बाइबल व्याख्या

प्रकाशितवाक्य 5

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

सिंहासन पर बैठे परमेश्वर के दाहिने हाथ में एक पुस्तक है, भीतर और बाहर लिखी हुई, सात मुहरों से बन्द। एक बलवन्त स्वर्गदूत पूरे सृष्टि-जगत को चुनौती देता है: "इस पुस्तक के खोलने और उसकी मुहरें तोड़ने के योग्य कौन है?" कोई नहीं निकलता, और यूहन्ना फूट-फूटकर रोने लगता है। तब एक प्राचीन उसे यहूदा के सिंह की ओर इशारा करता है, परन्तु जो सामने आता है वह सिंह नहीं, "मानो एक वध किया हुआ मेम्ना" है। वही पुस्तक लेता है, और उसी क्षण स्वर्ग गीत में फूट पड़ता है, पहले चार प्राणी और चौबीस प्राचीन, फिर लाखों-करोड़ों स्वर्गदूत, और अन्त में सृष्टि की हर वस्तु।

मूल बात

यह अध्याय इतिहास के केन्द्रीय प्रश्न का उत्तर है: संसार की लगाम किसके हाथ में है, और वह उसे संभालने का अधिकार कहाँ से पाता है? पुस्तक परमेश्वर के हाथ में है, अर्थात् इतिहास का अन्त उनके नियंत्रण में है। परन्तु ध्यान दीजिए कि प्रश्न सामर्थ्य का नहीं, योग्यता का है। परमेश्वर अपनी योजना किसी भी शक्तिशाली प्राणी को नहीं सौंपते; वे उसे उसी को सौंपते हैं जिसने स्वयं को दे दिया। और जब योग्यता का कारण गाया जाता है, वह यह है: "तूने वध होकर अपने लहू से… परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।" यहाँ अनुग्रह केवल एक कोमल भावना नहीं, वह विश्व-शासन का आधार है। मारा गया मेम्ना सिंहासन के बीच खड़ा है, और इसी से न्याय और उद्धार एक ही हाथ में आ जाते हैं।

मुख्य सूत्र

"मोल लिया" शब्द मिस्र की गुलामी से छुड़ाए जाने की गूँज है, और "वध किया हुआ मेम्ना" फसह की रात की। इस्राएल को लहू से छुड़ाया गया था, और छुड़ाए जाने के बाद उससे कहा गया था कि वह "याजकों का राज्य" होगा (निर्गमन 19:6)। यूहन्ना यही वाचा-सूत्र अब पूरी पृथ्वी तक फैला देखता है: "हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से", और "उन्हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया।" जो वादा एक जाति से शुरू हुआ था, वह मेम्ने के लहू से सब जातियों में पूरा होता है। और सिंह तथा मेम्ने का जोड़ा बताता है कि यहूदा को दिया गया राजदण्ड का वचन (उत्पत्ति 49) क्रूस के रास्ते से ही सिंहासन तक पहुँचा।

दर्पण

यूहन्ना का रोना हमें जानी-पहचानी लगती है। जब आप समाचार पढ़ते हैं और लगता है कि कोई इसे संभाल नहीं रहा; जब किसी बीमार माता-पिता की रिपोर्ट हाथ में है और समझ नहीं आता आगे क्या; जब दफ्तर में बेईमान आदमी तरक्की पा जाता है, तब मन में वही आवाज़ उठती है कि "कोई योग्य नहीं मिला।" यह अध्याय आपके आँसू नहीं झिड़कता, वह उन्हें एक दिशा देता है: "मत रो; देख।" साथ ही यह हमारे गर्व को भी छीलता है, क्योंकि हम स्वाभाविक रूप से सामर्थ्य को योग्यता समझते हैं, और यहाँ योग्य वह ठहरा जो मारा गया। आज एक काम कीजिए: जिस परिस्थिति में आपको लगता है कि उसकी लगाम किसी के हाथ में नहीं है, उसका नाम कागज़ पर लिखिए, और उसी कागज़ के नीचे लिख दीजिए, "वध किया हुआ मेम्ना ही योग्य है", और उसे ज़ोर से पढ़िए।

मुख्य पात्र

मेम्ना इस अध्याय का हृदय है, और उसका चित्रण जानबूझकर बेचैन करने वाला है। वह "मानो एक वध किया हुआ" है, अर्थात् घाव मिटे नहीं; महिमा ने इतिहास को पोंछा नहीं। फिर भी उसके सात सींग हैं, जो पूर्ण सामर्थ्य का चिह्न हैं, और सात आँखें, जो सारी पृथ्वी पर भेजी गई परमेश्वर की सातों आत्माएँ हैं। यानी वह कमज़ोर दिखता है पर उससे कुछ छिपा नहीं और उससे बड़ा कोई बलवान नहीं। और वह "खड़ा" है, मारा गया परन्तु जीवित। वह पुस्तक लेने के लिए माँगता नहीं, झिझकता नहीं: "उसने आकर उसके दाहिने हाथ से… वह पुस्तक ले ली।" यही अधिकार की शान्त निश्चितता है, जो किसी सिंहासन की होड़ से नहीं, आत्मदान से जन्मी है।

श्रोताओं का परिचय

एशिया माइनर की वे छोटी कलीसियाएँ रोमी सम्राट की छाया में रहती थीं, जहाँ "आदर, महिमा, सामर्थ्य" जैसे शब्द सिक्कों और जयघोषों में कैसर के लिए गाए जाते थे। उनके लिए अध्याय 5 केवल आराधना का दृश्य नहीं, एक राजनीतिक दावा था: सिंहासन कहीं और है, और वहाँ बैठनेवाला एक मारा गया मेम्ना है। जब उन्होंने सुना कि "वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं", तो यह उन मुट्ठी भर लोगों के लिए कहा गया था जिनका नगर में कोई वज़न नहीं था। और धूप से भरे सोने के कटोरे, जो "पवित्र लोगों की प्रार्थनाएँ" हैं, उन्हें बताते थे कि उनकी काँपती हुई प्रार्थनाएँ स्वर्ग के सबसे भीतरी कमरे तक पहुँचकर आराधना का हिस्सा बन जाती हैं।

एक बारीकी

"वे यह नया गीत गाने लगे।" भजनों में "नया गीत" तब गाया जाता है जब परमेश्वर कुछ ऐसा कर देते हैं जिसके लिए पुराने शब्द छोटे पड़ जाते हैं, कोई नई मुक्ति, कोई नई विजय। यहाँ नयापन इसमें है कि आराधना का विषय बदल गया: अध्याय 4 में सृष्टिकर्ता की स्तुति होती है, और अब उसी सिंहासन के सामने उद्धारकर्ता की। गीत "तू" से शुरू होता है, "क्योंकि" से कारण देता है, और कारण क्रूस है। ध्यान दीजिए कि यह गीत गाने वाले अपने बारे में तीसरे व्यक्ति में नहीं कहते, वे कहते हैं "मोल लिया", "बनाया"; बचाए गए लोग ही गवाह हैं। आराधना यहाँ भावना नहीं, चुकाई गई कीमत का स्वीकारनामा है।

मनन के प्रश्न

आप किस परिस्थिति में भीतर से यही मान बैठे हैं कि "कोई योग्य नहीं मिला", और वहाँ "मत रो; देख" सुनने का क्या अर्थ होगा?

यदि योग्यता का माप सामर्थ्य नहीं बल्कि आत्मदान है, तो आपके घर या कार्यस्थल में कौन सा निर्णय इस माप से बदल जाएगा?

Revelation में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Revelation

Michael Wilcock

A steady, sane guide through the visions to the throne of the Lamb.

Revelation For Everyone

N.T. Wright

Wright makes the last book hopeful instead of frightening.

Revelation: An Introduction and Commentary

Leon Morris

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Revelation

Craig Keener

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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Revelation 5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

प्रकाशितवाक्य 5 का क्या अर्थ है?
सिंहासन पर बैठे परमेश्वर के दाहिने हाथ में एक पुस्तक है, भीतर और बाहर लिखी हुई, सात मुहरों से बन्द। एक बलवन्त स्वर्गदूत पूरे सृष्टि-जगत को चुनौती देता है: "इस पुस्तक के खोलने और उसकी मुहरें तोड़ने के योग्य कौन है?" कोई नहीं निकलता, और यूहन्ना फूट-फूटकर रोने लगता है। तब एक प्राचीन उसे यहूदा के सिंह की ओर इशारा करता है, परन्तु जो सामने आता है वह सिंह नहीं, "मानो एक वध किया हुआ मेम्ना" है। वही पुस्तक लेता है, और उसी क्षण स्वर्ग गीत में फूट पड़ता है, पहले चार प्राणी और चौबीस प्राचीन, फिर लाखों-करोड़ों स्वर्गदूत, और अन्त में सृष्टि की हर वस्तु।
प्रकाशितवाक्य 5 किस विषय में है?
"मोल लिया" शब्द मिस्र की गुलामी से छुड़ाए जाने की गूँज है, और "वध किया हुआ मेम्ना" फसह की रात की। इस्राएल को लहू से छुड़ाया गया था, और छुड़ाए जाने के बाद उससे कहा गया था कि वह "याजकों का राज्य" होगा (निर्गमन 19:6)। यूहन्ना यही वाचा-सूत्र अब पूरी पृथ्वी तक फैला देखता है: "हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से", और "उन्हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया।" जो वादा एक जाति से शुरू हुआ था, वह मेम्ने के लहू से सब जातियों में पूरा होता है। और सिंह तथा मेम्ने का जोड़ा बताता है कि यहूदा को दिया गया राजदण्ड का वचन (उत्पत्ति 49) क्रूस के रास्ते से ही सिंहासन तक पहुँचा।
प्रकाशितवाक्य 5 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
मेम्ना इस अध्याय का हृदय है, और उसका चित्रण जानबूझकर बेचैन करने वाला है। वह "मानो एक वध किया हुआ" है, अर्थात् घाव मिटे नहीं; महिमा ने इतिहास को पोंछा नहीं। फिर भी उसके सात सींग हैं, जो पूर्ण सामर्थ्य का चिह्न हैं, और सात आँखें, जो सारी पृथ्वी पर भेजी गई परमेश्वर की सातों आत्माएँ हैं। यानी वह कमज़ोर दिखता है पर उससे कुछ छिपा नहीं और उससे बड़ा कोई बलवान नहीं। और वह "खड़ा" है, मारा गया परन्तु जीवित।
प्रकाशितवाक्य 5 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"वे यह नया गीत गाने लगे।" भजनों में "नया गीत" तब गाया जाता है जब परमेश्वर कुछ ऐसा कर देते हैं जिसके लिए पुराने शब्द छोटे पड़ जाते हैं, कोई नई मुक्ति, कोई नई विजय। यहाँ नयापन इसमें है कि आराधना का विषय बदल गया: अध्याय 4 में सृष्टिकर्ता की स्तुति होती है, और अब उसी सिंहासन के सामने उद्धारकर्ता की। गीत "तू" से शुरू होता है, "क्योंकि" से कारण देता है, और कारण क्रूस है। ध्यान दीजिए कि यह गीत गाने वाले अपने बारे में तीसरे व्यक्ति में नहीं कहते, वे कहते हैं "मोल लिया", "बनाया"; बचाए गए लोग ही गवाह हैं। आराधना यहाँ भावना नहीं, चुकाई गई कीमत का स्वीकारनामा है।
प्रकाशितवाक्य 5 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि योग्यता का माप सामर्थ्य नहीं बल्कि आत्मदान है, तो आपके घर या कार्यस्थल में कौन सा निर्णय इस माप से बदल जाएगा?
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Revelation 5 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

स्वर्ग में सोने के कटोरे किसी खजाने से नहीं, धूप से भरे थे, और वह धूप है "पवित्र लोगों की प्रार्थनाएँ।" सोचो, तुमने रोते हुए, टूटे शब्दों में जो प्रार्थना की थी, वह खोई नहीं। वह सहेजी गई, मेम्ने के सामने रखी गई। जिसे तुमने बेअसर समझा, स्वर्ग उसे सुगंध की तरह सँभाले हुए है।

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