निर्गमन 15
पाठ
समुद्र के उस पार खड़े होकर मूसा और इस्राएली गाते हैं, और गीत की पहली पंक्ति ही निर्णायक है: "घोड़ों समेत सवारों को उसने समुद्र में डाल दिया है।" जो कुछ हुआ, उसका श्रेय किसी रणनीति या संयोग को नहीं, बल्कि परमेश्वर के दाहिने हाथ को दिया जाता है। गीत मिस्र की सेना के डूबने से शुरू होकर आगे बढ़ता है: पलिश्ती, एदोम, मोआब, कनान सब काँपेंगे, और परमेश्वर अपनी छुड़ाई हुई प्रजा को अपने "पवित्र निवास-स्थान" तक पहुँचाएगा। मिर्याम डफ लेकर स्त्रियों के साथ वही टेक दोहराती है। फिर अचानक स्वर बदल जाता है: तीन दिन बिना पानी, मारा का खारा पानी, बड़बड़ाहट, एक पौधा, और एक वचन, "मैं तुम्हारा चंगा करनेवाला यहोवा हूँ।" अंत में एलीम, बारह सोते और सत्तर खजूर।
मूल बात
यह अध्याय दो नामों को एक साथ रखता है, और वही इसका धड़कता हुआ हृदय है: "यहोवा योद्धा है" और "मैं तुम्हारा चंगा करनेवाला यहोवा हूँ।" जो परमेश्वर फ़िरौन के रथों को सीसे के समान डुबो देता है, वही परमेश्वर तीन दिन बाद खारे पानी के किनारे अपनी थकी हुई प्रजा के लिए झुकता है। हम इन दोनों को अलग-अलग खानों में रखना चाहते हैं, पर पाठ ऐसा करने नहीं देता। छुटकारा केवल किसी चीज़ से बचाया जाना नहीं है, वह किसी ओर ले जाया जाना भी है: "अपनी करुणा से तूने अपनी छुड़ाई हुई प्रजा की अगुआई की है।" और गीत का शिखर इतिहास से ऊपर उठ जाता है, "यहोवा सदा सर्वदा राज्य करता रहेगा।" मुक्ति का लक्ष्य स्वतंत्रता नहीं, उपासना है; राजा के पास पहुँचना है।
सूत्र
गीत का मध्यभाग एक अजीब काम करता है: वह भविष्य को भूतकाल में गाता है। कनान अभी जीता नहीं गया, पर गायक पहले से कहता है कि परमेश्वर अपनी प्रजा को "अपने निज भागवाले पहाड़ पर" बसाएगा। समुद्र के किनारे खड़े लोग सिय्योन के मंदिर तक देख लेते हैं। यही पैटर्न पूरे शास्त्र में फैलता है: एक निर्णायक छुटकारा, फिर उसके आधार पर एक लंबी यात्रा। इसलिए नया नियम यीशु मसीह के क्रूस और पुनरुत्थान को एक नया निर्गमन कहता है; लूका के सुसमाचार में रूपांतरण के पहाड़ पर मूसा और एलिय्याह यीशु से उनके "निर्गमन" की बात करते हैं, जिसे वे यरूशलेम में पूरा करने वाले थे। और जैसे यहाँ गीत उद्धार के तुरंत बाद आता है, वैसे ही मसीही जीवन भी कृतज्ञता के गीत से शुरू होता है, कर्तव्य से नहीं।
दर्पण
ध्यान दीजिए कि गीत और बड़बड़ाहट के बीच केवल तीन दिन हैं। वही गला जो "यहोवा योद्धा है" गा रहा था, अब पूछता है, "हम क्या पीएँ?" यह हमें शर्मिंदा करने के लिए नहीं लिखा गया, बल्कि इसलिए कि हम स्वयं को पहचान लें। आपने भी देखा होगा: नौकरी मिल गई, रिपोर्ट साफ आई, रिश्ता बच गया, और आपने सच्चे मन से धन्यवाद दिया। फिर महीने भर बाद कोई छोटी सी कमी, एक खारा घूँट, और भीतर का सारा भरोसा सूख गया। मारा यह कहता है कि आपकी विश्वासहीनता आपको परमेश्वर की देखभाल से बाहर नहीं कर देती; वहाँ भी उन्होंने पौधा दिखाया। आज यह कीजिए: जो एक ठोस छुटकारा परमेश्वर ने आपके जीवन में पिछले साल किया, उसे एक वाक्य में कागज़ पर लिखिए और उसे उस जगह रखिए जहाँ आपकी नज़र रोज़ पड़े।
प्रश्न
पर डूबते हुए मिस्री भी तो मनुष्य थे। गीत उनके मरने पर खुशी मनाता है, और वह खुशी हमें असहज करती है। पाठ इसे नरम नहीं करता; वह शत्रु के अपने शब्द उद्धृत करता है, "मैं लूट के माल को बाँट लूँगा," ताकि स्पष्ट हो कि यहाँ मासूम लोग नहीं, एक लुटेरी व्यवस्था डूब रही है। फिर भी प्रश्न बचा रहता है। शायद इसका ईमानदार उत्तर यह है: जिन्होंने चार सौ साल ईंटें बनाई हैं, उनके गीत को हम, जो कभी गुलाम नहीं रहे, आसानी से न्याय नहीं कर सकते। उत्पीड़ितों के मुँह में न्याय का गीत भजन होता है; सुविधाभोगियों के मुँह में वही गीत क्रूरता बन सकता है। अंतर यह है कि आप समुद्र के किस किनारे खड़े हैं।
अंतर्पाठ
यह गीत इस्राएल की स्मृति में गूँजता रहा। भजनकार बार-बार लाल समुद्र पर लौटते हैं, और यशायाह निर्वासन में रहनेवालों से कहता है कि जिस भुजा ने समुद्र सुखाया था वही भुजा फिर काम करेगी; यानी निर्गमन एक बार का किस्सा नहीं, परमेश्वर के काम करने का ढंग है। पौलुस कुरिन्थियों को चेतावनी देते हुए याद दिलाता है कि वे सब समुद्र के बीच से पार हुए, फिर भी जंगल में गिर पड़े; गीत गा लेना मंज़िल की गारंटी नहीं। और सबसे चौंकानेवाली गूँज प्रकाशितवाक्य में है, जहाँ विजयी लोग काँच के समुद्र के किनारे खड़े होकर "मूसा का गीत और मेम्ने का गीत" गाते हैं। वही प्रश्न, "देवताओं में तेरे तुल्य कौन है?", इतिहास के अंत तक गाया जाता रहेगा।
श्रोता
जिन्होंने यह गीत पहली बार पीढ़ी दर पीढ़ी गाया, वे मिस्र के उत्पीड़न को जानते थे और कनान की सीमाओं पर रहनेवाली जातियों को भी। "यहोवा योद्धा है" उनके कानों में धर्मशास्त्र का सूत्र नहीं, राजनीतिक घोषणा थी: फ़िरौन, जो स्वयं को देवता कहता था, पानी में सीसे की तरह बैठ गया। पलिश्ती, एदोम, मोआब, कनान का क्रम कोई अनजाना नक्शा नहीं था, वह उनकी आनेवाली यात्रा का मार्ग था। और मारा का वचन, "मैं तुम्हारा चंगा करनेवाला यहोवा हूँ," उन लोगों के लिए था जिन्होंने अभी-अभी मिस्र पर पड़ी विपत्तियाँ अपनी आँखों से देखी थीं। चंगाई का वादा खोखला नहीं था; इसके पीछे दस विपत्तियों की स्मृति खड़ी थी।
चिंतन
आपके जीवन में इस समय "मारा" कहाँ है, वह खारा घूँट जिसे आप पी नहीं पा रहे, और क्या आपने उसके विषय में परमेश्वर से सीधे दुहाई दी है या केवल दूसरों के सामने बड़बड़ाए हैं?
यदि मुक्ति का लक्ष्य उपासना है, तो आपकी पिछली एक छुड़ाई हुई घटना ने आपके गाने, देने या सेवा करने में कौन सा ठोस फर्क डाला?
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इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, जब सब कुछ बदलता दिखता है, तब भी आपका राज्य कभी नहीं हिलता। मेरे डर, मेरी उलझनें, मेरा कल, सब आपके हाथ में है। मुझे याद दिलाइए कि आप ही सदा सर्वदा राजा हैं, और आपके साथ चलना ही मेरी सबसे बड़ी सुरक्षा है।
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