निर्गमन 11
पाठ
आधी रात से ठीक पहले का मिस्र। परमेश्वर मूसा के कान में एक आख़िरी बात डालते हैं: "एक और विपत्ति मैं फ़िरौन और मिस्र देश पर डालता हूँ, उसके पश्चात् वह तुम लोगों को वहाँ से जाने देगा।" इस्राएलियों को कहा जाता है कि वे अपने पड़ोसियों से सोने-चाँदी के गहने माँग लें, और मिस्री उन्हें देने को तैयार हो जाते हैं। फिर मूसा फ़िरौन के सामने खड़ा होकर घोषणा करता है कि आधी रात को सिंहासन के पहलौठे से लेकर चक्की पीसनेवाली दासी के पहलौठे तक, सब मर जाएँगे, पर इस्राएल पर "कोई कुत्ता भी न भौंकेगा।" यह कहकर मूसा क्रोध में भरा हुआ महल से निकल जाता है, और परमेश्वर फ़िरौन का मन और कठोर कर देते हैं।
मर्म
इस अध्याय का धड़कता हुआ केंद्र वचन 7 में है: "मिस्रियों और इस्राएलियों में मैं यहोवा अन्तर करता हूँ।" यह केवल सुरक्षा का वादा नहीं, बल्कि एक धार्मिक दावा है। परमेश्वर तटस्थ नहीं हैं। वे इतिहास के ऊपर तैरते हुए दर्शक नहीं, बल्कि उसके भीतर चलनेवाले न्यायी हैं, जो "मिस्र देश के बीच में होकर" गुज़रते हैं। और उनका न्याय सिंहासन और चक्की, दोनों तक पहुँचता है; सत्ता की ऊँचाई भी बचा नहीं पाती, और ग़ुलामी की गहराई भी छिपा नहीं पाती। पहलौठा मिस्र का भविष्य था, उसकी उत्तराधिकार-रेखा, उसका कल। परमेश्वर वहीं हाथ रखते हैं। जिस देश ने इब्री बच्चों को नील में डुबोया था, उसी देश के बच्चों पर अब वही तराज़ू झुकता है। यह भयानक है, और इसे कम करके बताना बेईमानी होगी। पर यही वह परमेश्वर हैं जो दबे हुओं की चीख़ को भूलते नहीं।
सूत्र
इस अध्याय की भाषा बाद में फिर सुनाई देती है, पर उलटी हुई। यहाँ पहलौठा मरता है ताकि दास छूटे; बाद में परमेश्वर का अपना पहलौठा मरता है ताकि दास छूटें। पौलुस मसीह को "पहलौठा" कहता है, और यह संयोग नहीं। निर्गमन की यह रात वह साँचा गढ़ती है जिसमें पूरा छुटकारा ढाला जाएगा: न्याय टलता नहीं, वह किसी और पर पड़ता है। ध्यान दीजिए कि इस्राएल अपनी नैतिक श्रेष्ठता के कारण नहीं बचता। अगले अध्याय में स्पष्ट होगा कि जो चीज़ अन्तर करती है वह चौखट पर लगा लहू है, न कि इब्री ख़ून। "अन्तर" परमेश्वर करते हैं, और वे उसे बलिदान के द्वारा करते हैं। यही अनुग्रह का आदिम आकार है, और गोलगोथा तक यही रेखा सीधी चलती जाती है।
दर्पण
हम में से बहुतों को वचन 10 काँटे की तरह चुभता है: "यहोवा ने फ़िरौन का मन और कठोर कर दिया।" हम चाहते हैं कि परमेश्वर हमारी न्याय-भावना के सामने सफ़ाई दें। पर यह अध्याय सफ़ाई नहीं देता; वह हमें दिखाता है कि दस बार मौक़ा मिलने के बाद भी एक आदमी अपने इनकार में इतना जम सकता है कि वह इनकार उसकी हड्डी बन जाए। सोचिए उस बात पर जिसे आप वर्षों से "बाद में देखेंगे" कहते आ रहे हैं: वह माफ़ी जो आप नहीं माँगते, वह लत जिसे आप संभाला हुआ कहते हैं, वह रिश्ता जिसे आप ठंडा पड़ने देते हैं क्योंकि झुकना भारी लगता है। हर टाल-मटोल दिल को थोड़ा और कठोर बनाती है। मूसा का क्रोध भी दर्पण है: विश्वास हमेशा शांत नहीं होता।
आज, दस मिनट के भीतर: उस एक व्यक्ति का नाम काग़ज़ पर लिखिए जिसके सामने आप सालों से झुकने को तैयार नहीं हुए, और उस नाम पर ऊँची आवाज़ में प्रार्थना कीजिए कि परमेश्वर आपका मन कठोर न होने दें।
संदर्भ
यह दृश्य मिस्र के राजमहल में घटता है, संभवतः नील डेल्टा में, जहाँ फ़िरौन को केवल राजा नहीं बल्कि देवता माना जाता था, सूर्य-देवता का पुत्र, जिसका शरीर मिस्र की व्यवस्था को थामे रखता था। उसका पहलौठा अगला जीवित देवता था। इसलिए दसवीं विपत्ति राजनीतिक चोट से कहीं गहरी है; यह मिस्र के धर्मशास्त्र के हृदय में छुरा है। दूसरी ओर इस्राएली ईंटें बनानेवाले दास हैं, समाज के सबसे नीचे। और ठीक यही तस्वीर पलटती है: वचन 3 कहता है कि मूसा "फ़िरौन के कर्मचारियों और साधारण लोगों की दृष्टि में अति महान था।" जिस दास-जाति का नेता कभी भागा हुआ अपराधी था, वह अब दरबार में वज़न रखता है। परमेश्वर ने धरातल हिला दिया है, और सब इसे महसूस कर रहे हैं।
अंतर्पाठ
निर्गमन 4:22 में परमेश्वर फ़िरौन से कहलवाते हैं कि इस्राएल "मेरा पहलौठा पुत्र" है, और चेतावनी देते हैं कि यदि तू मेरे पुत्र को न जाने देगा तो तेरे पुत्र का क्या होगा। अध्याय 11 उसी वाक्य का पूरा होना है; परमेश्वर बिना चेतावनी के प्रहार नहीं करते। दूसरा प्रतिध्वनि-स्थल निर्गमन 1 है, जहाँ फ़िरौन ने आदेश दिया था कि हर इब्री लड़का नील में फेंका जाए। वहाँ माताओं का हाहाकार था जिसे किसी ने दर्ज नहीं किया; यहाँ "सारे मिस्र देश में बड़ा हाहाकार मचेगा।" बाइबल यह नहीं कहती कि दोनों बराबर हैं, पर वह दिखाती है कि जो चीख़ें इतिहास की किताबों से गायब कर दी जाती हैं, वे परमेश्वर के कानों से गायब नहीं होतीं।
मुख्य पात्र
महल से बाहर निकलता हुआ मूसा इस अध्याय की सबसे मानवीय छवि है: "यह कहकर मूसा बड़े क्रोध में फ़िरौन के पास से निकल गया।" यह वही आदमी है जो कभी जलती झाड़ी के सामने हकलाता था, जो कहता था कि मैं बोल नहीं सकता। अब वह देवता-राजा के मुँह पर उसकी मौत की घोषणा करता है और गुस्से में पीठ फेर लेता है। उसका क्रोध घमंड नहीं है; यह उस आदमी का क्रोध है जिसने अपने लोगों की पीठ पर कोड़े देखे हैं और अब एक ऐसे हठ को देख रहा है जो हज़ारों घरों को कब्र तक ले जाएगा। परमेश्वर के साथ लंबा चलना आपको ठंडा नहीं बनाता। वह आपको उन चीज़ों पर जलना सिखाता है जिन पर परमेश्वर जलते हैं।
चिंतन
आपके जीवन में कौन सी एक बात है जिसे आप बार-बार टालते आए हैं, और क्या आप ईमानदारी से कह सकते हैं कि उस विषय में आपका दिल पहले से नरम है, कठोर नहीं?
"मैं यहोवा अन्तर करता हूँ" सुनकर आपके भीतर पहले क्या उठता है: सुरक्षा का आराम, या यह बेचैनी कि यह अन्तर आपकी योग्यता पर नहीं टिका?
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Exodus 11 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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निर्गमन 11 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
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Exodus 11 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
और सारे मिस्र देश में ऐसा बड़ा हाहाकार मचेगा, कि न तो वैसा कभी हुआ है और न फिर कभी होगा।" सोचो, कभी इस्राएल की चीख मिस्र में गूँजी थी, जब नील नदी में उनके बच्चे फेंके गए। परमेश्वर ने वह चीख भुलाई नहीं थी। जिसे दुनिया अनसुना कर देती है, वह उसे गिनता है। तुम्हारा आँसू भी उसके सामने दर्ज है।
पिता, कभी लगता है कि इंतज़ार कभी खत्म नहीं होगा। पर तू जानता है कि छुटकारा कब आएगा, और तेरा समय कभी देर नहीं करता। जहाँ मेरा मन थक गया है, वहाँ मुझे भरोसा दे कि तू आखिरी कदम भी उठाएगा और मुझे बाहर ले आएगा।
फ़िरौन जो सिंहासन पर विराजमान है, उसके पहलौठे से लेकर चक्की पीसनेवाली दासी के पहलौठे तक" सब पर वही रात आई। सिंहासन और चक्की के बीच का फ़ासला मिट गया। ओहदा किसी को नहीं बचा सका, बचाया सिर्फ़ मेम्ने के लहू ने। तू भी अपनी हैसियत पर भरोसा कर रहा है या उस लहू पर?
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