बाइबल व्याख्या

आमोस 7

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

तीन दर्शन, एक के बाद एक, और हर बार आमोस को कुछ ऐसा दिखाया जाता है जो देश को निगल सकता है: टिड्डियों का झुंड जो राजा की कटनी के बाद उगी हुई पिछली घास पर टूट पड़ता है, फिर आग जो महासागर तक सुखा देती है, और अंत में एक साहुल, एक सीधी लटकती डोरी, प्रभु के हाथ में। पहले दो दर्शनों पर आमोस बीच में कूदकर विनती करता है और यहोवा रुक जाते हैं; तीसरे पर वह चुप रह जाता है। इसके तुरंत बाद बेतेल का याजक अमस्याह राजा यारोबाम को खबर भेजता है और आमोस को देश से निकल जाने का हुक्म देता है, जिस पर आमोस अपनी बुलाहट की कहानी सुनाता है और अमस्याह के अपने घर पर एक भयानक वचन उतारता है।

मूल

ध्यान दीजिए कि परमेश्वर अपना निर्णय एक आदमी की पुकार पर बदल देते हैं। "हे परमेश्वर यहोवा, क्षमा कर! नहीं तो याकूब कैसे स्थिर रह सकेगा?" आमोस याकूब की योग्यता का हवाला नहीं देता, केवल उसकी निर्बलता का। और यहोवा पछताते हैं। यह कोई कमजोरी नहीं, यह वह हृदय है जो न्याय करने से पहले क्षमा करने का रास्ता खोजता है। पर तीसरे दर्शन में कुछ बदल जाता है: साहुल कोई हथियार नहीं, एक नापने का यंत्र है। परमेश्वर इस्राएल को अपनी ही सीध से नापते हैं, और दीवार टेढ़ी निकलती है। जहाँ माप का सवाल है, वहाँ विनती नहीं चलती; टेढ़ी दीवार के लिए प्रार्थना यह नहीं कर सकती कि वह सीधी कहलाए। अनुग्रह की सीमा परमेश्वर के धीरज में नहीं, हमारे सीधे होने से इनकार में है।

सूत्र

आमोस दो बार बीच में खड़ा होता है और परमेश्वर का हाथ थाम लेता है। यह भूमिका इस्राएल की कहानी में बार-बार लौटती है: मूसा सोने के बछड़े के बाद पहाड़ पर वैसे ही खड़ा होता है, और यहोवा वैसे ही "पछताते" हैं। मध्यस्थ होना परमेश्वर की योजना का हिस्सा है, न कि उसमें बाधा। पर आमोस की सीमा साफ है: तीसरे दर्शन में वह चुप हो जाता है, क्योंकि उसके पास न्याय को टालने के सिवा कुछ नहीं है, टेढ़ी दीवार को सीधा करने की शक्ति नहीं। यहीं वह खाली जगह बनती है जिसे मसीह भरते हैं। वे मध्यस्थ हैं जो केवल विनती नहीं करते, बल्कि दीवार को फिर से साहुल में लाते हैं, क्योंकि वे स्वयं वह सीध हैं जिससे हम नापे जाते हैं।

दर्पण

अमस्याह का वाक्य चुभता है: "यह राजा का पवित्रस्थान और राज-नगर है।" उसे परमेश्वर से कोई शिकायत नहीं, बस उस आवाज़ से, जो उसकी नौकरी, उसके संरक्षक और उसकी व्यवस्था को हिलाती है। हम भी यही करते हैं, बड़े भद्र तरीके से। जो उपदेश हमारे खर्च की आदतों को छूता है, हम उसे "संतुलित नहीं" कह देते हैं। जो सहकर्मी हमारे कार्यालय की चालाकी पर सवाल उठाता है, उसे "व्यवहार में कच्चा" ठहरा देते हैं। जो पत्नी या मित्र हमारे गुस्से का नाम लेता है, उसे हम बताते हैं कि वक्त गलत था। साहुल के सामने खड़े होने का मतलब है कि हम एक बार सुनना बंद करके नापने दें। आज ही उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसकी आखिरी खरी बात आपने टाल दी थी, और उसके नीचे वह वाक्य लिखिए जो उसने कहा था। बस इतना, आज।

प्रश्न

पद 17 को हल्का करने का कोई ईमानदार तरीका नहीं है। अमस्याह की पत्नी, उसके बेटे-बेटियाँ, उसकी ज़मीन: जिन्होंने आमोस को कभी नहीं रोका, वे उसी फैसले में खिंच जाते हैं। यह हमें अखरता है, और अखरना चाहिए। पवित्रशास्त्र यहाँ हमें यह नहीं समझाता कि परिवार दोषी था; वह केवल दिखाता है कि जब कोई अधिकार-प्राप्त व्यक्ति परमेश्वर के वचन का रास्ता रोकता है, तो उसका फल उसके अकेले तक सीमित नहीं रहता। पिता के निर्णय बच्चों के जीवन में उतरते हैं, यह प्राचीन इस्राएल की सच्चाई थी और हमारी भी है। परमेश्वर इसे अन्याय नहीं कहते, वे इसे यथार्थ कहते हैं। यहाँ पर रहस्य बना रहता है, और उसे भरने की कोई कोशिश इस वचन को उससे कम भारी बना देगी जितना यह है।

पहले श्रोता

यारोबाम दूसरे का इस्राएल समृद्ध था: सीमाएँ फैली हुईं, व्यापार चलता, बेतेल का मंदिर भरा हुआ। श्रोताओं के कानों में "राजा की कटनी" कोई कविता नहीं थी, वह एक वास्तविक व्यवस्था थी जिसमें राजा पहले काटता है और किसान बाद की पिछली घास पर जीता है। टिड्डियाँ उसी बची हुई घास पर पड़ती हैं, यानी मार सबसे निर्बल पर। और आमोस यहूदा से आया एक बाहरी आदमी था, दक्षिण की बोली में बोलता चरवाहा, जो उत्तर के सबसे प्रतिष्ठित मंदिर में खड़ा होकर राजघराने पर तलवार की बात करता है। सुननेवालों के लिए यह धर्म का मामला कम और राजनीति का ज़्यादा लगा होगा। इसीलिए अमस्याह "राजद्रोह" शब्द चुनता है; वही शब्द जो हर युग में असुविधाजनक भविष्यद्वक्ताओं पर चिपकाया जाता है।

एक बारीकी

आमोस अपने परिचय में एक विचित्र बात जोड़ता है: वह "गूलर के वृक्षों का छाँटनेवाला" था। गूलर के फल को पकने से पहले चीरना पड़ता था, वरना वह खाने लायक न होता; यह गरीबों का भोजन था और यह काम धूल और कीड़ों वाला था। आमोस यह ब्योरा विनम्रता दिखाने के लिए नहीं देता, बल्कि अपनी वैधता के दावे के तौर पर। अमस्याह ने कहा था, "वहीं रोटी खाया कर", जैसे भविष्यद्वाणी कमाई का धंधा हो। आमोस उत्तर देता है कि उसकी रोटी कहीं और से आती थी; उसने यह काम चुना नहीं, वह इसमें से खींचा गया। जिस आवाज़ को कोई वेतन नहीं खरीद सकता, उसे कोई हुक्म चुप भी नहीं करा सकता।

चिंतन

पहले दो दर्शनों में आमोस विनती करता है, तीसरे में नहीं। मेरे जीवन में कौन सी बात ऐसी है जिसके लिए मैं अब तक क्षमा माँगता आया हूँ, जबकि असल ज़रूरत सीधा किए जाने की है?

अमस्याह को परमेश्वर से नहीं, उस आवाज़ से डर था जो उसकी व्यवस्था हिलाती थी। पिछले महीने किस खरी बात को मैंने "गलत समय" कहकर टाला?

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The Message of Amos

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Joel and Amos: An Introduction and Commentary

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A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Hosea, Amos, Micah

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Amos 7 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

आमोस 7 का क्या अर्थ है?
तीन दर्शन, एक के बाद एक, और हर बार आमोस को कुछ ऐसा दिखाया जाता है जो देश को निगल सकता है: टिड्डियों का झुंड जो राजा की कटनी के बाद उगी हुई पिछली घास पर टूट पड़ता है, फिर आग जो महासागर तक सुखा देती है, और अंत में एक साहुल, एक सीधी लटकती डोरी, प्रभु के हाथ में। पहले दो दर्शनों पर आमोस बीच में कूदकर विनती करता है और यहोवा रुक जाते हैं; तीसरे पर वह चुप रह जाता है। इसके तुरंत बाद बेतेल का याजक अमस्याह राजा यारोबाम को खबर भेजता है और आमोस को देश से निकल जाने का हुक्म देता है, जिस पर आमोस अपनी बुलाहट की कहानी सुनाता है और अमस्याह के अपने घर पर एक भयानक वचन उतारता है।
आमोस 7 किस विषय में है?
आमोस दो बार बीच में खड़ा होता है और परमेश्वर का हाथ थाम लेता है। यह भूमिका इस्राएल की कहानी में बार-बार लौटती है: मूसा सोने के बछड़े के बाद पहाड़ पर वैसे ही खड़ा होता है, और यहोवा वैसे ही "पछताते" हैं। मध्यस्थ होना परमेश्वर की योजना का हिस्सा है, न कि उसमें बाधा। पर आमोस की सीमा साफ है: तीसरे दर्शन में वह चुप हो जाता है, क्योंकि उसके पास न्याय को टालने के सिवा कुछ नहीं है, टेढ़ी दीवार को सीधा करने की शक्ति नहीं। यहीं वह खाली जगह बनती है जिसे मसीह भरते हैं। वे मध्यस्थ हैं जो केवल विनती नहीं करते, बल्कि दीवार को फिर से साहुल में लाते हैं, क्योंकि वे स्वयं वह सीध हैं जिससे हम नापे जाते हैं।
आमोस 7 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
पद 17 को हल्का करने का कोई ईमानदार तरीका नहीं है। अमस्याह की पत्नी, उसके बेटे-बेटियाँ, उसकी ज़मीन: जिन्होंने आमोस को कभी नहीं रोका, वे उसी फैसले में खिंच जाते हैं। यह हमें अखरता है, और अखरना चाहिए। पवित्रशास्त्र यहाँ हमें यह नहीं समझाता कि परिवार दोषी था; वह केवल दिखाता है कि जब कोई अधिकार-प्राप्त व्यक्ति परमेश्वर के वचन का रास्ता रोकता है, तो उसका फल उसके अकेले तक सीमित नहीं रहता। पिता के निर्णय बच्चों के जीवन में उतरते हैं, यह प्राचीन इस्राएल की सच्चाई थी और हमारी भी है। परमेश्वर इसे अन्याय नहीं कहते, वे इसे यथार्थ कहते हैं। यहाँ पर रहस्य बना रहता है, और उसे भरने की कोई कोशिश इस वचन को उससे कम भारी बना देगी जितना यह है।
आमोस 7 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
आमोस अपने परिचय में एक विचित्र बात जोड़ता है: वह "गूलर के वृक्षों का छाँटनेवाला" था। गूलर के फल को पकने से पहले चीरना पड़ता था, वरना वह खाने लायक न होता; यह गरीबों का भोजन था और यह काम धूल और कीड़ों वाला था। आमोस यह ब्योरा विनम्रता दिखाने के लिए नहीं देता, बल्कि अपनी वैधता के दावे के तौर पर। अमस्याह ने कहा था, "वहीं रोटी खाया कर", जैसे भविष्यद्वाणी कमाई का धंधा हो। आमोस उत्तर देता है कि उसकी रोटी कहीं और से आती थी; उसने यह काम चुना नहीं, वह इसमें से खींचा गया। जिस आवाज़ को कोई वेतन नहीं खरीद सकता, उसे कोई हुक्म चुप भी नहीं करा सकता।
आमोस 7 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
अमस्याह को परमेश्वर से नहीं, उस आवाज़ से डर था जो उसकी व्यवस्था हिलाती थी। पिछले महीने किस खरी बात को मैंने "गलत समय" कहकर टाला?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Amos 7 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 9

धन्यवाद है आपका, कि आप झूठी भक्ति और ऊँचे स्थानों को सहन नहीं करते। जब आपने कहा कि "इसहाक के ऊँचे स्थान उजाड़ किए जाएँगे," तब भी आपने पहले चेतावनी दी। हमारे मन के छिपे हुए ऊँचे स्थानों को भी आप प्रेम से तोड़ते हैं, और हमें सच्ची आराधना की ओर लौटाते हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

क्या देखता हूँ कि प्रभु साहुल लिए हुए एक दीवार पर खड़ा है, जो साहुल लगाकर बनाई गई थी।" ध्यान दे, दीवार कभी सीधी ही बनी थी। धीरे धीरे झुकी, और किसी ने ध्यान न दिया। परमेश्वर दूसरों से तुलना करके नहीं, अपने सीधे सूत से नापता है। तू भी कहीं थोड़ा थोड़ा झुकता जा रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

अमस्याह ने आमोस से कहा, "हे दर्शी, यहूदा देश को भाग जा, और वहीं रोटी खाकर भविष्यद्वाणी किया कर।" उसने सोचा कि आमोस भी उसी की तरह रोटी के लिए बोलता है, इसलिए उसे खरीदा या भगाया जा सकता है। पर आमोस भेड़ चराता था, उसे परमेश्वर ने बुलाया था। आज भी लोग पूछते हैं, इससे तुझे क्या मिलेगा? और कभी कभी सच्चा उत्तर यही होता है, कुछ नहीं, पर यह मेरा बुलावा है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

अमस्याह ने आमोस के शब्द ठीक से दोहराए, "यारोबाम तलवार से मारा जाएगा, और इस्राएल अपनी भूमि पर से निश्चय बँधुआई में जाएगा।" पर उसने उन्हें चेतावनी नहीं, राजद्रोह समझा। परमेश्वर की बात सुनकर घुटने टेकने के बजाय उसने शिकायत दर्ज की। कभी सोचा है, जो वचन तुझे चुभता है, उसे तू सुधार मानता है या हमला?

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