प्रेम जो सेवा में झलकता है
प्रेम और सेवा
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए मरकुस 14:6-7, यूहन्ना 21:16, यूहन्ना 13:5 and यूहन्ना 21:16.
☀ सुबह का पल
यीशु ने कहा, “उसे छोड़ दो; उसे क्यों सताते हो? उसने तो मेरे साथ भलाई की है। गरीब तुम्हारे साथ सदा रहते हैं और तुम जब चाहो तब उनसे भलाई कर सकते हो; पर मैं तुम्हारे साथ सदा न रहूँगा।(व्यव. 15:11)
मरकुस 14:6-7
वह स्त्री जानती थी कि यह तेल वापस बोतल में नहीं जा सकता। अलाबस्तर की शीशी का गला संकरा और सील किया हुआ होता था, एक बार तोड़ दिया तो पूरा उड़ेलना ही एकमात्र रास्ता था, आधा नहीं, थोड़ा नहीं।
ऐसी शीशियाँ उस ज़माने में बहुमूल्य इत्र रखने के लिए बनती थीं, अक्सर शुद्ध जटामांसी का तेल, जो दूर भारत से व्यापारियों के रास्ते आता था। एक शीशी की कीमत किसी मज़दूर की पूरे साल की मज़दूरी के बराबर हो सकती थी। परिवार ऐसी शीशी बरसों सँभालकर रखते, शायद दहेज के लिए, शायद अपनी ही अंत्येष्टि के दिन के लिए रखी हुई। यह कोई मामूली भेंट नहीं थी।
जब उसने शमौन के घर में यीशु के सिर पर वह सब कुछ उड़ेल दिया, तो कमरे में तुरंत हिसाब शुरू हो गया, कितना बर्बाद हुआ, कितने गरीबों का भला हो सकता था। पर यीशु ने उसका बचाव किया और उसके काम को अच्छा काम कहा।
सुबह के वक़्त हिसाब करना आसान है, आज का समय कहाँ लगाएँ, कहाँ बचाएँ, क्या सुरक्षित रखें। यह स्त्री याद दिलाती है कि कुछ भेंटें हिसाब से परे होती हैं। यीशु को दिया हुआ समय, ध्यान, प्रेम बेकार नहीं जाता, भले ही दुनिया की नज़र में वह फ़िज़ूलखर्ची लगे।
आज
आज किसी एक व्यक्ति के लिए दस मिनट निकालें, जिसे आप बाद में कहकर टालते आए हैं, और अभी उसे फोन करें या एक संदेश लिखें, बिना यह सोचे कि इससे आपको क्या वापस मिलेगा।
✦ दोपहर का पल
उसने फिर दूसरी बार उससे कहा, “हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझसे प्रेम रखता है?” उसने उससे कहा, “हाँ, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” उसने उससे कहा, “मेरी भेड़ोंकी रखवाली कर।”
यूहन्ना 21:16
थाली को एक तरफ सरकाओ, कुछ पल के लिए हाथ खाली रहने दो।
झील के किनारे यह बातचीत तीन बार दोहराई जाती है। यीशु पूछते हैं, पतरस जवाब देता है, और हर बार वही शब्द नहीं दोहराए जाते। मूल भाषा में यीशु पहले दो बार एक ऐसे शब्द से प्रेम पूछते हैं जो चुनी हुई, बिना शर्त की निष्ठा को दिखाता है, वह प्रेम जो भावना से ऊपर इरादे से तय होता है। पतरस हर बार एक दूसरे शब्द से जवाब देता है, वह गर्मजोशी भरा स्नेह जो दोस्ती में होता है, जो दिल से उमड़ता है पर वादा नहीं करता।
अनुवाद में यह फर्क अक्सर गुम हो जाता है, पर यहाँ साफ दिखता है, एक जगह लव और दूसरी जगह अफेक्शन। पतरस उस बड़े दावे तक नहीं पहुँच पाता जो उसने तीन बार इनकार करने के बाद खो दिया था। और तीसरी बार यीशु खुद पतरस का शब्द उठा लेते हैं, जैसे कह रहे हों, तेरा यही स्नेह काफी है, इसी पर मेरा काम टिकेगा।
दोपहर के इस छोटे वक्फे में यही बात ठहरने लायक है, तुम्हारे पास बड़ा दावा न भी हो, छोटा स्नेह भी काम आता है।
आज
अभी किसी एक सहकर्मी या घर के सदस्य को एक छोटा संदेश भेजो, बस इतना लिखो कि आज तुम्हारा ख्याल आया।
◐ दोपहर का पल
तब बर्तन में पानी भरकर चेलों के पाँव धोने और जिस अँगोछे से उसकी कमर बंधी थी उसी से पोंछने लगा।
यूहन्ना 13:5
कमरे में पानी का बर्तन रखा था, तौलिया भी तैयार था, पर एक बात ध्यान देने लायक है, कोई नहीं उठा। बारह चेले वहाँ बैठे रहे, और किसी के भी घुटने नहीं मुड़े। तब वह स्वयं उठा, जिसे वे गुरु कहते थे।
उस ज़माने में हर यात्री धूल भरी, पत्थरीली सड़कों पर खुले सैंडल में चलता था। किसी के घर पहुँचने पर पहला काम यही होता था, पैर धुलाना, थकान और गंदगी दोनों उतारना। यह काम सबसे छोटे सेवक का माना जाता था, क्योंकि इसमें झुकना पड़ता था, किसी और की गंदगी को अपने हाथों में लेना पड़ता था। इब्राहीम ने तीन अजनबियों को यही पेशकश की, पानी मँगवाया ताकि वे स्वयं अपने पैर धो लें। वह आतिथ्य की पहली शर्त थी, यात्री की गरिमा और मेज़बान का सम्मान दोनों इसी एक काम में बँधे थे।
यीशु ने वह काम किसी सेवक को नहीं सौंपा, वह स्वयं नीचे झुका। यह केवल नम्रता का पाठ नहीं है, यह सवाल है, जो काम मैं टाल देता हूँ, क्या मेरा परमेश्वर वही काम उठाने को तैयार है।
आज
आज कोई एक ऐसा छोटा, नीचा काम चुनें जिसे आप आमतौर पर टाल देते हैं, जैसे किसी के जूते साफ़ करना या किसी का झूठा बर्तन धोना, और इसे बिना बताए, चुपचाप कर दें।
☾ संध्या का क्षण
उसने फिर दूसरी बार उससे कहा, “हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझसे प्रेम रखता है?” उसने उससे कहा, “हाँ, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” उसने उससे कहा, “मेरी भेड़ोंकी रखवाली कर।”
यूहन्ना 21:16
आज सोने से पहले मन में यह सवाल उठता है: जो प्रेम मैंने आज दिखाया, क्या वह वाकई उतना गहरा था जितना मैं दावा करता हूँ, या सिर्फ़ उतना ही जितना मुझसे बन पड़ा?
यूहन्ना के अंतिम अध्याय में यीशु पतरस से तीन बार पूछते हैं, क्या तू मुझसे प्रेम करता है। पर यूनानी भाषा में यह एक ही सवाल नहीं है। पहले दो बार यीशु वह शब्द उपयोग करते हैं जो अपने आप को पूरी तरह दे देने वाले, बिना शर्त के प्रेम की तस्वीर बनाता है, वह प्रेम जो इच्छा से चुना जाता है। पतरस हर बार जवाब देता है एक दूसरे शब्द से, जो मित्रता की गर्माहट, हृदय के स्वाभाविक लगाव को दर्शाता है। वह बड़ा शब्द कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाता, वह सिर्फ़ इतना कह पाता है, तू जानता है कि मुझे तुझसे लगाव है।
हमारी भाषा में यह भेद खो जाता है, हम दोनों को सिर्फ़ प्रेम कहते हैं। पर पतरस की ईमानदारी यहीं छिपी है, उसने बड़े दावे से बचना चुना।
आज की शाम, जब दिन की थकान और छोटी असफलताएँ याद आती हैं, शायद तुम्हारा प्रेम भी आज पतरस जैसा ही रहा हो, दावे से कम, पर सच्चे लगाव जितना। यीशु उस छोटे प्रेम को भी ठुकराते नहीं, उस पर ही एक काम सौंप देते हैं।
आज
आज रात सोने से पहले, किसी एक व्यक्ति का नाम लो, जिसे तुम प्रेम तो करते हो पर जितना चाहते उतना नहीं दे पाए, और उसे एक छोटा संदेश भेजो, आज मैं तुम्हें याद कर रहा था।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
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6यीशु ने कहा, “उसे छोड़ दो; उसे क्यों सताते हो? उसने तो मेरे साथ भलाई की है।
7गरीब तुम्हारे साथ सदा रहते हैं और तुम जब चाहो तब उनसे भलाई कर सकते हो; पर मैं तुम्हारे साथ सदा न रहूँगा।(व्यव. 15:11)
16उसने फिर दूसरी बार उससे कहा, “हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझसे प्रेम रखता है?” उसने उससे कहा, “हाँ, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” उसने उससे कहा, “मेरी भेड़ोंकी रखवाली कर।”
5तब बर्तन में पानी भरकर चेलों के पाँव धोने और जिस अँगोछे से उसकी कमर बंधी थी उसी से पोंछने लगा।
16उसने फिर दूसरी बार उससे कहा, “हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझसे प्रेम रखता है?” उसने उससे कहा, “हाँ, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” उसने उससे कहा, “मेरी भेड़ोंकी रखवाली कर।”
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