दीनता में छिपा परमेश्वर का अधिकार
विनम्रता और अधिकार
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए मत्ती 28:2, फिलिप्पियों 2:7, मत्ती 3:12 and गिनती 17:10.
☀ सुबह का पल
तब एक बड़ा भूकम्प हुआ, क्योंकि परमेश्वर का एक दूत स्वर्ग से उतरा, और पास आकर उसने पत्थर को लुढ़का दिया, और उस पर बैठ गया।
मत्ती 28:2
अभी कुछ मत करिए। बस एक पल रुकिए, साँस लीजिए।
उस समय की कब्रें आज की तरह नहीं थीं। एक चट्टान में गुफा काटी जाती थी, और उसके द्वार पर एक बड़ा, चक्के जैसा पत्थर एक बनी हुई नाली में लुढ़काकर लगाया जाता था। यह पत्थर इतना भारी होता था कि उसे खिसकाने के लिए कई लोगों की ताकत लगती। इसका काम था रक्षा करना, जंगली जानवरों से, चोरों से, और यह सुनिश्चित करना कि जो भीतर है वह भीतर ही रहे। यह बंद होने के लिए बनाया गया था।
फिर भी मत्ती बताता है कि स्वर्गदूत ने उस पत्थर को लुढ़काया। ध्यान दीजिए, यह यीशु को बाहर निकालने के लिए नहीं था, वे तो पहले ही जी उठे थे। यह पत्थर इसलिए हटाया गया ताकि डरी हुई स्त्रियाँ, और हम सब, भीतर झाँककर देख सकें कि वहाँ कुछ नहीं बचा था।
आज सुबह शायद आपके भीतर भी कोई पत्थर लुढ़का हुआ है, कोई चिंता जो रात भर द्वार पर पड़ी रही। परमेश्वर उस भारी पत्थर को नहीं डरता। जो मृत्यु को नहीं रोक सका, वह आपकी सुबह की थकान को भी नहीं रोक पाएगा।
आज
आज घर से निकलने से पहले, दरवाज़े पर एक पल रुकिए और धीरे से कह दीजिए, "यीशु जीवित है, और मेरे साथ चलता है।" फिर दरवाज़ा खोलकर बाहर निकलिए।
✦ दोपहर का पल
वरन् अपने आपको ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
फिलिप्पियों 2:7
एक तेल बेचने वाला अपना घड़ा उल्टा करता है और उसे तब तक हिलाता रहता है जब तक आखिरी बूँद भी न गिर जाए। आधा उड़ेलना आसान है, पर पूरी तरह खाली करना अलग बात है, क्योंकि फिर घड़े में कुछ भी बचाकर रखने का विकल्प नहीं रहता।
पौलुस जिस यूनानी शब्द का उपयोग करता है उसका मूल अर्थ यही है, पूरी तरह खाली करना। हिंदी का "अपने आप को शून्य कर दिया" इसकी गंभीरता को पूरी तरह नहीं पकड़ पाता। यह शब्द बताता है कि यीशु ने अपनी महिमा को थोड़ा ढका नहीं, उसे घड़े की आखिरी बूँद तक उड़ेल दिया, और दास का रूप धारण किया।
दोपहर के समय दफ्तर में यही लड़ाई चलती है, कौन कितना दिखे, किसका श्रेय माना जाए, कौन ऊँची कुर्सी पर बैठे। यह शब्द उस दौड़ के ठीक विपरीत खड़ा है। यीशु ने अपना अधिकार छोड़ा, पकड़ा नहीं रखा।
यह दबना नहीं है, यह चुनाव है। जो भरा हुआ है वही खाली कर सकता है, खाली आदमी के पास उड़ेलने को कुछ नहीं होता।
आज
आज दोपहर के भोजन में किसी एक छोटे काम का श्रेय चुपचाप किसी और को जाने दो, बिना यह बताए कि वह काम तुमने किया था।
◐ दोपहर का पल
उसका सूप उसके हाथ में है, और वह अपना खलिहान अच्छी रीति से साफ करेगा, और अपने गेहूँ को तो खत्ते में इकट्ठा करेगा, परन्तु भूसी को उस आग में जलाएगा जो बुझने की नहीं।”
मत्ती 3:12
फटकने का पंखा। एक लकड़ी का औजार, जिससे अनाज को हवा में उछाला जाता था ताकि भूसा उड़ जाए और दाना नीचे गिर आए। यह कोई मशीन नहीं थी, हाथ का काम था, बार-बार उछालना, धैर्य से इंतज़ार करना कि हवा सही दिशा से चले। खलिहान किसी ऊँची, खुली जगह पर बनाया जाता था, जहाँ शाम की हवा नियमित रूप से बहती थी। रूत के समय बोअज़ उसी खलिहान पर रात बिताता था, क्योंकि कटे हुए अनाज की रखवाली ज़रूरी थी, चोरी का डर हमेशा रहता था।
यह प्रथा किसी एक को नहीं, दोनों को छूती थी। मालिक को सुरक्षा चाहिए थी, मज़दूर को रोटी। गरीब खेत के किनारों से गिरा अनाज बीन सकते थे, जैसे रूत ने किया। खलिहान सिर्फ अन्न अलग करने की जगह नहीं थी, वहाँ समाज की ज़रूरतें भी तौली जाती थीं।
यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला इसी तस्वीर को उठाता है, पर अब पंखा मसीह के हाथ में है। यहाँ कोई आधा-अधूरा अलगाव नहीं। गेहूँ भंडार में, भूसा आग में। यह सुनने में कठोर लगता है, क्योंकि हमारे भीतर दोनों मिले हुए हैं, सच्चाई और दिखावा, विश्वास और डर।
सवाल यह नहीं कि परमेश्वर इतना कठोर क्यों है। सवाल यह है कि हम कितनी बार आधी छनाई से संतुष्ट रहना चाहते हैं।
आज
आज कागज़ पर दो कॉलम बनाओ, अनाज और भूसा। अपने दिन की एक चीज़ लिखो जो वाकई मायने रखती है, और एक जो सिर्फ शोर है। भूसेवाला भाग फाड़कर कूड़ेदान में डाल दो।
☾ संध्या का क्षण
फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “हारून की छड़ी को साक्षीपत्र के सामने फिर रख दे, कि यह उन बलवा करनेवालों के लिये एक निशान बनकर रखी रहे, कि तू उनका बुड़बुड़ाना जो मेरे विरुद्ध होता रहता है भविष्य में रोक सके, ऐसा न हो कि वे मर जाएँ।” (इब्रा. 9:4)
गिनती 17:10
एक सूखी लाठी किसी के मुंह का ताला बन सकती है।
अहरोन की लाठी कोई खास वस्तु नहीं थी, एक साधारी छड़ी, जैसी हर कुल के मुखिया के पास होती, भेड़-बकरियां हांकने और चलने के सहारे के लिए काम आती। बारह कुलों के बारह नाम, बारह लाठियां, पवित्रस्थान में रात भर रखी गईं। सुबह सिर्फ अहरोन की लाठी में कलियां फूटीं, फूल खिले, बादाम पक गए। परमेश्वर ने इसी साधारण लकड़ी से बोल दिया कि उसने किसे चुना है।
पर कहानी यहीं खत्म नहीं होती। यहोवा मूसा से कहते हैं कि इस लाठी को वापस साक्षी के सन्दूक के आगे रखा जाए, एक निशानी के रूप में, ताकि विद्रोही सन्तानों की बुड़बुड़ाहट थम जाए और वे न मरें। एक लाठी, एक मौन गवाह, लोगों की शिकायत को चुप कराने के लिए काफी थी।
आज के दिन के अंत में शायद तुम्हारे भीतर भी कुछ बुड़बुड़ाहट बची रह गई हो, थकान की, किसी अन्याय की, किसी न सुलझे सवाल की। अहरोन की लाठी याद दिलाती है कि परमेश्वर शिकायत के शोर में भी एक शांत निशानी रख सकता है, जो बहुत कुछ कहे बिना ही बहुत कुछ कह देती है।
आज
आज रात एक कागज़ पर वह एक शिकायत लिख, जो दिनभर तुम्हारे मन में बुड़बुड़ाती रही, और उसे अपनी बाइबल के पन्नों के बीच रख दे, जैसे वह लाठी साक्षी के सन्दूक के आगे रखी गई थी।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
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2तब एक बड़ा भूकम्प हुआ, क्योंकि परमेश्वर का एक दूत स्वर्ग से उतरा, और पास आकर उसने पत्थर को लुढ़का दिया, और उस पर बैठ गया।
7वरन् अपने आपको ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
12उसका सूप उसके हाथ में है, और वह अपना खलिहान अच्छी रीति से साफ करेगा, और अपने गेहूँ को तो खत्ते में इकट्ठा करेगा, परन्तु भूसी को उस आग में जलाएगा जो बुझने की नहीं।”
10फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “हारून की छड़ी को साक्षीपत्र के सामने फिर रख दे, कि यह उन बलवा करनेवालों के लिये एक निशान बनकर रखी रहे, कि तू उनका बुड़बुड़ाना जो मेरे विरुद्ध होता रहता है भविष्य में रोक सके, ऐसा न हो कि वे मर जाएँ।” (इब्रा. 9:4)
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