बाइबल व्याख्या

न्यायियों 11

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

गिलाद का यिप्तह वेश्या का बेटा था, इसलिए उसके सौतेले भाइयों ने उसे विरासत से बेदखल करके घर से निकाल दिया; तोब देश में वह लुच्चे लोगों का सरदार बन गया। जब अम्मोनी इस्राएल पर चढ़ आए, तब वही वृद्ध लोग उसे वापस बुलाने गए जिन्होंने उसे ठुकराया था, और उसने प्रधान बनने की शर्त पर युद्ध स्वीकार किया। अम्मोनियों के राजा से लम्बी कूटनीतिक बहस के बाद यहोवा का आत्मा उस पर आया, उसने विजय के बदले एक भयानक मन्नत मानी, और लौटने पर उसकी एकलौती बेटी ही डफ बजाती हुई उससे भेंट करने निकल आई।

मर्म

यह अध्याय दो बातें एक साथ कहता है, और दोनों असहज हैं। पहली: परमेश्वर उद्धार के लिए उस आदमी को चुनते हैं जिसे समाज ने अशुद्ध ठहराकर बाहर फेंक दिया था। यिप्तह की वैधता पर मुहर आदमियों की सभा नहीं, बल्कि "यहोवा का आत्मा यिप्तह में समा गया" लगाता है। दूसरी: आत्मा से भरा होना किसी को धर्मशास्त्र में सही नहीं बना देता। यिप्तह सोचता है कि यहोवा भी कमोश जैसे देवताओं की तरह सौदा करते हैं, कि विजय के लिए कुछ चढ़ाना पड़ेगा। न्यायियों की किताब यही दिखाती है: जब परमेश्वर का लोग अपने परमेश्वर को भूलते हैं, तो वे उन्हें अपने पड़ोसियों के देवताओं की छवि में गढ़ने लगते हैं, और उसकी कीमत निर्दोष चुकाते हैं।

सूत्र

ठुकराया हुआ भाई जो उद्धारकर्ता बनता है: यह सूत्र बाइबल में बार-बार लौटता है, यूसुफ से लेकर दाऊद तक, और अंत में उस पर जो "अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण न किया।" यिप्तह उस छाया का एक टेढ़ा-मेढ़ा टुकड़ा है, और इब्रानियों 11:32 उसे विश्वास के साक्षियों में गिनता भी है। पर असली सूत्र उलटी दिशा से चमकता है। यहाँ पिता अपनी मन्नत पूरी करने के लिए बेटी को खो देता है; क्रूस पर पिता हमें पाने के लिए अपने पुत्र को देते हैं। यिप्तह की बेटी जबरदस्ती नहीं, सहमति से जाती है, और उसकी वह सहमति उस आवाज़ की दूर की गूँज है जो गतसमनी में कहेगी, "मेरी नहीं, आपकी इच्छा पूरी हो।" फर्क यह है: उसकी मृत्यु किसी को नहीं बचाती, मसीह की मृत्यु सबको।

दर्पण

यिप्तह की सबसे गहरी चोट यह नहीं थी कि वह लड़ नहीं सकता था, बल्कि यह कि उसे बताया गया था कि उसका कोई भाग नहीं। और जो आदमी कभी स्वीकार नहीं किया गया, वह जीवन भर योग्यता साबित करता रहता है, यहाँ तक कि परमेश्वर के सामने भी। आप भी शायद यह सौदा जानते हैं: अगर मैं और ज़्यादा सेवा करूँ, और ज़्यादा दान दूँ, तो शायद परमेश्वर वह नौकरी, वह चंगाई, वह रिश्ता ठीक कर देंगे। यह प्रार्थना नहीं, लेन-देन है, और इसकी कीमत हमेशा कोई और चुकाता है: आपका समय आपके बच्चों से कटता है, आपकी चिड़चिड़ाहट आपकी पत्नी पर उतरती है। यिप्तह यह मानना भूल गया कि यहोवा ने उसे प्रधान पहले बनाया, मन्नत बाद में आई। आज, एक काग़ज़ पर वह एक शर्त लिखिए जो आप चुपचाप परमेश्वर के सामने रखते आए हैं, और उसे ज़ोर से पढ़कर कहिए: "आपका अनुग्रह मेरी सौदेबाज़ी से पहले आ चुका है," फिर काग़ज़ फाड़ दीजिए।

मुख्य पात्र

यिप्तह शूरवीर है, चतुर है, और भीतर से घायल है। अम्मोनियों के राजा को उसका लम्बा उत्तर एक ज़बरदस्त कानूनी दलील है: तीन सौ साल का कब्ज़ा, एदोम और मोआब के साथ पुराना व्यवहार, और अंत में "यहोवा जो न्यायी है, वह इस्राएलियों और अम्मोनियों के बीच में आज न्याय करे।" यह आदमी इतिहास जानता है। पर वह यहोवा के स्वभाव को नहीं जानता, वरना वह कभी होमबलि की मन्नत न मानता। उसके पहले शब्द वृद्ध लोगों से यही हैं: "फिर अब संकट में पड़कर मेरे पास क्यों आए हो?" वह ठुकराए जाने का हिसाब कभी नहीं भूलता, और शायद इसीलिए परमेश्वर से भी हिसाब की भाषा में बात करता है। जो आदमी असुरक्षित है, वह अनुग्रह पर भरोसा नहीं कर पाता; वह गारंटी माँगता है, और गारंटी महँगी पड़ती है।

बारीकी

"वह उसकी एकलौती थी; उसको छोड़ उसके न तो कोई बेटा था और न कोई बेटी।" यह अतिरिक्त वाक्य संयोग नहीं है। यही शब्द, "एकलौता", उत्पत्ति 22 में इसहाक के लिए इस्तेमाल हुआ है, जहाँ एक पिता अपने एकलौते को लेकर पहाड़ पर चढ़ता है। पर वहाँ परमेश्वर स्वयं हाथ रोकते हैं और मेढ़ा देते हैं, क्योंकि वे बच्चों का लहू नहीं चाहते। यहाँ कोई आवाज़ नहीं रोकती, क्योंकि यह मन्नत परमेश्वर ने माँगी ही नहीं थी। मोरिय्याह पर परमेश्वर ने दिखाया कि बलि वे देते हैं; मिस्पा में मनुष्य ने सोचा कि बलि से वे खरीदे जाते हैं। और जब समय पूरा हुआ, तब एकलौते के लिए कोई मेढ़ा नहीं आया, क्योंकि इस बार वही मेढ़ा था।

श्रोता

न्यायियों की किताब उन लोगों के लिए लिखी गई जो राजाओं के युग में पीछे मुड़कर देख रहे थे और पूछ रहे थे कि हम यहाँ तक कैसे पहुँचे। उनके कानों में "कमोश देवता" कोई पुरानी बात नहीं थी; अम्मोनी और मोआबी पड़ोसी उसी पहाड़ी के उस पार थे, और उनके यहाँ बच्चों की बलि का रिवाज सचमुच चलता था। इसलिए यिप्तह की मन्नत उन्हें चौंकाती नहीं, डराती है: देखो, हम कितने उनके जैसे हो गए थे। और वर्ष में चार दिन उसकी बेटी का यश गाने वाली स्त्रियाँ इस बात की जीवित याद थीं कि गलत धर्मशास्त्र का बिल किसके नाम आता है।

चिंतन

आप परमेश्वर से किस बात में सौदा कर रहे हैं, और उस सौदे की कीमत आपके आसपास कौन चुका रहा है?

यिप्तह को आत्मा मिली पर समझ नहीं; आपके जीवन में परमेश्वर का स्वभाव जानने के लिए आप किस पर भरोसा करते हैं, अपने अनुभव पर या उनके वचन पर?

Judges में और गहराई से जानें

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Judges For You

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Keller shows how this dark book shines light on grace for flawed people.

Judges: Such a Great Salvation

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Brings the judges to life without taming the rough edges of the text.

The Message of Judges

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Steady guidance through the darkest chapters of Israel's story.

Judges and Ruth: An Introduction and Commentary

Arthur Cundall

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Judges, Ruth

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Judges 11 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

न्यायियों 11 का क्या अर्थ है?
गिलाद का यिप्तह वेश्या का बेटा था, इसलिए उसके सौतेले भाइयों ने उसे विरासत से बेदखल करके घर से निकाल दिया; तोब देश में वह लुच्चे लोगों का सरदार बन गया। जब अम्मोनी इस्राएल पर चढ़ आए, तब वही वृद्ध लोग उसे वापस बुलाने गए जिन्होंने उसे ठुकराया था, और उसने प्रधान बनने की शर्त पर युद्ध स्वीकार किया। अम्मोनियों के राजा से लम्बी कूटनीतिक बहस के बाद यहोवा का आत्मा उस पर आया, उसने विजय के बदले एक भयानक मन्नत मानी, और लौटने पर उसकी एकलौती बेटी ही डफ बजाती हुई उससे भेंट करने निकल आई।
न्यायियों 11 किस विषय में है?
ठुकराया हुआ भाई जो उद्धारकर्ता बनता है: यह सूत्र बाइबल में बार-बार लौटता है, यूसुफ से लेकर दाऊद तक, और अंत में उस पर जो "अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण न किया।" यिप्तह उस छाया का एक टेढ़ा-मेढ़ा टुकड़ा है, और इब्रानियों 11:32 उसे विश्वास के साक्षियों में गिनता भी है। पर असली सूत्र उलटी दिशा से चमकता है। यहाँ पिता अपनी मन्नत पूरी करने के लिए बेटी को खो देता है; क्रूस पर पिता हमें पाने के लिए अपने पुत्र को देते हैं। यिप्तह की बेटी जबरदस्ती नहीं, सहमति से जाती है, और उसकी वह सहमति उस आवाज़ की दूर की गूँज है जो गतसमनी में कहेगी, "मेरी नहीं, आपकी इच्छा पूरी हो।" फर्क यह है: उसकी मृत्यु किसी को नहीं बचाती, मसीह की मृत्यु सबको।
न्यायियों 11 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यिप्तह शूरवीर है, चतुर है, और भीतर से घायल है। अम्मोनियों के राजा को उसका लम्बा उत्तर एक ज़बरदस्त कानूनी दलील है: तीन सौ साल का कब्ज़ा, एदोम और मोआब के साथ पुराना व्यवहार, और अंत में "यहोवा जो न्यायी है, वह इस्राएलियों और अम्मोनियों के बीच में आज न्याय करे।" यह आदमी इतिहास जानता है। पर वह यहोवा के स्वभाव को नहीं जानता, वरना वह कभी होमबलि की मन्नत न मानता। उसके पहले शब्द वृद्ध लोगों से यही हैं: "फिर अब
न्यायियों 11 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
न्यायियों की किताब उन लोगों के लिए लिखी गई जो राजाओं के युग में पीछे मुड़कर देख रहे थे और पूछ रहे थे कि हम यहाँ तक कैसे पहुँचे। उनके कानों में "कमोश देवता" कोई पुरानी बात नहीं थी; अम्मोनी और मोआबी पड़ोसी उसी पहाड़ी के उस पार थे, और उनके यहाँ बच्चों की बलि का रिवाज सचमुच चलता था। इसलिए यिप्तह की मन्नत उन्हें चौंकाती नहीं, डराती है: देखो, हम कितने उनके जैसे हो गए थे। और वर्ष में चार दिन उसकी बेटी का यश गाने वाली स्त्रियाँ इस बात की जीवित याद थीं कि गलत धर्मशास्त्र का बिल किसके नाम आता है।
न्यायियों 11 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यिप्तह को आत्मा मिली पर समझ नहीं; आपके जीवन में परमेश्वर का स्वभाव जानने के लिए आप किस पर भरोसा करते हैं, अपने अनुभव पर या उनके वचन पर?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Judges 11 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 28

यिप्तह ने कितनी मेहनत से समझाया था। इतिहास बताया, हक़ जताया, परमेश्वर को न्यायी ठहराया। और जवाब में बस यही लिखा है, "तो भी अम्मोनियों के राजा ने यिप्तह की ये बातें न मानीं जो उसने कहला भेजी थीं।"

सही बात कहना तुम्हारे हाथ में है, सुनना दूसरे के हाथ में। कभी सबसे सच्ची बात भी बंद दरवाज़े से टकराकर लौट आती है। पर सोचो, क्या तुम्हारे कान खुले हैं?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

कुछ दिनों के बाद अम्मोनियों ने इस्राएल से युद्ध किया।" यही वह घड़ी थी जब गिलाद के लोगों को यिप्तह की याद आई, वही यिप्तह जिसे उन्होंने घर से निकाल दिया था। कभी कभी परमेश्वर उसी को खड़ा करता है जिसे लोगों ने बेकार समझकर छोड़ दिया। तुझे भी किसी ने ठुकराया है? तेरी कहानी वहीं खत्म नहीं हुई।

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