बाइबल व्याख्या

एज्रा 8:13

बाइबल
यह वचन CITY LIFE REVIVAL MINISTRIES द्वारा समर्पित है

पाठ

अदोनीकाम के घराने की सूची में एक अजीब सा वाक्यांश छिपा है: "जो पीछे गए।" एज्रा नाम गिनवाते हुए एलीपेलेत, यूएल और शमायाह तक पहुँचते हैं, और उनके साथ साठ पुरुष। बाकी दलों का परिचय सीधा है, "अमुक के वंश में से अमुक, उसके संग इतने पुरुष," पर यहाँ लेखक रुककर एक टिप्पणी जोड़ता है। ये वे हैं जो देर से आए। अदोनीकाम का परिवार तो लगभग अस्सी साल पहले, जरुब्बाबेल के साथ पहले जत्थे में ही लौट चुका था; ये उसी घराने के बचे हुए लोग हैं, जो पिछड़ गए थे, जो उस पहली लहर में शामिल नहीं हुए। और अब, दूसरी बार जब यात्रा का दरवाज़ा खुलता है, ये तीन नाम और उनके साठ साथी उसमें से निकलते हैं।

मर्म

इब्रानी में जो शब्द है, अहरोनीम, उसका अर्थ है "बाद वाले," "पिछले।" यह कोई प्रशंसा का शब्द नहीं है। इसमें एक हल्की सी शर्मिंदगी की आहट है: तुम पहले क्यों नहीं आए? पर ध्यान दीजिए कि एज्रा उन्हें सूची से बाहर नहीं रखते, न ही किसी निचले दर्जे में डालते हैं। वे उनके नाम लिखते हैं, पूरे सम्मान के साथ, बाकी सबके बीच में। परमेश्वर की गिनती में देर से आने वाला भी गिना जाता है, और उसका नाम वैसे ही स्याही पाता है जैसे पहली लहर के अगुवों का। यही अनुग्रह का ठोस, दस्तावेज़ी रूप है: वह पिछड़ेपन को मिटाता नहीं, उसे दर्ज करता है, और फिर भी उसे अपनाता है। लौटने का समय कभी बीत नहीं चुका होता, जब तक परमेश्वर सूची बंद न कर दें।

सूत्र

पूरा बंधुआई का लौटना ही एक "पीछे आना" है। इस्राएल सत्तर साल देर से घर पहुँचा, और जो पहुँचे वे भी अधूरे पहुँचे: मंदिर छोटा, दीवारें टूटी, लेवीय गिनती में कम। इसी अध्याय में एज्रा को रुककर काशिप्या में लोग ढूँढ़ने पड़ते हैं क्योंकि पहले जत्थे में लेवीय थे ही नहीं। परमेश्वर की बहाली का काम हमेशा देर से आने वालों को जोड़ते हुए आगे बढ़ता है। यही धागा सीधे मसीह तक जाता है, जो ग्यारहवें घंटे के मज़दूरों को पूरी मज़दूरी देते हैं और क्रूस पर लटके उस डाकू को, जिसके पास पश्चाताप के लिए कुछ घंटे ही बचे थे, उसी दिन स्वर्गलोक का वचन देते हैं। अदोनीकाम के ये साठ पुरुष उस अनुग्रह की पहली धुंधली परछाईं हैं: सूची अब भी खुली है।

दर्पण

आप जानते हैं कि आपकी ज़िंदगी में वह कौन सी चीज़ है जिसमें आप "पीछे" हैं। शायद वह पिता के साथ की चुप्पी है जो बारह साल से चल रही है। शायद वह पैसा है जो आपने किसी को लौटाना था और अब लौटाना और शर्मनाक हो गया है। शायद वह प्रार्थना की आदत है जो कॉलेज के बाद छूट गई और अब लगता है कि दोबारा शुरू करने वाले लोग हँसी के पात्र बनते हैं। देर होने की सबसे बड़ी मार यह नहीं कि समय बीत गया, बल्कि यह कि देरी खुद एक बहाना बन जाती है: अब क्या फ़ायदा, गाड़ी तो निकल चुकी। एलीपेलेत, यूएल और शमायाह के पास यही बहाना था, अस्सी साल का पक्का बहाना, और उन्होंने उसे ठुकरा दिया। आज एक काग़ज़ पर वह एक काम लिखिए जिसे आप वर्षों से टाल रहे हैं, उसके नीचे आज की तारीख़ डालिए, और ज़ोर से कहिए: "मैं देर से आया हूँ, पर मैं आ रहा हूँ।"

मुख्य पात्र

इन तीन नामों के पीछे तीन पूरे जीवन हैं। इनके दादा-परदादा बाबेल में बसे, वहाँ खेत या दुकान जमाई, वहाँ कब्रें खोदीं। इनके लिए यरूशलेम कोई यादगार नहीं, सिर्फ़ सुनी हुई कहानी थी, और उस कहानी के लिए उन्होंने वह सब छोड़ा जो हाथ में पक्का था। साथ ही उन्हें यह भी पता था कि पहुँचने पर लोग पूछेंगे: तुम्हारा घराना तो पहले ही आ गया था, तुम कहाँ रह गए थे? देर से आने वाले को दो बोझ उठाने पड़ते हैं, यात्रा का और सवालों का। इनका साहस भोलापन नहीं, खुली आँखों वाला साहस है। और साठ पुरुष इनके पीछे चले, जिसका मतलब है कि किसी के देर से उठ खड़े होने का असर दूसरों पर भी पड़ता है।

अंतर्पाठ

इसी अध्याय में एज्रा एक और तरह की शर्म की बात करते हैं: "मैं मार्ग के शत्रुओं से बचने के लिये सिपाहियों का दल और सवार राजा से माँगने से लजाता था।" वहाँ शर्म एक अच्छी चीज़ है, जो विश्वास की रक्षा करती है। यहाँ शर्म एक ख़तरनाक चीज़ है, जो लौटने से रोक सकती थी। दोनों को अलग पहचानना सीखना पड़ता है। दूसरी ओर एज्रा 2 की सूची देखिए, जहाँ अदोनीकाम के वंश के छह सौ छाछठ लोग पहले जत्थे में दर्ज हैं; परमेश्वर की किताब में पहली लहर और आख़िरी लहर एक ही स्याही से लिखी गई है, बिना किसी तारांकन के, बिना किसी छोटे अक्षर वाली टिप्पणी के।

प्रश्न

फिर भी एक कड़वा सवाल बचता है: क्या देर से आने की कोई क़ीमत नहीं? है। अस्सी साल वापस नहीं आते। जो बच्चे बाबेल में जन्मे और वहीं मरे, वे यरूशलेम कभी नहीं देख पाए। जो मंदिर का पुनर्निर्माण चला, उसमें इन साठ पुरुषों के हाथ नहीं लगे। पाठ इस नुक़सान को छिपाता नहीं; वह ठीक इसीलिए "जो पीछे गए" लिखता है। अनुग्रह देरी को माफ़ करता है, पर उसे मिटाकर नहीं, दर्ज करके। यही इसकी ईमानदारी है और यही इसकी चुभन। जो खो गया, वह खो गया; जो बचा है, वह पूरा का पूरा आपका है। इस दोनों को एक साथ पकड़े रहना ही परिपक्व विश्वास है, और यह आसान नहीं होता।

चिंतन

आपके जीवन में वह कौन सी "देर" है जिसे आपने अब अपनी पहचान बना लिया है, यह कहकर कि अब मैं ऐसा ही हूँ?

अगर परमेश्वर आपकी देरी को मिटाए बिना आपका नाम लिखते हैं, तो आप अपनी असफलताओं की कहानी दूसरों को किस लहजे में सुनाएँगे?

Ezra में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Ezra and Haggai

Robert Fyall

Rebuilding the temple and the people, read as one story of restoration.

Ezra and Nehemiah: An Introduction and Commentary

Derek Kidner

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

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Ezra 8:13 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

एज्रा 8:13 का क्या अर्थ है?
अदोनीकाम के घराने की सूची में एक अजीब सा वाक्यांश छिपा है: "जो पीछे गए।" एज्रा नाम गिनवाते हुए एलीपेलेत, यूएल और शमायाह तक पहुँचते हैं, और उनके साथ साठ पुरुष। बाकी दलों का परिचय सीधा है, "अमुक के वंश में से अमुक, उसके संग इतने पुरुष," पर यहाँ लेखक रुककर एक टिप्पणी जोड़ता है। ये वे हैं जो देर से आए। अदोनीकाम का परिवार तो लगभग अस्सी साल पहले, जरुब्बाबेल के साथ पहले जत्थे में ही लौट चुका था; ये उसी घराने के बचे हुए लोग हैं, जो पिछड़ गए थे, जो उस पहली लहर में शामिल नहीं हुए। और अब, दूसरी बार जब यात्रा का दरवाज़ा खुलता है, ये तीन नाम और उनके साठ साथी उसमें से निकलते हैं।
एज्रा 8:13 किस विषय में है?
पूरा बंधुआई का लौटना ही एक "पीछे आना" है। इस्राएल सत्तर साल देर से घर पहुँचा, और जो पहुँचे वे भी अधूरे पहुँचे: मंदिर छोटा, दीवारें टूटी, लेवीय गिनती में कम। इसी अध्याय में एज्रा को रुककर काशिप्या में लोग ढूँढ़ने पड़ते हैं क्योंकि पहले जत्थे में लेवीय थे ही नहीं। परमेश्वर की बहाली का काम हमेशा देर से आने वालों को जोड़ते हुए आगे बढ़ता है। यही धागा सीधे मसीह तक जाता है, जो ग्यारहवें घंटे के मज़दूरों को पूरी मज़दूरी देते हैं और क्रूस पर लटके उस डाकू को, जिसके पास पश्चाताप के लिए कुछ घंटे ही बचे थे, उसी दिन स्वर्गलोक का वचन देते हैं। अदोनीकाम के ये साठ पुरुष उस अनुग्रह की पहली धुंधली परछाईं हैं: सूची अब भी खुली है।
एज्रा 8:13 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इन तीन नामों के पीछे तीन पूरे जीवन हैं। इनके दादा-परदादा बाबेल में बसे, वहाँ खेत या दुकान जमाई, वहाँ कब्रें खोदीं। इनके लिए यरूशलेम कोई यादगार नहीं, सिर्फ़ सुनी हुई कहानी थी, और उस कहानी के लिए उन्होंने वह सब छोड़ा जो हाथ में पक्का था। साथ ही उन्हें यह भी पता था कि पहुँचने पर लोग पूछेंगे: तुम्हारा घराना तो पहले ही आ गया था, तुम कहाँ रह गए थे?
एज्रा 8:13 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
फिर भी एक कड़वा सवाल बचता है: क्या देर से आने की कोई क़ीमत नहीं? है। अस्सी साल वापस नहीं आते। जो बच्चे बाबेल में जन्मे और वहीं मरे, वे यरूशलेम कभी नहीं देख पाए। जो मंदिर का पुनर्निर्माण चला, उसमें इन साठ पुरुषों के हाथ नहीं लगे। पाठ इस नुक़सान को छिपाता नहीं; वह ठीक इसीलिए "जो पीछे गए" लिखता है। अनुग्रह देरी को माफ़ करता है, पर उसे मिटाकर नहीं, दर्ज करके। यही इसकी ईमानदारी है और यही इसकी चुभन। जो खो गया, वह खो गया; जो बचा है, वह पूरा का पूरा आपका है। इस दोनों को एक साथ पकड़े रहना ही परिपक्व विश्वास है, और यह आसान नहीं होता।
एज्रा 8:13 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
अगर परमेश्वर आपकी देरी को मिटाए बिना आपका नाम लिखते हैं, तो आप अपनी असफलताओं की कहानी दूसरों को किस लहजे में सुनाएँगे?
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Ezra 8 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 17

पिता, जब काम बड़ा हो और हाथ कम पड़ जाएँ, तो मुझे याद दिला कि तू ही लोगों को भेजता है। मेरे मुँह में सही शब्द रख, जब मैं किसी से मदद माँगूँ। और मुझे भी ऐसा बना दे कि जब तू किसी के लिए मुझे बुलाए, मैं पीछे न हटूँ।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

बेबै के वंश में से बेबै का पुत्र जकर्याह, और उसके साथ अट्ठाईस पुरुष" (एज्रा 8:11). बस एक नाम और एक गिनती। न कोई चमत्कार, न कोई भाषण। फिर भी परमेश्वर ने इन अट्ठाईस को गिनवाकर लिखवा दिया।

तुम सोचते हो तुम्हारा साथ चलना किसी को दिखता नहीं। पर जो लौटने के लिए उठ खड़े होते हैं, उनका हिसाब स्वर्ग में रखा जाता है। तुम भीड़ नहीं हो, तुम गिने हुए हो।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 35

यात्रा सुरक्षित पूरी हुई, खज़ाना गिनकर सौंप दिया गया, और तब सबसे पहले जो हुआ वह बलिदान था। ध्यान दो, "सारे इस्राएल के लिये बारह बछड़े" चढ़े, जबकि लौटे हुए लोग तो थोड़े से ही थे। जो भाई दूर छूट गए थे, उन्हें भी वे वेदी पर साथ लाए। और पापबलि भी चढ़ाई, क्योंकि बच जाना पवित्र हो जाना नहीं है। तेरी प्रार्थना में कौन छूट रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 18

एज्रा ने गिनती की और पाया कि लेवियों की कमी है। उसने आदमी भेजे, इंतजार किया, और जब शेरेब्याह अपने अठारह लोगों के साथ आया तो एज्रा ने अपनी योजना की तारीफ नहीं की। उसने लिखा, "हमारे परमेश्वर की कृपादृष्टि हम पर थी।" जो कमी तुझे आज खल रही है, उसे परमेश्वर के सामने रख। और जब कोई आए, तो याद रखना कि उसे किसने भेजा।

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