2 राजाओं 23
पाठ
विनाश के बीच राजा अचानक ठहर जाता है और पूछता है: "जो खम्भा मुझे दिखाई पड़ता है, वह क्या है?" बेतेल की वेदी टूट चुकी है, हड्डियाँ जलाई जा चुकी हैं, और तब योशिय्याह एक कब्र के सामने रुककर कहता है, "उसको छोड़ दो।" यही अध्याय का स्वर है। मन्दिर में मिली वाचा की पुस्तक पढ़कर सुनाई जाती है, राजा खम्भे के पास खड़ा होकर पूरे मन और पूरे प्राण से वाचा बाँधता है, और सारी प्रजा उसमें सम्भागी होती है। फिर बाल, अशेरा, सूर्य के रथ, तोपेत, ओझे, गृहदेवता, सब कुछ तोड़ा, फूँका, पीसा और किद्रोन में फेंका जाता है। न्यायियों के दिनों से ऐसा फसह नहीं मनाया गया था। और फिर एक छोटा सा वाक्य आता है जो सब कुछ हिला देता है: "तो भी यहोवा का भड़का हुआ बड़ा कोप शान्त न हुआ।"
मर्म
इस अध्याय का सबसे कठिन शब्द "तो भी" है। हम सुधार को सौदे की तरह सोचते हैं: तुम मूर्तियाँ तोड़ो, परमेश्वर क्रोध रोक लें। योशिय्याह ने जितना किसी राजा ने नहीं किया उतना किया, और पाठ कहता है कि उस जैसा न पहले कोई था न बाद में। फिर भी न्याय टलता नहीं। यह हमें परमेश्वर के विषय में कुछ ऐसा बताता है जिसे पचाना मुश्किल है: वे हमारे प्रदर्शन से खरीदे नहीं जाते। उनकी पवित्रता कोई तराजू नहीं जिसमें अच्छे कामों का वज़न बुरे कामों को ढँक दे। और साथ ही, इसी अध्याय में वे उस आदमी की हड्डियों की रक्षा करते हैं जिसने सैकड़ों साल पहले बेतेल के विषय पुकारकर कहा था। परमेश्वर भूलते नहीं, न पाप को, न वफ़ादारी को।
मुख्य धारा
ध्यान दीजिए कि सुधार कैसे शुरू होता है: पुस्तक मिलती है, पढ़ी जाती है, सुनी जाती है। वचन पहले, कार्य बाद में। यही क्रम पूरे बाइबल में चलता है, और यही कारण है कि योशिय्याह का सुधार हमें यीशु मसीह की ओर मोड़ता है। क्योंकि यहाँ एक राजा है जो पूरे मन से फिरता है, और फिर भी देश को नहीं बचा सकता। उसका फसह शानदार है, पर अस्थायी; उसकी मृत्यु मगिद्दो में होती है और उसका बेटा तीन महीने में बन्दी बन जाता है। इस्राएल को एक ऐसे राजा की ज़रूरत थी जिसकी आज्ञाकारिता दूसरों के लिए भी गिनी जाए, और एक ऐसे फसह की, जो हर साल दोहराया न जाना पड़े। योशिय्याह उस कमी को इतनी स्पष्टता से दिखाता है कि वह स्वयं एक प्रश्न बन जाता है।
दर्पण
हिब्रू में जो क्रिया बार-बार आती है, "अशुद्ध कर दिया" (टिम्मे), उसका अर्थ है किसी चीज़ को इस्तेमाल के लायक न छोड़ना। योशिय्याह केवल मूर्तियाँ नहीं हटाता; वह उन स्थानों को ऐसा कर देता है कि लौटने का मन न करे। यह हमारी आधी-अधूरी तौबा पर उँगली रखता है। हम आमतौर पर मूर्ति हटाते हैं पर वेदी बची रहने देते हैं: वह ऐप जो हटाई नहीं, बस फ़ोल्डर में छिपा दी; वह रिश्ता जिसे खत्म कहा पर नंबर नहीं मिटाया; वह खर्च करने की आदत जिसे संयम कहकर पाल रखा है। हम विकल्प खुला रखना चाहते हैं। योशिय्याह विकल्प जलाकर किद्रोन में फेंक देता है।
आज एक काम कीजिए: जो एक चीज़ आपको बार-बार उसी गिरावट पर लौटाती है, उसे ढूँढ़कर सचमुच हटा दीजिए, आज, अगले दस मिनट में, ताकि वापसी का रास्ता आसान न रहे।
शास्त्र-संवाद
बेतेल की वह कब्र 1 राजा 13 की ओर इशारा करती है, जहाँ एक अनजान "परमेश्वर का भक्त" यारोबाम की वेदी के सामने पुकारकर बोला था और फिर अपनी ही अनाज्ञाकारिता में मर गया। उसका नाम हमें मालूम नहीं, पर उसका वचन तीन सौ साल बाद पूरा होता है, और योशिय्याह उसकी हड्डियों को छूने नहीं देता। वचन देर करता है, पर गिरता नहीं। दूसरी ओर यिर्मयाह, जो ठीक इसी समय यरूशलेम में बोल रहा था, यहूदा के विषय कहता है कि वह केवल दिखावे के लिए, आधे मन से फिरी। यही दो आवाज़ें इस अध्याय के दोनों सिरे हैं: राजा का पूरा मन, और प्रजा का आधा मन।
मुख्य पात्र
योशिय्याह आठ साल की उम्र में सिंहासन पर बैठा था और उसके पिता-दादा वही थे जिन्होंने तोपेत और सूर्य के रथ बनवाए थे। वह अपने ही घराने की विरासत तोड़ रहा है, और यह काम अकेलेपन का काम है। उसकी गति में एक तरह का उन्माद है: फूँकना, पीसना, बुकनी करना, कब्रों पर फेंकना। पर उसी व्यक्ति में वह ठहराव भी है जो एक अनजान नबी की कब्र के सामने रुककर पूछता है और उसे छोड़ देता है। यह आदमी क्रोधी धर्म-उत्साही नहीं; वह सुना हुआ आदमी है। और आखिर में वह मगिद्दो में, बिना किसी भविष्यवाणी, बिना किसी व्याख्या के, मारा जाता है। पाठ उसकी मृत्यु का कोई कारण नहीं बताता। वह चुप्पी ही उसके जीवन की सबसे बड़ी बात कह देती है: उसने परमेश्वर की सेवा इनाम के बदले नहीं की।
कठिन प्रश्न
तो क्या उसका सुधार बेकार गया? यह प्रश्न टाला नहीं जा सकता। देश निर्वासन में गया, मन्दिर गिरा, उसका बेटा मिस्र में मरा। अगर आज्ञाकारिता परिणाम की गारंटी नहीं, तो उसका मूल्य क्या है? पाठ कोई सांत्वना नहीं देता, पर एक संकेत छोड़ता है: परमेश्वर की दृष्टि में योशिय्याह का फसह गिना गया, न्यायियों के दिनों से लेकर अब तक सबसे बड़ा। उसकी वफ़ादारी राष्ट्र का भविष्य नहीं बदल सकी, पर वह परमेश्वर के सामने व्यर्थ नहीं थी। हो सकता है हमें यहीं रुकना पड़े, इस असुविधा के साथ कि हम अपने विश्वासयोग्य जीवन का फल देख ही न पाएँ। बेतेल की वह कब्र सैकड़ों साल चुप पड़ी रही। फिर एक दिन एक राजा रुका और पूछा: यह क्या है?
चिंतन के प्रश्न
आपके जीवन में कौन सी वेदी खड़ी है जिसे आपने तोड़ा नहीं, केवल इस्तेमाल करना बंद किया है, और आप उसे खड़ी क्यों रहने देते हैं?
अगर आपकी आज्ञाकारिता का कोई दिखाई देने वाला फल आपके जीवनकाल में न मिले, तो क्या वह आपके लिए फिर भी पर्याप्त कारण होगी?
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2 Kings 23 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
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2 राजाओं 23 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
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2 Kings 23 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
योशिय्याह ने उन पुजारियों को हटाया "जिन्हें यहूदा के राजाओं ने ऊँचे स्थानों पर धूप जलाने के लिये ठहराया था।" ध्यान दे, ये नियुक्त थे, मान्यता प्राप्त थे, पीढ़ियों से चले आ रहे थे। गलत चीज़ जब पुरानी हो जाए तो वह सही नहीं हो जाती, बस सामान्य लगने लगती है। तेरे जीवन में कौन सी आदत है जिसे तू इसलिये नहीं छोड़ता क्योंकि वह हमेशा से ऐसी ही रही है?
योशिय्याह ने वह सब किया जो कोई कर सकता था। मूरतें तोड़ीं, वेदियाँ ढाईं, पूरे मन से लौटा। फिर भी लिखा है, "तो भी यहोवा का भड़का हुआ बड़ा क्रोध शान्त न हुआ।" मनश्शे के पापों की गूँज एक पीढ़ी के बाद भी बाकी थी। तेरे आज के चुनाव भी इतने छोटे नहीं जितने तुझे लगते हैं। कोई उन्हें तेरे बाद भी ढोएगा।
राजा खुद पढ़ता है। याजक नहीं, नबी नहीं, योशिय्याह स्वयं। और सुनने वालों में "छोटे बड़े सब लोग" थे, कोई छूटा नहीं।
सोचिए, वह पुस्तक परमेश्वर के भवन में ही पड़ी खोई रही। जो सबसे पवित्र जगह थी, वहीं वचन धूल में दबा था।
कहीं आपकी बाइबल भी घर में तो है, पर खुली नहीं?
योशिय्याह ने तोपेत को सिर्फ बंद नहीं किया, उसने उसे अशुद्ध कर दिया, "ताकि कोई अपने बेटे या बेटी को मोलेक के लिये आग में होम करके न चढ़ाए।" वह जगह फिर कभी इस्तेमाल के लायक न रहे। तू भी जिस पाप को बार बार छोड़कर लौट आता है, क्या तूने उसका रास्ता सचमुच तोड़ा है, या सिर्फ दरवाज़ा भेड़ दिया है?
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