भजन संहिता 51:10
पाठ
राजमहल की छत पर खड़े जिस आदमी ने एक नज़र से सब कुछ गँवा दिया था, वह अब फ़र्श पर है। धुलाई की, माफ़ी की, हड्डियों के टूटने की बातें कर चुकने के बाद वह एक ऐसी माँग तक पहुँचता है जो पहले की सब प्रार्थनाओं से बड़ी है: "हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।" वह दाग़ मिटाने को नहीं कह रहा; वह कह रहा है कि जो भीतर है उसे बनाया जाए, नए सिरे से, जैसे कुछ था ही नहीं। यह क्षमा से आगे की प्रार्थना है। यह उस आदमी की प्रार्थना है जो जान चुका है कि उसका असली संकट उसका कर्म नहीं, उसका मन है।
मूल बात
जिस क्रिया से यह प्रार्थना शुरू होती है, इब्रानी में वह है बारा, "सृजना"। पुराने नियम में इस शब्द का कर्ता हमेशा और केवल परमेश्वर होता है; यही शब्द उत्पत्ति के पहले वाक्य में आकाश और पृथ्वी के बनने पर खड़ा है। दाऊद मरम्मत नहीं माँग रहा। वह सुधार, संकल्प, बेहतर अनुशासन नहीं माँग रहा, क्योंकि वह जानता है कि जिस चीज़ ने उसे धोखा दिया वही चीज़ उसे बचा नहीं सकती। जब मन ही टूटा हो, तो मन के प्रयास से मन ठीक नहीं होता। यहाँ पाप को व्यवहार की गड़बड़ी नहीं, अस्तित्व की गहराई में लगी चोट माना गया है, और उसका इलाज केवल वही कर सकता है जो शून्य से कुछ बना देता है। अनुग्रह का अर्थ यही है: परमेश्वर क्षमा करके छोड़ नहीं देते, वे भीतर नया कुछ रचते हैं, और उसी के साथ "स्थिर आत्मा", यानी वह दृढ़ता जो अगली बार छत पर खड़े होने पर डगमगाए नहीं।
जोड़ने वाला सूत्र
दाऊद यह प्रार्थना करता है, पर वह इसे पूरा नहीं कर सकता। और यही इस पद की सबसे मार्मिक बात है: एक राजा, जिसके पास सेना है, खज़ाना है, मन्दिर की व्यवस्था है, अपने ही सीने के भीतर एक इंच ज़मीन पर कुछ नहीं कर सकता। यह खाली हाथ माँग सदियों तक खुली पड़ी रही, जब तक यहेजकेल के द्वारा परमेश्वर ने वादा नहीं किया कि वे पत्थर का हृदय निकालकर माँस का हृदय देंगे और अपना आत्मा भीतर रखेंगे। वह वादा दाऊद की प्रार्थना का उत्तर है, और वह उत्तर मसीह में आता है। क्रूस पर केवल हिसाब नहीं चुकता; पिन्तेकुस्त के दिन भीतर कुछ रचा जाता है। इसलिए जब पौलुस लिखता है कि मसीह में कोई हो तो वह नई सृष्टि है, वह ठीक उसी क्रिया की गूँज है जो दाऊद ने अँधेरे में फुसफुसाई थी।
दर्पण
हम में से ज़्यादातर लोग अपने पापों की मरम्मत करना जानते हैं। हम एप्लिकेशन हटा देते हैं, नया अनुशासन शुरू करते हैं, दफ़्तर में उस आदमी से दूरी बना लेते हैं जिसके सामने हमारा ईर्ष्यालु रूप जाग उठता है, पत्नी से माफ़ी माँग लेते हैं और सोचते हैं कि मामला निपट गया। फिर छह महीने बाद वही चीज़ लौट आती है, थोड़े अलग कपड़ों में, और हमें समझ आता है कि हमने टहनियाँ काटी थीं, जड़ नहीं। दाऊद की प्रार्थना उसी थकान से निकलती है। "स्थिर आत्मा" उसे चाहिए, क्योंकि वह जानता है कि उसका संकल्प मौसम की तरह बदलता है। आज आप भी यह मान लीजिए कि आपकी इच्छाशक्ति आपको नहीं बचाएगी। एक काग़ज़ पर वह एक आदत या विचार लिखिए जिसे आप बार-बार अपने बल पर ठीक करने की कोशिश करते हैं, और उसके ऊपर ऊँची आवाज़ में यह वाक्य पढ़िए: "हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर।"
संदर्भ
पृष्ठभूमि वह कहानी है जिसे इस्राएल भूल नहीं सका: छत, बतशेबा, ऊरिय्याह की मौत का आदेश एक चिट्ठी में, और फिर नातान भविष्यद्वक्ता का आना। प्राचीन पूर्व में राजा कानून के ऊपर होता था; मिस्र या अश्शूर का कोई सम्राट इस तरह गिड़गिड़ाता नहीं। पर इस्राएल का राजा वाचा के नीचे था, और नातान बिना निमंत्रण के दरबार में घुसकर कह सकता था, वह मनुष्य तू ही है। इससे भी कड़वी बात यह थी कि व्यवस्था में जानबूझकर किए गए व्यभिचार और हत्या के लिए कोई बलिदान निर्धारित नहीं था। इसीलिए भजन आगे कहता है कि परमेश्वर होमबलि से प्रसन्न नहीं होते। दाऊद के पास चढ़ाने को कुछ था ही नहीं। जो आदमी चाहे तो हज़ार बैल वेदी पर भेज सकता था, वह जानता था कि उसकी जेब में एक भी सिक्का नहीं है।
श्रोताओं की पहचान
यह निजी प्रार्थना निजी नहीं रही। इसे संगीत निर्देशक को सौंप दिया गया, यानी यह मन्दिर में गाई जाने लगी। सोचिए: किसान, बुनकर, सैनिक, विधवाएँ, सब मिलकर अपने महानतम राजा की सबसे शर्मनाक रात के शब्द गा रहे हैं। इसका असर दोहरा था। एक ओर यह राजगद्दी का भ्रम तोड़ता था; जिस वंश से मसीहा की आशा थी, वह वंश भी भीतर से सड़ा हुआ निकला। दूसरी ओर यह हर साधारण उपासक को साहस देता था: अगर दाऊद के लिए जगह है, तो मेरे लिए भी है। और बाद में, बेबीलोन से लौटे लोगों के लिए, जिनकी शहरपनाह टूटी पड़ी थी, यह प्रार्थना राष्ट्रीय हो गई। टूटी दीवारें और टूटा मन एक ही साँस में परमेश्वर के सामने रखे गए।
अंतर्पाठ
यहेजकेल 36 इस पद का सबसे सीधा जवाब है: वहाँ परमेश्वर स्वयं प्रतिज्ञा करते हैं कि वे नया मन और नया आत्मा देंगे, न कि माँगे जाने पर, बल्कि अपने नाम के कारण। दाऊद जो भीख माँगता है, वही परमेश्वर वाचा के रूप में देने का वचन देते हैं। इसके विपरीत खड़ा है शाऊल, जिससे परमेश्वर का आत्मा हट गया था; दाऊद ने वह दृश्य अपनी आँखों से देखा था, और इसीलिए अगला पद इतनी घबराहट से निकलता है कि अपने पवित्र आत्मा को मुझसे अलग न कर। वह जानता था कि यह केवल शब्द नहीं, एक सचमुच होने वाली बात है। नई सृष्टि की माँग उसी डर के किनारे पर खड़ी है।
चिंतन
आप अपने जीवन में किस चीज़ की मरम्मत करते-करते थक चुके हैं, और क्या आपने कभी उसके लिए "नए सिरे से बनाने" की प्रार्थना की है?
अगर परमेश्वर आपके भीतर आज कुछ नया रचें, तो सबसे पहले किस व्यक्ति को उसका फ़र्क़ महसूस होगा?
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Psalms 51 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पाप ने दाऊद की ज़बान पर ताला लगा दिया था। जो कभी भजन लिखता था, वह अब चुप था। इसलिए वह कहता है, "हे प्रभु, मेरा मुँह खोल दे, तब मैं तेरा गुणगान करूँगा।" ध्यान दे, वह शब्द नहीं माँगता, होंठ खुलने माँगता है। क्या तेरी भी कोई बात है जिसने तेरी आराधना को चुप करा रखा है? उसे क्षमा करने वाले के सामने रख दे।
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