बाइबल व्याख्या

भजन संहिता 23:2

बाइबल
यह वचन Jagdish kameshwar द्वारा समर्पित है

पाठ

चरवाहा भेड़ को हरी घास के बीच बैठा देता है, और उसे ऐसे पानी के किनारे ले जाता है जो शोर नहीं करता, जो डराता नहीं। दो क्रियाएँ हैं और दोनों परमेश्वर की हैं: वे बैठाते हैं, वे ले चलते हैं। भेड़ न चरागाह ढूँढ़ती है, न रास्ता तय करती है। इस आधे पद में विश्राम और गति साथ-साथ चलते हैं, जैसे कोई किसी थके हुए को पहले लिटाए और फिर, ताकत लौटने पर, आगे बढ़ाए। ध्यान दीजिए कि "मुझे कुछ घटी न होगी" के तुरंत बाद यह पद आता है; पद 2 उस कमी-रहित जीवन का पहला ठोस चित्र है, कोई अस्पष्ट आशीष नहीं बल्कि घास, पानी और बैठने की जगह।

मर्म

यह पद कहता है कि परमेश्वर की देखभाल केवल संकट में बचाना नहीं, बल्कि विश्राम देना भी है। और विश्राम बाइबल में कभी छोटी बात नहीं रहा: सृष्टि सातवें दिन विश्राम पर पहुँचती है, और वाचा का पूरा जीवन सब्त के इर्द-गिर्द साँस लेता है। भेड़ तभी बैठती है जब वह भरी हुई और सुरक्षित हो; डरी हुई भेड़ खड़ी रहती है। इसलिए "वह मुझे हरी-हरी चराइयों में बैठाता है" एक ईश्वरशास्त्रीय दावा है, अनुभव-रिपोर्ट नहीं: यहाँ अनुग्रह इतना ठोस है कि शरीर तक उसे मान लेता है। और "सुखदाई जल" का इब्रानी शब्द मेनुहोत सिर्फ़ शांत पानी नहीं, ठहराव की जगह कहता है, वही शब्द जो देश में बसने के विश्राम के लिए इस्तेमाल होता है। यानी चरवाहा भेड़ को वहीं ले जा रहा है जहाँ इस्राएल को परमेश्वर ने ले जाने की शपथ खाई थी।

सूत्र

चरवाहे की तस्वीर इस्राएल में कभी केवल रोमानी नहीं थी; यह राजनीतिक भाषा थी। राजा चरवाहे कहलाते थे, और यहेजकेल 34 में परमेश्वर उन झूठे चरवाहों पर मुकदमा चलाते हैं जिन्होंने भेड़ों को चराने के बजाय खाया, और फिर घोषणा करते हैं कि वे स्वयं आकर अपनी भेड़ों को अच्छी चराई में चराएँगे। दाऊद का यह पद उसी वादे की छोटी-सी झलक है। और जब यीशु मसीह अपने को अच्छा चरवाहा कहते हैं, तो वे किसी कोमल उपमा का प्रयोग नहीं कर रहे, वे उस पुराने दावे को अपने ऊपर ले रहे हैं। क्रूस पर वह चरवाहा भेड़ों की जगह लेटता है ताकि भेड़ें बैठ सकें। "बैठाता है" के पीछे अंततः एक कीमत खड़ी है।

दर्पण

हममें से अधिकतर लेटना नहीं जानते। काम की सूची कभी ख़त्म नहीं होती, बच्चों का साल कभी हल्का नहीं होता, बैंक का खाता कभी पर्याप्त नहीं लगता, और रात को शरीर बिस्तर पर होता है जबकि मन अगले सोमवार में। हम मानते हैं कि रुकना बेवफ़ाई है, कि अगर मैंने पकड़ ढीली की तो सब गिर जाएगा। यह पद उस झूठ को चुपचाप तोड़ता है: भेड़ को चरागाह ढूँढ़ने का काम सौंपा ही नहीं गया। जो परमेश्वर आपको बैठाते हैं, वे आपके बैठे रहने पर भी संसार सँभाले रखते हैं। आज दस मिनट के लिए फ़ोन दूसरे कमरे में रख दीजिए, कुर्सी पर बिना कुछ माँगे बैठिए, और धीरे से ज़ोर से कहिए: "वह मुझे बैठाते हैं।"

शास्त्र की गूँज

यीशु का वह बुलावा कि थके और बोझ से दबे हुए लोग उनके पास आएँ और वे उन्हें विश्राम देंगे, ठीक इसी पद की भाषा है, केवल अब वह वादा एक व्यक्ति के मुँह से निकलता है जो सामने खड़ा है। और प्रकाशितवाक्य में मेम्ना अपनी प्रजा को जीवन के जल के सोतों तक ले चलता है, जहाँ हर आँसू पोंछा जाता है; वहाँ पद 2 की चराई और झरना अपनी अंतिम शक्ल पा लेते हैं। यानी यह पद तीन समयों में एक साथ खड़ा है: दाऊद के भेड़ों वाले अनुभव में, मसीह के बुलावे में, और उस नए सृष्टि-रूपी चरागाह में जहाँ भेड़ें फिर कभी नहीं उठेंगी क्योंकि कोई ख़तरा बचा ही नहीं होगा।

मुख्य पात्र

इस आधे पद में करने वाला केवल एक है। परमेश्वर पहल करते हैं, वे स्थान चुनते हैं, वे गति तय करते हैं। यह गौर करने लायक है कि वे भेड़ को धक्का नहीं देते; वे न डाँटते हैं, न शर्मिंदा करते हैं। चरवाहे की सामर्थ्य यहाँ नरमी के रूप में दिखती है, और यही बाइबल के परमेश्वर की सबसे चौंकाने वाली बात है: सर्वशक्तिमान होना और साथ ही किसी थके प्राणी की रफ़्तार से चलना। पद 3 में वही चरवाहा "अपने नाम के निमित्त" अगुआई करता है, यानी उनकी देखभाल उनकी अपनी प्रतिष्ठा से बँधी है। वे आपको इसलिए नहीं सँभालते कि आप उपयोगी हैं, बल्कि इसलिए कि वे ऐसे ही हैं।

पृष्ठभूमि

यहूदिया की पहाड़ियाँ हरी नहीं हैं। वे भूरी, पथरीली और गर्मियों में झुलसी हुई हैं। "हरी-हरी चराइयाँ" वहाँ बड़े मैदान नहीं, बल्कि ढलानों के बीच छिपे छोटे-छोटे हरे टुकड़े हैं जिन्हें केवल वही चरवाहा जानता है जो इस इलाक़े में सालों से चल रहा है। और पानी: पहाड़ी नाले तेज़ और ख़तरनाक होते हैं, भेड़ें बहते शोर वाले पानी से डरती हैं, इसलिए चरवाहा उन्हें ठहरे हुए, शांत सोतों तक ले जाता है। दाऊद यह सब हड्डियों में जानता था। जो आदमी बाद में राजा बना और जिसने अपनी भेड़ों की रक्षा में शेर और भालू का सामना किया, वह यहाँ खुद को भेड़ की जगह रखता है, और यही उसकी सबसे साहसी स्वीकारोक्ति है।

चिंतन

आपके जीवन में वह कौन-सी जगह है जहाँ आप बैठने से इनकार करते हैं, और उस इनकार के पीछे कौन-सा डर छिपा है?

यदि विश्राम देना परमेश्वर का काम है, तो आपके इस सप्ताह के कैलेंडर में कौन-सी एक चीज़ ऐसी है जिसे आप उन्हें सौंपकर छोड़ सकते हैं?

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Psalms 23:2 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

भजन संहिता 23:2 का क्या अर्थ है?
चरवाहा भेड़ को हरी घास के बीच बैठा देता है, और उसे ऐसे पानी के किनारे ले जाता है जो शोर नहीं करता, जो डराता नहीं। दो क्रियाएँ हैं और दोनों परमेश्वर की हैं: वे बैठाते हैं, वे ले चलते हैं। भेड़ न चरागाह ढूँढ़ती है, न रास्ता तय करती है। इस आधे पद में विश्राम और गति साथ-साथ चलते हैं, जैसे कोई किसी थके हुए को पहले लिटाए और फिर, ताकत लौटने पर, आगे बढ़ाए। ध्यान दीजिए कि "मुझे कुछ घटी न होगी" के तुरंत बाद यह पद आता है; पद 2 उस कमी-रहित जीवन का पहला ठोस चित्र है, कोई अस्पष्ट आशीष नहीं बल्कि घास, पानी और बैठने की जगह।
भजन संहिता 23:2 किस विषय में है?
चरवाहे की तस्वीर इस्राएल में कभी केवल रोमानी नहीं थी; यह राजनीतिक भाषा थी। राजा चरवाहे कहलाते थे, और यहेजकेल 34 में परमेश्वर उन झूठे चरवाहों पर मुकदमा चलाते हैं जिन्होंने भेड़ों को चराने के बजाय खाया, और फिर घोषणा करते हैं कि वे स्वयं आकर अपनी भेड़ों को अच्छी चराई में चराएँगे। दाऊद का यह पद उसी वादे की छोटी-सी झलक है। और जब यीशु मसीह अपने को अच्छा चरवाहा कहते हैं, तो वे किसी कोमल उपमा का प्रयोग नहीं कर रहे, वे उस पुराने दावे को अपने ऊपर ले रहे हैं। क्रूस पर वह चरवाहा भेड़ों की जगह लेटता है ताकि भेड़ें बैठ सकें। "बैठाता है" के पीछे अंततः एक कीमत खड़ी है।
भजन संहिता 23:2 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यीशु का वह बुलावा कि थके और बोझ से दबे हुए लोग उनके पास आएँ और वे उन्हें विश्राम देंगे, ठीक इसी पद की भाषा है, केवल अब वह वादा एक व्यक्ति के मुँह से निकलता है जो सामने खड़ा है। और प्रकाशितवाक्य में मेम्ना अपनी प्रजा को जीवन के जल के सोतों तक ले चलता है, जहाँ हर आँसू पोंछा जाता है; वहाँ पद 2 की चराई और झरना अपनी अंतिम शक्ल पा लेते हैं। यानी यह पद तीन समयों में एक साथ खड़ा है: दाऊद के भेड़ों वाले अनुभव में, मसीह के बुलावे में, और उस नए सृष्टि-रूपी चरागाह में जहाँ भेड़ें फिर कभी नहीं उठेंगी क्योंकि कोई ख़तरा बचा ही नहीं होगा।
भजन संहिता 23:2 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यहूदिया की पहाड़ियाँ हरी नहीं हैं। वे भूरी, पथरीली और गर्मियों में झुलसी हुई हैं। "हरी-हरी चराइयाँ" वहाँ बड़े मैदान नहीं, बल्कि ढलानों के बीच छिपे छोटे-छोटे हरे टुकड़े हैं जिन्हें केवल वही चरवाहा जानता है जो इस इलाक़े में सालों से चल रहा है। और पानी: पहाड़ी नाले तेज़ और ख़तरनाक होते हैं, भेड़ें बहते शोर वाले पानी से डरती हैं, इसलिए चरवाहा उन्हें ठहरे हुए, शांत सोतों तक ले जाता है। दाऊद यह सब हड्डियों में जानता था। जो आदमी बाद में राजा बना और जिसने अपनी भेड़ों की रक्षा में शेर और भालू का सामना किया, वह यहाँ खुद को भेड़ की जगह रखता है, और यही उसकी सबसे साहसी स्वीकारोक्ति है।
भजन संहिता 23:2 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि विश्राम देना परमेश्वर का काम है, तो आपके इस सप्ताह के कैलेंडर में कौन-सी एक चीज़ ऐसी है जिसे आप उन्हें सौंपकर छोड़ सकते हैं?
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Psalms 23 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय

When I read Psalm 23 with the loss of my father still fresh in my memory, verse 4 struck me most of all: even though I walk through the valley of the shadow of death, I will fear no evil, for You are with me. It was not a band-aid but a hand on my shoulder.

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