दया जो बोझ उतार दे
दया और विनम्रता
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए मत्ती 9:36, 2 राजा 5:2, योना 3:6 and प्रेरितों के काम 15:28-29.
☀ सुबह का पल
जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान जिनका कोई चरवाहा न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे। (1 राजा. 22:17)
मत्ती 9:36
जब तुम आज सुबह उठे, क्या तुम्हें लगा कि कोई सच में तुम्हारी हालत देख रहा है, या तुम बस एक और थके हुए चेहरे की तरह भीड़ में खो जाओगे?
मत्ती 9 में जो शब्द यीशु की भावना के लिए इस्तेमाल हुआ है, वह ग्रीक भाषा में स्प्लैंकनिज़ोमाइ है। यह शब्द सीधे पेट और आंतों से जुड़ा है। प्राचीन यूनानी सोच में भावनाओं का केंद्र दिल नहीं, बल्कि शरीर के भीतर की वह गहराई मानी जाती थी। यह सिर्फ सहानुभूति नहीं, बल्कि भीतर कुछ मुड़ जाने जैसा अनुभव है, जैसे किसी का दर्द देखकर तुम्हारी अपनी देह में हलचल मच जाए।
यीशु ने भीड़ को देखा, थके हुए, तितर-बितर, चरवाहे रहित भेड़ों जैसे, और उनके भीतर यही हलचल हुई। यही शब्द लूका 15 में उस पिता के लिए भी आता है जो दूर से अपने बेटे को आते देखता है। दोनों जगह यह शब्द बताता है कि करुणा कोई दूर से लिया गया फैसला नहीं थी, बल्कि शरीर में उठी हुई असली प्रतिक्रिया थी।
हमारी भाषाओं में दया आई या तरस खाया जैसे शब्द इस गहराई को पूरी तरह नहीं पकड़ पाते। वे बहुत सभ्य, बहुत नियंत्रित लगते हैं। असली शब्द कहता है कि परमेश्वर का पुत्र किसी दूर के सिंहासन से नहीं, बल्कि भीतर तक हिल जाकर तुम्हारी ओर देखता है।
इसका मतलब है कि आज सुबह जब तुम थके, बिखरे हुए या चिंतित महसूस करते हो, तो तुम किसी ठंडी नजर के सामने नहीं खड़े हो। यीशु की नजर तुम्हें देखकर आज भी भीतर से हिलती है।
आज
आज किसी एक व्यक्ति को, जिसके बारे में तुम जानते हो कि वह थका या बिखरा हुआ महसूस कर रहा है, अभी एक छोटा संदेश भेज दो, जिसमें लिखो, मैं तुम्हें देख रहा हूँ, तुम अकेले नहीं हो।
✦ दोपहर का पल
अब अरामी दल बांधकर निकले थे, और इस्राएल देश से एक छोटी लड़की को बंदी बनाकर ले आए थे; और वह नामान की पत्नी की सेवा करती थी।
2 राजा 5:2
उसका कोई नाम नहीं है। "एक छोटी लड़की", इतना ही पाठ हमें बताता है। युद्ध में पकड़ी गई, घर से दूर, नामान की पत्नी के पैरों में सेवा करती हुई। उसका नाम छीन लिया गया, उसकी ज़मीन छीन ली गई, फिर भी यही वह है जिसके एक वाक्य से पूरी कहानी मुड़ जाती है।
ज़रा सोचो उसकी स्थिति। दूसरे देश में, पराए घर में, अपनी मर्ज़ी से नहीं आई। कोई पद नहीं, कोई आवाज़ नहीं जो गिनी जाए। फिर भी जब मौका आता है, वह बोलती है, और वह भी अपने मालिक की भलाई के लिए, उसी आदमी की भलाई के लिए जिसने उसे बंदी बनाया।
उसके पास सेना नहीं थी, चांदी नहीं थी, प्रभाव नहीं था। उसके पास बस एक जानकारी थी, एक नाम, एक पता, शमरिया का एक भविष्यद्वक्ता। उसने वह वाक्य रोककर नहीं रखा। उसी छोटे वाक्य से इस्राएल के परमेश्वर की महिमा सीरिया के सेनापति के घर तक पहुंच गई।
दोपहर के इस छोटे ठहराव में यही सवाल रह जाता है, तुम्हारे पास कितना है, यह मायने नहीं रखता। दफ्तर में तुम्हारा पद छोटा लग सकता है, तुम्हारी बात अनसुनी रह सकती है, फिर भी एक सच्चा वाक्य, सही समय पर कहा गया, किसी के लिए रास्ता खोल सकता है।
आज
आज किसी एक सहकर्मी या परिचित का नाम कागज़ पर लिख लो जिसे तुम्हारे एक भले शब्द की ज़रूरत है, और दोपहर खत्म होने से पहले उसे वह शब्द सीधे कह दो या संदेश भेज दो।
◐ दोपहर का पल
तब यह समाचार नीनवे के राजा के कान में पहुँचा; और उसने सिंहासन पर से उठ, अपना राजकीय ओढ़ना उतारकर टाट ओढ़ लिया, और राख पर बैठ गया।
योना 3:6
एक राजा से उम्मीद की जाती है कि वह संयत और सशक्त दिखे, चाहे भीतर कुछ भी टूट रहा हो। नीनवे के राजा ने ठीक उलटा किया, अपना शाही वस्त्र उतार कर टाट ओढ़ लिया और राख में बैठ गया, सबके सामने, बिना किसी को छुपाए।
टाट बकरी के बालों से बना मोटा, खुरदुरा कपड़ा था, सीधे त्वचा पर पहना जाता, जो चुभता और खुजाता था। यह आराम का इनकार था। राख में बैठना मिट्टी में लौटने का इशारा था, जो हर इंसान को याद दिलाता कि वह धूल है। अय्यूब भी जब सब कुछ खो बैठता है, नगर के बाहर राख के ढेर पर जा बैठता है, टूटे बर्तन के टुकड़े से अपने घावों को खुरचते हुए, बिना किसी को दूर भगाए।
यह रिवाज किसी को दिखावे के लिए नहीं दिया गया था। यह शरीर से दुःख को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने का तरीका था, ताकि समुदाय उसे देख सके, नकार न सके। यह हैसियत की रक्षा नहीं करता था, बल्कि उसे उतार देता था, राजा हो या दीन, सब राख में एक समान।
और यही परमेश्वर के बारे में कुछ खोलता है। उसने उस उखड़े हुए सिंहासन और धूल में बैठे राजा को तुच्छ नहीं जाना। उसे चमकाए हुए शब्दों की नहीं, उतरे हुए आदमी की ज़रूरत थी।
हम टाट नहीं पहनते, पर अपने टूटे दिनों को भी चमका कर पेश करते हैं, मानो सब ठीक हो। यह पाठ पूछता है कि क्या तुम आज कुछ उतारने को तैयार हो।
आज
आज दोपहर कुछ मिनट के लिए फर्श पर नीचे बैठ जाओ, जूते उतार दो, और जो टूटन तुम छुपा रहे हो उसे ज़ोर से शब्दों में परमेश्वर के सामने कह दो।
☾ संध्या का क्षण
पवित्र आत्मा को, और हमको भी ठीक जान पड़ा कि इन आवश्यक बातों को छोड़; तुम पर और बोझ न डालें; कि तुम मूरतों के बलि किए हुओं से, और लहू से, और गला घोंटे हुओं के माँस से, और व्यभिचार से दूर रहो। इनसे दूर रहो तो तुम्हारा भला होगा। आगे शुभकामना।” (उत्प. 9:4, लैव्य. 3:17)
प्रेरितों के काम 15:28-29
पत्र का चर्मपत्र अभी हाथ में गीला सा लग रहा था जब यहूदा और सीलास उसे लेकर अन्ताकिया की ओर चल पड़े। यरूशलेम के ऊपरी कमरे में बहस देर तक चली थी, आवाज़ें ऊँची हुई थीं, कुछ ने कहा था कि अन्यजाति विश्वासियों को पहले यहूदी रीति से खतना करवाना ज़रूरी है, तभी वे मसीह के पूरे अधिकारी माने जाएँगे।
फिर पतरस खड़ा हुआ, बरनबास और पौलुस ने अपनी यात्राओं की बातें सुनाईं, और याकूब ने अंत में निर्णय सुनाया। कोई नया बोझ नहीं, बस कुछ गिनी-चुनी ज़रूरी बातें। यह कलीसिया के इतिहास का एक मोड़ था, जहाँ विश्वास की राह को इंसानों की माँगों से मुक्त रखा गया।
यह छोटी बात नहीं थी। इस निर्णय से पहले अन्यजाति विश्वासी हमेशा इस संशय में रहते कि क्या वे पूरी तरह स्वीकार किए गए हैं। निर्णय के बाद, पत्र हाथ में लिए दूत चल पड़े, और अन्ताकिया की कलीसिया ने उसे पढ़कर आनंद मनाया।
आज शाम, सोचिए कि आपने अपने ऊपर या किसी और के ऊपर कौन सा अनावश्यक बोझ रख छोड़ा है, कोई शर्त जो परमेश्वर ने कभी नहीं माँगी।
आज
एक कागज़ पर वह एक शर्त लिखिए जो आपने खुद से जोड़ रखी है, जैसे 'पहले मुझे यह करना होगा, तभी मैं ठीक हूँ,' और उसे अभी काट दीजिए।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
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36जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान जिनका कोई चरवाहा न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे। (1 राजा. 22:17)
6तब यह समाचार नीनवे के राजा के कान में पहुँचा; और उसने सिंहासन पर से उठ, अपना राजकीय ओढ़ना उतारकर टाट ओढ़ लिया, और राख पर बैठ गया।
28पवित्र आत्मा को, और हमको भी ठीक जान पड़ा कि इन आवश्यक बातों को छोड़; तुम पर और बोझ न डालें;
29कि तुम मूरतों के बलि किए हुओं से, और लहू से, और गला घोंटे हुओं के माँस से, और व्यभिचार से दूर रहो। इनसे दूर रहो तो तुम्हारा भला होगा। आगे शुभकामना।” (उत्प. 9:4, लैव्य. 3:17)
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