बाइबल व्याख्या

भजन संहिता 51:5

बाइबल

पाठ

दाऊद अपने अपराध की जड़ खोदते-खोदते उस जगह पहुँचता है जहाँ कोई बहाना नहीं बचता: "देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा।" यह वाक्य किसी एक कर्म की स्वीकारोक्ति नहीं, बल्कि उस स्वभाव की स्वीकारोक्ति है जिसमें से वह कर्म निकला। पिछले पद में उसने कहा था कि उसने केवल परमेश्वर के विरुद्ध पाप किया; अब वह पीछे और पीछे जाता है, अपने जन्म से भी पीछे, मानो कह रहा हो कि जिस बीमारी का इलाज वह माँग रहा है वह कल की नहीं, शुरू से की है। यहाँ न माता पर दोष है, न जन्म की निंदा, न किसी एक घटना की सफाई, केवल एक आदमी जो अपनी गहराई तक सच बोलने का साहस कर रहा है।

मूल बात

यह पद मनुष्य के बारे में एक कड़वी बात कहता है और परमेश्वर के बारे में एक मीठी बात, और दोनों एक ही साँस में। कड़वी बात यह कि पाप हमारे लिए केवल गलत चुनावों की सूची नहीं है, जिसे बेहतर अनुशासन से छोटा किया जा सके; वह उस मिट्टी में है जिससे चुनाव उगते हैं। इसीलिए दाऊद सुधार नहीं, सृष्टि माँगता है: "मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर" (पद 10)। जो जन्म से टेढ़ा है उसे सीधा करने के लिए नया जन्म चाहिए, मरम्मत नहीं। और यही मीठी बात भी है: जब दोष इतना गहरा है कि मैं उसे ठीक नहीं कर सकता, तो उद्धार पूरी तरह परमेश्वर की करुणा का काम बन जाता है, मेरी कोशिशों का हिसाब नहीं। जो अपने जन्म तक ईमानदार होने को तैयार है, वही अनुग्रह को सचमुच अनुग्रह के रूप में पाता है।

सामान्य सूत्र

दाऊद यहाँ अनजाने में उस कहानी को छू लेता है जो बाइबल के तीसरे अध्याय में शुरू होती है। पौलुस रोमियों 5:12 में ठीक यही तर्क खोलता है: एक मनुष्य के द्वारा पाप संसार में आया और पाप के द्वारा मृत्यु, और इस तरह मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई। दाऊद अपने बारे में जो कहता है, पौलुस पूरी मानवजाति के बारे में कहता है। और इसी जड़ पर मसीह का काम टिका है: यदि समस्या केवल बुरे कर्म होती, तो एक अच्छा शिक्षक काफी था; पर यदि समस्या जन्म से है, तो दूसरे जन्म की ज़रूरत है, और उसके लिए दूसरे आदम की। इसीलिए यीशु निकुदेमुस से कहते हैं कि जो शरीर से जन्मा है वह शरीर है और जो आत्मा से जन्मा है वह आत्मा है (यूहन्ना 3:6)। पद 10 की प्रार्थना, "मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर", क्रूस और पुनरुत्थान के बाद ही पूरी तरह उत्तर पाती है।

दर्पण

हम ज़्यादातर अपनी असफलताओं को घटनाओं की तरह देखते हैं: उस दिन मैंने गुस्सा किया, उस सौदे में मैंने थोड़ा झूठ बोला, उस रिश्ते में मैं ठंडा पड़ गया। घटना को सँभालना आसान है, क्योंकि उसे अपवाद कहा जा सकता है। यह पद अपवाद का रास्ता बंद कर देता है। वही चिड़चिड़ापन जो आप दफ्तर में दबाकर रखते हैं, घर पहुँचते ही बच्चों पर क्यों फूटता है? वही लालच जो आप बजट बनाते समय नियंत्रित करते हैं, तुलना करते ही फिर क्यों जाग जाता है? क्योंकि वह बाहर से नहीं आया, वह आपके साथ ही आया। यह जानना आपको कुचलने के लिए नहीं, बल्कि बहानों से मुक्त करने के लिए है। आज दस मिनट निकालिए: एक कागज़ पर वह एक आदत लिखिए जो बार-बार लौटती है, और उसके नीचे पद 10 अपने हाथ से लिखकर ज़ोर से परमेश्वर के सामने बोलिए।

अंतर्पाठ

इस पद के चारों ओर पूरी बाइबल गूँजती है। जलप्रलय के बाद परमेश्वर स्वयं कहते हैं कि मनुष्य के मन की कल्पना बचपन से ही बुरी है, और फिर भी वे पृथ्वी को शाप न देने की प्रतिज्ञा करते हैं; वहाँ भी यह सच्चाई न्याय का नहीं, धीरज का कारण बनती है। अय्यूब के मित्र पूछते हैं कि अशुद्ध में से शुद्ध कौन निकाल सकता है, पर वे इसे दूसरे पर आरोप लगाने के लिए इस्तेमाल करते हैं; दाऊद इसे अपने ऊपर लागू करता है, और यही अंतर आरोप और स्वीकारोक्ति के बीच की पूरी दूरी है। इफिसियों 2:3 कहता है कि हम स्वभाव से क्रोध की सन्तान थे, और उसके ठीक बाद "परन्तु परमेश्वर" आता है। यशायाह 43:25 में परमेश्वर स्वयं कहते हैं कि वे अपराधों को मिटाते हैं, और दाऊद पद 1 में वही क्रिया उधार लेकर माँगता है: "मेरे अपराधों को मिटा दे।" मंदिर की प्रार्थना पवित्रशास्त्र की भाषा से बुनी गई है।

संदर्भ

यह भजन बतशेबा और नातान की घटना से जुड़ा है, और पद 14 की "हत्या के अपराध से छुड़ा ले" इसकी पुष्टि करती है। प्राचीन पूर्व में राजा कानून से ऊपर था; मिस्र या अश्शूर का कोई सम्राट किसी स्त्री को ले लेता और किसी सैनिक को मरवा देता तो कोई भविष्यवक्ता उसके महल में घुसकर उँगली नहीं उठाता। इस्राएल में उठाता है, क्योंकि वहाँ राजा भी वाचा के अधीन है। और दाऊद तलवार नहीं उठाता, वह टूट जाता है। यह भी ध्यान दीजिए कि पद 18 और 19 में सिय्योन की शहरपनाह की बात आती है, जिसका अर्थ है कि यह व्यक्तिगत स्वीकारोक्ति बाद की पीढ़ियों ने अपनी सामूहिक प्रार्थना बना ली। एक राजा का निजी पतन पूरे समुदाय के पश्चात्ताप का शब्दकोश बन गया।

प्रश्न

क्या नवजात शिशु दोषी है? पद को शब्दशः दबाएँ तो यही निकलता दिखता है, और यह हमें चुभता है। पर ध्यान दीजिए कि दाऊद यहाँ शिशुओं के बारे में सिद्धांत नहीं गढ़ रहा, वह अपने बारे में गवाही दे रहा है, और वह इसे बचाव के रूप में नहीं बल्कि आरोप के रूप में पेश करता है। कोई भी व्यक्ति जो अपने जन्म का दोष बताकर बरी होना चाहता है, वह इस भजन को उल्टा पढ़ रहा है। फिर भी प्रश्न पूरी तरह हल नहीं होता: मैं उस चीज़ के लिए ज़िम्मेदार कैसे हूँ जो मैंने चुनी नहीं? बाइबल इस गाँठ को खोलती नहीं, वह इसे दूसरी ओर से काटती है। जो चीज़ मेरी पसंद से पहले मुझमें आई, उसे हटाने के लिए भी एक ऐसा काम चाहिए जो मेरी पसंद से पहले आए, और उसी का नाम अनुग्रह है।

चिंतन

आप अपने किस बार-बार लौटने वाले पाप को अब तक "परिस्थिति" कहकर समझाते आए हैं, और उसे स्वभाव कहकर स्वीकार करने में क्या डर है?

यदि आपका उद्धार पूरी तरह परमेश्वर का नया सृजन है, तो यह आज आपके आत्म-मूल्यांकन और दूसरों के प्रति आपकी सहनशीलता को कैसे बदलता है?

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Psalms 51:5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

भजन संहिता 51:5 का क्या अर्थ है?
दाऊद अपने अपराध की जड़ खोदते-खोदते उस जगह पहुँचता है जहाँ कोई बहाना नहीं बचता: "देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा।" यह वाक्य किसी एक कर्म की स्वीकारोक्ति नहीं, बल्कि उस स्वभाव की स्वीकारोक्ति है जिसमें से वह कर्म निकला। पिछले पद में उसने कहा था कि उसने केवल परमेश्वर के विरुद्ध पाप किया; अब वह पीछे और पीछे जाता है, अपने जन्म से भी पीछे, मानो कह रहा हो कि जिस बीमारी का इलाज वह माँग रहा है वह कल की नहीं, शुरू से की है। यहाँ न माता पर दोष है, न जन्म की निंदा, न किसी एक घटना की सफाई, केवल एक आदमी जो अपनी गहराई तक सच बोलने का साहस कर रहा है।
भजन संहिता 51:5 किस विषय में है?
दाऊद यहाँ अनजाने में उस कहानी को छू लेता है जो बाइबल के तीसरे अध्याय में शुरू होती है। पौलुस रोमियों 5:12 में ठीक यही तर्क खोलता है: एक मनुष्य के द्वारा पाप संसार में आया और पाप के द्वारा मृत्यु, और इस तरह मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई। दाऊद अपने बारे में जो कहता है, पौलुस पूरी मानवजाति के बारे में कहता है। और इसी जड़ पर मसीह का काम टिका है: यदि समस्या केवल बुरे कर्म होती, तो एक अच्छा शिक्षक काफी था; पर यदि समस्या जन्म से है, तो दूसरे जन्म की ज़रूरत है, और उसके लिए दूसरे आदम की। इसीलिए यीशु निकुदेमुस से कहते हैं कि जो शरीर से जन्मा है वह शरीर है और जो आत्मा से जन्मा है वह आत्मा है (यूहन्ना 3:6)। पद 10 की प्रार्थना, "मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर", क्रूस और पुनरुत्थान के बाद ही पूरी तरह उत्तर पाती है।
भजन संहिता 51:5 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इस पद के चारों ओर पूरी बाइबल गूँजती है। जलप्रलय के बाद परमेश्वर स्वयं कहते हैं कि मनुष्य के मन की कल्पना बचपन से ही बुरी है, और फिर भी वे पृथ्वी को शाप न देने की प्रतिज्ञा करते हैं; वहाँ भी यह सच्चाई न्याय का नहीं, धीरज का कारण बनती है। अय्यूब के मित्र पूछते हैं कि अशुद्ध में से शुद्ध कौन निकाल सकता है, पर वे इसे दूसरे पर आरोप लगाने के लिए इस्तेमाल करते हैं; दाऊद इसे अपने ऊपर लागू करता है, और यही अंतर आरोप और स्वीकारोक्ति के बीच की पूरी दूरी है। इफिसियों 2:3 कहता है कि हम स्वभाव से क्रोध की सन्तान थे, और उसके ठीक बाद "परन्तु परमेश्वर" आता है। यशायाह 43:25 में परमेश्वर स्वयं कहते हैं कि वे अपराधों को मिटाते हैं, और दाऊद पद 1 में वही क्रिया उधार लेकर माँगता है: "मेरे अपराधों को मिटा दे।" मंदिर की प्रार्थना पवित्रशास्त्र की भाषा से बुनी गई है।
भजन संहिता 51:5 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
क्या नवजात शिशु दोषी है?
भजन संहिता 51:5 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि आपका उद्धार पूरी तरह परमेश्वर का नया सृजन है, तो यह आज आपके आत्म-मूल्यांकन और दूसरों के प्रति आपकी सहनशीलता को कैसे बदलता है?
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Psalms 51 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

पाप ने दाऊद की ज़बान पर ताला लगा दिया था। जो कभी भजन लिखता था, वह अब चुप था। इसलिए वह कहता है, "हे प्रभु, मेरा मुँह खोल दे, तब मैं तेरा गुणगान करूँगा।" ध्यान दे, वह शब्द नहीं माँगता, होंठ खुलने माँगता है। क्या तेरी भी कोई बात है जिसने तेरी आराधना को चुप करा रखा है? उसे क्षमा करने वाले के सामने रख दे।

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