2 तीमुथियुस 4:14
पाठ
पौलुस अपनी आखिरी चिट्ठी के आखिरी हिस्से में, कपड़ों और पुस्तकों और नमस्कारों के बीच, अचानक एक नाम रख देता है: "सिकन्दर ठठेरे ने मुझसे बहुत बुराइयाँ की हैं।" कोई विस्तार नहीं, कोई कहानी नहीं, कोई सफाई नहीं। बस एक नाम, एक पेशा, और एक घाव जो अब तक हरा है। और फिर, उतनी ही संक्षिप्तता से, वाक्य का दूसरा आधा हिस्सा: "प्रभु उसे उसके कामों के अनुसार बदला देगा।" यह न शाप है, न प्रार्थना की चीख; यह एक सौंपना है। पौलुस अपने अन्तिम दिनों में उस आदमी का नाम लिखता है जिसने उसे चोट पहुँचाई, और फिर उस नाम को अपने हाथ से निकालकर परमेश्वर के हाथ में रख देता है।
मूल बात
ध्यान दीजिए कि पौलुस क्या नहीं कहता। वह यह नहीं कहता कि कुछ हुआ ही नहीं। वह यह भी नहीं कहता कि वह सिकन्दर से बदला लेगा। वह दोनों रास्ते छोड़ देता है: न इनकार, न प्रतिशोध। बीच में जो बचता है, वही इस वाक्य का धर्मशास्त्र है। परमेश्वर न्यायी हैं, और इसलिए मुझे न्यायी बनने की ज़रूरत नहीं। यह सस्ती बात नहीं है; यह एक कैदी की बात है जिसके पास वैसे भी बदला लेने की कोई ताकत नहीं बची। पर शायद इसीलिए यह सच्ची है। घाव को परमेश्वर के हाथ में रखने का मतलब यह नहीं कि घाव छोटा हो गया; इसका मतलब है कि अब उसे ढोने वाला कोई और है। और यहाँ एक असहज सवाल भी छिपा है: क्या हम सचमुच चाहते हैं कि परमेश्वर "कामों के अनुसार" बदला दें, या हम चाहते हैं कि वे केवल दूसरों के कामों के अनुसार दें?
सूत्र
इसी अध्याय की शुरुआत में पौलुस उसी प्रभु की बात करता है "जो जीवितों और मरे हुओं का न्याय करेगा", और आठवें पद में वही प्रभु उसे "धार्मिकता का वह मुकुट" देने वाला है। यानी जो हाथ मुकुट पकड़े है, वही हाथ हिसाब भी माँगेगा। यह कोई छोटी बात नहीं। पूरे बाइबल में परमेश्वर का न्याय और परमेश्वर की दया दो अलग विभाग नहीं हैं; वे एक ही क्रूस पर मिलते हैं, जहाँ मसीह ने गाली खाकर गाली नहीं लौटाई, बल्कि अपने आप को उसी न्यायी के हाथ में सौंप दिया। पौलुस यहाँ कोई नई नैतिकता नहीं गढ़ रहा; वह अपने प्रभु की चाल की नकल कर रहा है। सौंपना, चुप रहना, और आगे बढ़ना। यह कमज़ोरी नहीं, यह विश्वास का सबसे सख़्त रूप है।
दर्पण
आपके पास भी एक नाम है। शायद वह साथी जिसने दफ़्तर में आपकी बात तोड़-मरोड़कर ऊपर पहुँचाई। शायद वह रिश्तेदार जिसने ज़मीन के काग़ज़ों में चालाकी की और आज भी शादी-ब्याह में मुस्कुराकर मिलता है। शायद कलीसिया का कोई भाई जिसने आपके बारे में कुछ कहा और आपने सुना कि लोग हँसे। हम दो में से एक काम करते हैं: या तो कहते हैं "कोई बात नहीं" जबकि बात है, या फिर मन में बार-बार वह अदालत लगाते हैं जिसमें हम ही जज हैं और फ़ैसला हमेशा एक ही आता है। पौलुस तीसरा रास्ता दिखाता है, और वह रास्ता ज़ुबान से होकर जाता है, न कि दबाने से।
आज, दस मिनट के भीतर: एक काग़ज़ पर उस व्यक्ति का नाम लिखिए, और ज़ोर से कहिए, "प्रभु, इसका हिसाब आपका है, मेरा नहीं।" फिर वह काग़ज़ फाड़कर फेंक दीजिए।
बारीकी
"ठठेरे।" पौलुस पेशा क्यों लिखता है? सबसे सीधा कारण यह कि सिकन्दर नाम आम था, और तीमुथियुस को पहचानना था कि किससे सावधान रहना है। पर इस छोटे से शब्द में एक पूरी दुनिया है। ठठेरा वह आदमी है जो धातु को आग में तपाकर हथौड़े से पीटता है, जिसकी बाँहें मज़बूत हैं, जिसकी दुकान बाज़ार में है, जिसकी एक बिरादरी है। इफिसुस जैसे शहरों में धातु का काम करने वाले मन्दिर की मूर्तियों और स्मृति-चिह्नों से जुड़े थे; सुसमाचार उनके धन्धे पर सीधी चोट था। और ध्यान दीजिए, पौलुस नाम मिटाता नहीं। क्षमा का मतलब स्मृति-लोप नहीं होता। वह नाम लिखता है, पेशा लिखता है, और फिर दोनों को परमेश्वर के सामने रख देता है।
संदर्भ
यह रोम है, दूसरी क़ैद, और अन्त पास है। पौलुस लिख चुका है कि वह "अर्घ के समान उण्डेला" जा रहा है। जाड़ा आ रहा है, इसीलिए वह बागा माँगता है और तीमुथियुस से कहता है कि जाड़े से पहले आ जाए। अदालत में उसकी पहली पेशी हो चुकी है, और वहाँ, उसके अपने शब्दों में, "किसी ने भी मेरा साथ नहीं दिया।" रोमी अदालत में गवाह और मुख़बिर बड़ी भूमिका निभाते थे; एक विरोधी की गवाही आदमी की जान ले सकती थी। बहुत सम्भव है कि सिकन्दर की "बुराइयाँ" महज़ बहस नहीं, बल्कि अदालत में की गई मुख़बिरी थीं। यानी यह वाक्य किसी सुरक्षित आदमी का उपदेश नहीं है। यह उस आदमी की बात है जिसकी गर्दन पर तलवार है और जो फिर भी हिसाब अपने हाथ में नहीं लेता।
अन्य वचनों की गूँज
हिन्दी बाइबल का हाशिया यहाँ दो जगहें दिखाता है, और दोनों काम की हैं। भजन 28 में दाऊद परमेश्वर से माँगता है कि वे दुष्टों को उनके कामों के अनुसार बदला दें; यानी पौलुस की भाषा भजनों की प्रार्थना-भाषा से उधार ली गई है, उस परम्परा से जहाँ क्रोध दबाया नहीं जाता बल्कि ऊपर उठाकर परमेश्वर के सामने रखा जाता है। और रोमियों 12 में पौलुस खुद लिख चुका है कि बदला लेना परमेश्वर का काम है, हमारा नहीं। इन दोनों को साथ रखिए तो तस्वीर साफ़ होती है: भजन कहता है, अपनी पीड़ा छिपाओ मत; रोमियों कहता है, उसे अपने हाथ में मत रखो। चौथे अध्याय का यह छोटा-सा पद उन दोनों को एक साँस में जोड़ देता है।
मनन
वह नाम जो आज भी आपके मन में अदालत लगाता है, क्या आपने उसे कभी परमेश्वर के सामने ज़ोर से कहा है, या आप उसे केवल भीतर ही भीतर तौलते रहते हैं?
अगर परमेश्वर सचमुच "कामों के अनुसार" बदला देते हैं, तो आप अपने लिए न्याय चाहते हैं या अनुग्रह, और क्या आप दूसरे के लिए भी वही चाहने को तैयार हैं?
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2 Timothy 4:14 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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2 तीमुथियुस 4:14 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
2 तीमुथियुस 4:14 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
2 Timothy 4 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पौलुस जंजीरों में है, अंत पास है, और आखिरी सांसों में वह तीमुथियुस से कहता है, "तू वचन का प्रचार कर; समय और असमय तैयार रह।" सुविधा का इंतज़ार मत कर। और ध्यान दे, डाँटने के साथ वह "सब प्रकार की सहनशीलता" जोड़ता है। सच बोलना आसान है, सच बोलकर उस इंसान के साथ धीरज से ठहरे रहना कठिन। तू किसके लिए ठहरा हुआ है?
पौलुस मृत्यु के करीब है, जंजीरों में है, और उसके मन में क्या है? नाम। "प्रिस्का और अक्विला को, और उनेसिफुरुस के घराने को नमस्कार।" उनेसिफुरुस ने रोम में उसे ढूंढ़कर ताज़गी दी थी, अब पौलुस उसके घर वालों को याद कर रहा है। अंतिम घड़ी में भी रिश्ते नहीं भूले। तुम्हारे मन में आज किसका नाम है, जिसे तुमने कब से याद नहीं किया?
पौलुस लिखता है, "क्योंकि ऐसा समय आएगा, जब लोग खरा उपदेश न सह सकेंगे पर कानों की खुजली के कारण अपनी अभिलाषाओं के अनुसार अपने लिये बहुत सारे उपदेशक बटोर लेंगे।" ध्यान दे, वे शिक्षकों को ठुकराते नहीं, बल्कि बटोरते हैं। खतरा सुनना छोड़ देना नहीं, बल्कि वही सुनना है जो मन को गुदगुदाए। आज खुद से पूछ: मैं वह सुनता हूँ जो मुझे अच्छा लगता है, या वह जो मुझे बदलता है?
पौलुस, जिसके हाथों से परमेश्वर ने अनोखे सामर्थ्य के काम किए थे, लिखता है: "त्रुफिमुस को मैंने मिलेतुस में बीमार छोड़ा।" चंगाई हर बार नहीं आई। वह अपने साथी को बीमार छोड़कर आगे बढ़ा, और यह बात उसने छिपाई नहीं। तेरी वह प्रार्थना जिसका उत्तर अब तक नहीं मिला, तुझे विश्वास से बाहर नहीं करती। परमेश्वर की नज़र में तू भूला नहीं गया है।
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