बाइबल व्याख्या

यिर्मयाह 52

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

सिदकिय्याह के ग्यारहवें वर्ष में यरूशलेम की दीवार टूटती है, राजा यरीहो के पास पकड़ा जाता है, उसके बेटे उसकी आँखों के सामने मारे जाते हैं और फिर उसकी आँखें फोड़ दी जाती हैं। एक महीने बाद नबूजरदान आकर मन्दिर, राजभवन और नगर जला देता है, पीतल के खम्भे तोड़कर टुकड़े-टुकड़े बाबेल ले जाता है, याजकों और अधिकारियों को रिबला में मरवा देता है। अन्त में गिनती आती है, चार हज़ार छः सौ बँधुए, और फिर अचानक एक और दृश्य: सैंतीस साल बाद बन्दीगृह से निकाला गया यहोयाकीन, बदले हुए कपड़ों में, राजा की मेज़ पर।

मर्म

तीसरा पद पूरी अध्याय की कुंजी है: "निश्चय यहोवा के कोप के कारण यरूशलेम और यहूदा की ऐसी दशा हुई कि अन्त में उसने उनको अपने सामने से दूर कर दिया।" यह वाक्य बाबेल को इतिहास का असली कर्ता मानने से इनकार करता है। नबूकदनेस्सर यहाँ जीत नहीं रहा, वह इस्तेमाल हो रहा है। और यह ध्यान दीजिए कि दण्ड का सार क्या है: सेना नहीं, भूख नहीं, आग नहीं, बल्कि "अपने सामने से दूर कर दिया।" वाचा का अभिशाप अन्ततः उपस्थिति का छिन जाना है। मन्दिर इसलिए जलता है क्योंकि जिस उपस्थिति के लिए वह बना था, वह पहले ही वहाँ से हट चुकी थी। परमेश्वर की पवित्रता कोई भावना नहीं; वह अपने ही घर को छोड़ सकती है।

सूत्र

अध्याय वहाँ खत्म नहीं होता जहाँ न्याय खत्म होता है। अन्तिम चार पद एक दूसरी ही दुनिया से आते हैं: यहोयाकीन के "बन्दीगृह के वस्त्र बदल दिए; और वह जीवन भर नित्य राजा के सम्मुख भोजन करता रहा।" दाऊद का वंश बुझा नहीं, बस एक परदेसी मेज़ पर टिका है। यिर्मयाह ने जिस धर्मी शाखा की प्रतिज्ञा की थी, उसका धागा यहीं से आगे बढ़ता है; मत्ती अपनी वंशावली में यकुन्याह का नाम बिना शर्म के लिखता है, क्योंकि निर्वासन के बीच से ही मसीह आता है। अनुग्रह यहाँ न्याय को रद्द नहीं करता, वह उसके मलबे पर बैठकर रोटी खाता है। यह पुराने नियम का सबसे संयमित सुसमाचार है: वंश बचा रहा, इसलिए प्रतिज्ञा बची रही।

दर्पण

हम सब सिदकिय्याह जैसी रणनीति जानते हैं: दीवार में दरार पड़ चुकी है और हम रात के अँधेरे में राजा की बारी वाले फाटक से निकल भागते हैं, यह सोचकर कि शायद अराबा का रास्ता बच जाए। कर्ज़ को छिपाना, शादी में बढ़ती दूरी पर बात न करना, शरीर के लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना, दफ़्तर में एक झूठ को दूसरे से ढाँपना। पर पद आठ निर्मम है: "उनकी सेना ने राजा का पीछा किया।" भागना दण्ड को टालता नहीं, बस उसे अकेला कर देता है। और फिर अन्तिम पद आता है, जहाँ टूटे हुए आदमी को "प्रतिदिन के खर्च के लिये" कुछ नित्य मिलता रहा। परमेश्वर अक्सर हमें एकमुश्त बहाली नहीं, रोज़ की रोटी देते हैं। आज एक काग़ज़ पर वे तीन चीज़ें लिखिए जो इस साल आपके हाथ से छिन गईं, और उनके नीचे आज की तारीख़ डालकर लिखिए: "आज भी रोटी मिली।"

अन्तर्पाठ

व्यवस्थाविवरण 28 में मूसा ने घेराबंदी, अकाल, और "अपने बेटों का सामना" जैसे अभिशाप शब्दशः गिनाए थे, और यिर्मयाह 52 पढ़ते समय लगता है जैसे कोई पुराना अनुबंध अदालत में पढ़कर सुनाया जा रहा हो। यह इतिहास नहीं, वाचा का हिसाब है। इसीलिए यह अध्याय विलापगीत के ठीक पहले रखा गया है: पहले तथ्य, फिर आँसू। दूसरी ओर मत्ती की वंशावली, जहाँ यकुन्याह (यहोयाकीन) बाबेल के निर्वासन के मोड़ पर खड़ा है, दिखाती है कि यह सूची मृत्यु-प्रमाणपत्र नहीं बल्कि जन्म-सूची का हिस्सा निकली। एक ही नाम, दो अलग पुस्तकों में: एक में वह बन्दी है, दूसरी में वह पूर्वज।

प्रश्न

सिदकिय्याह ने बलवा किया, पर उसके बेटों ने क्या किया था? पद दस को हल्के में पढ़ना असंभव है: उन्हें पिता की आँखों के सामने मारा गया, और वही उसकी अन्तिम दृष्टि बनी। यह पाठ इस क्रूरता की व्याख्या नहीं करता, न इसे परमेश्वर के माथे मढ़ता है, न बाबेल को निर्दोष ठहराता है। यहाँ कोई सफ़ाई नहीं मिलती। हमें बस यह मानना पड़ता है कि पाप के परिणाम निजी सीमाओं में नहीं रुकते; वे परिवारों, बच्चों, पीढ़ियों में फैलते हैं, और परमेश्वर इस फैलाव को रोक देने के बजाय अक्सर इसे चलने देते हैं। यह बात न्यायसंगत महसूस नहीं होती। पाठ इसे न्यायसंगत महसूस कराने की कोशिश भी नहीं करता, और शायद यही उसकी ईमानदारी है।

विवरण

सबसे अजीब बात पद तेईस है: जले हुए मन्दिर के टूटे खम्भों पर कितने अनार थे, इसकी गिनती। "कँगनियों के चारों ओर छियानवे अनार बने थे, और जाली के ऊपर चारों ओर एक सौ अनार थे।" सौ अनार, जिनमें से छियानवे एक तरफ़ से दिखते थे। जो चीज़ अब टुकड़ों में बाबेल जा चुकी है, उसका ब्यौरा इतनी बारीकी से क्यों? क्योंकि प्रेम गिनता है। अनार उर्वरता और जीवन का चिह्न थे, सुलैमान के मन्दिर पर उकेरी गई यह घोषणा कि परमेश्वर की उपस्थिति फल देती है। लेखक उस मृत विवरण को इसलिए सहेजता है जैसे कोई विधवा पति का नाप लिखा हुआ पुराना परचा रखती है। शोक का काम याद रखना है, और यही याद एक दिन पुनर्निर्माण का नक़्शा बनेगी।

चिंतन

आपके जीवन में कौन-सी "दीवार की दरार" है जिससे आप अब भी रात के अँधेरे में भागने की योजना बना रहे हैं, बजाय इसके कि उसे नाम देकर सामने रखें?

यहोयाकीन को एकमुश्त बहाली नहीं, रोज़ का हिस्सा मिला। क्या आप परमेश्वर के "नित्य" प्रबन्ध से सन्तुष्ट हो सकते हैं, या आप केवल पूरी बहाली को ही अनुग्रह मानते हैं?

Jeremiah में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Jeremiah

Christopher Wright

Walks with the weeping prophet and the God whose word will not fail.

Jeremiah, Lamentations

J. Andrew Dearman

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.

यह व्याख्या साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

Jeremiah 52 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

यिर्मयाह 52 का क्या अर्थ है?
सिदकिय्याह के ग्यारहवें वर्ष में यरूशलेम की दीवार टूटती है, राजा यरीहो के पास पकड़ा जाता है, उसके बेटे उसकी आँखों के सामने मारे जाते हैं और फिर उसकी आँखें फोड़ दी जाती हैं। एक महीने बाद नबूजरदान आकर मन्दिर, राजभवन और नगर जला देता है, पीतल के खम्भे तोड़कर टुकड़े-टुकड़े बाबेल ले जाता है, याजकों और अधिकारियों को रिबला में मरवा देता है। अन्त में गिनती आती है, चार हज़ार छः सौ बँधुए, और फिर अचानक एक और दृश्य: सैंतीस साल बाद बन्दीगृह से निकाला गया यहोयाकीन, बदले हुए कपड़ों में, राजा की मेज़ पर।
यिर्मयाह 52 किस विषय में है?
अध्याय वहाँ खत्म नहीं होता जहाँ न्याय खत्म होता है। अन्तिम चार पद एक दूसरी ही दुनिया से आते हैं: यहोयाकीन के "बन्दीगृह के वस्त्र बदल दिए; और वह जीवन भर नित्य राजा के सम्मुख भोजन करता रहा।" दाऊद का वंश बुझा नहीं, बस एक परदेसी मेज़ पर टिका है। यिर्मयाह ने जिस धर्मी शाखा की प्रतिज्ञा की थी, उसका धागा यहीं से आगे बढ़ता है; मत्ती अपनी वंशावली में यकुन्याह का नाम बिना शर्म के लिखता है, क्योंकि निर्वासन के बीच से ही मसीह आता है। अनुग्रह यहाँ न्याय को रद्द नहीं करता, वह उसके मलबे पर बैठकर रोटी खाता है। यह पुराने नियम का सबसे संयमित सुसमाचार है: वंश बचा रहा, इसलिए प्रतिज्ञा बची रही।
यिर्मयाह 52 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
व्यवस्थाविवरण 28 में मूसा ने घेराबंदी, अकाल, और "अपने बेटों का सामना" जैसे अभिशाप शब्दशः गिनाए थे, और यिर्मयाह 52 पढ़ते समय लगता है जैसे कोई पुराना अनुबंध अदालत में पढ़कर सुनाया जा रहा हो। यह इतिहास नहीं, वाचा का हिसाब है। इसीलिए यह अध्याय विलापगीत के ठीक पहले रखा गया है: पहले तथ्य, फिर आँसू। दूसरी ओर मत्ती की वंशावली, जहाँ यकुन्याह (यहोयाकीन) बाबेल के निर्वासन के मोड़ पर खड़ा है, दिखाती है कि यह सूची मृत्यु-प्रमाणपत्र नहीं बल्कि जन्म-सूची का हिस्सा निकली। एक ही नाम, दो अलग पुस्तकों में: एक में वह बन्दी है, दूसरी में वह पूर्वज।
यिर्मयाह 52 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
सबसे अजीब बात पद तेईस है: जले हुए मन्दिर के टूटे खम्भों पर कितने अनार थे, इसकी गिनती। "कँगनियों के चारों ओर छियानवे अनार बने थे, और जाली के ऊपर चारों ओर एक सौ अनार थे।" सौ अनार, जिनमें से छियानवे एक तरफ़ से दिखते थे। जो चीज़ अब टुकड़ों में बाबेल जा चुकी है, उसका ब्यौरा इतनी बारीकी से क्यों?
यिर्मयाह 52 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यहोयाकीन को एकमुश्त बहाली नहीं, रोज़ का हिस्सा मिला। क्या आप परमेश्वर के "नित्य" प्रबन्ध से सन्तुष्ट हो सकते हैं, या आप केवल पूरी बहाली को ही अनुग्रह मानते हैं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Jeremiah 52 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 16

पिता, धन्यवाद कि जब सब कुछ छिन गया और लोग बँधुआई में ले जाए गए, तब भी आपने देश के कंगालों को दाख की बारियों और खेतों में काम करने के लिये छोड़ दिया। आप न्याय के बीच भी बचा रखते हैं, हमें रोटी और काम देते हैं। हमारी छोटी सी बची हुई चीज़ों के लिये भी आपका शुक्रिया।

इस अंश को किसी और स्तर पर देखें

शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।

अध्ययन टूल में खोलें