हर पल परमेश्वर से मुलाकात
उपस्थिति में मुलाकात
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए निर्गमन 16:33-34, प्रेरितों के काम 20:7, लूका 4:20 and 1 राजा 19:9.
☀ सुबह का पल
तब मूसा ने हारून से कहा, “एक पात्र लेकर उसमें ओमेर भर लेकर उसे यहोवा के आगे रख दे, कि वह तुम्हारी पीढ़ियों के लिये रखा रहे।” जैसी आज्ञा यहोवा ने मूसा को दी थी, उसी के अनुसार हारून ने उसको साक्षी के सन्दूक के आगे रख दिया, कि वह वहीं रखा रहे।
निर्गमन 16:33-34
रसोई की किसी दराज़ में शायद कोई पुरानी चीज़ पड़ी होगी, जो अब काम की नहीं पर फेंकी भी नहीं जाती।
जंगल में हर सुबह मन्ना ज़मीन पर पड़ा मिलता था। लोग उतना ही बटोरते जितना उस दिन के लिए चाहिए था। अगर कोई उसे बचाकर अगले दिन तक रखता, तो वह सड़ जाता और कीड़े पड़ जाते। यही नियम था, रोज़ का भोजन, रोज़ की निर्भरता।
लेकिन इस एक मुट्ठी भर मन्ने के साथ कुछ अलग हुआ। हारून ने इसे एक घड़े में रखा, और इसे वाचा के सन्दूक के सामने रखा गया, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी देख सकें। जो लोग कभी उस जंगल में नहीं चले, वे भी इस घड़े को देखकर जान सकें कि परमेश्वर ने अपने लोगों को कैसे खिलाया था। यह मन्ना अब खाने के लिए नहीं, याद रखने के लिए रखा गया था।
शनिवार की सुबह अक्सर पीछे मुड़कर देखने का दिन होती है। आज अगर परिवार साथ बैठे, तो यह घड़ा याद दिलाता है कि कुछ कहानियाँ संभालकर रखने लायक होती हैं, न सिर्फ अपने लिए, बल्कि उनके लिए भी जो बाद में सुनेंगे।
आज
आज नाश्ते की मेज़ पर रुककर परिवार को वह एक दिन सुनाइए जब परमेश्वर ने आपकी किसी ज़रूरत को ठीक समय पर पूरा किया था।
✦ दोपहर का पल
सप्ताह के पहले दिन जब हम रोटी तोड़ने के लिये इकट्ठे हुए, तो पौलुस ने जो दूसरे दिन चले जाने पर था, उनसे बातें की, और आधी रात तक उपदेश देता रहा।
प्रेरितों के काम 20:7
तीसरी मंजिल के उस कमरे में ढेर सारे तेल के दीयों की लौ जल रही थी, हवा भारी और गरम थी, धुएँ और पसीने की गंध से भरी हुई, और एक खिड़की खुली रखी गई थी ताकि बाहर की ठंडी हवा भीतर आ सके।
त्रोआस एशिया माइनर के तट पर एक व्यस्त बंदरगाह शहर था, जहाँ से जहाज यूनान और मकिदुनिया की ओर निकलते थे। पौलुस वहाँ रुका हुआ था, और सप्ताह के पहले दिन, जो उस ज़माने में छुट्टी का दिन नहीं था, विश्वासी अपने दिन भर के काम के बाद रात में इकट्ठे हुए रोटी तोड़ने के लिए।
यह ध्यान देने योग्य है कि उन्होंने उपासना के लिए कोई अलग, आरामदायक दिन नहीं माँगा। उन्होंने अपने व्यस्त जीवन के किनारे पर, थके हुए शरीर और गरम कमरे में, साथ बैठने और रोटी तोड़ने की जगह निकाली। पौलुस इतनी देर तक बोलता रहा कि आधी रात हो गई, क्योंकि यह मुलाक़ात दुर्लभ थी और हर घड़ी कीमती थी।
खिड़की वहाँ इसलिए थी कि भरे हुए कमरे में साँस ली जा सके, जीवन बना रहे। हमारी ज़िंदगी में भी कभी कभी ऐसी ही एक खिड़की चाहिए होती है, थोड़ी हवा, थोड़ी साँस, ताकि भारी हो चुका पल फिर से जीने लायक बन जाए।
आज
आज शनिवार है, और कल कलीसिया फिर इकट्ठी होगी, रोटी तोड़ने और सुनने के लिए, जैसे त्रोआस में हुआ था। अभी जहाँ आप बैठे हैं वहीं एक खिड़की खोलें, दो मिनट वहाँ खड़े रहकर गहरी साँस लें, और धन्यवाद दें कि कल आप भी किसी मेज़ पर किसी के साथ बैठेंगे।
◐ दोपहर का पल
तब उसने पुस्तक बन्द करके सेवक के हाथ में दे दी, और बैठ गया: और आराधनालय के सब लोगों की आँखें उस पर लगी थी।
लूका 4:20
नासरत के लोग उस आदमी को बचपन से जानते थे, उसके हाथों की रेखाएं बढ़ई के औजारों से बनी थीं, उसकी आवाज़ गली के कोने तक पहचानी जाती थी। उस शनिवार आराधनालय में वही आदमी खड़ा था, यशायाह की पुस्तक पढ़ रहा था।
उस दुनिया में पढ़ने और सिखाने के बीच एक साफ रेखा थी। कोई भी खड़े होकर शास्त्र पढ़ सकता था, यह सम्मान की बात थी। पर जब शिक्षक अपनी बात कहने लगता, व्याख्या करने लगता, तब वह बैठ जाता था। बैठना अधिकार का स्थान था, जैसे न्यायाधीश अपनी गद्दी पर बैठता है। लोग समझ जाते थे कि अब जो बोला जाएगा, वह साधारण नहीं है।
इसीलिए जब यीशु पुस्तक बन्द करके बैठ गए, कमरे में सांस थम गई। सबकी आंखें उन पर टिकी थीं, क्योंकि अब वे पढ़ नहीं रहे थे, वे खुद को उस भविष्यवाणी के केंद्र में रख रहे थे जिसे उन्होंने अभी पढ़ा था।
यह सवाल आज भी उतना ही तीखा है, इस आदमी को किस अधिकार से यह गद्दी दी गई? नासरत के लोगों ने भी यही पूछा, और आगे की आयतों में उनका जवाब कड़वा निकला। यह कहानी आराम से बंद नहीं होती।
आज
आज किसी शांत कुर्सी पर पांच मिनट बैठ जाइए, कोई काम नहीं, बस बैठिए। फिर जोर से बोलिए, वह मुझ पर अधिकार रखता है, और एक पंक्ति में लिखिए कि इसका आज के दिन के लिए क्या मतलब है।
☾ संध्या का क्षण
He came there to a cave, and lodged there; and behold, the word of Yahweh came to him, and he said to him, "What are you doing here, Elijah?"
1 राजा 19:9
क्या मैं बस हार मान लूं, यह ख़्याल आज रात किसी कोने में बैठा है क्या? यह सवाल एलिय्याह ने भी पूछा था, उस दिन जब उसकी हिम्मत ख़त्म हो गई थी।
कार्मेल पहाड़ पर उसने बड़े चमत्कार देखे थे, आग आसमान से गिरी थी, परन्तु ईज़ेबेल की एक धमकी ने उसे भगा दिया। वह एक दिन भर रेगिस्तान में चला, एक झाड़ी के नीचे बैठा, और मरने की भीख मांगी। फिर वह सो गया। एक स्वर्गदूत ने उसे छुआ, रोटी और पानी दिया, और उसे फिर सोने दिया। कोई सवाल नहीं पूछा गया, कोई उपदेश नहीं दिया गया, पहले आराम, फिर भोजन, फिर रास्ता।
चालीस दिन चलकर वह होरेब पहाड़ पर पहुंचा, एक गुफा में रुका, और तब परमेश्वर ने पूछा, तू यहां क्या कर रहा है? यह सवाल तिरस्कार का नहीं था, यह एक पिता का सवाल था जिसने पहले अपने थके हुए बेटे को खाने और सोने दिया।
शायद आज तुम्हारे भीतर भी कोई सवाल दबा पड़ा है, कोई थकान जो शब्द नहीं बन पा रही। परमेश्वर आज रात तुमसे हिसाब नहीं मांग रहा। वह पहले तुम्हें खाने, सोने, सांस लेने देना चाहता है। कल के सवालों के लिए कल है।
आज
आज रात सोने से पहले कुछ हल्का खाइए या एक गिलास पानी पीजिए, धीरे धीरे, बिना फोन या टीवी के। खाते हुए ज़ोर से कहिए, परमेश्वर, आज का बोझ मैं यहां रख देता हूं, फिर बत्ती बुझा दीजिए।
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33तब मूसा ने हारून से कहा, “एक पात्र लेकर उसमें ओमेर भर लेकर उसे यहोवा के आगे रख दे, कि वह तुम्हारी पीढ़ियों के लिये रखा रहे।”
34जैसी आज्ञा यहोवा ने मूसा को दी थी, उसी के अनुसार हारून ने उसको साक्षी के सन्दूक के आगे रख दिया, कि वह वहीं रखा रहे।
7सप्ताह के पहले दिन जब हम रोटी तोड़ने के लिये इकट्ठे हुए, तो पौलुस ने जो दूसरे दिन चले जाने पर था, उनसे बातें की, और आधी रात तक उपदेश देता रहा।
20तब उसने पुस्तक बन्द करके सेवक के हाथ में दे दी, और बैठ गया: और आराधनालय के सब लोगों की आँखें उस पर लगी थी।
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