भजन संहिता 22:1
पाठ
भजन २२ की पहली ही पंक्ति एक चीख है, कोई प्रार्थना की भूमिका नहीं: "हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?" दाऊद दो बार पुकारते हैं, मानो पहली बार में आवाज़ टूट गई हो, और फिर तीन शिकायतें एक साथ रख देते हैं: आप मेरी पुकार से दूर हैं, आप मेरी सहायता से दूर हैं, और मेरा उद्धार कहीं दिखाई नहीं देता। ध्यान दीजिए कि यह नास्तिक की बात नहीं है। जो कहता है "मेरे परमेश्वर", वह रिश्ता तोड़ नहीं रहा; वह उसी रिश्ते के भीतर से चिल्ला रहा है कि यह रिश्ता इस समय काम क्यों नहीं कर रहा। अगले पद में वह और स्पष्ट करता है: दिन-रात पुकारता हूँ, पर उत्तर नहीं मिलता।
मर्म
यहाँ परमेश्वर की अनुपस्थिति का अनुभव और उनकी वाचा की सच्चाई एक-दूसरे से टकराते हैं, और भजनकार इस टकराव को छिपाता नहीं। "मेरे परमेश्वर" कहना वाचा की भाषा है, वही भाषा जिससे इस्राएल सीनै पर्वत के बाद से जीता आया था: मैं तुम्हारा परमेश्वर, तुम मेरी प्रजा। इसलिए यह प्रश्न "क्यों छोड़ दिया" केवल भावना नहीं, धर्मशास्त्रीय संकट है। यदि परमेश्वर विश्वासयोग्य हैं, तो यह सन्नाटा क्या है? ध्यान दीजिए कि भजनकार दो में से किसी भी आसान रास्ते पर नहीं जाता। वह न तो परमेश्वर की भलाई से इनकार करता है, न अपने दर्द को झूठा ठहराता है। वह दोनों को पकड़े रहता है और परमेश्वर के सामने ही रख देता है। यही बाइबल का विश्वास है: शिकायत प्रार्थना का विरोध नहीं, प्रार्थना का एक रूप है। अनुग्रह इतना बड़ा है कि वह हमारी नाराज़गी को भी झेल सकता है।
बड़ी कहानी का सूत्र
इस पंक्ति को क्रूस पर यीशु मसीह ने अपनी भाषा में दोहराया, और उन्होंने केवल एक वाक्य उधार नहीं लिया, उन्होंने पूरा भजन अपने ऊपर ले लिया। इसी भजन में लिखा है "वह मेरे हाथ और मेरे पैर छेदते हैं" और "वे मेरे वस्त्र आपस में बाँटते हैं, और मेरे पहरावे पर चिट्ठी डालते हैं"; गोलगोथा पर ये शब्द कागज़ से उतरकर घटना बन गए। पर सूत्र यहीं समाप्त नहीं होता। जो भजन परित्याग की चीख से शुरू होता है, वह राज्य की घोषणा पर जाकर रुकता है: "क्योंकि राज्य यहोवा ही का है, और सब जातियों पर वही प्रभुता करता है।" यही मुक्ति का ढाँचा है। एक धर्मी जन का त्यागा जाना बाँझ त्रासदी नहीं रहता; उसी के भीतर से पृथ्वी के छोर तक फैलने वाला उद्धार फूटता है। पद एक का "क्यों" पद अट्ठाईस के सिंहासन तक ले जाता है।
दर्पण
आप यह पंक्ति तब तक नहीं समझेंगे जब तक आपने स्वयं महीनों किसी बात के लिए प्रार्थना न की हो और कुछ न हुआ हो। बीमार माता-पिता की रिपोर्ट हर बार और बुरी आती है। वह नौकरी, जिसके लिए आपने उपवास रखा, किसी और को मिल गई। वह बच्चा जो चर्च छोड़ गया, फोन नहीं उठाता। ऐसे समय में हम दो में से एक चीज़ करते हैं: या तो रविवार को मुस्कुराकर कहते हैं कि सब ठीक है, या चुपचाप प्रार्थना करना बंद कर देते हैं। यह पद तीसरा रास्ता खोलता है, और वह रास्ता परमेश्वर की ओर ही जाता है, उनसे दूर नहीं। शिकायत को प्रार्थना बनने दीजिए। आज, अकेले में, उस एक बात का नाम लेकर यह पद ऊँची आवाज़ में बोलिए: "हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?" और फिर उस स्थिति का नाम जोड़ दीजिए। मन में नहीं, होंठों से।
एक बारीकी
"छोड़ दिया" के लिए इब्रानी शब्द है अज़ब, और यह कोई हल्का शब्द नहीं। यही क्रिया पूरे पुराने नियम में वाचा तोड़ने के लिए इस्तेमाल होती है: इस्राएल ने यहोवा को छोड़ दिया, यहोवा अपनी प्रजा को नहीं छोड़ेंगे। भजनकार जानबूझकर यही शब्द उठाता है और परमेश्वर की ओर मोड़ देता है। वह वही आरोप लगा रहा है जो आमतौर पर इस्राएल पर लगता था। यह गुस्ताख़ी है, पर यह विश्वास से निकली गुस्ताख़ी है, क्योंकि केवल वही व्यक्ति ऐसा कह सकता है जो वाचा को गंभीरता से लेता है। और साथ में लगा "मेरे" इस आरोप को खंडन भी कर देता है। जो आपको छोड़ चुका हो, उसे आप "मेरे परमेश्वर" नहीं कहते। एक ही वाक्य में परित्याग का अनुभव और सम्बन्ध का दावा, दोनों खड़े हैं।
मुख्य पात्र
इस पद का असली विषय परमेश्वर हैं, और वे यहाँ दो रूपों में दिखते हैं जिन्हें भजनकार मिला नहीं पाता। एक ओर वे "इस्राएल की स्तुति के सिंहासन पर विराजमान" पवित्र परमेश्वर हैं, जिन्होंने पुरखाओं को बार-बार छुड़ाया और किसी को लज्जित नहीं होने दिया। दूसरी ओर वे चुप हैं, दिन को भी और रात को भी। पवित्रता का अर्थ यही है कि परमेश्वर हमारे हिसाब-किताब में फिट नहीं बैठते; वे अपनी भलाई को हमारे समय-सारणी पर प्रमाणित करने को बाध्य नहीं। फिर भी इसी भजन के पद चौबीस में वह उत्तर आता है जो पहले पद को झुठलाता नहीं, पर उसे पूरा करता है: "यहोवा ने उससे अपना मुख नहीं छिपाया; पर जब उसने उसकी दुहाई दी, तब उसकी सुन ली।" अनुभव कहता था, छोड़ दिया। सत्य कहता है, सुन लिया। भजन दोनों को रहने देता है।
शास्त्र की गूँज
इस पद की सबसे गहरी गूँज सुसमाचारों में है, जहाँ यीशु मसीह नौवें घंटे यही चीख उठाते हैं। वे इसे उद्धरण के रूप में नहीं, अपने अनुभव के रूप में बोलते हैं, और तभी यह पद अपनी पूरी गहराई तक उतरता है: वहाँ परित्याग केवल महसूस नहीं हुआ, वह वास्तविक था, क्योंकि वहाँ न्याय उठाया जा रहा था। दूसरी गूँज इब्रानियों की पत्री में है, जो इसी भजन के पद बाईस को उद्धृत करती है, "मैं अपने भाइयों के सामने तेरे नाम का प्रचार करूँगा", और उसे मसीह के मुँह में रखती है। यानी जो व्यक्ति पद एक में अकेला था, वह पद बाईस में एक परिवार के बीच खड़ा है, और हम उस परिवार में हैं।
चिंतन
आपने परमेश्वर के सामने आख़िरी बार कब ईमानदारी से शिकायत की थी, और यदि कभी नहीं, तो क्या रोकता है?
यदि यीशु मसीह इस चीख के भीतर से होकर गुज़रे, तो आपकी वर्तमान चुप्पी के बारे में यह क्या कहता है?
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Psalms 22:1 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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भजन संहिता 22:1 का क्या अर्थ है?
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Psalms 22 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, जब चारों ओर से घेर लिया जाता हूँ और कोई रास्ता नहीं दिखता, तब मैं उस दर्द को याद करता हूँ जो यीशु ने मेरे लिए सहा। उसके छिदे हुए हाथ मुझे बताते हैं कि तू मुझे छोड़ता नहीं। इस घेरे के बीच भी मुझे थामे रख।
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