1 इतिहास 18
पाठ
दाऊद चारों दिशाओं में युद्ध जीतता है: पश्चिम में पलिश्ती, पूर्व में मोआब, उत्तर में सोबा का हदादेजेर और दमिश्क के अरामी, दक्षिण में एदोम। हर जीत के साथ लूट आती है, सोने की ढालें, पीतल, चाँदी के पात्र, और अधीन हुई जातियों से नियमित भेंट। दाऊद यह सब अपने खजाने में नहीं डालता, बल्कि "यहोवा के लिये पवित्र करके" रखता है, और वही पीतल बाद में सुलैमान के मंदिर के हौद और खम्भे बनेगा। अध्याय का अंत युद्ध से नहीं, प्रशासन से होता है: दाऊद "अपनी सब प्रजा के साथ न्याय और धार्मिकता के काम करता था", और उसके अधिकारियों की सूची दी जाती है।
मर्म
एक वाक्य दो बार दोहराया जाता है, पद 6 और पद 13 में: "जहाँ-जहाँ दाऊद जाता, वहाँ-वहाँ यहोवा उसको जय दिलाता था।" यह अध्याय का धुरा है। जीत दाऊद की रणनीति का परिणाम नहीं, परमेश्वर का दान है। और जो चीज़ दान है, उस पर मालिकाना हक जताया नहीं जा सकता; उसे लौटाया जाता है। इसलिए पद 11 पद 6 का स्वाभाविक परिणाम है: जिसने जय दी, उसी की लूट। यहाँ शक्ति के बारे में एक गहरी बात कही जा रही है। शक्ति स्वयं में भ्रष्ट नहीं करती; अपनी शक्ति को अपनी उपलब्धि मान लेना भ्रष्ट करता है। दाऊद जीतता है और फिर घुटने टेकता है, इसी क्रम में इस्राएल का राजत्व टिकता है।
सूत्र
पद 4 का वह छोटा, हिंसक ब्यौरा आसानी से छूट जाता है: दाऊद रथवाले घोड़ों के घुटनों की नस कटवा देता है और केवल सौ बचाता है। हज़ार रथ उसके हाथ में थे; वह उन्हें अपनी सेना में जोड़ नहीं लेता। व्यवस्थाविवरण 17 में राजा के लिए यही शर्त थी: वह अपने लिए घोड़े न बढ़ाए, क्योंकि घोड़े और रथ वह सुरक्षा हैं जो परमेश्वर पर निर्भरता की जगह ले लेती है। दाऊद जान-बूझकर अपने आप को सीमित करता है। यहीं वह छाया दिखती है जो मसीह में पूरी होती है: वह राजा जो अपनी शक्ति का प्रयोग करने से इनकार करता है, जो गधे पर यरूशलेम में आता है, जो बारह सेनाओं को बुला सकता था और नहीं बुलाता। दाऊद का चाकू और मसीह का क्रूस एक ही तर्क पर चलते हैं।
दर्पण
आपके हाथ में भी कुछ आया है जिसे आप अपनी मेहनत का फल कहते हैं: पदोन्नति, वेतन, प्रभाव, वह प्रतिष्ठा जो दस साल की ईमानदारी से बनी। सवाल यह नहीं है कि आपने उसे कमाया या नहीं। सवाल यह है कि आप उसमें से क्या पवित्र करके अलग रखते हैं और क्या घुटने की नस काट देते हैं। वह अतिरिक्त पद जिसे आप ले सकते हैं पर लेना नहीं चाहिए, क्योंकि वह आपके परिवार को खा जाएगा। वह अधिकार जो आप एक कर्मचारी पर जता सकते हैं पर नहीं जताते। वह पैसा जो कानूनी रूप से आपका है और जिसे आप देते हैं, बिना बताए। शक्ति का ईसाई प्रयोग हमेशा दो हिस्सों में होता है: इस्तेमाल और स्वैच्छिक इनकार। जो केवल पहला करता है, वह जीतते-जीतते खो जाता है।
मुख्य पात्र
दाऊद यहाँ अपनी शक्ति के शिखर पर है, और यही सबसे खतरनाक जगह होती है। इतिहास की पुस्तक उसका मन नहीं खोलती, केवल उसके निर्णय दिखाती है, और वे काफ़ी बोलते हैं। वह विजय को उत्सव में नहीं, संरचना में बदलता है: चौकियाँ, अधिकारी, इतिहास लिखनेवाला, प्रधान याजक, मंत्री। पद 14 उसका असली चित्र है, "न्याय और धार्मिकता" वह भी "अपनी सब प्रजा के साथ", केवल अपने समर्थकों के साथ नहीं। यह वही आदमी है जो कुछ अध्याय बाद बतशेबा के मामले में गिरेगा, और वहाँ भी शक्ति ही औज़ार होगी। इसलिए यह अध्याय भोला नहीं है, यह गवाही है: वही व्यक्ति जो शक्ति को परमेश्वर के हाथ में लौटा सकता है, उसे अपने पेट के लिए भी इस्तेमाल कर सकता है। कोई भी इससे ऊपर नहीं।
अंतर्पाठ
व्यवस्थाविवरण 17 का राजा-नियम इस अध्याय के पीछे चुपचाप खड़ा है, और उसे जानते ही घोड़ों की नस काटना क्रूरता से बदलकर आज्ञाकारिता बन जाता है; दाऊद अपने आप पर वह लगाम लगाता है जो व्यवस्था ने माँगी थी। दूसरी ओर प्रकाशितवाक्य 21 में जातियों के राजा अपनी महिमा और सम्पत्ति नए यरूशलेम में लाते हैं। पद 10 में हमात का तोऊ अपने पुत्र को सोने-चाँदी के पात्रों के साथ भेजता है, और वे पात्र मंदिर के लिए अलग कर दिए जाते हैं। यह एक झलक है उस अंत की, जहाँ मानव इतिहास की सारी दौलत लूट नहीं रहती बल्कि भेंट बन जाती है। पीतल हौद बनता है, हथियार पूजा का सामान।
प्रश्न
फिर भी पद 5 सहज नहीं होता: बाईस हज़ार आदमी मारे गए, और वृत्तांत बिना ठहरे आगे बढ़ जाता है। हम इसे धो नहीं सकते। यह पाठ प्राचीन पूर्व की उस दुनिया में लिखा गया जहाँ राज्य युद्ध से बनते और मिटते थे, और परमेश्वर ने अपनी योजना उसी खूनी इतिहास के भीतर चलाई, उससे बाहर नहीं। मुझे यह असहज लगता है और मैं इसे असहज छोड़ता हूँ। पर एक बात कहना ज़रूरी है: यह अध्याय हमारे लिए अनुकरणीय आदर्श नहीं है, क्योंकि हमारा राजा तलवार से नहीं जीता। जो लोग इस पाठ को अपनी लड़ाइयों का समर्थन बनाते हैं, वे इसके अंत तक नहीं पढ़ते, जहाँ जीत लूट नहीं, भेंट बनती है, और जहाँ राजा की सबसे बड़ी उपलब्धि हिंसा नहीं, बल्कि सब प्रजा के साथ न्याय है।
चिंतन
आपके जीवन में वह "हज़ार रथ" क्या है, जो आप ले सकते हैं पर परमेश्वर के सामने लेना नहीं चाहिए?
इस साल जो कुछ आपके हाथ आया, उसमें से आपने क्या "यहोवा के लिये पवित्र करके" अलग रखा, और क्या चुपचाप अपने खजाने में डाल लिया?
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1 Chronicles 18 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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1 Chronicles 18 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
तोऊ दाऊद का मित्र नहीं था। वह बस इतना जानता था कि जिस हदादेजेर से वह बरसों लड़ता रहा, उसे दाऊद ने हरा दिया। इसलिए उसने अपने पुत्र को भेजा, "उसका कुशल क्षेम पूछने और उसे बधाई देने को।" दाऊद की एक लड़ाई किसी दूर बैठे अनजान राजा की शांति बन गई। तेरी वफादारी का फल तुझ पर आकर नहीं रुकता। परमेश्वर जो तुझमें कर रहा है, उसकी छाया किसी ऐसे पर भी पड़ेगी जिसका नाम तू जानता तक नहीं।
जीत के बाद दाऊद के हाथ में एक हजार रथ आ गए, पर उसने घोड़ों की नसें कटवा दीं और सिर्फ सौ रथ अपने पास रखे। जो ताकत उसे सबसे सुरक्षित लगती, उसी को उसने जानबूझकर घटा दिया, क्योंकि वह जानता था कि भरोसा रथों पर नहीं, यहोवा पर है। तेरे जीवन में कौन सी चीज़ है जो तुझे बचाती हुई लगती है, पर चुपचाप परमेश्वर की जगह ले रही है?
पिता, जिनके नाम सूची में दर्ज हैं, वे न राजा थे न योद्धा, फिर भी उनका काम तेरे लिए मायने रखता था। मुझे भी वहीं वफ़ादार रहना सिखा जहाँ तूने मुझे रखा है, चाहे कोई तालियाँ न बजाए। तेरी नज़र में मेरा छोटा काम भी छोटा नहीं है, यही मेरा भरोसा है।
जब हमात के राजा तोऊ ने सुना, कि दाऊद ने सोबा के राजा हदादेजेर की सारी सेना को जीत लिया है।" तोऊ सालों से हदादेजेर से लड़ता आया था। जो जीत दाऊद ने पाई, उसकी राहत तोऊ तक पहुँची, जो युद्ध के मैदान में था ही नहीं। परमेश्वर एक जगह जो करता है, उसकी खबर दूर बैठे थके हुए दिलों तक पहुँचती है। तेरी लड़ाई में मिली जीत किसी और की साँस बन सकती है।
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