यशायाह 43:2
पाठ
परमेश्वर अपनी प्रजा से कहते हैं: "जब तू जल में होकर जाए, मैं तेरे संग-संग रहूँगा और जब तू नदियों में होकर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेगी; जब तू आग में चले तब तुझे आँच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी।" ध्यान दीजिए, वाक्य "यदि" से शुरू नहीं होता, "जब" से शुरू होता है। पानी आएगा, नदी चढ़ेगी, आग जलेगी। यह वचन इन चीज़ों को रद्द नहीं करता, वह उनके बीच में से एक रास्ता खोलता है। और वह रास्ता किसी तकनीक या साहस का नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की उपस्थिति का है: "मैं तेरे संग-संग रहूँगा।" पूरा भार इसी छोटे से "मैं" पर टिका है।
मर्म
यहाँ परमेश्वर सुरक्षा की गारंटी नहीं, साथ की गारंटी देते हैं, और यह अंतर हमारे जीने के तरीके को पूरी तरह बदल देता है। पिछली आयत में आधार रखा गया है: "मैंने तुझे छुड़ा लिया है; मैंने तुझे नाम लेकर बुलाया है, तू मेरा ही है।" यानी बचाव पहले हो चुका है, आग बाद में आती है। इसलिए यह वचन डर को खत्म नहीं करता, वह डर की जगह छीन लेता है, ताकि डर अब हमारे फैसलों का मालिक न रहे। जो व्यक्ति जानता है कि वह किसी और का है, वह नौकरी में सच बोलने, कर्ज़ के बारे में ईमानदार होने, या किसी कमज़ोर के पक्ष में खड़े होने की कीमत चुका सकता है। कब्ज़ा बदलता है, तो हिम्मत बदलती है।
जोड़ने वाला सूत्र
पानी और आग इस्राएल के लिए खाली प्रतीक नहीं थे। लाल समुद्र से गुज़रना, यरदन को पार करना, मिस्र की "लोहे की भट्ठी" से निकलना: ये उनकी सामूहिक स्मृति के निशान थे। इसी अध्याय में परमेश्वर स्वयं इस स्मृति को छूते हैं, जब उन्हें ऐसे परमेश्वर के रूप में बताया जाता है जो "समुद्र में मार्ग और प्रचण्ड धारा में पथ बनाता है"। ध्यान दीजिए, परमेश्वर समुद्र को हटाते नहीं, उसके भीतर रास्ता बनाते हैं। यही पैटर्न मसीह में अपनी आख़िरी गहराई तक पहुँचता है: यीशु ने बपतिस्मा के पानी में उतरकर और फिर क्रूस की आग में जाकर वह रास्ता अपने शरीर से खोला। उन्हें आँच लगी, ताकि हमें उस आग में अकेलापन न मिले। इसलिए "मैं तेरे संग-संग रहूँगा" कोई काव्यात्मक आश्वासन नहीं, यह एक कीमत चुकाकर खरीदा गया वादा है।
दर्पण
ईमानदारी से पूछिए: आपकी नदी इस समय कौन-सी है? शायद वह मेडिकल रिपोर्ट है जिसका इंतज़ार आप कर रहे हैं, या वह नौकरी जहाँ आपसे कुछ ऐसा करवाया जा रहा है जिसे आप गलत जानते हैं, या वह रिश्ता जिसमें आप सालों से ठंडी चुप्पी के पीछे छिपे हैं। हम में से ज़्यादातर लोग ईश्वरीय बचाव नहीं, बचने का रास्ता माँगते हैं। और जब वह नहीं मिलता, तो हम छोटे समझौते करने लगते हैं: टैक्स के काग़ज़ में थोड़ी-सी चालाकी, बॉस के सामने आधा सच, बच्चे से किया वादा जो टलता ही जाता है। डर ईमानदारी का सबसे सस्ता सौदा करवाता है। यह वचन आपको यह नहीं कहता कि नदी छोटी है; यह कहता है कि उसमें आप अकेले नहीं हैं, इसलिए अब झूठ बोलने की मजबूरी खत्म हुई।
आज वह एक संदेश या फ़ोन कॉल पूरा कीजिए जिसे आप डर के कारण हफ़्तों से टाल रहे हैं। भेजने से पहले ज़ोर से कहिए: "मैं तेरे संग-संग रहूँगा", और फिर भेज दीजिए।
मुख्य पात्र
इस आयत का मुख्य पात्र परमेश्वर हैं, और वे यहाँ एक बहुत ख़ास भूमिका में खड़े हैं। इब्रानी में "छुड़ानेवाला" के लिए जो शब्द है, गोएल, वह उस निकट रिश्तेदार का शब्द है जो कर्ज़ में बिके हुए अपने भाई को अपने पैसे से वापस खरीदता है। यह क़ानूनी नहीं, पारिवारिक ज़िम्मेदारी थी। परमेश्वर ख़ुद को उसी रिश्ते में बाँधते हैं: "तू मेरा ही है"। इसीलिए वे दूर से निर्देश नहीं देते, साथ चलते हैं। और वे भावनाहीन भी नहीं हैं: चार आयत आगे वे कहते हैं, "मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है और मैं तुझ से प्रेम रखता हूँ"। यह एक ऐसे परमेश्वर की आवाज़ है जो अपनी हारी हुई, निर्वासित, बदनाम प्रजा को छोड़ने से इनकार करते हैं, तब भी जब वे उनसे थक चुके हैं।
कठिन प्रश्न
पर लोग सचमुच डूबते हैं। विश्वासी कैंसर से मरते हैं, गवाह जलाए गए हैं, बाढ़ में मसीही परिवार भी बह जाते हैं। तो क्या यह वचन झूठ बोलता है? नहीं, पर यह वह नहीं कहता जो हम चाहते हैं कि कहे। गौर कीजिए, वादा यह नहीं है कि पानी नहीं आएगा या आग नहीं जलेगी; वादा यह है कि वे तुझे "न डुबा सकेगी" और लौ तुझे "न जला सकेगी", यानी वे तुझे नष्ट नहीं कर पाएँगी, तुझे परमेश्वर से अलग नहीं कर पाएँगी। दानिय्येल के तीन साथी भट्ठी में जाते समय जानते थे कि परमेश्वर बचा भी सकते हैं और न भी बचाएँ, फिर भी वे झुके नहीं। यहाँ रहस्य बचा रहता है, और उसे मिटाना बेईमानी होगी। जो नहीं बचता वह हमारी सुविधा है; जो बचता है वह हम हैं।
संदर्भ
यह शब्द किसी शांत मंदिर-सेवा में नहीं बोले गए। यशायाह का यह हिस्सा उन लोगों से बात करता है जो बाबेल में निर्वासित हैं, जिनका शहर जल चुका है, मंदिर गिर चुका है, और जिनका राजा जंज़ीरों में ले जाया गया है। इसी अध्याय में परमेश्वर साफ़ कहते हैं, "तुम्हारे निमित्त मैंने बाबेल को भेजा है"। एक हारी हुई क़ौम के लिए यह मानना लगभग असंभव था कि उनका परमेश्वर अब भी राजा हैं; आसपास की दुनिया कहती थी कि बाबेल के देवता जीत गए। इस माहौल में "मत डर" कोई भावुक तसल्ली नहीं, एक राजनीतिक और धार्मिक दावा है। और यह वादा उस प्रजा से किया जा रहा है जिसके बारे में परमेश्वर आगे शिकायत करते हैं कि उसने प्रार्थना तक नहीं की। कृपा योग्यता के बाद नहीं आती, उससे पहले आती है।
मनन के प्रश्न
आपके जीवन में इस समय कौन-सा फैसला डर के कारण टल रहा है, और अगर "तू मेरा ही है" सच है, तो वह फैसला कैसे बदलेगा?
आप सुरक्षा माँग रहे हैं या साथ? ईमानदारी से, इन दोनों में से किसके बिना आप जी नहीं सकते?
Isaiah में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Isaiah: An Introduction and Commentary
A lifetime of Isaiah study distilled into one accessible volume.
Keeps the big storyline of judgment and comfort wonderfully clear.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Isaiah 43:2 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यशायाह 43:2 का क्या अर्थ है?
यशायाह 43:2 किस विषय में है?
यशायाह 43:2 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यशायाह 43:2 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यशायाह 43:2 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Isaiah 43 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि आप जंगल में मार्ग और निर्जल देश में नदियाँ बहाने वाले परमेश्वर हैं। जहाँ मुझे कोई रास्ता नहीं दिखता था, वहाँ आपने राह खोली। धन्यवाद कि आप आज भी नया काम कर रहे हैं, और वह प्रगट होने पर है। मेरी सूखी जगहों पर आपकी नदियाँ बहती हैं।
मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूँ; मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊँगा और पश्चिम से इकट्ठा करूँगा।"
गौर कर, पहले "मैं तेरे संग हूँ" कहा, फिर बिखरे हुओं को लाने का वादा किया। परमेश्वर हालात बदलने से पहले तेरे पास आ खड़ा होता है।
तेरा अपना कोई दूर छिटक गया है? जिस दिशा में वह गया है, वह दिशा भी परमेश्वर के हाथ में है।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें