बाइबल व्याख्या

यहेजकेल 41

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

माप की छड़ लिए वह पुरुष यहेजकेल को मन्दिर के भीतर ले जाता है: द्वार, खम्भे, चालीस हाथ लम्बा और बीस हाथ चौड़ा मुख्य कक्ष, फिर भीतर का बीस हाथ का चौकोर कमरा। तीन मंज़िला बाहरी कोठरियाँ, तख़्ताबन्दी, झिलमिलीदार खिड़कियाँ, और दीवारों पर करूबों और खजूर के पेड़ों की खुदाई सब नाप लिया जाता है। पूरे अध्याय में वह मार्गदर्शक केवल दो बार बोलता है: एक बार भीतरी कक्ष पर, "यह तो परमपवित्र स्थान है," और एक बार काठ की उस छोटी वेदी पर, "यह तो यहोवा के सम्मुख की मेज है।"

मर्म

संख्याओं की इस सूखी सूची में वे दो वाक्य ही पूरे अध्याय का भार उठाते हैं। पवित्रता और भोजन। दूरी और निमंत्रण। ध्यान दीजिए कि यहेजकेल स्वयं परमपवित्र स्थान में नहीं जाता; वह पुरुष भीतर जाता है, मापता है, और बाहर आकर बताता है कि वह क्या है। परमेश्वर की पवित्रता कोई भावना नहीं, वह हाथों में नापी जा सकनेवाली सीमा है, और उस सीमा के भीतर याजक यहेजकेल भी खड़ा नहीं हो सकता। और फिर, उसी घर में, काठ की एक मेज़। जो परमेश्वर अपने घर की दीवारें छः हाथ मोटी बनवाते हैं, वही अपने घर में खाने की मेज़ रखवाते हैं। यह विरोधाभास नहीं, यह सुसमाचार का ढाँचा है।

जोड़नेवाला सूत्र

दीवारों पर क्या खुदा है, यह संयोग नहीं: "उसमें करूब और खजूर के पेड़ ऐसे खुदे हुए थे कि दो-दो करूबों के बीच एक-एक खजूर का पेड़ था।" उत्पत्ति के तीसरे अध्याय में करूब अदन के द्वार पर पहरेदार हैं, हाथ में धधकती तलवार, और पेड़ तक पहुँचने का रास्ता बन्द। यहाँ वही करूब दीवार की सजावट बन गए हैं, और खजूर के पेड़ भीतर, घर के अन्दर, फ़र्श से लेकर द्वार के ऊपर तक। पहरेदार अब भीतर खड़े हैं, रोकने के लिए नहीं, स्वागत की शोभा के लिए। यह उस बग़ीचे की वापसी है जिससे मनुष्य निकाला गया था।

और वह मार्गदर्शक जो अकेले परमपवित्र स्थान में जाता है और बाहर आकर गवाही देता है? यूहन्ना के सुसमाचार में यीशु मन्दिर के विषय में कहते हैं कि इसे ढा दो, और तीन दिन में वे इसे खड़ा कर देंगे, और यूहन्ना जोड़ता है कि वे अपनी देह के मन्दिर की बात कर रहे थे। यहेजकेल को घर का नक़्शा मिला; हमें वह देह मिली जिसमें वह नक़्शा माँस और लहू बन गया।

दर्पण

माप की छड़ हमें असहज करती है, क्योंकि हम मापे जाना पसन्द नहीं करते। दफ़्तर में समीक्षा, घर में तुलना, अपनी देह का आकार, महीने के अन्त में बचत का आँकड़ा; हम जीवन भर नापे जाते हैं और भीतर से थके हुए हैं। पर यहाँ जो नापा जा रहा है वह आप नहीं, परमेश्वर का घर है। वे अपनी पवित्रता को गंभीरता से लेते हैं, आपकी योग्यता को नहीं। दूसरी ओर, वह मेज़ हमारी एक और गहरी चोरी को उजागर करती है: हम पवित्रता के बिना निकटता चाहते हैं, और निकटता के बिना पवित्रता का दिखावा करते हैं। जिस मेज़ पर परमेश्वर बैठाते हैं, वहाँ हम अपनी पसन्द के मेहमान चुनना चाहते हैं।

आज रात खाने से पहले अपने भोजन की मेज़ पर हाथ रखकर ऊँची आवाज़ में कहिए, "यह तो यहोवा के सम्मुख की मेज है," और वहीं खड़े-खड़े उस एक व्यक्ति का नाम लेकर प्रार्थना कीजिए जिसे आप इस मेज़ पर बैठाना नहीं चाहते।

शास्त्र की गूँज

सुलैमान के मन्दिर के विवरण में भी करूब और खजूर के पेड़ खुदे थे, और भीतरी कक्ष वैसा ही चौकोर था। यहेजकेल का दर्शन शून्य से कुछ नया नहीं गढ़ता; वह उस घर की स्मृति को उठाता है जो जल चुका था, और कहता है: यह ख़त्म नहीं हुआ। दूसरी ओर, प्रकाशितवाक्य के अन्तिम अध्यायों में नया यरूशलेम भी नापा जाता है, चौकोर, ठीक जैसे यहाँ परमपवित्र स्थान बीस पर बीस है, पर वहाँ कोई मन्दिर नहीं दिखता, क्योंकि परमेश्वर और मेम्ना ही मन्दिर हैं। यहेजकेल का नक़्शा एक दिशा-सूचक है: पूरा शहर ही परमपवित्र स्थान बन जाएगा, और जिस कमरे में याजक भी नहीं घुस सका, वहाँ परमेश्वर की सारी प्रजा रहेगी।

पृष्ठभूमि

यह दर्शन निर्वासन के पच्चीसवें वर्ष का है, यरूशलेम के गिरने के लगभग चौदह साल बाद। यहेजकेल याजक है, पर बेबीलोन में, जहाँ उसके पास मन्दिर नहीं, वेदी नहीं, बलि नहीं, केवल एक पेशा है जिसका अब कोई कार्यक्षेत्र नहीं बचा। उसके चारों ओर बेबीलोन के भव्य मन्दिर खड़े हैं, विजेता देवताओं के घर, और उसके अपने परमेश्वर का घर मलबा है। ऐसे आदमी को नक़्शा दिया जाता है, माप के साथ, इतनी बारीकी से कि दीवार की मोटाई और खिड़की की बनावट तक गिनी गई है। यह क्रूरता नहीं, दया है: नक़्शा उसी को दिया जाता है जिससे भविष्य की आशा की जाती है।

कठिन प्रश्न

यह मन्दिर कभी नहीं बना। निर्वासन से लौटे लोगों ने जो घर खड़ा किया, वह इन मापों से मेल नहीं खाता, और आज तक नहीं खाया। तो परमेश्वर ने ऐसा नक़्शा क्यों दिया जिसे किसी ने नहीं बनाया? सहज उत्तर है कि यह सब मसीह में पूरा हुआ, और वह उत्तर झूठा नहीं है। पर ईमानदारी यह भी कहती है कि यह अध्याय ईंट, लकड़ी और हाथों में बात करता है, और उसकी ठोस देह को आत्मिक अर्थ में घोल देना पाठ का अपमान है। सम्भवतः बात यही है: परमेश्वर ऐसा घर वर्णित करते हैं जिसे मनुष्य बना नहीं सकता, ताकि हम समझें कि उसे बनानेवाले वे ही हैं। हमें नक़्शा सौंपा गया, निर्माण-ठेका नहीं। इस रहस्य में कुछ बेचैनी बची रहती है, और उसे बची रहने देना चाहिए।

चिन्तन के प्रश्न

जिस परमपवित्र स्थान में यहेजकेल स्वयं नहीं जा सका, उसके भीतर मसीह के द्वारा प्रवेश पाने का अर्थ आपके आज के दिन के लिए व्यावहारिक रूप से क्या है?

आपके जीवन में कोई ऐसी "मेज़" है जिसे आप परमेश्वर के सम्मुख की मेज़ मानने से बचते हैं, और क्यों?

Ezekiel में और गहराई से जानें

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The Message of Ezekiel

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Ezekiel

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Ezekiel 41 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

यहेजकेल 41 का क्या अर्थ है?
माप की छड़ लिए वह पुरुष यहेजकेल को मन्दिर के भीतर ले जाता है: द्वार, खम्भे, चालीस हाथ लम्बा और बीस हाथ चौड़ा मुख्य कक्ष, फिर भीतर का बीस हाथ का चौकोर कमरा। तीन मंज़िला बाहरी कोठरियाँ, तख़्ताबन्दी, झिलमिलीदार खिड़कियाँ, और दीवारों पर करूबों और खजूर के पेड़ों की खुदाई सब नाप लिया जाता है। पूरे अध्याय में वह मार्गदर्शक केवल दो बार बोलता है: एक बार भीतरी कक्ष पर, "यह तो परमपवित्र स्थान है," और एक बार काठ की उस छोटी वेदी पर, "यह तो यहोवा के सम्मुख की मेज है।"
यहेजकेल 41 किस विषय में है?
दीवारों पर क्या खुदा है, यह संयोग नहीं: "उसमें करूब और खजूर के पेड़ ऐसे खुदे हुए थे कि दो-दो करूबों के बीच एक-एक खजूर का पेड़ था।" उत्पत्ति के तीसरे अध्याय में करूब अदन के द्वार पर पहरेदार हैं, हाथ में धधकती तलवार, और पेड़ तक पहुँचने का रास्ता बन्द। यहाँ वही करूब दीवार की सजावट बन गए हैं, और खजूर के पेड़ भीतर, घर के अन्दर, फ़र्श से लेकर द्वार के ऊपर तक। पहरेदार अब भीतर खड़े हैं, रोकने के लिए नहीं, स्वागत की शोभा के लिए। यह उस बग़ीचे की वापसी है जिससे मनुष्य निकाला गया था।
यहेजकेल 41 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
माप की छड़ हमें असहज करती है, क्योंकि हम मापे जाना पसन्द नहीं करते। दफ़्तर में समीक्षा, घर में तुलना, अपनी देह का आकार, महीने के अन्त में बचत का आँकड़ा; हम जीवन भर नापे जाते हैं और भीतर से थके हुए हैं। पर यहाँ जो नापा जा रहा है वह आप नहीं, परमेश्वर का घर है। वे अपनी पवित्रता को गंभीरता से लेते हैं, आपकी योग्यता को नहीं। दूसरी ओर, वह मेज़ हमारी एक और गहरी चोरी को उजागर करती है: हम पवित्रता के बिना निकटता चाहते हैं, और निकटता के बिना पवित्रता का दिखावा करते हैं। जिस मेज़ पर परमेश्वर बैठाते हैं, वहाँ हम अपनी पसन्द के मेहमान चुनना चाहते हैं।
यहेजकेल 41 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
सुलैमान के मन्दिर के विवरण में भी करूब और खजूर के पेड़ खुदे थे, और भीतरी कक्ष वैसा ही चौकोर था। यहेजकेल का दर्शन शून्य से कुछ नया नहीं गढ़ता; वह उस घर की स्मृति को उठाता है जो जल चुका था, और कहता है: यह ख़त्म नहीं हुआ। दूसरी ओर, प्रकाशितवाक्य के अन्तिम अध्यायों में नया यरूशलेम भी नापा जाता है, चौकोर, ठीक जैसे यहाँ परमपवित्र स्थान बीस पर बीस है, पर वहाँ कोई मन्दिर नहीं दिखता, क्योंकि परमेश्वर और मेम्ना ही मन्दिर हैं। यहेजकेल का नक़्शा एक दिशा-सूचक है: पूरा शहर ही परमपवित्र स्थान बन जाएगा, और जिस कमरे में याजक भी नहीं घुस सका, वहाँ परमेश्वर की सारी प्रजा रहेगी।
यहेजकेल 41 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यह मन्दिर कभी नहीं बना। निर्वासन से लौटे लोगों ने जो घर खड़ा किया, वह इन मापों से मेल नहीं खाता, और आज तक नहीं खाया। तो परमेश्वर ने ऐसा नक़्शा क्यों दिया जिसे किसी ने नहीं बनाया? सहज उत्तर है कि यह सब मसीह में पूरा हुआ, और वह उत्तर झूठा नहीं है। पर ईमानदारी यह भी कहती है कि यह अध्याय ईंट, लकड़ी और हाथों में बात करता है, और उसकी ठोस देह को आत्मिक अर्थ में घोल देना पाठ का अपमान है। सम्भवतः बात यही है: परमेश्वर ऐसा घर वर्णित करते हैं जिसे मनुष्य बना नहीं सकता, ताकि हम समझें कि उसे बनानेवाले वे ही हैं। हमें नक़्शा सौंपा गया, निर्माण-ठेका नहीं। इस रहस्य में कुछ बेचैनी बची रहती है, और उसे बची रहने देना चाहिए।
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Ezekiel 41 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 23

मन्दिर और पवित्रस्थान के दो-दो किवाड़ थे।" इस लम्बी नापजोख के बीच परमेश्वर किवाड़ों का भी ज़िक्र करता है। किवाड़ दो काम करते हैं, वे भीतर आने देते हैं और वे रोकते भी हैं। पवित्रता कोई ठंडी दीवार नहीं, वह एक द्वार है। सोचो, तुम्हारे जीवन में कौन सा किवाड़ है जिसे खोलने से तुम डरते हो, और क्या वह ठीक वही जगह है जहाँ परमेश्वर खड़ा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

भवन का पूर्व की ओर का सामना और आँगन सौ हाथ चौड़ा था।" सुनने में यह सिर्फ नाप है। पर जो लोग बंधुआई में बैठे थे, उनके लिए हर हाथ एक वादा था। परमेश्वर उसी की नाप लेता है जिसे वह सचमुच बनाने वाला है। और पूर्व की ओर, जहाँ से सूरज उगता है, वहीं से उसका तेज लौटकर आया। तेरे टूटे हुए हिस्से को भी वह नाप रहा है।

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