बाइबल व्याख्या

प्रेरितों के काम 20:35

बाइबल

पाठ

पौलुस अपने विदाई भाषण के अंत में इफिसुस के प्राचीनों के सामने अपने हाथ उठाकर कहता है: इन्हीं हाथों ने मेरी और मेरे साथियों की ज़रूरतें पूरी कीं। और फिर वह इसे केवल अपनी जीवनी का ब्यौरा नहीं रहने देता, बल्कि आदेश बना देता है, "मैंने तुम्हें सब कुछ करके दिखाया, कि इस रीति से परिश्रम करते हुए निर्बलों को सम्भालना, और प्रभु यीशु के वचन स्मरण रखना अवश्य है।" उसके बाद वह प्रभु यीशु का एक ऐसा वाक्य उद्धृत करता है जो चारों सुसमाचारों में कहीं दर्ज नहीं है: "लेने से देना धन्य है।" तीन बातें एक साथ बँधी हैं, मेहनत, कमज़ोरों को सँभालना, और मसीह का यह वचन याद रखना।

मूल बात

यह वचन आपके पैसे के बारे में नहीं, आपके भीतर बैठे उस हिसाब-किताब के बारे में है जो हर रिश्ते को नफ़े-नुक़सान में तौलता है। पौलुस कहता है कि धन्यता, यानी वह गहरी भलाई जो परमेश्वर से आती है, लेने वाले हाथ में नहीं बल्कि देने वाले हाथ में मिलती है। यह मानवीय समझ के ठीक उलट है; हम मानते हैं कि जो जमा करता है वह सुरक्षित है। परमेश्वर का राज्य इस गणित को पलट देता है, क्योंकि परमेश्वर स्वयं ऐसे ही हैं। जिस कलीसिया की चर्चा पौलुस ने अभी-अभी की थी, वह "अपने लहू से मोल" ली गई है। देना परमेश्वर का स्वभाव है, और जो देता है वह उस स्वभाव में हिस्सा लेता है। इसलिए यहाँ नैतिक सलाह नहीं, बल्कि यह घोषणा है कि आनंद कहाँ रहता है।

जोड़ने वाला सूत्र

"लेने से देना धन्य है" यीशु का ऐसा वाक्य है जो किसी सुसमाचार में लिखा नहीं मिलता, फिर भी कलीसिया इसे याद रखे हुए थी, जैसे कोई परिवार अपने पिता की एक बात पीढ़ियों तक दोहराता रहता है। और यह वाक्य केवल उनकी शिक्षा नहीं, उनकी जीवनी है। जो देह लेकर आए, उन्होंने कुछ माँगा नहीं, स्वयं को दे दिया। इसी अध्याय में पौलुस कलीसिया को "परमेश्वर की कलीसिया" कहता है, "जिसे उसने अपने लहू से मोल लिया है"। यही क्रूस का गणित है: कीमत देने वाले ने पाने वालों को जन्म दिया। इसलिए जब आप बिना बदले की आशा के देते हैं, आप कोई ऊँचा नैतिक कार्य नहीं कर रहे, आप उस धारा में उतर रहे हैं जो सृष्टि से लेकर गोलगोथा तक और वहाँ से आपके दरवाज़े तक बहती आई है।

दर्पण

आपके भीतर एक बहीखाता है, और आप उसे मानने से इनकार करते हैं। जिस रिश्तेदार ने कभी आपकी मदद नहीं की, उसकी बीमारी की ख़बर सुनकर आपके मन में जो पहला हिसाब उठता है, वह उस बही का पन्ना है। जिस सहकर्मी की तरक़्क़ी आपसे पहले हुई, उसे मदद देते समय आपकी उँगलियाँ जो एक पल ठिठकती हैं, वह भी। और सबसे बारीक जाल यह है कि आप देते तो हैं, पर इस तरह कि लोग आपके ऋणी बने रहें; यह देना नहीं, चुपचाप लेना है, इज़्ज़त और ज़रूरत की मुद्रा में। पौलुस अपने हाथ दिखाकर कहता है, इनमें छाले हैं, और इनके बदले मैंने तुमसे कुछ नहीं माँगा। यह वचन आपको दोषी ठहराने नहीं, आज़ाद करने आया है, क्योंकि जिस दिन बही बंद होती है, उस दिन डर भी बंद होता है कि कहीं मेरा कुछ कम न हो जाए।

आज, अगले दस मिनट में, उस एक व्यक्ति को फ़ोन कीजिए जो आपको कभी कुछ लौटा नहीं सकता, और उससे केवल यह पूछिए कि उसे किस चीज़ की ज़रूरत है।

बारीकी

"निर्बलों को सम्भालना" में जो क्रिया है, वह दूर से सिक्का उछालने का शब्द नहीं है। यूनानी में यह अन्तिलम्बानोमाई है, जिसका अर्थ है किसी को थाम लेना, उसका बोझ अपने कंधे के नीचे लगाकर उठाना, जैसे गिरते हुए आदमी को बग़ल से पकड़ लिया जाए। इसमें शरीर लगता है, समय लगता है, और सबसे बढ़कर निकटता लगती है। यही कारण है कि पौलुस इसे "परिश्रम करते हुए" से जोड़ता है, दान से नहीं। उसने कमाया इसलिए कि थाम सके। ध्यान दीजिए, वह अभी-अभी यूतुखुस को अपनी बाँहों में लिपटा चुका है। शब्द और दृश्य एक-दूसरे को समझाते हैं: सुसमाचार का सेवक वह है जो नीचे उतरकर गिरे हुए से लिपट जाता है।

अंतर्पाठ

पौलुस यहाँ जो कर रहा है, वह इस्राएल की स्मृति में पहले भी हो चुका है। शमूएल ने भी अपनी विदाई में लोगों के सामने खड़े होकर पूछा था कि उसने किसका बैल या गधा लिया, किसे ठगा; एक नेता अपने खुले हाथ दिखाकर पद छोड़ता है। पौलुस उसी परंपरा में खड़ा है, पर एक क़दम आगे बढ़ता है: वह केवल यह नहीं कहता कि मैंने लिया नहीं, वह कहता है कि मैंने कमाकर तुम्हें दिया। और जिस "धन्यता" की वह बात करता है, वह यीशु के उन आशीषवचनों की गूँज है जहाँ धन्य वे कहे गए जो दरिद्र हैं, भूखे हैं, रोते हैं; यानी वे जिनके पास बही रखने को कुछ है ही नहीं। देने वाला स्वेच्छा से उसी जगह जाकर खड़ा हो जाता है, और वहीं परमेश्वर का आनंद उसे मिलता है।

श्रोता

इफिसुस के प्राचीन एक ऐसी दुनिया में जी रहे थे जहाँ हर संबंध संरक्षक और आश्रित का था। बड़ा आदमी पैसा देता, छोटा आदमी वफ़ादारी और प्रशंसा लौटाता; कोई भी उपहार मुफ़्त नहीं होता था। घूमते हुए दार्शनिक और धर्मगुरु शिष्यों से शुल्क लेते थे, और हाथ से काम करना उस समाज में नीच लोगों का काम माना जाता था। पौलुस ने जानबूझकर वह नीचा रास्ता चुना, ताकि इफिसुस में कोई उसका मालिक न बन सके और सुसमाचार बिकाऊ न लगे। ये प्राचीन अभी-अभी सुन चुके हैं कि "फाड़नेवाले भेड़िए" आएँगे। भेड़िया झुंड से लेता है; चरवाहा झुंड को देता है। इस एक वाक्य में उन्हें दोनों की पहचान थमा दी गई, और आज भी वही पहचान काम करती है।

चिंतन

आपके जीवन में वह कौन-सा रिश्ता है जिसमें आप चुपचाप हिसाब रख रहे हैं, और उस बही को बंद करने में आपको किस चीज़ के खो जाने का डर है?

आपके हाथों की कमाई में से कोई ऐसा हिस्सा है जिसे कोई नहीं जानता, या आपका देना हमेशा वहीं होता है जहाँ कोई देख रहा हो?

Acts में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Acts

John Stott

Stott's classic on how the gospel crossed every boundary on earth.

Acts For Everyone, Part 1

N.T. Wright

The church's explosive beginnings, explained with energy and care.

Acts: An Introduction and Commentary

I. Howard Marshall

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Acts

Ajith Fernando

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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Acts 20:35 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

प्रेरितों के काम 20:35 का क्या अर्थ है?
पौलुस अपने विदाई भाषण के अंत में इफिसुस के प्राचीनों के सामने अपने हाथ उठाकर कहता है: इन्हीं हाथों ने मेरी और मेरे साथियों की ज़रूरतें पूरी कीं। और फिर वह इसे केवल अपनी जीवनी का ब्यौरा नहीं रहने देता, बल्कि आदेश बना देता है, "मैंने तुम्हें सब कुछ करके दिखाया, कि इस रीति से परिश्रम करते हुए निर्बलों को सम्भालना, और प्रभु यीशु के वचन स्मरण रखना अवश्य है।" उसके बाद वह प्रभु यीशु का एक ऐसा वाक्य उद्धृत करता है जो चारों सुसमाचारों में कहीं दर्ज नहीं है: "लेने से देना धन्य है।" तीन बातें एक साथ बँधी हैं, मेहनत, कमज़ोरों को सँभालना, और मसीह का यह वचन याद रखना।
प्रेरितों के काम 20:35 किस विषय में है?
"लेने से देना धन्य है" यीशु का ऐसा वाक्य है जो किसी सुसमाचार में लिखा नहीं मिलता, फिर भी कलीसिया इसे याद रखे हुए थी, जैसे कोई परिवार अपने पिता की एक बात पीढ़ियों तक दोहराता रहता है। और यह वाक्य केवल उनकी शिक्षा नहीं, उनकी जीवनी है। जो देह लेकर आए, उन्होंने कुछ माँगा नहीं, स्वयं को दे दिया। इसी अध्याय में पौलुस कलीसिया को "परमेश्वर की कलीसिया" कहता है, "जिसे उसने अपने लहू से मोल लिया है"। यही क्रूस का गणित है: कीमत देने वाले ने पाने वालों को जन्म दिया। इसलिए जब आप बिना बदले की आशा के देते हैं, आप कोई ऊँचा नैतिक कार्य नहीं कर रहे, आप उस धारा में उतर रहे हैं जो सृष्टि से लेकर गोलगोथा तक और वहाँ से आपके दरवाज़े तक बहती आई है।
प्रेरितों के काम 20:35 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज, अगले दस मिनट में, उस एक व्यक्ति को फ़ोन कीजिए जो आपको कभी कुछ लौटा नहीं सकता, और उससे केवल यह पूछिए कि उसे किस चीज़ की ज़रूरत है।
प्रेरितों के काम 20:35 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पौलुस यहाँ जो कर रहा है, वह इस्राएल की स्मृति में पहले भी हो चुका है। शमूएल ने भी अपनी विदाई में लोगों के सामने खड़े होकर पूछा था कि उसने किसका बैल या गधा लिया, किसे ठगा; एक नेता अपने खुले हाथ दिखाकर पद छोड़ता है। पौलुस उसी परंपरा में खड़ा है, पर एक क़दम आगे बढ़ता है: वह केवल यह नहीं कहता कि मैंने लिया नहीं, वह कहता है कि मैंने कमाकर तुम्हें दिया। और जिस "धन्यता" की वह बात करता है, वह यीशु के उन आशीषवचनों की गूँज है जहाँ धन्य वे कहे गए जो दरिद्र हैं, भूखे हैं, रोते हैं; यानी वे जिनके पास बही रखने को कुछ है ही नहीं। देने वाला स्वेच्छा से उसी जगह जाकर खड़ा हो जाता है, और वहीं परमेश्वर का आनंद उसे मिलता है।
प्रेरितों के काम 20:35 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन में वह कौन-सा रिश्ता है जिसमें आप चुपचाप हिसाब रख रहे हैं, और उस बही को बंद करने में आपको किस चीज़ के खो जाने का डर है?
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Acts 20 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 12

पिता, जहाँ हमने उम्मीद खो दी थी, वहाँ तू जीवन लौटा देता है। जो गिर गए, जो टूट गए, उन्हें तू फिर उठाता है। मेरे डर के बीच मुझे वही सांत्वना दे, जो तेरे काम को देखकर दिलों में उतरती है। मैं तुझ पर भरोसा रखता हूँ।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 20

पिता, मुझे भी ऐसा साहस दे कि जो बातें दूसरों के भले की हैं, उन्हें छिपाऊँ नहीं। चाहे भीड़ के सामने हो या किसी के घर की चौखट पर, मेरा जीवन और मेरे शब्द तेरे प्रेम की गवाही दें। डर को हटा दे, और सच्चाई से बोलने की नम्रता मुझमें भर दे।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 29

पिता, आपके झुंड को बचाकर रखिए। जब ऐसी आवाज़ें आएँ जो सच्ची लगती हैं पर दिल को आपसे दूर खींचती हैं, हमें पहचानने की समझ दीजिए। हमें जगाए रखिए, एक दूसरे का ध्यान रखना सिखाइए, और अपनी आवाज़ इतनी साफ कर दीजिए कि हम किसी और के पीछे न चलें।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

पौलुस को जहाज़ से सीरिया जाना था, पर घात लगी और उसने रास्ता बदल दिया: "इसलिए उसने यह निश्चय किया कि मकिदुनिया होकर लौट जाए।" सुसमाचार का इतना बड़ा सेवक भी लंबा, घुमावदार रास्ता लेता है। हठ करना विश्वास नहीं होता। तेरी ज़िंदगी का जो मोड़ तुझे देर लगती दिख रही है, शायद वही परमेश्वर का सुरक्षित रास्ता है।

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