यशायाह 5:2
पाठ
वह आदमी ढलान पर झुका हुआ है। कुदाल चल रही है, मिट्टी पलट रही है, और वह एक-एक पत्थर चुनकर किनारे फेंक रहा है, जैसे कोई पिता बच्चे के बिस्तर से कंकड़ हटाता हो। फिर वह साधारण नहीं, "उत्तम जाति की एक दाखलता" लगाता है। बीच में गुम्मट उठता है, पहरे के लिए, और चट्टान में कुण्ड खोदा जाता है, क्योंकि फसल इतनी होगी कि रस निचोड़ना पड़ेगा। सब कुछ तैयार है। वह इंतज़ार करता है, एक मौसम, दो मौसम। और फिर कटाई का दिन आता है, वह हाथ बढ़ाता है, और उसकी हथेली में जो गिरता है वह दाख नहीं है: "उसमें निकम्मी दाखें ही लगीं।"
मूल मर्म
इस एक वाक्य में परमेश्वर का पूरा हृदय खुल जाता है। वे निर्लिप्त दर्शक नहीं हैं जो दूर से इस्राएल को देखते रहे; वे मिट्टी में उतरे, पत्थर उठाए, पहरा बिठाया। इब्रानी में जो शब्द यहाँ है, बेउशीम, उसका अर्थ केवल "खट्टी" नहीं, बल्कि "बदबूदार, सड़ी हुई" दाखें है। यानी पैदावार कम नहीं हुई, पैदावार विकृत हुई। यही पाप का असली चेहरा है: वह शून्य नहीं, वह विकृति है। और ध्यान दीजिए कि आशा किसने की थी, "तब उसने दाख की आशा की" । परमेश्वर आशा करते हैं। वे अपने आप को निराश होने के लिए खुला छोड़ देते हैं। प्रेम हमेशा यही जोखिम उठाता है, और इसीलिए आगे आने वाला न्याय मनमानी नहीं, टूटे हुए भरोसे की चीख है।
जोड़ने वाला धागा
यह गीत अधूरा रह जाता है, और इसकी अधूरेपन ही इसका सबसे बड़ा वादा है। एक बारी जो बार-बार निराश करती है, एक मालिक जो बार-बार लौटता है: यही पूरे पुराने नियम की कहानी है। फिर यीशु यही गीत उठाते हैं और उसे बदल देते हैं। वे दाख की बारी के बारे में नहीं, स्वयं दाखलता होने के बारे में बोलते हैं। जिस बारी ने निकम्मी दाखें दीं, उसके बीच परमेश्वर ने एक ऐसा पौधा रोपा जो आख़िरकार वही फल लाया जिसकी आशा की गई थी। क्रूस पर वह उत्तम दाखलता काटी गई, और उसका रस कुण्ड में नहीं, प्याले में उतरा। यशायाह का मालिक बाड़ा उखाड़ने की बात करता है; मसीह में वही मालिक स्वयं बाड़े के बाहर खड़ा हो जाता है, ताकि बारी बची रहे।
दर्पण
यह पद हमें उस जगह छूता है जहाँ हम अपनी "अच्छी परवरिश" को ढाल बनाते हैं। आपने शायद कभी शराब नहीं छुई, रविवार कभी नहीं छोड़ा, बच्चों को प्रार्थना सिखाई। पर पद 7 बताता है कि मालिक किस फल की तलाश में था: न्याय और धार्मिकता। यानी, क्या आपके दफ़्तर में वह आदमी जिसे कोई नहीं गिनता, आपकी वजह से थोड़ा कम अकेला है? क्या आपके पैसे का हिसाब किसी के शोषण पर टिका है? निकम्मी दाखें बाहर से दाख जैसी ही दिखती हैं; दूर से बारी हरी-भरी लगती है। सड़ांध हाथ में लेने पर पता चलती है। आज, दस मिनट में: उस एक व्यक्ति का नाम काग़ज़ पर लिखिए जिसके साथ आपने पिछले महीने अन्याय किया, चाहे छोटा सा, और उस नाम के नीचे लिखिए कि इस सप्ताह आप उसके साथ क्या ठीक करेंगे।
कठिन प्रश्न
"मेरी दाख की बारी के लिये और क्या करना रह गया जो मैंने उसके लिये न किया हो?" यह सवाल बेचैन करता है। अगर परमेश्वर सर्वशक्तिमान हैं, तो क्या वे दाख पैदा नहीं करा सकते थे? क्या वे हृदय नहीं बदल सकते थे? यशायाह इस दरवाज़े को बंद नहीं करता। वह यह भी नहीं कहता कि मालिक लाचार है। वह बस यह दिखाता है कि प्रेम ज़बरदस्ती नहीं कर सकता, वरना वह प्रेम नहीं रह जाता। परमेश्वर ने मिट्टी दी, पत्थर हटाए, बाड़ा लगाया, पर फल देने की ज़िम्मेदारी उन्होंने बारी के हाथ में छोड़ी। यह रहस्य हल नहीं होता। हमें इसी तनाव में जीना है: एक परमेश्वर जो सब कुछ कर सकते हैं, और जिन्होंने फिर भी अपने आप को हमारी "ना" से घायल होने दिया।
मुख्य पात्र
यहाँ असली पात्र वह किसान है, और वह अजीब तरह से असुरक्षित है। गौर कीजिए कि गीत में वह खुद अपनी सफ़ाई नहीं देता, वह यरूशलेम के निवासियों से न्याय करने को कहता है: "मेरे और मेरी दाख की बारी के बीच न्याय करो।" सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने ही लोगों को जज की कुर्सी पर बिठा देते हैं। यह गुस्सैल तानाशाह की भाषा नहीं, एक घायल प्रेमी की भाषा है जो चाहता है कि कोई देखे कि उसने क्या-क्या किया था। और फिर भी, वही आवाज़ पद 5 में कठोर हो जाती है। यही परमेश्वर का भावनात्मक नक्शा है: इतनी गहरी ममता कि निराशा असली है, और इतनी सच्ची पवित्रता कि न्याय टाला नहीं जाता।
संदर्भ
यह गीत शायद अंगूर की फ़सल के उत्सव में गाया गया, जब यहूदा समृद्ध था, उज्जियाह के लंबे शासन की चमक अभी बुझी नहीं थी, और अश्शूर की छाया अभी दूर थी। कल्पना कीजिए: भीड़, दाखमधु, और एक गायक जो प्रेमगीत की धुन छेड़ता है। श्रोता मुस्कुराते हैं, यह तो जानी-पहचानी बात है, प्रिय और उसकी बारी। फ़िलिस्तीन की पथरीली पहाड़ियों पर बारी बनाना सचमुच महीनों की पीठ-तोड़ मेहनत थी; हर सुननेवाला जानता था कि पत्थर बीनना क्या होता है। इसीलिए जाल काम करता है। वे गीत में खिंचते चले जाते हैं, सिर हिलाते हैं, और तभी गायक मुड़कर उंगली उन्हीं पर रख देता है। मनोरंजन अचानक अदालत बन जाता है।
मनन
जिस "दाख" की परमेश्वर आपके जीवन से आशा करते हैं, वह ठीक-ठीक क्या है, और आप किस चीज़ को उसकी जगह पेश करते आए हैं?
अगर परमेश्वर आज आपसे पूछें, "और क्या करना रह गया जो मैंने तुम्हारे लिये न किया हो?", तो आपका ईमानदार जवाब क्या होगा?
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इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, तूने हमें अपने बगीचे की तरह लगाया और हमसे अच्छे फल की आशा की। हमें माफ कर कि हमारे बीच अक्सर न्याय की जगह चोट और दर्द की पुकार सुनाई देती है। हमारे दिलों को बदल दे, ताकि हमारे काम तेरी नेकी का स्वाद दें।
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