बाइबल व्याख्या

यशायाह 43:4

बाइबल
यह वचन ZION BAPTIST CHURCH द्वारा समर्पित है

वचन

परमेश्वर बेबीलोन में बिखरी हुई, हारी हुई प्रजा से कहते हैं: मेरी नज़र में तू कीमती है, तू आदरणीय ठहरा है, और मैं तुझसे प्रेम करता हूँ। और फिर वे एक ऐसी बात जोड़ते हैं जो हमें सहज नहीं लगती: इसी प्रेम के कारण मैं तेरे बदले मनुष्यों को, तेरे प्राण के बदले राष्ट्रों को दे दूँगा। यह वचन पिछली आयत से जुड़ा है, जहाँ मिस्र, कूश और सबा को छुड़ौती के रूप में गिनाया गया है। यानी यहाँ केवल कोमल आश्वासन नहीं है, बल्कि एक लेन-देन की भाषा है, एक कीमत, एक अदला-बदली। परमेश्वर अपने लोगों को छुड़ाने के लिए कुछ चुकाने को तैयार हैं, और वे यह खुलकर कहते हैं।

मूल बात

यहाँ जो मूल्य घोषित हुआ है, वह इस्राएल में पड़ा हुआ नहीं मिला; वह उस पर रखा गया है। ध्यान दीजिए, वचन कहता है "अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है", ठहराया गया है, किसी के निर्णय से। इब्रानी शब्द याकार का अर्थ है "कीमती", वही शब्द जो दुर्लभ रत्नों के लिए इस्तेमाल होता है। पर जिस प्रजा से यह कहा जा रहा है, वह उसी अध्याय में आगे "अंधी" और "बहरी" कही जाती है, जिसने प्रार्थना तक नहीं की और अपने पापों से परमेश्वर को थका दिया। तो यह मूल्य उनकी योग्यता से नहीं, बल्कि परमेश्वर के प्रेम के निर्णय से निकलता है। यही अनुग्रह की परिभाषा है: प्रेम पहले आता है, मूल्य उसके बाद। और यह प्रेम भावुक नहीं, वाचा से बंधा है, इसलिए यह कीमत चुकाने तक जाता है। परमेश्वर की पवित्रता और उनकी करुणा यहाँ एक ही वाक्य में साँस लेती हैं।

सूत्र

छुड़ौती की भाषा इस अध्याय की रीढ़ है, और वह अधूरी रह जाती है। परमेश्वर कहते हैं कि वे इस्राएल के बदले राष्ट्रों को दे देंगे, यानी मुक्ति मुफ़्त मिलती है पर मुफ़्त होती नहीं; कहीं न कहीं कीमत चुकती है। पूरे पुराने नियम में यह प्रश्न खुला लटका रहता है: आख़िर कौन किसके बदले दिया जाएगा? यशायाह स्वयं इसका उत्तर दस अध्याय आगे देते हैं, जहाँ एक सेवक अपने लोगों के अपराधों के कारण कुचला जाता है। वहाँ अदला-बदली बाहर की ओर नहीं, भीतर की ओर मुड़ती है। और यीशु मसीह ने जब कहा कि मनुष्य का पुत्र बहुतों की छुड़ौती के लिए अपना प्राण देने आया है, तब यशायाह 43 का वाक्य अपने अंतिम रूप में पहुँचा: परमेश्वर ने कीमत किसी तीसरे से नहीं वसूली, अपने ही पुत्र में स्वयं चुकाई।

दर्पण

हम सब कहीं न कहीं अपनी कीमत नापते रहते हैं। कार्यालय में वार्षिक मूल्यांकन के दिन, बच्चों के परिणाम आने पर, बीमारी के बाद जब शरीर पहले जैसा काम नहीं करता, या उस उम्र में जब लगता है कि अब आप बदले जा सकते हैं, कोई और आपकी जगह ले लेगा। बाज़ार की तर्ज़ पर सोचें तो हम सब बदले जा सकते हैं। यह वचन उसी तर्ज़ को तोड़ता है, पर सस्ती तसल्ली देकर नहीं। यह नहीं कहता कि आप भीतर से बहुत मूल्यवान हैं; यह कहता है कि परमेश्वर ने आप पर मूल्य रखा है और उसे चुकाने को तैयार हैं। यह मुफ़्त है, मगर सस्ता नहीं।

आज दिन ढलने से पहले एक कागज़ पर वह एक चीज़ लिखिए जिससे आप चुपचाप अपनी कीमत आँकते हैं, और उसके ठीक नीचे लिखिए: "मेरी दृष्टि में तू अनमोल", फिर उसे ज़ोर से पढ़िए।

संदर्भ

यह वाणी उन लोगों तक पहुँची जो बेबीलोन की निर्वासित बस्तियों में बैठे थे। यरूशलेम का मंदिर राख था, राजवंश समाप्त, और साम्राज्य की गलियों में मर्दूक के जुलूस निकलते थे, मानो बेबीलोन के देवता ने यहोवा को हरा दिया हो। ऐसे माहौल में "तू मेरा ही है" कहना राजनीतिक बयान भी है। मिस्र, कूश और सबा नील नदी की ओर के धनी देश थे; इतिहास में फ़ारसी साम्राज्य ने आगे चलकर उन्हें जीत लिया, और यशायाह उस बड़े उलटफेर की ओर इशारा करते हैं जिसमें कोरेश यहूदियों को घर भेजेगा। छुड़ौती की भाषा गुलामों के बाज़ार से उठाई गई है: कोई कीमत देकर दास को अपना बनाता है। निर्वासित लोग यह मुहावरा हड्डियों में समझते थे।

कठिन प्रश्न

तो क्या परमेश्वर पक्षपाती हैं? अगर एक जाति को छुड़ाने के लिए दूसरी जातियों को "दे दिया" जाता है, तो उन दूसरों के जीवन का क्या मोल? इस प्रश्न को चिकना करके निगलना बेईमानी होगी। इतना ज़रूर कहना होगा कि इसी अध्याय में इस्राएल का चुनाव विशेषाधिकार नहीं, ज़िम्मेदारी है: "तुम मेरे साक्षी हो और मेरे दास हो"। चुनी हुई प्रजा दुनिया के विरुद्ध नहीं, दुनिया के लिए चुनी गई है। फिर भी यह सच बचा रहता है कि परमेश्वर का प्रेम विशेष है, उसके नाम और पते हैं, और ऐसा प्रेम इतिहास में कीमत माँगता है। मसीह के क्रूस पर वह कीमत किसी और से नहीं वसूली गई, पर उससे पहले के इतिहास की खुरदरापन बनी रहती है। यहाँ हमें रहस्य के आगे चुप होना पड़ता है, राहत गढ़ने की जल्दी में नहीं।

शास्त्र की गूँज

पहली गूँज मिस्र से आती है। जल में से पार जाना, आग में से गुज़रना, ये निर्गमन की स्मृतियाँ हैं; बेबीलोन की मुक्ति उसी पुरानी मुक्ति का दूसरा संस्करण है, इसलिए परमेश्वर आगे चलकर कहते हैं, "देखो, मैं एक नई बात करता हूँ"। दूसरी गूँज यशायाह 53 की है, जहाँ बदले की भाषा अपने चरम पर पहुँचती है: वहाँ राष्ट्र नहीं, एक सेवक दिया जाता है। इन दोनों को साथ पढ़िए तो आयत 4 का ढाँचा साफ़ दिखता है: सृजनहार जो अपनी महिमा के लिए रचते हैं, वही उद्धारकर्ता हैं जो अपने नाम के निमित्त अपराध मिटाते हैं। सृष्टि, वाचा और छुटकारा एक ही हाथ के काम हैं।

मनन के लिए

आप अपनी कीमत किस तराज़ू पर तौलते हैं, और उस तराज़ू को परमेश्वर के इस निर्णय के सामने रखने में सबसे ज़्यादा क्या अखरता है?

अगर चुना जाना गवाही देने के लिए है, तो इस सप्ताह आपके जीवन में किसके सामने यह गवाही देनी है कि छुड़ौती चुकाई जा चुकी है?

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Isaiah 43:4 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

यशायाह 43:4 का क्या अर्थ है?
परमेश्वर बेबीलोन में बिखरी हुई, हारी हुई प्रजा से कहते हैं: मेरी नज़र में तू कीमती है, तू आदरणीय ठहरा है, और मैं तुझसे प्रेम करता हूँ। और फिर वे एक ऐसी बात जोड़ते हैं जो हमें सहज नहीं लगती: इसी प्रेम के कारण मैं तेरे बदले मनुष्यों को, तेरे प्राण के बदले राष्ट्रों को दे दूँगा। यह वचन पिछली आयत से जुड़ा है, जहाँ मिस्र, कूश और सबा को छुड़ौती के रूप में गिनाया गया है। यानी यहाँ केवल कोमल आश्वासन नहीं है, बल्कि एक लेन-देन की भाषा है, एक कीमत, एक अदला-बदली। परमेश्वर अपने लोगों को छुड़ाने के लिए कुछ चुकाने को तैयार हैं, और वे यह खुलकर कहते हैं।
यशायाह 43:4 किस विषय में है?
छुड़ौती की भाषा इस अध्याय की रीढ़ है, और वह अधूरी रह जाती है। परमेश्वर कहते हैं कि वे इस्राएल के बदले राष्ट्रों को दे देंगे, यानी मुक्ति मुफ़्त मिलती है पर मुफ़्त होती नहीं; कहीं न कहीं कीमत चुकती है। पूरे पुराने नियम में यह प्रश्न खुला लटका रहता है: आख़िर कौन किसके बदले दिया जाएगा?
यशायाह 43:4 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज दिन ढलने से पहले एक कागज़ पर वह एक चीज़ लिखिए जिससे आप चुपचाप अपनी कीमत आँकते हैं, और उसके ठीक नीचे लिखिए: "मेरी दृष्टि में तू अनमोल", फिर उसे ज़ोर से पढ़िए।
यशायाह 43:4 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
तो क्या परमेश्वर पक्षपाती हैं? अगर एक जाति को छुड़ाने के लिए दूसरी जातियों को "दे दिया" जाता है, तो उन दूसरों के जीवन का क्या मोल? इस प्रश्न को चिकना करके निगलना बेईमानी होगी। इतना ज़रूर कहना होगा कि इसी अध्याय में इस्राएल का चुनाव विशेषाधिकार नहीं, ज़िम्मेदारी है: "तुम मेरे साक्षी हो और मेरे दास हो"। चुनी हुई प्रजा दुनिया के विरुद्ध नहीं, दुनिया के लिए चुनी गई है। फिर भी यह सच बचा रहता है कि परमेश्वर का प्रेम विशेष है, उसके नाम और पते हैं, और ऐसा प्रेम इतिहास में कीमत माँगता है। मसीह के क्रूस पर वह कीमत किसी और से नहीं वसूली गई, पर उससे पहले के इतिहास की खुरदरापन बनी रहती है। यहाँ हमें रहस्य के आगे चुप होना पड़ता है, राहत गढ़ने की जल्दी में नहीं।
यशायाह 43:4 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आप अपनी कीमत किस तराज़ू पर तौलते हैं, और उस तराज़ू को परमेश्वर के इस निर्णय के सामने रखने में सबसे ज़्यादा क्या अखरता है?
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Isaiah 43 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 19

पिता, धन्यवाद कि आप जंगल में मार्ग और निर्जल देश में नदियाँ बहाने वाले परमेश्वर हैं। जहाँ मुझे कोई रास्ता नहीं दिखता था, वहाँ आपने राह खोली। धन्यवाद कि आप आज भी नया काम कर रहे हैं, और वह प्रगट होने पर है। मेरी सूखी जगहों पर आपकी नदियाँ बहती हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूँ; मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊँगा और पश्चिम से इकट्ठा करूँगा।"

गौर कर, पहले "मैं तेरे संग हूँ" कहा, फिर बिखरे हुओं को लाने का वादा किया। परमेश्वर हालात बदलने से पहले तेरे पास आ खड़ा होता है।

तेरा अपना कोई दूर छिटक गया है? जिस दिशा में वह गया है, वह दिशा भी परमेश्वर के हाथ में है।

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