बाइबल व्याख्या

एस्तेर 7

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

हामान के आँगन में पचास हाथ ऊँचा एक खम्भा खड़ा है। वह किसी और के लिए गढ़वाया गया था। अध्याय के अन्त तक उस पर वही लटका मिलता है जिसने उसे बनवाया।

दूसरे दिन की दावत में राजा तीसरी बार वही प्रश्न दुहराता है, "तेरा क्या निवेदन है?" और इस बार एस्तेर चुप नहीं रहती। वह अपने प्राणों और अपने लोगों के प्राणों की भीख माँगती है, और फिर वह नाम लेती है: "वह विरोधी और शत्रु यही दुष्ट हामान है।" राजा क्रोध में बाग में निकल जाता है, लौटता है, एक दृश्य का उलटा अर्थ लगाता है, और हामान का मुँह ढाँप दिया जाता है। दस पदों में साम्राज्य का दूसरा सबसे बड़ा आदमी मिट जाता है।

हृदय की बात

इस पूरे अध्याय में परमेश्वर का नाम एक बार भी नहीं आता। यहाँ, जहाँ बचाव घटता है, जहाँ पूरी जाति की जान बचती है, वहाँ भी कोई स्वर्गदूत नहीं, कोई भविष्यद्वक्ता नहीं, कोई चिन्ह नहीं। बस दाखमधु, समय, और एक गलत समझा गया इशारा। यह चुप्पी लापरवाही नहीं है; यह कहने का एक तरीका है।

एस्तेर जो माँगती है, उसके लिए इब्रानी शब्द है नेफेश, यानी प्राण, जान। "मुझे… प्राणदान मिले।" और सात पद बाद वही हामान खड़ा होता है, "एस्तेर रानी से प्राणदान माँगने को।" एक ही शब्द, दो होंठ। जिसने हज़ारों जानों का सौदा किया था, वह अपनी एक जान की भीख माँग रहा है। न्याय यहाँ कोई सिद्धान्त नहीं, वह प्राणों में गिना जाता है।

और ध्यान दीजिए कि राजा पश्चाताप नहीं करता। "राजा का गुस्सा ठंडा हो गया", बस इतना। परमेश्वर ऐसे लोगों के द्वारा भी बचाते हैं जो उन्हें जानते ही नहीं।

जोड़नेवाला सूत्र

पूरे शास्त्र में एक नमूना बार-बार दिखता है: जाल बुननेवाला अपने ही जाल में फँसता है। भजन 7 इसी को गाता है, कि जो गड्ढा खोदता है वह उसी में गिरता है। हामान का खम्भा उसी सत्य का सबसे नग्न रूप है।

पर सूत्र यहीं नहीं रुकता। एस्तेर जो करती है, वह मध्यस्थता है, और वह मुफ़्त नहीं। वह अपने लोगों से अपने को अलग नहीं करती: "मैं और मेरी जाति के लोग बेच डाले गए हैं।" वह रानी थी, वह चुप रह सकती थी, महल की दीवारें मोटी हैं। उसने अपना नाम उनके नाम के साथ जोड़ दिया।

और आगे एक और खम्भा है, जिस पर निर्दोष लटका, दोषियों की जगह। हामान अपने खम्भे पर न्याय पाता है; मसीह अपने खम्भे पर हमारा न्याय उठाते हैं। दोनों को एक साथ मत मिलाइए, पर दोनों को एक साथ देखिए।

दर्पण

चार अध्याय एस्तेर चुप रही। हम भी चुप रहते हैं। वह बात जो आपके परिवार में सब जानते हैं पर कोई कहता नहीं। वह आदत जिसे आप "थकान" कहते हैं। वह व्यक्ति जिसके बारे में आप अस्पष्ट भाषा में बात करते हैं, क्योंकि नाम लेना बहुत महँगा पड़ेगा।

और दूसरी ओर, हामान भी दर्पण है। हम सब मन में खम्भे बनवाते हैं। वह भाषण जो आप उस सहकर्मी को कभी देंगे। वह क्षण जिसकी आप कल्पना करते हैं जब उसकी पोल खुलेगी और आप सही साबित होंगे। पचास हाथ ऊँचा, बहुत मेहनत से बनाया गया, और अन्त में हमारे ही नीचे की ज़मीन खोखली कर देता है।

आज एक काग़ज़ लें और उस एक बात को लिखिए जिसे आप महीनों से अस्पष्ट रखे हुए हैं, बिना नाम, बिना ब्योरे के। और फिर वह काग़ज़ हाथ में लेकर परमेश्वर के सामने ऊँची आवाज़ में पढ़िए। एस्तेर की तरह, नाम लेकर।

श्रोतागण

पहले सुननेवाले वे यहूदी थे जो लौटे नहीं थे। फारस में बसे, फारसी बोलते, फारसी नाम रखते, मन्दिर से सैकड़ों कोस दूर। उनके पास न कोई भविष्यद्वक्ता था, न कोई चमत्कार, न कोई सेना। एक शाही आज्ञा उन्हें मिटा सकती थी और उनके पास कोई अपील नहीं थी।

ऐसे लोगों के लिए यह अध्याय दोहरा था। एक ओर पूरिम के उत्सव में जब यह ऊँची आवाज़ में पढ़ा जाता, तो पद 8 पर पूरी सभा हँसती: हामान जान बचाने के लिए झुका, और राजा ने कुछ और समझ लिया। यह जीवित बचे हुए लोगों की हँसी थी।

दूसरी ओर वे परमेश्वर की चुप्पी को पहचानते थे, क्योंकि वह उनकी रोज़ की चुप्पी थी। यह पुस्तक उनसे कहती है: वे बोलते नहीं, पर वे काम करते हैं।

प्रसंग

शूशन, क्षयर्ष का महल, ईसा पूर्व पाँचवीं सदी की शुरुआत। फारसी दावत में लोग बैठते नहीं, चौकियों पर अधलेटे होकर खाते थे। हामान जब प्राण की भीख माँगने के लिए एस्तेर की चौकी की ओर झुका, तो शायद उसने उसके पैर पकड़े। रानी को छूना मृत्युदण्ड था, और राजा ने ठीक वही देखा जो वह देखना चाहता था।

पद 8 का "मुँह ढाँप दिया" संयोग नहीं है; दण्डित व्यक्ति का मुँह ढाँकना उसका अन्त घोषित करना था। और हर्बोना का बोलना भी संयोग नहीं: दरबारी हवा का रुख पहचानते हैं। जो कल हामान के आगे झुकते थे, आज याद दिलाते हैं कि खम्भा किसके लिए बना था।

एस्तेर की स्थिति अब भी नाज़ुक है। वह तीन बार दरबारी शिष्टाचार की भाषा बोलती है, "यदि तू मुझ पर प्रसन्न है।" उसकी शक्ति उधार की है।

अंतर्पाठ

भजन 7 में दाऊद उस दुष्ट का वर्णन करता है जो गड्ढा खोदकर खुद उसी में गिरता है। एस्तेर 7 उस भजन का गद्य रूप है, बिना भजन की भाषा, बिना परमेश्वर के नाम के, पर ठीक उसी आकार में।

और मोर्दकै की वह चेतावनी याद कीजिए जो अध्याय 4 में आई थी: यदि तू चुप रहेगी, तो छुटकारा कहीं और से उठेगा, पर तू नष्ट हो जाएगी। अध्याय 7 इसका उत्तर है। छुटकारा आया, और वह एस्तेर के मुँह से आया। परमेश्वर को हमारी आवाज़ की ज़रूरत नहीं है। फिर भी वे उसे इस्तेमाल करना चुनते हैं, और यही इस चुप्पी का सबसे गहरा रहस्य है।

चिंतन के प्रश्न

इस अध्याय में परमेश्वर का नाम एक बार भी नहीं आता, फिर भी बचाव आता है। आपके जीवन के किस दौर को आप अब पीछे मुड़कर उनके अनाम काम के रूप में पहचानते हैं, और आप उस समय क्या देख नहीं पा रहे थे?

आपने किसके लिए मन में खम्भा बनवाया है, और यदि आप आज उस काम को रोक दें, तो वह खाली समय किसमें लगेगा?

Esther में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Esther

David Firth

Finds God's unseen hand in the one Bible book that never names him.

Esther

Karen Jobes

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

Esther: An Introduction and Commentary

Debra Reid

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

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Esther 7 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

एस्तेर 7 का क्या अर्थ है?
हामान के आँगन में पचास हाथ ऊँचा एक खम्भा खड़ा है। वह किसी और के लिए गढ़वाया गया था। अध्याय के अन्त तक उस पर वही लटका मिलता है जिसने उसे बनवाया।
एस्तेर 7 किस विषय में है?
पूरे शास्त्र में एक नमूना बार-बार दिखता है: जाल बुननेवाला अपने ही जाल में फँसता है। भजन 7 इसी को गाता है, कि जो गड्ढा खोदता है वह उसी में गिरता है। हामान का खम्भा उसी सत्य का सबसे नग्न रूप है।
एस्तेर 7 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज एक काग़ज़ लें और उस एक बात को लिखिए जिसे आप महीनों से अस्पष्ट रखे हुए हैं, बिना नाम, बिना ब्योरे के। और फिर वह काग़ज़ हाथ में लेकर परमेश्वर के सामने ऊँची आवाज़ में पढ़िए। एस्तेर की तरह, नाम लेकर।
एस्तेर 7 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पद 8 का "मुँह ढाँप दिया" संयोग नहीं है; दण्डित व्यक्ति का मुँह ढाँकना उसका अन्त घोषित करना था। और हर्बोना का बोलना भी संयोग नहीं: दरबारी हवा का रुख पहचानते हैं। जो कल हामान के आगे झुकते थे, आज याद दिलाते हैं कि खम्भा किसके लिए बना था।
एस्तेर 7 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपने किसके लिए मन में खम्भा बनवाया है, और यदि आप आज उस काम को रोक दें, तो वह खाली समय किसमें लगेगा?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Esther 7 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

हामान ने वह फाँसी का खम्भा अपने ही घर के आँगन में खड़ा किया था। रोज़ उसे देखकर खुश होता रहा होगा। पर जो नफ़रत हम दूसरों के लिए तैयार करते हैं, वह हमारे अपने घर के पास ही खड़ी रहती है। राजा ने कहा, "उसको उसी पर लटका दो।" आज किसी के लिए मन में कोई खम्भा गाड़ रखा है क्या? ज़रा देख, वह किसके आँगन में खड़ा है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

एस्तेर सालों तक चुप रही, अपनी पहचान छिपाए। पर आज वह कहती है, "क्योंकि मैं और मेरी जाति के लोग बेच डाले गए हैं।" वह खुद को अपने लोगों से अलग नहीं करती। महल की सुरक्षा में बैठकर वह उनके दुख को अपना दुख कहती है।

क्या आप किसी के दर्द को इतने पास से महसूस करते हैं कि उसे "हम" कह सकें?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 10

पिता, जो जाल दूसरों के लिए बिछाए जाते हैं, वे अक्सर बिछाने वाले को ही उलझा लेते हैं। जब मुझे लगता है कि बुराई जीत रही है, मुझे याद दिला कि तू चुपचाप न्याय कर रहा है। मेरे मन से बदले की आग निकाल दे, और मुझे तेरे समय पर भरोसा करना सिखा।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

राजा ने आधा राज्य देने की बात कही थी, पर एस्तेर ने न सोना माँगा, न पद: "मेरा प्राण मुझे दिया जाए; और मेरी प्रजा भी मुझे दी जाए।" वह महल में सुरक्षित थी, चुप रहकर बच सकती थी। पर उसने अपने लोगों से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया। सोच, तेरी चुप्पी आज किसे अकेला छोड़े हुए है?

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