल्कि एक उपस्थिति है जो भीतर ठहरती है। और उपस्थिति को जगह चाहिए। घृणा वह कमरा नहीं छोड़ती। इसलिए वाक्य यह नहीं कहता कि हत्यारा दण्ड पाएगा, बल्कि यह कि उसमें जीवन ठहरता नहीं, जैसे बंद मुट्ठी में पानी नहीं ठहरता। प्रश्न यह है कि मेरे भीतर कितनी जगह अभी भी किसी और के कब्ज़े में है।

मुख्य पात्र

इस पद में असली पात्र कोई हत्यारा नहीं, बल्कि वह है जो जीवन देता है। परमेश्वर यहाँ नियम बनाने वाले न्यायाधीश की तरह नहीं, बल्कि जीवन के स्रोत की तरह खड़े हैं, और उनका स्वभाव देने का है, छीनने का नहीं। अगला पद इसे खोलकर रख देता है: प्रेम क्या है, यह हमने शब्दकोश से नहीं, एक क्रूस से जाना। जो परमेश्वर अपने प्राण दे देते हैं, उनका जीवन उस हृदय में कैसे ठहरेगा जो दूसरे के प्राणों से जलता है? यूहन्ना चेतावनी दे रहे हैं, हाँ, पर उससे पहले वे एक चित्र दिखा रहे हैं। और शायद यही इस कठोर वाक्य की सबसे कोमल बात है: वे हमें डराने नहीं, घर लौटाने के लिए लिख रहे हैं।

मनन के प्रश्न

किसका नाम पढ़ते ही मेरे भीतर कुछ बंद हो जाता है, और मैंने उस बंद दरवाज़े को कितने सालों से खोलकर नहीं देखा?

यदि अनन्त जीवन कोई अधिकार नहीं बल्कि एक उपस्थिति है जो ठहरना चाहती है, तो आज मेरे भीतर उसे ठहरने के लिए कहाँ जगह मिलती है, और कहाँ नहीं?

1 John में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of John's Letters

David Jackman

Assurance, love and truth in John's letters, warmly explained.

Early Christian Letters For Everyone

N.T. Wright

James, Peter, John and Jude in short accessible readings.

The Letters of John: An Introduction and Commentary

John Stott

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Letters of John

Gary Burge

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1 John 3:15 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 यूहन्ना 3:15 का क्या अर्थ है?
यूहन्ना एक ऐसा वाक्य लिखते हैं जिसे पढ़कर कोई भी ठिठक जाए: "जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह हत्यारा है; और तुम जानते हो, कि किसी हत्यारे में अनन्त जीवन नहीं रहता।" यानी घृणा को वे कोई भीतरी, निजी, किसी को नुकसान न पहुँचाने वाली भावना नहीं मानते, बल्कि उसे सीधे उसी श्रेणी में रख देते हैं जिसमें खून बहाना आता है। और फिर वे एक और बात जोड़ते हैं, जो और भी बेचैन करती है: ऐसे व्यक्ति के भीतर अनन्त जीवन ठहरता नहीं। बैर रखना और परमेश्वर के जीवन में बने रहना, दोनों एक साथ नहीं चल सकते। वाक्य छोटा है, पर उसमें कहीं कोई ढील नहीं छोड़ी गई।
1 यूहन्ना 3:15 किस विषय में है?
बाइबल की कहानी में यह पहला अपराध है। मनुष्य ने परमेश्वर की आज्ञा तोड़ी, और अगली ही पीढ़ी में भाई ने भाई का खून किया। यूहन्ना इसे भूलते नहीं, इसलिए दो पद पहले वे कैन को सामने लाते हैं: "और कैन के समान न बनें, जो उस दुष्ट से था, और जिसने अपने भाई की हत्या की।" तब से पूरा पवित्रशास्त्र इसी घाव पर काम करता है, भाइयों के बीच का बैर, याकूब और एसाव, यूसुफ और उसके भाई, और अंत में वे लोग जो परमेश्वर के पुत्र को शहर के बाहर ले गए। और ठीक उसी जगह उत्तर भी आता है, अगले पद में: "उसने हमारे लिए अपने प्राण दे दिए।" कैन ने भाई से जीवन छीना; मसीह ने भाइयों को अपना जीवन दे दिया। पूरा उद्धार इसी उलटफेर पर टिका है।
1 यूहन्ना 3:15 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज ही एक कागज़ पर वह एक नाम लिखिए जिसे सुनते ही भीतर कुछ कड़ा हो जाता है, ज़ोर से बोलकर उसके लिए भलाई माँगिए, फिर वह कागज़ फाड़ दीजिए।
1 यूहन्ना 3:15 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
ध्यान दीजिए उस छोटे से शब्द पर: "रहता"। यूनानी में यह वही क्रिया है जो पूरे पत्र में बार बार लौटती है, बने रहना, ठहरना, टिकना। पद छह में "जो कोई उसमें बना रहता है", पद चौबीस में "वह उसमें, और परमेश्वर उनमें बना रहता है"। यूहन्ना के लिए अनन्त जीवन कोई प्रमाणपत्र नहीं जो जेब में पड़ा रहे, बल्कि एक उपस्थिति है जो भीतर ठहरती है। और उपस्थिति को जगह चाहिए। घृणा वह कमरा नहीं छोड़ती। इसलिए वाक्य यह नहीं कहता कि हत्यारा दण्ड पाएगा, बल्कि यह कि उसमें जीवन ठहरता नहीं, जैसे बंद मुट्ठी में पानी नहीं ठहरता। प्रश्न यह है कि मेरे भीतर कितनी जगह अभी भी किसी और के कब्ज़े में है।
1 यूहन्ना 3:15 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
किसका नाम पढ़ते ही मेरे भीतर कुछ बंद हो जाता है, और मैंने उस बंद दरवाज़े को कितने सालों से खोलकर नहीं देखा?
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1 John 3 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 18

पिता, मेरा प्रेम अक्सर बातों तक ही रह जाता है। मुझे ऐसा दिल दीजिए जो सिर्फ कहे नहीं, बल्कि करे। जहाँ किसी को मदद चाहिए, वहाँ मेरे हाथ बढ़ें, और मेरी सच्चाई मेरे कामों में दिखे, सिर्फ मेरी जुबान पर नहीं।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 7

पिता, मुझे धोखे से बचा, खासकर उस धोखे से जो मैं खुद को देता हूँ। सिर्फ अच्छी बातें कहना काफी नहीं, मेरे काम भी सच्चे हों। जैसा मसीह है, वैसा जीवन मुझमें गढ़ दे, थोड़ा थोड़ा करके, हर दिन।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

हे भाइयो, यदि संसार तुम से बैर रखता है, तो अचम्भा न करो।" यूहन्ना ने अभी कैन की बात की थी, जिसने अपने भाई को इसलिए मारा क्योंकि हाबिल के काम धर्म के थे। नफरत की जड़ यही है। जब तेरी ईमानदारी किसी को चुभती है, तो शायद तूने कुछ गलत नहीं किया। शायद तू सही जगह पर खड़ा है। हैरान मत हो, डगमगा भी मत।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

हे प्रियों, अब हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे!" ध्यान दे, यूहन्ना यह नहीं कहता कि तू एक दिन संतान बनेगा। तू अभी है। जो अधूरा दिखता है, वह तेरी पहचान नहीं, बस तेरी अधूरी तस्वीर है। और बदलाव तपस्या से नहीं, उसे देखने से आएगा। आज तू किसे देख रहा है?

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