भजन संहिता 23:6
पाठ
भजन का अंत एक घोषणा से होता है, अनुरोध से नहीं: "निश्चय भलाई और करुणा जीवन भर मेरे साथ-साथ बनी रहेंगी; और मैं यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूँगा।" चरवाहे के पीछे चलनेवाला अब पीछे मुड़कर देखता है और पाता है कि कोई और भी उसके पीछे चल रहा है: परमेश्वर की भलाई और उनकी करुणा। और आगे देखता है तो एक ही घर दिखता है, यहोवा का धाम, जहाँ वह केवल अतिथि नहीं, निवासी है। तराई, शत्रु, मेज, तेल, सब पीछे छूट जाता है और बचता है एक निश्चय।
मर्म
"निश्चय" शब्द को हल्के में न लीजिए। यह भावना का उच्छ्वास नहीं, वाचा की भाषा है। जिस शब्द का अनुवाद "करुणा" हुआ है, इब्रानी में वह हेसेद है: वह वफादार प्रेम जो परमेश्वर ने अपने लोगों से बाँधी हुई वाचा के कारण निभाते हैं, इसलिए नहीं कि हम उसके योग्य हैं। और जो क्रिया "साथ-साथ बनी रहेंगी" के पीछे है, वह मूल में पीछा करने की क्रिया है, वही शब्द जो शत्रु के खदेड़ने के लिए इस्तेमाल होता है। यानी भजनकार कहता है: मेरे सतानेवाले मेरा पीछा करते थे, अब परमेश्वर की भलाई और वाचा-निष्ठा मेरा पीछा करती है। अनुग्रह यहाँ निष्क्रिय प्रस्ताव नहीं, सक्रिय खोज है। परमेश्वर हमें ढूँढ़ते हैं, हम उन्हें ढूँढ़ते-ढूँढ़ते थक जाने से पहले।
सूत्र
यह छठवाँ पद पूरी बाइबल की दिशा में इशारा करता है। मिस्र से निकले लोग तम्बू लिए चलते थे और परमेश्वर उनके बीच तम्बू में बसते थे; दाऊद चाहता था कि परमेश्वर का एक स्थायी घर हो; भविष्यद्वक्ताओं ने उस दिन की बात कही जब परमेश्वर स्वयं अपने लोगों के बीच बसेंगे। "मैं यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूँगा" इस पूरी आकांक्षा का बीज है। और यूहन्ना 10 में यीशु स्वयं को अच्छा चरवाहा कहते हैं जो भेड़ों के लिए प्राण देता है, यह वही चरवाहा है जो अब देहधारी होकर तराई में उतर आया। प्रकाशितवाक्य के अंत में नया यरूशलेम उतरता है और घोषणा होती है कि परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच है। भजन 23 का अंतिम पद वहीं जाकर पूरा होता है।
दर्पण
हमारी सबसे गहरी आशंका यह नहीं है कि परमेश्वर हैं या नहीं, बल्कि यह कि वे टिकेंगे या नहीं। नौकरी जाने पर, रिपोर्ट में वह शब्द पढ़ने पर जिसकी आशंका थी, बेटे के फोन न उठाने पर, महीने के अंत में खाते का संतुलन देखने पर, मन कहता है: यहाँ तक तो साथ थे, आगे देखें। यह पद उस आशंका पर हाथ रखता है और कहता है, "जीवन भर"। पूरे जीवन भर, अच्छे वर्षों में भी और उन वर्षों में भी जिन्हें आप गिनना नहीं चाहते। और ध्यान दीजिए, भजनकार यह तराई देखने के बाद कहता है, पहले नहीं। आज यह कीजिए: अपने पिछले दस वर्षों में एक ऐसी घटना लिखकर रख दीजिए जहाँ पीछे मुड़कर देखने पर आपको परमेश्वर की भलाई दिखती है, और उस कागज़ को अपने बटुए या बाइबल में रख लीजिए।
मुख्य पात्र
इस पद में परमेश्वर का नाम केवल एक बार आता है, "यहोवा", वही वाचा का नाम जिससे भजन शुरू हुआ था। बीच के पदों में वे चरवाहा हैं, मार्गदर्शक हैं, तराई में साथी हैं, मेज बिछानेवाले मेज़बान हैं, और अब घर के स्वामी हैं जो दरवाज़ा खुला छोड़ देते हैं। यह परमेश्वर कर्तव्य निभाते हुए नहीं, स्वभाव से भला हैं। ध्यान दीजिए कि पद 3 में वे "अपने नाम के निमित्त" अगुआई करते हैं, अपनी प्रतिष्ठा के कारण, न कि भेड़ की योग्यता के कारण। इसका अर्थ यह है कि परमेश्वर की भलाई हमारे प्रदर्शन पर टिकी नहीं, उनके चरित्र पर टिकी है। यही वह नींव है जिस पर "निश्चय" शब्द खड़ा हो सकता है।
प्रश्न
पर यह "निश्चय" कैसे कहा जा सकता है, जब हम ऐसे विश्वासियों को जानते हैं जिनका जीवन भलाई में नहीं, कैंसर में, अन्याय में, अकेलेपन में समाप्त हुआ? भजन इस प्रश्न को टालता नहीं; वह पद 4 में घोर अंधकार से भरी तराई को और पद 5 में सतानेवालों को मानता है। वह यह नहीं कहता कि तराई नहीं आएगी, न यह कि शत्रु मिट जाएँगे। वह कहता है कि तराई में भी वह जो पीछा कर रहा है, भलाई है। यह दावा प्रमाणित नहीं किया जा सकता, केवल भरोसे से थामा जा सकता है, और अंतिम पुष्टि "सर्वदा" शब्द में है, इस जीवन के भीतर नहीं। इसे सस्ते में हल करना इस भजन के साथ अन्याय होगा।
अन्तर्पाठ
भजन 27 में दाऊद की एक ही मनोकामना है: जीवन भर यहोवा के भवन में रहना और उनकी मनोहरता देखना। वही आकांक्षा यहाँ घोषणा बन जाती है, और यह दिखाता है कि इस्राएल की भक्ति का केंद्र आशीष नहीं, उपस्थिति थी। दूसरी ओर लूका 15 की खोई हुई भेड़ का दृष्टांत इस पद के पीछा करनेवाले अनुग्रह को कहानी में बदल देता है: चरवाहा निन्यानवे को छोड़कर उस एक के पीछे जाता है, और कंधे पर उठाकर घर लौटता है। भजन 23 का अंत ठीक यही है, पीछा और घर। बाइबल का पूरा आंदोलन इसी दिशा में है: परमेश्वर ढूँढ़ते हैं, और ढूँढ़कर घर लाते हैं।
चिंतन
आप अपने जीवन में किस चीज़ का पीछा कर रहे हैं, और क्या होगा यदि आप मान लें कि असल में परमेश्वर की करुणा आपका पीछा कर रही है?
"यहोवा के धाम में सर्वदा वास" की आशा आपके इस सप्ताह के निर्णयों को किस तरह बदल देगी?
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Psalms 23:6 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 23:6 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 23:6 किस विषय में है?
भजन संहिता 23:6 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 23:6 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 23:6 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 23 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
When I read Psalm 23 with the loss of my father still fresh in my memory, verse 4 struck me most of all: even though I walk through the valley of the shadow of death, I will fear no evil, for You are with me. It was not a band-aid but a hand on my shoulder.
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