बाइबल व्याख्या

गिनती 22

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

इस्राएल यरीहो के सामने, यरदन के पूर्वी किनारे पर डेरे डाल चुका है, और मोआब का राजा बालाक डर से व्याकुल है। वह फरात के किनारे बसे बिलाम को बुलवाता है कि वह इस्राएल को श्राप दे, पहले कम प्रतिष्ठित दूत, फिर बड़े दूत और बड़े वादे भेजकर। परमेश्वर पहले मना करते हैं, फिर जाने की अनुमति देते हैं, और फिर रास्ते में अपने दूत के द्वारा उसका विरोध करते हैं। गदही बोलती है, बिलाम की आँखें खुलती हैं, वह मुँह के बल गिरता है, और अंत में वही आगे बढ़ता है, इस शर्त के साथ कि वह केवल वही कहेगा जो परमेश्वर उसके मुँह में डालेंगे।

मूल बात

यहाँ परमेश्वर की आशीष एक बंद मुट्ठी की तरह है जिसे कोई मंत्र, कोई दक्षिणा, कोई राजा खोल नहीं सकता। "उन लोगों को श्राप मत दे, क्योंकि वे आशीष के भागी हो चुके हैं।" ध्यान दें, तर्क इस्राएल के गुणों पर नहीं टिका; अध्याय 20 और 21 में यही लोग बड़बड़ाते और गिरते रहे हैं। आशीष उनकी योग्यता का इनाम नहीं, परमेश्वर के वचन का बंधन है। और इसीलिए यह अध्याय अजीब तरह से सांत्वना देता है: जो सुरक्षा हमने नहीं कमाई, उसे हम खो भी नहीं सकते। परमेश्वर अपने लोगों की रक्षा उनके पीछे से करते हैं, तब भी जब वे नहीं जानते कि किसी दूर पहाड़ पर उनके विषय में सौदेबाज़ी हो रही है।

जोड़ने वाला सूत्र

यह अध्याय अब्राहम से की गई प्रतिज्ञा की गूँज है, कि जो तुझे आशीष दे वह आशीषित होगा और जो श्राप दे वह श्रापित। बालाक उस वाक्य को उलटना चाहता है और पाता है कि वचन उलटता नहीं। यहीं से एक रेखा मसीह तक जाती है: पौलुस लिखता है कि हमारे विरुद्ध लिखी हुई दोषपत्री क्रूस पर कीलों से जड़ दी गई। बिलाम की कहानी में परमेश्वर ने श्राप को बाहर से रोका; क्रूस पर उन्होंने उसे अपने ऊपर ले लिया। और एक और सूत्र: परमेश्वर एक गैर-इस्राएली भाड़े के भविष्यवक्ता के मुँह से अपने लोगों को आशीष देते हैं। जो आवाज़ें हमारे धार्मिक दायरे के बाहर हैं, वे भी उनके हाथ में हैं।

दर्पण

बिलाम कहता है, "चाहे बालाक अपने घर को सोने चाँदी से भरकर मुझे दे दे," और यह पूरी तरह सच लगता है। फिर वह जोड़ता है, "आज रात को यहीं टिके रहो, ताकि मैं जान लूँ, कि यहोवा मुझसे और क्या कहता है।" यह वह क्षण है जहाँ हम अपने आप को पहचानते हैं। परमेश्वर ने साफ़ मना किया था, लेकिन जब दाम बढ़ता है तो हम प्रार्थना को दोबारा पूछने में बदल देते हैं, यह आशा करते हुए कि उत्तर बदल जाएगा। वेतन का प्रस्ताव, वह रिश्ता जिसे हम छोड़ना नहीं चाहते, वह मौका जिसके लिए हम विवेक को थोड़ा मोड़ लेते हैं। और गुस्सा, जो हमेशा उसी पर उतरता है जो सबसे कमज़ोर और सबसे पास है: गदही, पत्नी, बच्चा, सहकर्मी। सोचिए, हमारे रास्ते में परमेश्वर का कौन-सा विरोध हमने अब तक बाधा समझकर पीटा है?

प्रसंग

चालीस वर्ष खत्म होने को हैं। इस्राएल मोआब के अराबा में है, यरीहो के आमने-सामने, प्रवेश की दहलीज़ पर। मोआब के लिए यह भीड़ एक राष्ट्रीय संकट है, इसलिए वह चित्र, "जिस तरह बैल खेत की हरी घास को चट कर जाता है।" प्राचीन पूर्व में युद्ध केवल तलवारों से नहीं, शब्दों से भी लड़ा जाता था; एक प्रसिद्ध श्रापकर्ता को भारी दक्षिणा देकर बुलाना उतना ही व्यावहारिक था जितना सेना जुटाना। बिलाम कोई ठग नहीं, अंतरराष्ट्रीय ख्याति का पेशेवर है, और वह यहोवा का नाम भी जानता है। बालाक उसे बाल के ऊँचे स्थानों पर ले जाता है, बलि चढ़ाता है, हर धार्मिक तकनीक आज़माता है। यह अध्याय दिखाता है कि तकनीक कहाँ टूटती है।

श्रोताओं की पहचान

पहले सुननेवाले वे लोग थे, या उनकी संतान, जो उस समय अपने डेरों में सो रहे थे और उन्हें कुछ पता नहीं था। कल्पना कीजिए उस पीढ़ी का, जो कनान में बसने के बाद यह कहानी सुनती है: हमें मालूम ही नहीं था कि पहाड़ पर हमारे विरुद्ध क्या रचा जा रहा था। यह उनके लिए भय का इलाज था। मोआब, मिद्यान, बाल के ऊँचे स्थान, ये नाम उनके अपने इतिहास के घाव थे। और उन्हें यह भी सुनाई देता था जो हमसे छूट जाता है: एक अन्यजाति नबी की गदही परमेश्वर को देख लेती है, जबकि इस्राएल स्वयं अक्सर अंधा रहा। यह कहानी सांत्वना देती है और चुपचाप शर्मिंदा भी करती है।

मुख्य पात्र

बिलाम को समझना कठिन है, और पाठ उसे आसान नहीं बनाता। वह सच बोलता है और साथ ही लालच रखता है; वह आज्ञाकारी शब्द कहता है और उसी रात दरवाज़ा खुला छोड़ देता है। परमेश्वर उसे जाने देते हैं और फिर तलवार लेकर रास्ता रोकते हैं, और यह विरोधाभास पाठ हल नहीं करता। शायद इसलिए कि अनुमति और स्वीकृति एक चीज़ नहीं है। बिलाम की स्वीकारोक्ति, "मैंने पाप किया है; मैं नहीं जानता था," ईमानदार है, मगर अधूरी: उसे बताया गया था। वह झुकता है, दण्डवत् करता है, और फिर भी उसी रास्ते पर चल पड़ता है। यही सबसे डरावनी बात है, कि आदमी परमेश्वर को देख सकता है, गिर सकता है, और फिर भी अपने मुनाफ़े की दिशा में लौट सकता है।

चिंतन के प्रश्न

किस बात में मैं परमेश्वर से दोबारा पूछ रहा हूँ, क्योंकि पहला उत्तर मुझे महँगा पड़ता है?

मेरे जीवन में कौन या क्या वह "गदही" है, जो मुझसे अधिक देख रही है, और जिसे मैं सुनने के बजाय दबा देता हूँ?

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Numbers 22 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

गिनती 22 का क्या अर्थ है?
रास्ते के बीच एक गदही तीन बार हट जाती है, और जो आदमी दूर देश से "देखनेवाला" कहकर बुलवाया गया है, वह कुछ नहीं देखता। यह कहानी का सबसे चुभनेवाला क्षण है: नंगी तलवार लिये परमेश्वर का दूत सामने खड़ा है, पशु उसे पहचान लेता है, और भविष्यवक्ता लाठी उठा लेता है। कुछ देर इस चित्र के साथ बैठिए, इसे जल्दी समझाने की कोशिश किए बिना।
गिनती 22 किस विषय में है?
यहाँ परमेश्वर की आशीष एक बंद मुट्ठी की तरह है जिसे कोई मंत्र, कोई दक्षिणा, कोई राजा खोल नहीं सकता। "उन लोगों को श्राप मत दे, क्योंकि वे आशीष के भागी हो चुके हैं।" ध्यान दें, तर्क इस्राएल के गुणों पर नहीं टिका; अध्याय 20 और 21 में यही लोग बड़बड़ाते और गिरते रहे हैं। आशीष उनकी योग्यता का इनाम नहीं, परमेश्वर के वचन का बंधन है। और इसीलिए यह अध्याय अजीब तरह से सांत्वना देता है: जो सुरक्षा हमने नहीं कमाई, उसे हम खो भी नहीं सकते। परमेश्वर अपने लोगों की रक्षा उनके पीछे से करते हैं, तब भी जब वे नहीं जानते कि किसी दूर पहाड़ पर उनके विषय में सौदेबाज़ी हो रही है।
गिनती 22 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
बिलाम कहता है, "चाहे बालाक अपने घर को सोने चाँदी से भरकर मुझे दे दे," और यह पूरी तरह सच लगता है। फिर वह जोड़ता है, "आज रात को यहीं टिके रहो, ताकि मैं जान लूँ, कि यहोवा मुझसे और क्या कहता है।" यह वह क्षण है जहाँ हम अपने आप को पहचानते हैं। परमेश्वर ने साफ़ मना किया था, लेकिन जब दाम बढ़ता है तो हम प्रार्थना को दोबारा पूछने में बदल देते हैं, यह आशा करते हुए कि उत्तर बदल जाएगा। वेतन का प्रस्ताव, वह रिश
गिनती 22 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पहले सुननेवाले वे लोग थे, या उनकी संतान, जो उस समय अपने डेरों में सो रहे थे और उन्हें कुछ पता नहीं था। कल्पना कीजिए उस पीढ़ी का, जो कनान में बसने के बाद यह कहानी सुनती है: हमें मालूम ही नहीं था कि पहाड़ पर हमारे विरुद्ध क्या रचा जा रहा था। यह उनके लिए भय का इलाज था। मोआब, मिद्यान, बाल के ऊँचे स्थान, ये नाम उनके अपने इतिहास के घाव थे। और उन्हें यह भी सुनाई देता था जो हमसे छूट जाता है: एक अन्यजाति नबी की गदही परमेश्वर को देख लेती है, जबकि इस्राएल स्वयं अक्सर अंधा रहा। यह कहानी सांत्वना देती है और चुपचाप शर्मिंदा भी करती है।
गिनती 22 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
किस बात में मैं परमेश्वर से दोबारा पूछ रहा हूँ, क्योंकि पहला उत्तर मुझे महँगा पड़ता है?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Numbers 22 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 8

पिता, धन्यवाद कि आप चुप रहनेवाले परमेश्वर नहीं हैं। बिलाम कह सका, "जो बात यहोवा मुझसे कहेगा, वही मैं तुम्हें बताऊँगा," क्योंकि आप सचमुच बोलते हैं। धन्यवाद कि जल्दबाज़ी में उत्तर देने की जगह हम एक रात ठहरकर आपकी आवाज़ की बाट जोह सकते हैं।

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