बाइबल व्याख्या

2 तीमुथियुस 4:18

बाइबल
यह वचन Kingdom Grace Fellowship द्वारा समर्पित है

पाठ

पौलुस, जंजीरों में बंधा हुआ, अपनी अंतिम चिट्ठी के अंत में एक ऐसा वाक्य लिखता है जो किसी बरी हुए आदमी के मुँह से नहीं, बल्कि मौत की प्रतीक्षा करते आदमी के मुँह से निकलता है: "और प्रभु मुझे हर एक बुरे काम से छुड़ाएगा, और अपने स्वर्गीय राज्य में उद्धार करके पहुँचाएगा।" अभी-अभी उसने बताया था कि पहली पेशी में सब उसे छोड़कर चले गए, पर प्रभु उसके साथ खड़े रहे और उसे "सिंह के मुँह से" छुड़ाया गया। अब वह आगे देखता है। वह यह नहीं कहता कि रोम का न्यायालय उसे छोड़ देगा; वह कहता है कि प्रभु उसे पहुँचाकर ही छोड़ेंगे। और फिर, जैसे वाक्य अपने आप भजन बन जाता हो, वह जोड़ता है: "उसी की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।"

मूल बात

ध्यान दीजिए कि पौलुस किस चीज़ से छुटकारे की आशा रखता है। वह यह नहीं कहता कि प्रभु मुझे हर बुरी परिस्थिति से, हर तलवार से, हर अकेलेपन से बचाएँगे; वह पहले ही लिख चुका है कि वह अर्घ के समान उण्डेला जा रहा है। वह कहता है, "हर एक बुरे काम से" छुड़ाएगा। यानी असली ख़तरा वह नहीं जो जल्लाद के हाथ में है, बल्कि वह जो उसके अपने भीतर दुबका बैठा है: कि दबाव में आकर वह मुकर जाए, कि देमास की तरह इस संसार को प्रिय जान ले, कि अंत के कुछ कदम पहले विश्वास की रखवाली छोड़ दे। उद्धार यहाँ परिस्थिति का बदलना नहीं, बल्कि मनुष्य का अंत तक थामा जाना है। और इसकी गारंटी पौलुस के संकल्प में नहीं, प्रभु की वफ़ादारी में है, इसलिए वाक्य का अंत प्रार्थना में नहीं, स्तुति में होता है।

जोड़ने वाला सूत्र

"स्वर्गीय राज्य" शब्द इस चिट्ठी में अचानक नहीं आया। अध्याय की पहली ही आयत में पौलुस तीमुथियुस को "उसके प्रगट होने, और राज्य को सुधि दिलाकर" आदेश देता है, और आयत 8 में वह धार्मिकता के मुकुट की बात करता है जो "उस दिन" मिलेगा। यानी पूरा अध्याय एक ही धुरी पर घूमता है: मसीह लौटेंगे और उनका राज्य सचमुच का राज्य है। पौलुस के लिए यह कोई काव्यात्मक सांत्वना नहीं, बल्कि वही सिलसिला है जो पुराने नियम से चला आ रहा है, जहाँ परमेश्वर अपने लोगों को मिस्र से, बाबुल से, सिंहों की माँद से निकालकर अपने पास पहुँचाते हैं। फ़र्क़ यह है कि अब छुड़ाने वाला स्वयं मर चुका और जी उठा है, इसलिए कब्र भी मंज़िल तक पहुँचने के रास्ते का एक पड़ाव भर रह गई है।

आईना

आप भी शायद किसी ख़तरे से बचने की प्रार्थना कर रहे हैं: जाँच की रिपोर्ट, नौकरी की चिट्ठी, बेटे का फ़ोन जो नहीं आता। पौलुस आपसे यह नहीं कहता कि वह ख़तरा टल जाएगा। वह कुछ और कहता है, और वह ज़्यादा चुभता है: असली डर यह होना चाहिए कि दबाव आपके भीतर से क्या निकाल लाएगा। जब पैसा तंग होता है, तो आप कहाँ थोड़ी-सी बेईमानी को "व्यवहारिकता" कह देते हैं? जब कोई साथ नहीं देता, जैसे पौलुस की पहली पेशी में कोई नहीं खड़ा हुआ, तो आप किस सच को चुपचाप निगल जाते हैं? देमास किसी बुरे आदमी का नाम नहीं; वह एक साथी का नाम है जिसने संसार को थोड़ा ज़्यादा प्रिय जान लिया। आज, काम शुरू करने से पहले, काग़ज़ पर वह एक जगह लिखिए जहाँ आप इस हफ़्ते फिसलने के सबसे क़रीब हैं, और उसी काग़ज़ पर ऊपर लिख दीजिए: "प्रभु मुझे हर एक बुरे काम से छुड़ाएगा।" फिर उसे ज़ोर से पढ़िए।

मुख्य पात्र

इस आयत का मुख्य पात्र पौलुस नहीं, प्रभु हैं, और यह बात स्वयं वाक्य की बनावट से दिखती है: छुड़ाने वाले, पहुँचाने वाले, महिमा पाने वाले वे हैं; पौलुस केवल कर्म है, वह जिसे ले जाया जाता है। जो आदमी कभी कलीसियाओं का संस्थापक था, अब कोट और चर्मपत्र मँगवाता है और सर्दी से पहले किसी के आने की राह देखता है। उसकी शक्ति चुक गई है, उसका नेटवर्क बिखर गया है, पर उसका भरोसा सिकुड़ा नहीं। यही विश्वास का पक्का रूप है: जब आप अपने बारे में भ्रम खो चुके हों और फिर भी परमेश्वर के बारे में भ्रम न पालें। और इसीलिए वह आदमी, जिसके पास खोने को कुछ नहीं बचा, वाक्य के अंत में स्तुति गाने लगता है।

कठिन प्रश्न

तो क्या परमेश्वर सचमुच हर बुरे काम से छुड़ाते हैं? क्योंकि पौलुस ख़ुद लिखता है कि सिकन्दर ने उससे बहुत बुराइयाँ कीं और सब ने उसे छोड़ दिया। बुराई उस तक पहुँची, उसे चोट लगी, और कुछ महीनों बाद उसका सिर कलम हुआ। वचन यह नहीं कहता कि बुराई आप तक नहीं पहुँचेगी; यह कहता है कि बुराई आपको पकड़कर रख नहीं पाएगी। यह फ़र्क़ छोटा लगता है, पर जिसने किसी अपने को खोया है वह जानता है कि यह कितना बड़ा है। और ईमानदारी से: इस वादे की जाँच इसी जीवन में पूरी नहीं होती। पौलुस भी इसे "उस दिन" पर टिकाता है। जो इसे अभी के आराम में बदलना चाहेगा, उसे यह वाक्य झूठा लगेगा।

पहले पाठक

तीमुथियुस इफिसुस में था, एक जवान अगुवा, ऐसी कलीसिया में जहाँ लोग "खरा उपदेश न सह सकेंगे" और अपनी पसंद के उपदेशक बटोर लेंगे। उसके हाथ में यह चिट्ठी पहुँची तो उसने क़ानूनी दस्तावेज़ नहीं पढ़ा, अपने आत्मिक पिता की संभवतः आख़िरी बात पढ़ी। रोम का राज्य उसके चारों ओर था, पत्थर में, सिक्कों में, सैनिकों में। और इसी पत्र में उसे बताया जा रहा था कि असली राज्य कहीं और है और उसका राजा एक क़ैदी के साथ खड़ा रहता है। तीमुथियुस के लिए "स्वर्गीय राज्य" पलायन नहीं था, बल्कि यह साहस था कि सम्राट के शहर में उस दूसरे राजा का नाम लेकर जिया जाए।

चिंतन

आप किस बात से ज़्यादा डरते हैं: इस बात से कि परिस्थिति आपको तोड़ देगी, या इस बात से कि वह आपके भीतर से क्या बाहर ले आएगी?

अगर आपका छुटकारा इस जीवन में नहीं, "उस दिन" पूरा होगा, तो आज आपके निर्णयों में इससे ठीक-ठीक क्या बदलेगा?

2 Timothy में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of 2 Timothy

John Stott

Paul's final letter: guarding the gospel and finishing the race.

Paul For Everyone: The Pastoral Letters

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Timothy and Titus in Wright's accessible daily format.

The Pastoral Epistles: An Introduction and Commentary

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2 Timothy 4:18 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

2 तीमुथियुस 4:18 का क्या अर्थ है?
पौलुस, जंजीरों में बंधा हुआ, अपनी अंतिम चिट्ठी के अंत में एक ऐसा वाक्य लिखता है जो किसी बरी हुए आदमी के मुँह से नहीं, बल्कि मौत की प्रतीक्षा करते आदमी के मुँह से निकलता है: "और प्रभु मुझे हर एक बुरे काम से छुड़ाएगा, और अपने स्वर्गीय राज्य में उद्धार करके पहुँचाएगा।" अभी-अभी उसने बताया था कि पहली पेशी में सब उसे छोड़कर चले गए, पर प्रभु उसके साथ खड़े रहे और उसे "सिंह के मुँह से" छुड़ाया गया। अब वह आगे देखता है। वह यह नहीं कहता कि रोम का न्यायालय उसे छोड़ देगा; वह कहता है कि प्रभु उसे पहुँचाकर ही छोड़ेंगे। और फिर, जैसे वाक्य अपने आप भजन बन जाता हो, वह जोड़ता है: "उसी की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।"
2 तीमुथियुस 4:18 किस विषय में है?
"स्वर्गीय राज्य" शब्द इस चिट्ठी में अचानक नहीं आया। अध्याय की पहली ही आयत में पौलुस तीमुथियुस को "उसके प्रगट होने, और राज्य को सुधि दिलाकर" आदेश देता है, और आयत 8 में वह धार्मिकता के मुकुट की बात करता है जो "उस दिन" मिलेगा। यानी पूरा अध्याय एक ही धुरी पर घूमता है: मसीह लौटेंगे और उनका राज्य सचमुच का राज्य है। पौलुस के लिए यह कोई काव्यात्मक सांत्वना नहीं, बल्कि वही सिलसिला है जो पुराने नियम से चला आ रहा है, जहाँ परमेश्वर अपने लोगों को मिस्र से, बाबुल से, सिंहों की माँद से निकालकर अपने पास पहुँचाते हैं। फ़र्क़ यह है कि अब छुड़ाने वाला स्वयं मर चुका और जी उठा है, इसलिए कब्र भी मंज़िल तक पहुँचने के रास्ते का एक पड़ाव भर रह गई है।
2 तीमुथियुस 4:18 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इस आयत का मुख्य पात्र पौलुस नहीं, प्रभु हैं, और यह बात स्वयं वाक्य की बनावट से दिखती है: छुड़ाने वाले, पहुँचाने वाले, महिमा पाने वाले वे हैं; पौलुस केवल कर्म है, वह जिसे ले जाया जाता है। जो आदमी कभी कलीसियाओं का संस्थापक था, अब कोट और चर्मपत्र मँगवाता है और सर्दी से पहले किसी के आने की राह देखता है। उसकी शक्ति चुक गई है, उसका नेटवर्क बिखर गया है, पर उसका भरोसा सिकुड़ा नहीं। यही विश्वास का पक्का रूप है: जब आप अपने बारे में भ्रम खो चुके हों और फिर भी परमेश्वर के बारे में भ्रम न पालें। और इसीलिए वह आदमी, जिसके पास खोने को कुछ नहीं बचा, वाक्य के अंत में स्तुति गाने लगता है।
2 तीमुथियुस 4:18 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
तीमुथियुस इफिसुस में था, एक जवान अगुवा, ऐसी कलीसिया में जहाँ लोग "खरा उपदेश न सह सकेंगे" और अपनी पसंद के उपदेशक बटोर लेंगे। उसके हाथ में यह चिट्ठी पहुँची तो उसने क़ानूनी दस्तावेज़ नहीं पढ़ा, अपने आत्मिक पिता की संभवतः आख़िरी बात पढ़ी। रोम का राज्य उसके चारों ओर था, पत्थर में, सिक्कों में, सैनिकों में। और इसी पत्र में उसे बताया जा रहा था कि असली राज्य कहीं और है और उसका राजा एक क़ैदी के साथ खड़ा रहता है। तीमुथियुस के लिए "स्वर्गीय राज्य" पलायन नहीं था, बल्कि यह साहस था कि सम्राट के शहर में उस दूसरे राजा का नाम लेकर जिया जाए।
2 तीमुथियुस 4:18 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
अगर आपका छुटकारा इस जीवन में नहीं, "उस दिन" पूरा होगा, तो आज आपके निर्णयों में इससे ठीक-ठीक क्या बदलेगा?
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2 Timothy 4 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

वे अपने कान सत्य से फेर लेंगे और कहानियों पर लगाएँगे।" पौलुस यहाँ कान की बात करता है, मन की नहीं। सच्चाई पहले सुनने से छूटती है, फिर जीने से। आज खुद से पूछ: मैं किसे सुनना चुनता हूँ? उसे जो मेरे दिल को सहलाता है, या उसे जो मुझे बदलता है? जो बात चुभती है, कभी वही बचाती है।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 21

पिता, धन्यवाद कि पौलुस कैदखाने में भी अकेला नहीं था। यूबूलुस, पूदेंस, लीनुस और क्लौदिया जैसे भाई बहनों का नमस्कार उस तक पहुँचा। धन्यवाद उन विश्वासियों के लिए जो हमारी सर्दियों में हमें याद करते हैं, और उस बुलाहट के लिए कि हम भी एक दूसरे के पास जाड़े से पहले पहुँचें।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

पौलुस जंजीरों में है, अंत पास है, और आखिरी सांसों में वह तीमुथियुस से कहता है, "तू वचन का प्रचार कर; समय और असमय तैयार रह।" सुविधा का इंतज़ार मत कर। और ध्यान दे, डाँटने के साथ वह "सब प्रकार की सहनशीलता" जोड़ता है। सच बोलना आसान है, सच बोलकर उस इंसान के साथ धीरज से ठहरे रहना कठिन। तू किसके लिए ठहरा हुआ है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

पौलुस मृत्यु के करीब है, जंजीरों में है, और उसके मन में क्या है? नाम। "प्रिस्का और अक्विला को, और उनेसिफुरुस के घराने को नमस्कार।" उनेसिफुरुस ने रोम में उसे ढूंढ़कर ताज़गी दी थी, अब पौलुस उसके घर वालों को याद कर रहा है। अंतिम घड़ी में भी रिश्ते नहीं भूले। तुम्हारे मन में आज किसका नाम है, जिसे तुमने कब से याद नहीं किया?

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