स्थिर रहो · मंगलवार, सितम्बर 15, 2026

नम्रता में मिलती परमेश्वर की कृपा

नम्रता और कृपा

आज 2 मिनट का पठन 4 बाइबिल के अंश

शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए फिलिप्पियों 2:6-7, न्यायियों 6:11-12, लूका 17:17-18 and व्यवस्थाविवरण 5:14.

☀ सुबह का पल

जिसने परमेश्वर के स्वरूप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। वरन् अपने आपको ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।

फिलिप्पियों 2:6-7

सुबह साढ़े आठ बजे ऑफिस के व्हाट्सऐप ग्रुप में एक मैसेज आता है। कल की मीटिंग में जो आइडिया आपने रखा था, उसका श्रेय कोई और अपने नाम पर लिख रहा है। भीतर कुछ कस जाता है, अपनी जगह बचाने की, अपना हक जताने की इच्छा जाग उठती है।

पौलुस यह पत्र जेल की कोठरी से फिलिप्पी की कलीसिया को लिख रहा था। वहाँ भी कुछ ऐसा ही चल रहा था, आपस की खींचतान, कौन बड़ा है, किसकी बात मानी जाए। इसी बीच पौलुस एक पुराना भजन उद्धृत करता है, शायद कलीसिया में गाया जाने वाला एक गीत, जो बताता है कि मसीह ने क्या किया।

मूल भाषा के उस शब्द का अर्थ है जबरन पकड़े रहना, मुट्ठी बंद किए रखना। मसीह के पास परमेश्वर होने का पूरा अधिकार था, फिर भी उसने उसे मुट्ठी में जकड़े नहीं रखा। उसने स्वयं को खाली किया, दास का रूप ले लिया। यह हार नहीं थी, यह एक चुनाव था।

आज सुबह वही सवाल आपके सामने भी है। जो जगह, जो श्रेय, जो पहचान आपकी लगती है, क्या उसे जकड़े रहना ज़रूरी है? मसीह की राह अलग दिखती है, हाथ खोलने की राह, अपनी पकड़ ढीली करने की राह।

आज
आज उसी सहकर्मी को, जिसने आपका श्रेय लिया या जिससे होड़ चल रही है, एक छोटा संदेश भेजें, उसके काम की सच्ची तारीफ करते हुए, बिना कोई शर्त या ताना जोड़े।

यह दिन समर्पित करें →

✦ दोपहर का पल

फिर यहोवा का दूत आकर उस बांज वृक्ष के तले बैठ गया, जो ओप्रा में अबीएजेरी योआश का था, और उसका पुत्र गिदोन एक दाखरस के कुण्ड में गेहूँ इसलिए झाड़ रहा था कि उसे मिद्यानियों से छिपा रखे। उसको यहोवा के दूत ने दर्शन देकर कहा, “हे शूरवीर सूरमा, यहोवा तेरे संग है।”

न्यायियों 6:11-12

डंडा बार-बार गेहूँ की बालियों पर पड़ता है, पर आवाज़ धीमी रखी जाती है। खुले खलिहान में नहीं, पत्थर की तंग हौदी में, वहाँ जहाँ अंगूर कुचले जाते हैं, वहाँ गिदोन गेहूँ कूट रहा है। बाहर मिद्यानी लुटेरे कभी भी आ सकते हैं, इसलिए काम भी छिपकर होता है, डर के साये में।

यही वह जगह है जहाँ स्वर्गदूत आता है और कहता है, तू शक्तिशाली वीर है। यह बात हंसी जैसी लगती है। जो आदमी अपनी ही फसल छिपाकर, दबे पाँव, डरते हुए काम कर रहा है, उसे परमेश्वर वीर कहते हैं। उसने अभी कुछ नहीं किया है जिसे वीरता कहा जा सके। पर परमेश्वर उसे वहीं से बुलाते हैं जहाँ वह है, डर में झुका हुआ, न कि किसी कल्पित मैदान में जहाँ वह पहले से मजबूत खड़ा हो।

यह बात आज के काम के बीच भी सच है। कोई पहचान, कोई भावना, इंतज़ार नहीं करती कि पहले भीतर से वीर बन जाए और फिर कदम उठाए। बुलावा पहले आता है, भरोसा बाद में बढ़ता है।

आज
जो एक काम आज तुम टालते आ रहे हो क्योंकि वह बहुत बड़ा या डरावना लगता है, उसे अभी उठाओ और उसका पहला छोटा हिस्सा पूरा करो, इस ऐप को बंद करने से पहले।

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◐ दोपहर का पल

इस पर यीशु ने कहा, “क्या दसों शुद्ध न हुए, तो फिर वे नौ कहाँ हैं? क्या इस परदेशी को छोड़ कोई और न निकला, जो परमेश्वर की बड़ाई करता?”

लूका 17:17-18

एक कोढ़ी अपने गाँव की सीमा पर खड़ा रहता था, दूर से, क्योंकि नियम यही था। जैसे ही कोई पास आता, उसे चिल्लाकर कहना पड़ता था, "अशुद्ध हूँ।" न घर लौट सकता था, न किसी को छू सकता था। ऐसे ही दस लोग एक साथ खड़े थे, दूर से चिल्लाते हुए।

यीशु ने उन्हें याजक के पास जाने को कहा, क्योंकि नियम के अनुसार केवल याजक ही घोषित कर सकता था कि कोई शुद्ध हो गया है। यही एक कोढ़ी को फिर गाँव में, परिवार में, बाज़ार में लौटा सकता था। रास्ते में ही उनका शरीर बदल गया।

नौ लोग आगे बढ़ते रहे, याजक की ओर, घर की ओर, उस जीवन की ओर जो वर्षों से छिन गया था। यह कोई अनुचित बात नहीं थी। लेकिन एक मुड़ा। उसने केवल अपने शरीर को नहीं देखा, उस हाथ को देखा जिसने उसे छुआ था।

यीशु का प्रश्न वहीं लटका रह जाता है, कोई उत्तर नहीं आता। "नौ कहाँ हैं?" यह सवाल आज भी उसी तरह खड़ा है, बिना जवाब के, हमारी ओर मुड़ा हुआ।

आज
आज किसी एक व्यक्ति के पास जाओ या फोन करो और उसे स्पष्ट शब्दों में बताओ कि परमेश्वर ने तुम्हारे लिए क्या किया है, कोई एक ठोस बात, बिना उसे सामान्य बनाए।

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☾ संध्या का क्षण

परन्तु सातवाँ दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है; उसमें न तू किसी भाँति का काम-काज करना, न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरा बैल, न तेरा गदहा, न तेरा कोई पशु, न कोई परदेशी भी जो तेरे फाटकों के भीतर हो; जिससे तेरा दास और तेरी दासी भी तेरे समान विश्राम करे। (मत्ती 12:2, लूका 23:56)

व्यवस्थाविवरण 5:14

आज दिन भर में किसे तूने बिना सोचे इस्तेमाल किया, बिना एक बार पूछे कि वह थका है या नहीं?

यह आज्ञा किसी बड़े नियम की तरह नहीं लगती, फिर भी इसमें बहुत कुछ छिपा है। परमेश्वर यहाँ केवल इस्राएल से नहीं, उसके दास से, उसकी दासी से, उसके बैल से भी बात करते हैं। जो कमाता नहीं, जो हुक्म पर चलता है, जिसकी थकान किसी की नज़र में नहीं आती, उसका नाम भी इस आज्ञा में लिखा गया है।

यह उस परमेश्वर की तस्वीर है जो ताकत रखने वालों से नहीं, बल्कि सबसे कम अधिकार रखने वाले से पहले बात करता है। घर का मालिक विश्राम भूल सकता है, पर उसका दास भूल नहीं सकता, उसे तो आराम चाहिए। परमेश्वर उसकी तरफ से खड़े होते हैं।

आज मंगलवार की शाम में, जब दिन का हिसाब मन में चल रहा हो, यह सोचने की जगह है, किसकी थकान मैंने आज नज़रअंदाज़ की। घर में काम करने वाला कोई, दफ्तर में नीचे बैठा कोई, या वह जिसे मैं अपना समझकर उसकी सीमा भूल जाता हूँ।

आज
आज रात किसी एक व्यक्ति को, जो तेरे लिए काम करता है या तेरी सेवा में है, एक संदेश भेज या मुँह से कहकर धन्यवाद दे, और उससे कह कि आज रात वह चैन से आराम करे।

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