हर हाल में परमेश्वर की शरण
शरण और शांति
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए भजन संहिता 46:1, सभोपदेशक 5:12, भजन संहिता 88:14 and भजन संहिता 121:5-6.
☀ सुबह का पल
परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक।
भजन संहिता 46:1
आज सुबह तुम्हारी ताकत काफी नहीं होगी।
यह सच है, बुधवार की सुबह का बोझ अक्सर सोमवार जैसा ही भारी लगता है। दफ्तर की डेडलाइन, घर की जिम्मेदारियाँ, वह चिंता जो रात भर मन में घूमती रही, सब कुछ फिर से सामने खड़ा है। और तुम सोचते हो कि अगर तुम थोड़ा और मजबूत होते, थोड़ा और संगठित होते, तो सब ठीक हो जाता।
लेकिन भजनकार कुछ और कहता है। वह अपनी ताकत का हिसाब नहीं देता, वह परमेश्वर की ओर इशारा करता है। 'परमेश्वर हमारी शरण और बल है,' वह लिखता है, 'संकट में सहज ही मिलनेवाला सहायक।' यह कोई दूर की सहायता नहीं है जो कभी बाद में मिलेगी। यह अभी मौजूद है, इस सुबह, इस पल में।
जब तुम दरवाज़े से बाहर निकलो, तो याद रखो कि तुम अकेले नहीं जा रहे। जो कठिन बातचीत होनी है, जो थकान अभी से महसूस हो रही है, उसके पीछे एक उपस्थिति है जो तुमसे पहले वहाँ पहुँच चुकी है। तुम्हें आज हीरो बनने की ज़रूरत नहीं, केवल उस पर टिके रहने की।
आज
एक कागज़ के छोटे टुकड़े पर लिखो, 'परमेश्वर मेरी शरण और मेरा बल है,' और उसे अपने फोन के पीछे, बैग में या मेज़ पर रख दो, ताकि दिन में जब भी नज़र पड़े तुम्हें याद आए कि तुम अकेले नहीं हो।
✦ दोपहर का पल
परिश्रम करनेवाला चाहे थोड़ा खाए, या बहुत, तो भी उसकी नींद सुखदाई होती है; परन्तु धनी के धन बढ़ने के कारण उसको नींद नहीं आती।
सभोपदेशक 5:12
किसी मज़दूर को देखो, जो दिन भर की मेहनत के बाद दीवार की छाया में बैठ जाता है। हाथों पर धूल और सीमेंट लगी है, टिफिन में साधारण रोटी और सब्ज़ी है, और खाने के कुछ ही मिनटों बाद उसकी आँखें बंद हो जाती हैं। वह गहरी नींद सो जाता है, बिना किसी चिंता के, क्योंकि शरीर ने काम किया और अब वह विश्राम माँग रहा है।
यह साधारण दृश्य एक गहरी सच्चाई कहता है। नींद की मिठास इस पर नहीं टिकी कि थाली में कितना है, बल्कि इस पर कि भीतर कितनी शांति है। जिसके पास बहुत है पर मन बेचैन है, वह रातों को करवटें बदलता रहता है। जिसके पास थोड़ा है पर हाथ खाली हैं, उसकी नींद गहरी और मीठी है।
अभी दोपहर का समय है, कंप्यूटर की स्क्रीन अभी भी चालू है, मन में अगली मीटिंग या अधूरा काम घूम रहा है। पर यह वक्त शरीर और मन को थोड़ा टिकने का है। भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि याद दिलाने के लिए भी है कि परमेश्वर ने आज की रोटी दी है, और वही आराम भी देता है।
संतोष किसी बड़े हिसाब का नतीजा नहीं, बल्कि भरोसे का फल है। जो परमेश्वर पर टिका है, वह कम में भी चैन से सोता है।
आज
आज दोपहर के भोजन के दौरान फोन को मेज़ के दूसरे कोने में रख दें और पूरे दस मिनट बिना स्क्रीन देखे, धीरे-धीरे खाना खाएं, हर घूंट और हर टुकड़े पर ध्यान देते हुए।
◐ दोपहर का पल
हे यहोवा, तू मुझ को क्यों छोड़ता है? तू अपना मुख मुझसे क्यों छिपाता रहता है?
भजन संहिता 88:14
हेमान एज्राही ने यह भजन लिखा और फिर उसे बीच में ही छोड़ दिया, कोई निष्कर्ष नहीं, कोई राहत की पंक्ति नहीं। पूरा भजन अंधकार में डूबकर समाप्त होता है, जैसे कोई बात अधूरी रह गई हो।
दोपहर का यह समय भी अक्सर ऐसा ही होता है। सुबह की ऊर्जा उतर चुकी है, शाम की राहत अभी दूर है, और बीच में सवाल उठते हैं जिनका जवाब हमारे पास नहीं। यह प्रश्न आराम से नहीं पूछा गया, यह चीख़कर पूछा गया है।
हम अक्सर सोचते हैं कि विश्वास का मतलब है हर सवाल का उत्तर तैयार रखना। लेकिन यह भजन दिखाता है कि परमेश्वर के सामने खुलकर, बिना लाग लपेट के, अपनी उलझन कहना भी प्रार्थना है। हेमान ने अपने दर्द को छुपाया नहीं, उसने उसे परमेश्वर के सामने रख दिया, भले ही उत्तर न मिला हो।
यह असहज करता है, क्योंकि हम चाहते हैं कि हर बात सुलझ जाए। पर परमेश्वर उन प्रार्थनाओं को भी सुनता है जिनका अंत अंधकार में होता है। वह मुँह नहीं फेरता, चाहे हमें ऐसा ही महसूस हो।
आज
एक कागज़ पर वह सवाल लिख दीजिए जो आज आपके मन में परमेश्वर के लिए है, बिना उसे सुंदर बनाए, बिना उसे नरम किए। फिर उसे एक बार ऊँची आवाज़ में पढ़िए और कागज़ को फाड़े या मिटाए बिना कुछ देर वैसे ही रहने दीजिए।
☾ संध्या का क्षण
यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है। न तो दिन को धूप से, और न रात को चाँदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
भजन संहिता 121:5-6
खिड़की के बाहर रोशनी धीरे-धीरे मंद हो रही है, और घर की आवाज़ें भी शांत होने लगी हैं।
बुधवार का दिन बीत गया, मीटिंगें, फोन कॉल्स, बच्चों का होमवर्क, या दफ्तर की भागदौड़, सब कुछ अपनी जगह छूट गया है। शरीर थका है, और मन में अब भी कुछ बातें घूम रही होंगी, जो अधूरी रह गईं।
भजनकार दिन और रात दोनों की बात करता है। धूप में चलते हुए भी, और अंधेरे में सोते हुए भी, यहोवा वही है जो साये की तरह पास रहता है। वह न दिन में पीछे हटता है, न रात में सो जाता है। जो कुछ दिन भर हम पर आया, चाहे थकान हो या चिंता, वह उसकी आँखों से छुपा नहीं रहा।
यह जानना कैसा चैन देता है कि सारा दिन संभालने की ज़िम्मेदारी अकेले हम पर नहीं थी। जो बचा दिया, जो निभाया, जो थोड़ी शक्ति फिर से मिली, वह उसी की छाया के कारण था।
अब रात आने वाली है, और साथ ही एक भरोसा भी, कि सूरज हमें झुलसाएगा नहीं और चाँद भी नुकसान नहीं पहुँचाएगा, क्योंकि रखवाला जाग रहा है।
आज
आज रात सोने से पहले खिड़की के पास खड़े होकर आकाश की ओर देखें और धीरे से कहें, धन्यवाद प्रभु, आज मुझे थामे रखने के लिए।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
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1परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक।
12परिश्रम करनेवाला चाहे थोड़ा खाए, या बहुत, तो भी उसकी नींद सुखदाई होती है; परन्तु धनी के धन बढ़ने के कारण उसको नींद नहीं आती।
14हे यहोवा, तू मुझ को क्यों छोड़ता है? तू अपना मुख मुझसे क्यों छिपाता रहता है?
5यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है।
6न तो दिन को धूप से, और न रात को चाँदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
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