बाइबल व्याख्या

1 शमूएल 25:18

बाइबल

पाठ

भेड़ों की ऊन कतरने के उत्सव की हलचल के बीच, जब नाबाल के आँगन में माँस भुन रहा है और दाखमधु ढल रहा है, एक स्त्री चुपचाप भण्डार की ओर बढ़ती है। अबीगैल बिना देर किए दो सौ रोटियाँ, दो कुप्पी दाखमधु, पाँच भेड़ों का माँस, पाँच सआ भुना हुआ अनाज, एक सौ गुच्छे किशमिश और अंजीरों की दो सौ टिकियाँ इकट्ठी करती है, और यह सारा बोझ गदहों पर लदवा देती है। यह कोई प्रतीकात्मक भेंट नहीं, यह चार सौ भूखे, तलवार बाँधे हुए आदमियों का पूरा भोजन है, तौला हुआ, गिना हुआ, और इतनी फुर्ती से जुटाया हुआ कि कोई पूछने तक न पाए कि भण्डार से इतना अनाज कहाँ जा रहा है।

मर्म

इस एक पद में परमेश्वर की रक्षा का रूप कोई स्वर्गदूत या स्वप्न नहीं, बल्कि गदहों की पीठ पर लदी रोटियाँ हैं। दाऊद खून करने निकल चुका है; उसका अभिषिक्त भविष्य एक रात की हत्या से दागदार होने को है। और परमेश्वर उसे रोकते हैं, एक स्त्री की व्यावहारिक बुद्धि और भरे हुए भण्डार के द्वारा। यहाँ अनुग्रह अमूर्त नहीं है, वह वजनदार है, उसे नापा जा सकता है, उसकी गिनती की जा सकती है। नाबाल ने कहा था, "क्या मैं अपनी रोटी-पानी… लेकर ऐसे लोगों को दे दूँ", और अबीगैल ठीक वही देती है जिसे उसके पति ने अपनी मुट्ठी में भींच रखा था। मूर्खता कंजूसी में प्रकट होती है, और बुद्धि उदारता में। परमेश्वर संसार को प्रायः इसी तरह बचाते हैं: किसी के द्वारा जो समय रहते देना चुनता है।

कथा-सूत्र

ध्यान दीजिए कि अबीगैल पहले बोलती नहीं, पहले देती है। भेंट उसके शब्दों से आगे-आगे चलती है, गदहों पर लदी हुई, और जब तक वह दाऊद के सामने पहुँचती है, रोटी और दाखमधु पहले ही उसके पक्ष में बोल चुके होते हैं। बाद में वह कहेगी, "यह अपराध मेरे ही सिर पर हो", यानी वह उस दोष को अपने ऊपर ले लेती है जो उसका नहीं था। निर्दोष व्यक्ति दोषी के स्थान पर खड़ा होता है, रोटी और दाखमधु लेकर, और क्रोध टल जाता है। यह रूपक गढ़ना नहीं है; यह वही पैटर्न है जो पवित्रशास्त्र में बार-बार उभरता है और अंततः उस एक में पूरा होता है जो रोटी और दाखमधु हाथ में लेकर कहते हैं कि यह मेरी देह है। दाऊद का वंश उस रात बचा, ताकि उस वंश से मुक्तिदाता आ सके।

दर्पण

हममें से अधिकांश नाबाल की तरह क्रूर नहीं हैं, पर उसकी गणना हम भली-भाँति जानते हैं। यह मेरा है। मैंने कमाया है। मैं क्यों दूँ, और उसे क्यों दूँ जिसे मैं ठीक से जानता भी नहीं? बोनस आता है और हम हिसाब लगाते हैं कि कितना बचाना है, कितना सुरक्षित रखना है। और अबीगैल हमें असहज करती है, क्योंकि उसने भण्डार खोलने से पहले लाभ-हानि नहीं तौली; उसने यह तौला कि आज रात किसका खून बहने वाला है। उसकी उदारता संकट के बीच की उदारता थी, जल्दबाजी में की गई, बिना गवाहों के। आपके आसपास भी कोई है जिसकी ज़रूरत आप जानते हैं और जिसे आपने "बाद में" की सूची में डाल रखा है। आज ही अपनी रसोई से एक थैले में सामान भरिए, उस एक व्यक्ति का नाम सोचिए, और अभी उसे संदेश भेजिए कि आज शाम यह उसके पास पहुँच जाएगा।

कठिन प्रश्न

पद उन्नीस में एक वाक्य है जिसे हम अनदेखा करना चाहते हैं: उसने अपने पति को कुछ नहीं बताया। अबीगैल घर का बड़ा हिस्सा अपने स्वामी की जानकारी के बिना बाहर भेज देती है। उस संस्कृति में यह केवल अनुचित नहीं, खतरनाक था; नाबाल उसे इसके लिए दण्ड दे सकता था। तो क्या पवित्रशास्त्र यहाँ पति को धोखा देने की सराहना कर रहा है? पाठ इसका सीधा उत्तर नहीं देता, और उसे देना भी नहीं चाहिए। वह केवल इतना दिखाता है कि जब एक मूर्ख की ज़िद पूरे घराने को मृत्यु की ओर खींच रही हो, तब आज्ञाकारिता का अर्थ चुप रहना नहीं रह जाता। यह असुविधाजनक है, और रहना चाहिए। अधिकार के नीचे रहना कभी-कभी अधिकार के विरुद्ध खड़े होने की माँग करता है, और उस रेखा को खींचने का कोई सुरक्षित सूत्र नहीं है।

मुख्य पात्र

अबीगैल के बारे में सबसे पहली बात जो पाठ बताता है वह उसकी सुंदरता नहीं, उसकी बुद्धि है। और यह बुद्धि हवा में नहीं तैरती; वह जानती है कि भण्डार में कितनी रोटियाँ हैं, कितनी किशमिश, कौन-से गदहे खाली हैं। वर्षों से एक ऐसे पुरुष के साथ रहते हुए जिससे, उसके अपने सेवक के शब्दों में, "कोई बोल भी नहीं सकता", उसने सुनना, तौलना और चुप रहकर काम करना सीख लिया था। उसका भावनात्मक संसार आसान नहीं रहा होगा: एक ऐसा विवाह जिसमें वह अपने ही घर में अजनबी थी, और सेवक अपनी जान बचाने के लिए पति के पास नहीं, पत्नी के पास दौड़ते थे। फिर भी वह कड़वी नहीं हुई। कड़वाहट हाथ बाँध देती है; उसने हाथ खोल दिए।

पृष्ठभूमि

शमूएल अभी-अभी मरे हैं, और इस्राएल में वह आवाज़ चली गई है जो राजाओं को रोक सकती थी। दाऊद पारान के जंगल में है, अभिषिक्त पर भगोड़ा, चार सौ आदमियों का पेट भरने के लिए जिम्मेदार। कर्मेल में ऊन कतरने का मौसम है, वर्ष का सबसे धनी सप्ताह, जब मालिक खुले हाथ खर्च करता था और मेहमाननवाज़ी एक सामाजिक कर्तव्य थी, कोई शिष्टाचार नहीं। दाऊद के लोगों ने महीनों नाबाल के चरवाहों की आड़ बनकर काम किया था; उस दुनिया में इसका ऋण चुकाना सामान्य था। नाबाल इनकार करता है और दाऊद को भगोड़ा दास कहकर उसकी पहचान पर प्रहार करता है। कालेबवंशी होने का गर्व, नशे की भरी मेज़, और बाहर जंगल में तलवारें बँधती हुईं। इसी के बीच एक स्त्री गदहों पर रोटी लदवाती है।

चिंतन

आपके घर या जीवन में वह "भण्डार" क्या है जिसे आप सुरक्षित रखकर किसी ऐसे संकट को टलने नहीं दे रहे जिसे आप देख चुके हैं?

जब आपके चारों ओर के लोग किसी मूर्खतापूर्ण फैसले की ओर बढ़ रहे हों, तो आप चुप रहने को विनम्रता कहते हैं या भय?

1 Samuel में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

1 Samuel: Looking on the Heart

Dale Ralph Davis

Storytelling commentary at its best, from Hannah's prayer to David's rise.

The Message of Samuel

Mary Evans

One clear guide through both books of Samuel and their flawed kings.

1 Samuel For You

Tim Chester

Accessible walk through Samuel, Saul and David with constant application.

1 and 2 Samuel: An Introduction and Commentary

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1 and 2 Samuel

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1 Samuel 25:18 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 शमूएल 25:18 का क्या अर्थ है?
भेड़ों की ऊन कतरने के उत्सव की हलचल के बीच, जब नाबाल के आँगन में माँस भुन रहा है और दाखमधु ढल रहा है, एक स्त्री चुपचाप भण्डार की ओर बढ़ती है। अबीगैल बिना देर किए दो सौ रोटियाँ, दो कुप्पी दाखमधु, पाँच भेड़ों का माँस, पाँच सआ भुना हुआ अनाज, एक सौ गुच्छे किशमिश और अंजीरों की दो सौ टिकियाँ इकट्ठी करती है, और यह सारा बोझ गदहों पर लदवा देती है। यह कोई प्रतीकात्मक भेंट नहीं, यह चार सौ भूखे, तलवार बाँधे हुए आदमियों का पूरा भोजन है, तौला हुआ, गिना हुआ, और इतनी फुर्ती से जुटाया हुआ कि कोई पूछने तक न पाए कि भण्डार से इतना अनाज कहाँ जा रहा है।
1 शमूएल 25:18 किस विषय में है?
ध्यान दीजिए कि अबीगैल पहले बोलती नहीं, पहले देती है। भेंट उसके शब्दों से आगे-आगे चलती है, गदहों पर लदी हुई, और जब तक वह दाऊद के सामने पहुँचती है, रोटी और दाखमधु पहले ही उसके पक्ष में बोल चुके होते हैं। बाद में वह कहेगी, "यह अपराध मेरे ही सिर पर हो", यानी वह उस दोष को अपने ऊपर ले लेती है जो उसका नहीं था। निर्दोष व्यक्ति दोषी के स्थान पर खड़ा होता है, रोटी और दाखमधु लेकर, और क्रोध टल जाता है। यह रूपक गढ़ना नहीं है; यह वही पैटर्न है जो पवित्रशास्त्र में बार-बार उभरता है और अंततः उस एक में पूरा होता है जो रोटी और दाखमधु हाथ में लेकर कहते हैं कि यह मेरी देह है। दाऊद का वंश उस रात बचा, ताकि उस वंश से मुक्तिदाता आ सके।
1 शमूएल 25:18 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
पद उन्नीस में एक वाक्य है जिसे हम अनदेखा करना चाहते हैं: उसने अपने पति को कुछ नहीं बताया। अबीगैल घर का बड़ा हिस्सा अपने स्वामी की जानकारी के बिना बाहर भेज देती है। उस संस्कृति में यह केवल अनुचित नहीं, खतरनाक था; नाबाल उसे इसके लिए दण्ड दे सकता था। तो क्या पवित्रशास्त्र यहाँ पति को धोखा देने की सराहना कर रहा है?
1 शमूएल 25:18 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
शमूएल अभी-अभी मरे हैं, और इस्राएल में वह आवाज़ चली गई है जो राजाओं को रोक सकती थी। दाऊद पारान के जंगल में है, अभिषिक्त पर भगोड़ा, चार सौ आदमियों का पेट भरने के लिए जिम्मेदार। कर्मेल में ऊन कतरने का मौसम है, वर्ष का सबसे धनी सप्ताह, जब मालिक खुले हाथ खर्च करता था और मेहमाननवाज़ी एक सामाजिक कर्तव्य थी, कोई शिष्टाचार नहीं। दाऊद के लोगों ने महीनों नाबाल के चरवाहों की आड़ बनकर काम किया था; उस दुनिया में इसका ऋण चुकाना सामान्य था। नाबाल इनकार करता है और दाऊद को भगोड़ा दास कहकर उसकी पहचान पर प्रहार करता है। कालेबवंशी होने का गर्व, नशे की भरी मेज़, और बाहर जंगल में तलवारें बँधती हुईं। इसी के बीच एक स्त्री गदहों पर रोटी लदवाती है।
1 शमूएल 25:18 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
जब आपके चारों ओर के लोग किसी मूर्खतापूर्ण फैसले की ओर बढ़ रहे हों, तो आप चुप रहने को विनम्रता कहते हैं या भय?
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1 Samuel 25 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

अबीगैल ने पहले भेंट भेजी, फिर कहा, "तुम मेरे आगे-आगे चलो, मैं तुम्हारे पीछे-पीछे आती हूँ।" वह सिर्फ रोटी और दाखमधु भेजकर बैठी नहीं रही, वह स्वयं गई। दाऊद का क्रोध उपहारों से नहीं, उसके आमने-सामने खड़े होने से थमा। तू भी किसी टूटे रिश्ते में कुछ भेजकर काम चला रहा है? कभी-कभी जाना खुद ही पड़ता है।

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