लूका 5
पाठ
गन्नेसरत की झील के किनारे यीशु एक मछुए की नाव को मंच बना लेते हैं, और उपदेश के बाद उस मछुए से कहते हैं कि गहरे पानी में जाल डाले। रात भर की खाली मेहनत के बाद जो जाल भरता है, वह शमौन को यीशु के पाँवों पर गिरा देता है। इसके बाद अध्याय एक के बाद एक छूत और कलंक की सीमाएँ तोड़ता है: कोढ़ी छुआ जाता है, लकवे का रोगी क्षमा पाता है, एक चुंगी लेनेवाला शिष्य बनता है, और धार्मिक लोग कुड़कुड़ाते हैं, जिनसे यीशु नई मशकों और दूल्हे की बात करते हैं।
मर्म
ध्यान दीजिए कि शमौन का पाप-बोध किसी उपदेश से नहीं, बल्कि आशीष से जागा। मछलियों का ढेर देखकर वह कहता है, "हे प्रभु, मेरे पास से जा, क्योंकि मैं पापी मनुष्य हूँ!" परमेश्वर की भलाई जब इतने निकट आ जाती है कि उससे बचा न जा सके, तब मनुष्य को अपनी असलियत दिखती है। यही इस पूरे अध्याय का धड़कता हुआ मर्म है: यीशु पवित्रता को अपने भीतर इतनी गहराई से धारण करते हैं कि अशुद्धता उन्हें दूषित नहीं करती, बल्कि वे अशुद्ध को शुद्ध कर देते हैं। कोढ़ी को छूने पर यीशु कोढ़ी नहीं होते; कोढ़ी स्वच्छ होता है। पापियों के साथ भोजन करने पर वे पापी नहीं बनते; पापी बुलाए जाते हैं। "वैद्य भले चंगों के लिये नहीं, परन्तु बीमारों के लिये अवश्य है।"
मुख्य सूत्र
"मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का भी अधिकार है" यह वाक्य पूरे पुराने नियम की नसों पर हाथ रखता है। शास्त्रियों का तर्क बिल्कुल सही था: "परमेश्वर को छोड़ कौन पापों की क्षमा कर सकता है?" क्षमा मन्दिर में, बलिदान के द्वारा, याजक के माध्यम से मिलती थी। और यहाँ, कफरनहूम के एक टूटे छप्पर के नीचे, वह अधिकार एक मनुष्य के मुँह से बोलता है। कोढ़ी को याजक के पास भेजना भी यही संकेत देता है: व्यवस्था अभी रद्द नहीं हुई, परन्तु उसका गन्तव्य आ गया है। लैव्यव्यवस्था 14 का अनुष्ठान शुद्ध हुए व्यक्ति की घोषणा करता था; यीशु शुद्धता देते हैं और फिर घोषणा के लिए भेजते हैं। नई मशकों का दृष्टान्त इसी बात का निष्कर्ष है: जो आया है, वह पुरानी व्यवस्था में पैबन्द की तरह नहीं जोड़ा जा सकता।
दर्पण
शमौन की वह रात आपको जानी-पहचानी लगेगी। जिस काम में आप निपुण हैं, जिसमें आपने वर्षों लगाए हैं, उसी में खाली हाथ लौटना: कक्षा जो नहीं सुनती, वह बच्चा जो दूर जा चुका, वह प्रार्थना जिसका कोई उत्तर नहीं आया। और तब कोई बढ़ई आकर कहता है, गहरे में ले चल। शमौन का उत्तर विश्वास का सबसे ईमानदार रूप है: "तो भी तेरे कहने से जाल डालूँगा।" यह उत्साह नहीं, आज्ञाकारिता है। दूसरी ओर, जब आशीष आती है, तो हममें से कई पतरस की तरह पीछे हटते हैं, क्योंकि हमें डर है कि अगर परमेश्वर इतने पास आएँगे तो हमारी असलियत दिख जाएगी। यीशु पीछे नहीं हटते, वे कहते हैं, "मत डर।"
आज एक काम कीजिए: वह एक जगह जहाँ आपने हार मानकर जाल समेट लिया था, उसे कागज़ पर नाम देकर लिखिए, और ज़ोर से कहिए, "तेरे कहने से जाल डालूँगा।"
अन्य वचनों की गूँज
पतरस की प्रतिक्रिया यशायाह 6 की प्रतिध्वनि है, जहाँ नबी मन्दिर में प्रभु की महिमा देखकर चिल्लाता है कि वह अशुद्ध होंठों वाला मनुष्य है। दोनों जगह क्रम वही है: महिमा का दर्शन, अपने पाप की चेतना, और फिर भेजा जाना। परमेश्वर योग्य लोगों को नहीं बुलाते; वे बुलाकर योग्य बनाते हैं। दूसरी गूँज लैव्यव्यवस्था 13 और 14 में है, जहाँ कोढ़ी को बस्ती से बाहर रहना और "अशुद्ध, अशुद्ध" पुकारना था। उस कानून में छूना अशुद्ध करता था। यीशु ने "हाथ बढ़ाकर उसे छुआ" और धारा उलट गई। यही सुसमाचार का व्याकरण है।
पृष्ठभूमि
गलील झील के आसपास मछली पकड़ना छोटा पारिवारिक धंधा नहीं, बल्कि कर और ठेके से बँधा उद्योग था। शमौन, याकूब और यूहन्ना साझेदार थे, नावों और जालों के मालिक, यानी उनके पास छोड़ने योग्य कुछ था, और वे "सब कुछ छोड़कर उसके पीछे हो लिए।" लेवी की स्थिति और कड़वी थी: चुंगी की चौकी पर बैठा आदमी अपने ही लोगों से रोम के लिए पैसा वसूलता था, और इसलिए धार्मिक रूप से भ्रष्ट और सामाजिक रूप से गद्दार माना जाता था। उसके घर के भोज में बैठना यीशु का सार्वजनिक बयान था, क्योंकि उस संस्कृति में साथ खाना अपनापन स्वीकार करना था। फरीसी और व्यवस्थापक यरूशलेम तक से आए थे; यह निगरानी थी, जिज्ञासा नहीं।
केन्द्रीय व्यक्ति
इस अध्याय का यीशु अधिकार और कोमलता का अजीब मेल है। वे किसी और की नाव माँगते हैं, फिर समुद्र को आदेश देते हैं। वे कोढ़ी से कहते हैं, "मैं चाहता हूँ," जहाँ कोढ़ी ने केवल "यदि तू चाहे" कहा था; उनकी इच्छा ही चंगाई है। वे मनों की बातें जानते हैं, पर विरोधियों को कुचलते नहीं, प्रश्न पूछते हैं। और भीड़ के बीच से वे बार-बार निकल जाते हैं: "वह निर्जन स्थानों में अलग जाकर प्रार्थना किया करता था।" यह वाक्य सबसे अधिक कुछ प्रकट करता है। जो मनुष्यों को जीवित पकड़ने के लिए आए हैं, वे स्वयं पिता के सामने खाली हाथ जाते हैं। और वे दूल्हा हैं, जिनके छीने जाने के दिन आएँगे; आनन्द का कारण जो क्रूस की ओर बढ़ रहा है।
चिन्तन के प्रश्न
जब परमेश्वर की भलाई आपके जीवन में अपेक्षा से अधिक प्रकट होती है, तो आपकी पहली प्रतिक्रिया निकट आना है या पतरस की तरह पीछे हटना?
आपके भीतर कौन सी "पुरानी मशक" है, कोई आदत या धारणा, जिसमें आप यीशु के नए दाखरस को ठूँसने की कोशिश कर रहे हैं?
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Luke 5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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लूका 5 का क्या अर्थ है?
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Luke 5 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
जो खाट सालों तक उसे उठाए फिरती थी, अब वह उसे उठाकर चल पड़ा। "वह तुरन्त उनके सामने उठा, और जिस पर वह पड़ा था उसे उठाकर, परमेश्वर की बड़ाई करता हुआ अपने घर चला गया।" यीशु ने पहले पाप क्षमा किए, फिर पाँव मजबूत किए। तेरी वह कमज़ोरी जो तुझे दबाए रखती है, क्या तू उसे मसीह के सामने रखेगा? और घर लौटते हुए क्या तेरे होंठों पर उसकी बड़ाई होगी?
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