जहाँ विश्वास असंभव को छूता है
असंभव में विश्वास
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए यूहन्ना 11:39, 2 राजा 6:5, मत्ती 8:9 and जकर्याह 9:10.
☀ सुबह का पल
यीशु ने कहा, “पत्थर को उठाओ।” उस मरे हुए की बहन मार्था उससे कहने लगी, “हे प्रभु, उसमें से अब तो दुर्गन्ध आती है, क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए।”
यूहन्ना 11:39
इस्राएल की गरमी में एक लाश को चार दिन तक गुफा में बंद रखा जाए, तो हवा खुद बता देती है कि अंदर क्या हो रहा है। कब्र के मुँह पर एक भारी पत्थर रखा जाता था, इतना भारी कि उसे हटाने के लिए कई हाथों की ज़रूरत पड़ती थी। लाजर की कब्र भी ऐसी ही थी, एक चट्टान में बनी गुफा, और उसके मुँह पर टिका एक पत्थर जो चार दिन से नहीं हिला था।
मार्था यह जानती थी। जब यीशु ने पत्थर हटाने को कहा, तो उसने वही कहा जो हर कोई सोच रहा था, कि उसकी तो अब तक बदबू आने लगी होगी, क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए हैं। यह संदेह की बात नहीं थी, यह एक यथार्थ था। बहुत से यहूदी मार्था और मरियम को सांत्वना देने आए थे, जैसा उनकी रीति थी, पर वे भी यही मानकर आए थे कि अब कुछ नहीं हो सकता।
यीशु पत्थर के पास रुके नहीं। उन्होंने बदबू को झुठलाया नहीं और न ही मार्था की बात को टाला, बल्कि उसी हकीकत के बीचोंबीच खड़े होकर पुकारा, लाजर, बाहर आ। जो चार दिन से बंद था, वह जी उठा। जिन्होंने देखा, उनमें से कुछ विश्वास कर बैठे, और कुछ वही देखकर भी यरूशलेम की ओर दौड़ पड़े।
आज शनिवार है, शायद घर पर इत्मीनान का दिन, परिवार के साथ, या कल रविवार की तैयारी का। पर हर घर में कोई न कोई पत्थर पड़ा होता है, कोई हालात जो इतने पुराने और बिगड़े हुए लगते हैं कि उनके बारे में सोचना भी बेकार लगता है। यीशु उस बदबू से दूर नहीं भागते। वे वहीं खड़े होते हैं जहाँ उम्मीद खत्म हो चुकी लगती है, और पुकारते हैं।
आज
आज सुबह एक कागज़ पर उस एक हालात का नाम लिख जो तुझे चार दिन पुराना, अब कुछ नहीं हो सकता जैसा लगता है, और उसे पढ़ते हुए ज़ोर से कह, प्रभु, पत्थर हटा दे।
✦ दोपहर का पल
But as one was cutting down a beam, the axe head fell into the water. Then he cried, and said, 'Alas, my master! For it was borrowed.'
2 राजा 6:5
यरदन के किनारे एक जवान आदमी लकड़ी काट रहा है, और अचानक कुल्हाड़ी का फल हाथ से छूटकर पानी में डूब जाता है। वह रोता नहीं क्योंकि औज़ार कीमती था, वह रोता है क्योंकि वह उसका अपना नहीं था। वह उधार लिया हुआ था।
यही बात इस घटना को खास बनाती है। यह किसी बड़े युद्ध या राजा के संकट की कहानी नहीं है, यह एक साधारण मज़दूर की चिंता है कि किसी और की चीज़ उससे खो गई। उस ज़माने में उधार ली हुई वस्तु लौटाने का दायित्व भारी माना जाता था, इसलिए उसका रोना समझ में आता है।
एलीशा एक टहनी काटकर पानी में डालता है, और लोहा ऊपर तैरने लगता है। लोहा तैरता नहीं, यह सब जानते हैं। पर यहाँ परमेश्वर स्वभाव के नियम को भी पलट देता है, और वह भी किसी बड़े चमत्कार के लिए नहीं, बल्कि एक साधारण आदमी की छोटी सी मुसीबत के लिए।
यह घटना किसी भीड़ के सामने नहीं हुई। बस कुछ भविष्यद्वक्ता वहाँ काम कर रहे थे, और एक छोटी सी चूक हुई। फिर भी परमेश्वर ने ध्यान दिया। आज, जब तुम्हारा शनिवार घर के छोटे-मोटे कामों, उधार दी-ली चीज़ों और साधारण ज़िम्मेदारियों में बीत रहा है, यह याद रखने लायक है कि वह छोटी बातों से मुँह नहीं मोड़ता।
आज
आज घर में कोई उधार ली हुई चीज़ ढूंढो, चाहे वह छोटी ही क्यों न हो, और उसे मालिक को लौटा दो या लौटाने का संदेश अभी भेज दो।
◐ दोपहर का पल
क्योंकि मैं भी पराधीन मनुष्य हूँ, और सिपाही मेरे हाथ में हैं, और जब एक से कहता हूँ, जा, तो वह जाता है; और दूसरे को कि आ, तो वह आता है; और अपने दास से कहता हूँ, कि यह कर, तो वह करता है।”
मत्ती 8:9
आधीन। सूबेदार खुद यह शब्द बोलता है, मैं भी अधिकार के आधीन मनुष्य हूँ। यह चौंकाता है। हम सोचते थे अधिकार माने हाथ में डंडा, ऊपर बैठना, हुक्म चलाना। पर यह सैन्य अधिकारी पहले खुद को किसी और के नीचे रखता है, फिर दूसरों को आदेश देता है। अधिकार उसके पास इसलिए है क्योंकि वह पहले किसी के आधीन खड़ा है।
रोमी सेना में सूबेदार सौ सैनिकों पर अधिकार रखता था, पर खुद किसी उच्चाधिकारी के नीचे था। यही रोज़मर्रा का अनुभव उसे यीशु के पास ले आया। वह जानता था आदेश कैसे चलता है, बिना हाथ हिलाए, बिना शरीर वहाँ भेजे। जा, तो सिपाही जाता है। इसलिए उसने यीशु से घर आने को नहीं कहा। उसने माना कि बस एक वचन काफी है।
यह उस आदमी के लिए कुछ छोड़ना था। एक सैन्य अधिकारी, जिसकी पहचान ही आदेश देने से बनती थी, एक यहूदी रब्बी के सामने अपनी पूरी समझ रख देता है कि असली अधिकार कहीं और है। उसे वर्दी उतारनी नहीं पड़ी, पर अपनी समझ को झुकाना पड़ा।
आज भी हम अधिकार के ढांचों में जीते हैं, घर में, परिवार में, रिश्तों में। सवाल यह नहीं कि हम कितना अधिकार रखते हैं, सवाल यह है कि हम किसके आधीन खड़े हैं। सूबेदार ने पहचाना कि यीशु का वचन दूरी और बीमारी दोनों पर चलता है, बिना शारीरिक उपस्थिति के।
आज
आज किसी एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखो, जो बीमार है, थका है, या दूर कहीं संघर्ष में है। उसका नाम ऊँची आवाज़ में बोलो और कहो, यीशु, बस एक वचन कह दे। फिर कागज़ को अपनी बाइबल में रख दो।
☾ संध्या का क्षण
मैं एप्रैम के रथ और यरूशलेम के घोड़े नष्ट करूँगा; और युद्ध के धनुष तोड़ डाले जाएँगे, और वह अन्यजातियों से शान्ति की बातें कहेगा; वह समुद्र से समुद्र तक और महानद से पृथ्वी के दूर-दूर के देशों तक प्रभुता करेगा। (इफि. 2:17, भज. 72:8)
जकर्याह 9:10
आज रात, जब घर में सन्नाटा है, एक सवाल मन में उठता है: क्या इस दुनिया में ताकत के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा? क्या हर जगह वही जीतता है जिसके पास बड़ा हथियार है?
जकर्याह यह शब्द उस समय बोल रहा था जब यरूशलेम की दीवारें अभी कच्ची थीं, लोग थोड़े थे और आस-पास की ताकतें बड़ी। उनके पास ना रथ थे, ना घोड़े, ना सेना जिस पर भरोसा किया जा सके। ऐसे ही कमजोर समय में परमेश्वर ने वादा किया कि एक राजा आएगा, पर वह विजयी घोड़े पर नहीं, गधे पर आएगा। उसका रास्ता तलवार का नहीं, शांति का होगा।
यह आयत उसी राजा के राज्य की तस्वीर देती है। रथ कट जाते हैं, घोड़े हटा दिए जाते हैं, युद्ध का धनुष तोड़ दिया जाता है, और वह राष्ट्रों से शांति की बात करता है। उसका राज्य समुद्र से समुद्र तक, छोर से छोर तक फैलता है, पर हथियार से नहीं, वचन से।
आज के दिन में शायद किसी बहस में जीतने की, किसी को नीचा दिखाने की, या किसी स्थिति पर पूरी तरह काबू पाने की इच्छा रही होगी। यह राजा वैसा नहीं है। वह दिखाता है कि सच्चा राज्य दबाने से नहीं, शांति बोलने से बढ़ता है। उसके सामने आज की थकान और आज की लड़ाई सौंपी जा सकती है।
आज
आज रात सोने से पहले, अपने दिन की सबसे बड़ी चिंता या झगड़े की बात एक कागज़ के टुकड़े पर लिख दो, फिर उसे मोड़कर एक तरफ रख दो और ज़ोर से कह दो, मेरा राजा शांति से आता है, मैं यह उसे सौंपता हूँ।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
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39यीशु ने कहा, “पत्थर को उठाओ।” उस मरे हुए की बहन मार्था उससे कहने लगी, “हे प्रभु, उसमें से अब तो दुर्गन्ध आती है, क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए।”
9क्योंकि मैं भी पराधीन मनुष्य हूँ, और सिपाही मेरे हाथ में हैं, और जब एक से कहता हूँ, जा, तो वह जाता है; और दूसरे को कि आ, तो वह आता है; और अपने दास से कहता हूँ, कि यह कर, तो वह करता है।”
10मैं एप्रैम के रथ और यरूशलेम के घोड़े नष्ट करूँगा; और युद्ध के धनुष तोड़ डाले जाएँगे, और वह अन्यजातियों से शान्ति की बातें कहेगा; वह समुद्र से समुद्र तक और महानद से पृथ्वी के दूर-दूर के देशों तक प्रभुता करेगा। (इफि. 2:17, भज. 72:8)
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