नीतिवचन 19
पाठ
नगर के फाटक पर एक आदमी है जो पीछे-पीछे दौड़ रहा है। वह बोलता जा रहा है, सफ़ाई देता जा रहा है, पर जिनसे वह बात करना चाहता है वे मुड़ते नहीं: "वह बातें करते हुए उनका पीछा करता है, परन्तु उनको नहीं पाता।" यही अध्याय उन्नीस का संसार है। कहावतों की यह लड़ी निर्धनता और मित्रता के कड़वे गणित से शुरू होती है, फिर झूठे गवाह, राजा के क्रोध, आलसी के हाथ, झगड़ालू पत्नी, पुत्र की ताड़ना और अंत में ठट्ठा करनेवाले की पीठ तक जाती है। बीच में, जैसे पत्थरों के बीच सोने की एक नस, वह वाक्य पड़ा है जो सब कुछ बदल देता है: "जो युक्ति यहोवा करता है, वही स्थिर रहती है।"
मर्म
इस अध्याय का परमेश्वर तमाशबीन नहीं है। वे मानव समाज के किनारे खड़े होकर सिर नहीं हिलाते; वे उसमें एक पक्ष हैं। पद 17 में एक चौंकाने वाली बात कही गई है: "जो कंगाल पर अनुग्रह करता है, वह यहोवा को उधार देता है।" यहाँ स्वर्ग का राजा अपने आप को एक कर्ज़दार की स्थिति में रख देते हैं। जिस व्यक्ति को कोई नहीं पहचानता, जिसके भाई तक उससे बैर रखते हैं, उसके साथ परमेश्वर अपना खाता जोड़ लेते हैं। और पद 21 इस पूरे संसार पर छत डाल देता है: मनुष्य की कल्पनाएँ अनगिनत हैं, परमेश्वर की युक्ति एक है और वही टिकती है। बुद्धि इसी दोहरे सत्य में जीना सीखना है, न कि चालाकी से जीवन को साध लेना।
जोड़ने वाला सूत्र
इब्रानी पाठ में पद 17 अपने आप में सम्पूर्ण है, पर हिन्दी बाइबल ने उसके साथ मत्ती 25:40 का संकेत जोड़ा है, और यह संकेत सही जगह पर है। यीशु मसीह उस दृश्य में न्यायी के सिंहासन पर बैठकर कहते हैं कि जो मेरे इन छोटे भाइयों में से एक के साथ किया गया, वह मेरे साथ किया गया। नीतिवचन का "उधार" मसीह में देह धारण कर लेता है। और आगे बढ़िए: वह जो धनी था, हमारे लिए कंगाल बना, फाटक के बाहर निकाला गया, और उसके मित्र भी उससे दूर हो गए, ठीक पद 7 की तरह। पुराने नियम की यह ठंडी कहावत क्रूस पर जाकर जीवनी बन जाती है।
दर्पण
सबसे तीखा वाक्य पद 3 है: "मूर्खता के कारण मनुष्य का मार्ग टेढ़ा होता है, और वह मन ही मन यहोवा से चिढ़ने लगता है।" हम यही करते हैं। हमने नौकरी में जल्दबाज़ी की, कर्ज़ लिया, रिश्ते में वह बात कह दी जो नहीं कहनी थी, बच्चों को समय नहीं दिया, और जब परिणाम आया तो शिकायत ऊपर की ओर मुड़ गई। नाराज़गी खुले शब्दों में नहीं आती; वह "मन ही मन" रहती है, प्रार्थना में एक ठंडापन बनकर, चुप्पी बनकर। इस अध्याय का उतावलापन (पद 2) और यह भीतरी चिढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
आज ही, दस मिनट में: एक कागज़ पर वह एक निर्णय लिखिए जो आपका अपना था और गलत निकला, और उसके नीचे ज़ोर से कहिए, "यह मेरा चुनाव था, परमेश्वर का दोष नहीं।" फिर कागज़ फाड़ दीजिए।
कठिन प्रश्न
पद 23 कहता है: यहोवा का भय माननेवाला "ठिकाना पाकर सुखी रहता है; उस पर विपत्ति नहीं पड़ने की।" पर हम सब ऐसे लोगों को जानते हैं जो जीवन भर परमेश्वर से डरते रहे और फिर कैंसर आया, बेटा चला गया, नौकरी छिन गई। क्या यह वाक्य झूठा है? नहीं, पर यह अनुबंध भी नहीं है। नीतिवचन संसार की सामान्य बनावट का नक्शा है, बीमा-पत्र नहीं। और अय्यूब की पूरी पुस्तक इसी वाक्य के विरुद्ध खड़ी कर दी गई है, मानो परमेश्वर स्वयं नहीं चाहते कि हम इसे यांत्रिक बना लें। "ठिकाना" शायद विपत्ति की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि विपत्ति के भीतर एक जगह है जहाँ आप गिरते नहीं। यह उत्तर सुकून नहीं देता। मुझे भी नहीं देता।
एक छोटा सा ब्योरा
पद 12 में दो चित्र हैं जिन्हें हम पढ़कर आगे बढ़ जाते हैं: राजा का क्रोध "सिंह की गर्जन" और उसकी प्रसन्नता "घास पर की ओस।" प्राचीन इस्राएल में गर्मियों के महीनों में वर्षा नहीं होती थी; रात की ओस ही फसल और जीवन के बीच का अंतर थी। यानी राजा की कृपा विलासिता नहीं, जीविका है। और दोनों चित्रों में एक बात साझा है: सिंह की दहाड़ और रात की ओस, दोनों पर आपका कोई वश नहीं। जो शक्तिशाली के नीचे जीता है, वह मौसम के नीचे जीता है। इसीलिए अगला ही पद (14) कहता है कि घर और धन पुरखाओं से मिलते हैं, पर बुद्धिमती पत्नी "यहोवा ही से।" कुछ चीज़ें दरबार से नहीं, ऊपर से आती हैं।
शास्त्र की गूँज
मत्ती 25:40 इस अध्याय के पद 17 को पूरा करता है और साथ ही उसे और भारी बना देता है: उधार चुकाने का दिन तय है, और चुकाने वाला न्यायी भी है। दूसरी ओर, पद 21 की गूँज याकूब की पत्री के उस हिस्से में सुनाई देती है जहाँ व्यापारी कहते हैं, हम कल उस नगर में जाएँगे और लाभ कमाएँगे, और याकूब उन्हें टोकता है: तुम्हें कल का पता ही नहीं। नीतिवचन योजना बनाने से मना नहीं करता, वह योजना को उसकी जगह पर रख देता है। कल्पनाएँ आपकी हो सकती हैं; स्थिरता केवल परमेश्वर की युक्ति की है।
चिंतन के प्रश्न
आपके जीवन का कौन-सा "टेढ़ा मार्ग" वास्तव में आपकी अपनी मूर्खता से बना, और आपने उसका हिसाब चुपचाप परमेश्वर के खाते में क्यों डाल दिया?
अगर कंगाल पर किया गया अनुग्रह सचमुच परमेश्वर को दिया गया उधार है, तो इस सप्ताह आपका खाता कैसा दिखता है, और किसका नाम उसमें लिखा जाना चाहिए था?
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Proverbs 19 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
नीतिवचन 19 का क्या अर्थ है?
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नीतिवचन 19 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
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Proverbs 19 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
जो बुद्धि प्राप्त करता है वह अपने प्राण से प्रेम रखता है, और जो समझ को थामे रहता है उसका भला होगा।"
खुद से प्रेम करना, यह हम आराम और सुविधा में ढूँढ़ते हैं। पर यहाँ कहा गया है कि अपनी आत्मा से प्रेम करने का असली तरीका बुद्धि पाना है। जब तू परमेश्वर के वचन को टालता है, तू किसी और को नहीं, अपने ही प्राण को चोट पहुँचा रहा है। आज एक कदम समझ की ओर बढ़ा।
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