मत्ती 8
पाठ
पहाड़ से उतरते ही एक कोढ़ी यीशु के सामने झुकता है, और छूना मना होने के बावजूद यीशु हाथ बढ़ाकर उसे छू देते हैं। फिर कफरनहूम का रोमी सूबेदार, पतरस की सास, शाम को लाए गए अनगिनत बीमार, दो उम्मीदवार चेले जिन्हें यीशु की बेघरी और बुलाहट की कड़वाहट का सामना करना पड़ता है, झील का तूफान, और अंत में गदरेनियों के क्षेत्र में कब्रों से निकलते दो आदमी। अध्याय उस नगर की विनती पर खत्म होता है जो चंगाई देखकर भी कहता है, "हमारे क्षेत्र से बाहर निकल जा।"
मर्म
कोढ़ी की प्रार्थना में एक ही शब्द काँप रहा है: "यदि तू चाहे।" सामर्थ्य पर उसे संदेह नहीं, इच्छा पर है। और यीशु का उत्तर उसी शब्द को लौटाता है, "मैं चाहता हूँ।" यही इस पूरे अध्याय का धड़कता हुआ केंद्र है। मत्ती ने अभी-अभी पहाड़ी उपदेश का अधिकार दिखाया; अब वह उस अधिकार की दिशा दिखाता है। परमेश्वर का राज्य केवल शक्तिशाली नहीं, वह इच्छुक है। और ध्यान दीजिए कि यीशु अशुद्धता से दूर खड़े होकर शब्द नहीं फेंकते; वे छूते हैं। व्यवस्था में अशुद्ध व्यक्ति का स्पर्श शुद्ध को अशुद्ध कर देता था। यहाँ उल्टा होता है। शुद्धता संक्रामक निकलती है। यही अनुग्रह का तर्क है: मसीह हमारी गंदगी में उतरकर हमें अपनी शुद्धता देते हैं।
जोड़नेवाला धागा
श्लोक 17 में मत्ती यशायाह को खींच लाते हैं: "उसने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया।" यह वही गीत है जिसमें परमेश्वर का दास घायल होकर दूसरों को चंगा करता है। मत्ती यह पद चंगाइयों पर लगाकर एक लंबी रेखा खींचते हैं: कोढ़ी का छूना, बुखार का उतरना, तूफान का शांत होना, ये सब क्रूस की ओर इशारा करते हैं, जहाँ वह "उठा लेना" अपनी पूरी कीमत चुकाएगा। बीमारी और मृत्यु सृष्टि के टूटेपन के लक्षण हैं; यीशु लक्षणों का इलाज करते हुए जड़ की ओर बढ़ रहे हैं। इसलिए गदरेनी दुष्टात्माएँ चिल्लाती हैं, "क्या तू समय से पहले हमें दुःख देने यहाँ आया है?" वे जानती हैं कि अंत आ चुका है, बस घड़ी बाकी है।
दर्पण
आप शायद वर्षों से एक ही प्रार्थना दोहरा रहे हैं और थक गए हैं, और भीतर कहीं वह कोढ़ी वाला संदेह बैठा है: परमेश्वर कर सकते हैं, पर क्या वे चाहेंगे? मेरी बीमार माँ के लिए, मेरे उस बच्चे के लिए जो अब फोन नहीं उठाता, मेरी नौकरी के लिए? इस अध्याय में यीशु सबको चंगा नहीं करते, पर जिसके पास भी आते हैं, अनिच्छा से नहीं आते। और सूबेदार, एक कब्जाधारी सेना का अफसर, दिखाता है कि विश्वास योग्यता नहीं माँगता: "मैं इस योग्य नहीं, कि तू मेरी छत के तले आए।" यही स्वीकारोक्ति उसका दरवाज़ा खोलती है। आज, अभी: एक कागज़ पर उस एक व्यक्ति का नाम लिखिए जिसके लिए आप थक चुके हैं, और उस नाम पर हाथ रखकर ज़ोर से कहिए, "प्रभु, मैं इस योग्य नहीं, पर केवल मुँह से कह दे।"
प्रश्न
सूअरों का क्या? दो आदमी मुक्त हुए, पर एक पूरा झुंड डूब मरा और किसी किसान की जीविका पानी में बह गई, और नगर ने यीशु से जाने को कहा। क्या चंगाई की कीमत किसी और ने चुकाई? मत्ती कोई सफाई नहीं देते। वे यह भी नहीं कहते कि यीशु ने सूअरों को भेजा; दुष्टात्माओं ने विनती की और यीशु ने केवल कहा, "जाओ!" पर यह असहजता बनी रहती है। शायद यही बिंदु है: जब राज्य किसी इलाके में प्रवेश करता है, तो चीज़ें टूटती हैं, अर्थव्यवस्था हिलती है, और लोगों को चुनना पड़ता है कि उन्हें क्या प्यारा है, सूअर या वे दो आदमी जो अब कपड़े पहने बैठे हैं। नगर ने चुन लिया। यह मुझे डराता है, क्योंकि मैं समझता हूँ कि उन्होंने ऐसा क्यों किया।
श्रोता
मत्ती मुख्यतः यहूदी विश्वासियों के लिए लिख रहे थे, जो मंदिर के विनाश के बाद यह सवाल ढो रहे थे कि अन्यजातियों की बढ़ती भीड़ और इस्राएल के इनकार का क्या अर्थ है। उनके कानों में श्लोक 11-12 बम की तरह गिरा होगा। "पूर्व और पश्चिम से" आकर लोग अब्राहम, इसहाक और याकूब के साथ भोज में बैठेंगे, जबकि "राज्य के सन्तान बाहर अंधकार में डाल दिए जाएँगे।" यह वंश पर भरोसे का सीधा खंडन था। और यह एक रोमी अफसर के विश्वास पर कहा गया, उसी साम्राज्य के आदमी के बारे में जिसने उनका मंदिर जलाया था। मत्ती इस असहज सच्चाई को नरम नहीं करते: परमेश्वर के घर में जगह जन्म से नहीं, भरोसे से मिलती है।
एक बारीकी
तूफान में यीशु चेलों को "अल्पविश्वासियों" कहते हैं, यूनानी में ओलिगोपिस्तोई, यानी "थोड़े विश्वास वाले"। गौर कीजिए, "अविश्वासी" नहीं। उनके पास विश्वास था, वरना वे यीशु को जगाते ही क्यों? पर उनका विश्वास उनके डर से छोटा था। और फिर सबसे अजीब पंक्ति: "और वह सो रहा था।" नाव लहरों से ढँप रही है, अनुभवी मछुआरे चीख रहे हैं, और परमेश्वर का पुत्र सो रहे हैं। यह लापरवाही नहीं, भरोसा है। जो अपने पिता पर इतना भरोसा करता है कि तूफान में सो सके, वही तूफान को डाँट सकता है। उस नींद में हमारे लिए एक आमंत्रण छिपा है, और एक ताना भी।
चिंतन के प्रश्न
कोढ़ी को यीशु की सामर्थ्य पर नहीं, उनकी इच्छा पर संदेह था। आपकी प्रार्थनाओं में कौन-सा संदेह सचमुच बैठा है?
गदरेनी नगर ने चंगाई देखकर भी यीशु से जाने को कहा, क्योंकि कीमत ज़्यादा थी। आपके जीवन में वह "सूअरों का झुंड" क्या है जिसे आप यीशु के हाथों में देने से हिचकते हैं?
Matthew में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Short, fresh readings that make Matthew feel newly written.
The King and his kingdom, traced through the whole Gospel.
Matthew: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
The Message of the Sermon on the Mount
Stott's classic on Matthew 5-7, the charter of the kingdom.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Matthew 8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
मत्ती 8 का क्या अर्थ है?
मत्ती 8 किस विषय में है?
मत्ती 8 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
मत्ती 8 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
मत्ती 8 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Matthew 8 में आपको क्या स्पर्श करता है?
इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें
