बाइबल व्याख्या

निर्गमन 15:27

बाइबल
यह वचन Elim glorious church द्वारा समर्पित है

पाठ

तीन दिन की प्यास के बाद, मारा के कड़वे पानी और बड़बड़ाहट के बाद, एक छोटा-सा वाक्य आता है: "तब वे एलीम को आए, जहाँ पानी के बारह सोते और सत्तर खजूर के पेड़ थे; और वहाँ उन्होंने जल के पास डेरे खड़े किए।" कोई चमत्कार नहीं, कोई आज्ञा नहीं, कोई परीक्षा नहीं। बस पानी, छाया, और ठहराव।

मूल बात

यह आयत कुछ नहीं माँगती। उससे पहले की आयत में परमेश्वर ने शर्त रखी थी: यदि तू सुनेगा, यदि तू मानेगा। और फिर, बिना किसी शर्त के, एलीम। बारह सोते किसी ने कमाए नहीं। सत्तर खजूर किसी प्रार्थना के उत्तर में नहीं उगे; वे वहाँ वर्षों से खड़े थे, उस समय भी जब इस्राएल मिस्र में ईंटें बना रहा था। यही अनुग्रह का सबसे चुपचाप स्वरूप है: परमेश्वर ने आपके पहुँचने से बहुत पहले उस जगह को तैयार कर रखा था। हम अक्सर परमेश्वर को वहाँ ढूँढ़ते हैं जहाँ पानी कड़वे से मीठा होता है। पर वे वहाँ भी हैं जहाँ पानी बस मीठा है, और कोई कहानी नहीं बनती।

मुख्य सूत्र

छुटकारे की पूरी कहानी में एलीम जैसे पड़ाव बार-बार आते हैं। परमेश्वर अपनी प्रजा को मंज़िल तक एक ही छलाँग में नहीं पहुँचाते; वे उन्हें चरणों में ले चलते हैं, और बीच-बीच में विश्राम के द्वीप रखते हैं। गीत में मूसा ने गाया था कि परमेश्वर अपनी प्रजा को "अपने पवित्र निवास-स्थान को ले चला है" (15:13)। एलीम वह निवास-स्थान नहीं है। यह सिर्फ़ रास्ता है, पर ऐसा रास्ता जिस पर चलनेवाला अपने अगुवे का चेहरा पहचान सके। मसीह में यही धीरज पूरा होता है: वे चरवाहे हैं जो हमें हरे मैदानों से होकर ले जाते हैं, मंज़िल तक पहुँचाने से पहले ही हमें जिलाते हुए। एलीम वादा नहीं है; एलीम वादे की ख़ुशबू है।

दर्पण

हमें ठहरना नहीं आता। मारा में हम बड़बड़ाते हैं, और एलीम में बेचैन हो जाते हैं, क्योंकि जहाँ संकट नहीं, वहाँ हमें लगता है कि हम कुछ कर नहीं रहे। छुट्टी के दिन हम ईमेल खोलते हैं। बच्चे का हाथ पकड़े हुए हम अगले हफ़्ते की चिंता करते हैं। जो भला आज मिला है, उसे हम इसलिए नहीं चख पाते क्योंकि मन पहले से ही अगले जंगल में पहुँच चुका है। और एलीम के बाद सचमुच जंगल आता ही है, अध्याय सोलह में, भूख के साथ। पर इस्राएल को वहाँ का सामना वहीं करना था, यहाँ नहीं। आज, काग़ज़ के एक टुकड़े पर "एलीम" लिखिए, उसके नीचे आज की तारीख़, और वह एक चीज़ जो आपको बिना माँगे मिली है; फिर वह काग़ज़ वहाँ रखिए जहाँ कल सुबह आपकी नज़र पड़े।

एक बारीकी

"डेरे खड़े किए" के पीछे का इब्रानी शब्द हानाह है, जिसका अर्थ है झुकना, बैठ जाना, पड़ाव डालना। यह कोई स्थायी बसावट नहीं है; तंबू की रस्सियाँ फिर खुलेंगी। पर ध्यान दीजिए कि वे कहाँ झुके: "जल के पास"। उन्होंने तंबू ऊँचाई पर नहीं लगाए, जहाँ से दुश्मन दिखे; उन्होंने उसे पानी के किनारे लगाया। तीन दिन की प्यास के बाद आदमी पानी से दूर नहीं सोता। यह एक घायल मन की हरकत है, और परमेश्वर ने उसे होने दिया। वचन उन्हें वहाँ से तुरंत आगे नहीं धकेलता। कभी-कभी आत्मिक परिपक्वता का अर्थ यही होता है: जहाँ पानी है, वहीं डेरा डाल देना, और शर्मिंदा न होना।

श्रोताओं का चेहरा

जिन लोगों ने यह लिखा हुआ सुना, वे खुद जंगल के लोग थे या जंगल के बच्चे। उनके लिए बारह और सत्तर खोखली संख्याएँ नहीं थीं। बारह उनके गोत्रों की संख्या थी; सत्तर उन प्राणों की संख्या थी जो कभी याकूब के साथ मिस्र गए थे, और बाद में उन पुरनियों की जो मूसा के साथ पहाड़ पर गए। उन्होंने सुना: इस जगह में हमारी पूरी गिनती समाई हुई है। कोई गोत्र पानी के बिना नहीं रहा। एक ऐसे समाज में जहाँ मरुभूमि की यात्रा का मतलब था कि कमज़ोर पीछे छूट जाते हैं, यह आयत एक चुपचाप घोषणा थी: यहाँ सबके लिए काफ़ी है।

अंतर्पाठ

भजन तेईस में चरवाहा अपनी भेड़ों को शांत जल के किनारे ले चलता है और उनका प्राण बहाल करता है; वह भजन मानो एलीम की स्मृति से लिखा गया हो, क्योंकि वहाँ भी मंज़िल नहीं, रास्ते की देखभाल मुख्य बात है। और प्रकाशितवाक्य के आख़िरी अध्याय में फिर जल की धारा है और पेड़ जिनके पत्ते चंगाई के लिए हैं, वहाँ न प्यास बची है, न कूच। बीच में यह आयत खड़ी है, जिसमें पानी है पर तंबू भी; विश्राम है पर अस्थायी। यही हमारा वर्तमान है। परमेश्वर जिन्होंने मारा में कहा था कि वे चंगा करनेवाले हैं, एलीम में बिना कुछ कहे वही काम करते हैं।

चिंतन के प्रश्न

पिछले महीने का आपका एलीम कौन-सा था, और क्या आपने वहाँ सचमुच डेरा डाला या सिर्फ़ गुज़रते हुए उसे देखा?

जब परमेश्वर कुछ कहते नहीं, सिर्फ़ देते हैं, तो आप उनकी आवाज़ कैसे पहचानते हैं?

Exodus में और गहराई से जानें

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The Message of Exodus

Alec Motyer

Traces how God rescues a people for himself, from slavery to Sinai.

Exodus For You

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An accessible chapter by chapter guide that keeps pointing to Jesus.

Exodus: An Introduction and Commentary

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Exodus

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Exodus 15:27 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

निर्गमन 15:27 का क्या अर्थ है?
तीन दिन की प्यास के बाद, मारा के कड़वे पानी और बड़बड़ाहट के बाद, एक छोटा-सा वाक्य आता है: "तब वे एलीम को आए, जहाँ पानी के बारह सोते और सत्तर खजूर के पेड़ थे; और वहाँ उन्होंने जल के पास डेरे खड़े किए।" कोई चमत्कार नहीं, कोई आज्ञा नहीं, कोई परीक्षा नहीं। बस पानी, छाया, और ठहराव।
निर्गमन 15:27 किस विषय में है?
छुटकारे की पूरी कहानी में एलीम जैसे पड़ाव बार-बार आते हैं। परमेश्वर अपनी प्रजा को मंज़िल तक एक ही छलाँग में नहीं पहुँचाते; वे उन्हें चरणों में ले चलते हैं, और बीच-बीच में विश्राम के द्वीप रखते हैं। गीत में मूसा ने गाया था कि परमेश्वर अपनी प्रजा को "अपने पवित्र निवास-स्थान को ले चला है" (15:13)। एलीम वह निवास-स्थान नहीं है। यह सिर्फ़ रास्ता है, पर ऐसा रास्ता जिस पर चलनेवाला अपने अगुवे का चेहरा पहचान सके। मसीह में यही धीरज पूरा होता है: वे चरवाहे हैं जो हमें हरे मैदानों से होकर ले जाते हैं, मंज़िल तक पहुँचाने से पहले ही हमें जिलाते हुए। एलीम वादा नहीं है; एलीम वादे की ख़ुशबू है।
निर्गमन 15:27 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
"डेरे खड़े किए" के पीछे का इब्रानी शब्द हानाह है, जिसका अर्थ है झुकना, बैठ जाना, पड़ाव डालना। यह कोई स्थायी बसावट नहीं है; तंबू की रस्सियाँ फिर खुलेंगी। पर ध्यान दीजिए कि वे कहाँ झुके: "जल के पास"। उन्होंने तंबू ऊँचाई पर नहीं लगाए, जहाँ से दुश्मन दिखे; उन्होंने उसे पानी के किनारे लगाया। तीन दिन की प्यास के बाद आदमी पानी से दूर नहीं सोता। यह एक घायल मन की हरकत है, और परमेश्वर ने उसे होने दिया। वचन उन्हें वहाँ से तुरंत आगे नहीं धकेलता। कभी-कभी आत्मिक परिपक्वता का अर्थ यही होता है: जहाँ पानी है, वहीं डेरा डाल देना, और शर्मिंदा न होना।
निर्गमन 15:27 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन तेईस में चरवाहा अपनी भेड़ों को शांत जल के किनारे ले चलता है और उनका प्राण बहाल करता है; वह भजन मानो एलीम की स्मृति से लिखा गया हो, क्योंकि वहाँ भी मंज़िल नहीं, रास्ते की देखभाल मुख्य बात है। और प्रकाशितवाक्य के आख़िरी अध्याय में फिर जल की धारा है और पेड़ जिनके पत्ते चंगाई के लिए हैं, वहाँ न प्यास बची है, न कूच। बीच में यह आयत खड़ी है, जिसमें पानी है पर तंबू भी; विश्राम है पर अस्थायी। यही हमारा वर्तमान है। परमेश्वर जिन्होंने मारा में कहा था कि वे चंगा करनेवाले हैं, एलीम में बिना कुछ कहे वही काम करते हैं।
निर्गमन 15:27 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
जब परमेश्वर कुछ कहते नहीं, सिर्फ़ देते हैं, तो आप उनकी आवाज़ कैसे पहचानते हैं?
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Exodus 15 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 18

पिता, जब सब कुछ बदलता दिखता है, तब भी आपका राज्य कभी नहीं हिलता। मेरे डर, मेरी उलझनें, मेरा कल, सब आपके हाथ में है। मुझे याद दिलाइए कि आप ही सदा सर्वदा राजा हैं, और आपके साथ चलना ही मेरी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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